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ध्यान न भटके..

Jan 9, 2014 13:25 IST

हम जब भी कोई काम दिल लगाकर करते हैं, तो उसमें सफलता अवश्य मिलती है। बनूं मैं तेरी दुल्हन टीवी सीरियल में विद्या का लीड रोल करके चर्चा में आई दिव्यंका त्रिपाठी भी यही मानती हैं.. मन से करें काम

आज मेरा काम ही मेरी पहचान है। मुझे जो भी काम दिया गया या मैंने खुद की पसंद से लिया, उसे पूरी मेहनत और दिल से पूरा किया। मैं भोपाल से यह तय करके अभिनय की दुनिया में आई थी कि जो भी करूंगी दिल और मेहनत के साथ करूंगी। उसमें अपनी तरफ से कहीं कमी नहीं रहने दूंगी। मेरा यह निश्चय मेरे काम में भी दिखाई दिया और लोगों ने उसे नोटिस भी किया। इसी तरह धीरे-धीरे मेरी पहचान बन गई।

मैंने विद्या के किरदार को समझा और उसे अपने दिल में बसा लिया। इसी सोच के तहत मैं रोल को निभाती थी, जो लोगों को पसंद आया। वैसे भी यह बात तय है कि अगर आप भी कोई काम ईमानदारी से करेंगे, तो वह जरूर पसंद किया जाएगा।

लक्ष्य पर नजर

हमें जाना दिल्ली है और हमने रास्ता पकड लिया मुंबई का, तो दिल्ली कैसे पहुंच पाएंगे। ठीक उसी तरह करियर के बारे में सोचते समय भी इस बात का ध्यान सबसे पहले रखना चाहिए कि हमें करना क्या है? हमारी सीमाएं क्या हैं और उसका पालन करते हुए हम अपनी मंजिल तक पहुंचेंगे कैसे? मंजिल तक पहुंचने से पहले अगर हमारा ध्यान भटक गया, तो फिर हम भला लक्ष्य तक कैसे पहुंचेंगे।

आजकल तो नंबर का भी गेम है। अगर अच्छा ओहदा पाना है, तो अच्छे नंबर भी लाने होंगे। जाहिर है, अगर कम नंबर आएं, तो दूसरे दर्जे का ओहदा मिलेगा। हम औरों से पीछे हो जाएंगे और फिर सारी जिंदगी खुद को कोसते रहेंगे।

पसंद को पहचानें


किस फील्ड में जाना है? इस क्वैश्चन का आंसर तलाशने में सबसे पहले अपने इंट्रेस्ट को देखें। सोचिए, जब बिना इंट्रेंस्ट के किया गया काम खुद हमें ही पसंद नहीं आएगा, तो फिर भला दूसरे उससे कैसे खुश होंगे? सबसे पहले यह जानने की कोशिश करें कि आपकी रुचि किसमें है? अगर अपनी पसंद का काम करेंगे, तो वह आपको भी अच्छा लगेगा और दूसरे भी उसकी तारीफ करेंगे।

सपोर्ट जरूरी


कई बार मेहनत करने के बावजूद हमें सफलता नहीं मिलती। ऐसे वक्त में परिवार के लोग और दोस्त हमारी मदद करते हैं। उनके प्रोत्साहन और सलाह से हम अपने काम में सुधार लाते हैं और आगे बढते हैं। एक कलाकार के लिए तो ऐसी मदद और भी जरूरी हो जाती है, क्योंकि लोग अगर हमारे काम को पसंद नहीं करेंगे, तो हम ज्यादा दिन तक इस फील्ड में टिक ही नहीं सकेंगे।

अनुभव भी लें

आप कोई काम करते हैं और उसमें सफलता मिल जाती है, तो समझ लें वह आपकी मेहनत का फल है। लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं कि आप बिल्कुल परफेक्ट हो गए। अच्छा प्रदर्शन करते हुए वही आगे बढता है, जो दूसरों से हमेशा सीख लेता है। दूसरों से परामर्श लेकर अपनी राह बनाता है। दूसरे सफल लोगों के अनुभव से सीखकर भी आगे बढा जा सकता है। लोग कहते हैं न, सीखने की कोई उम्र नहीं होती। यह सच है। जीवन में हर क्षण हमें नए अनुभव हासिल होते रहते हैं और हम उसी के सहारे आगे बढते हैं.

Highlights
  • Citing safety concerns, non-Kashmiri students demand
  • They are also calling for action against cops who lathicharged students
  • NIT campus has been tense since students clashed over Indias T20 defeat

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