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विज्ञान का चमत्कार

21-OCT-2009

जेनेटिक इंजीनियरिंग विज्ञान की एक अत्याधुनिक ब्रांच है, जिसमें सजीव प्राणियों के डीएनए कोड में मौजूद जेनेटिक को अत्याधुनिक तकनीक केजरिए परिवर्तित किया जाता है।

जेनेटिक इंजीनियरिंग का कमाल कुछ वर्ष पहले ही दुनिया देख चुकी है, जब इयान विल्मुट और उनके सहयोगी रोसलिन ने जेनेटिक तरीके से भेड का बच्चा तैयार किया, जिसे डॉली नाम दिया था। यह हूबहू भेड की जेनेटिक कॉपी था। इन दिनों जेनेटिक इंजीनियर की डिमांड इंडिया के साथ-साथ विदेश में तेजी से बढ रहा है।

क्या है जीई

जेनेटिक तकनीक के जरिए जींस की सहायता से पेड-पौधे, जानवर और इंसानों में अच्छे गुणों को विकसित किया जाता है। जेनेटिक तकनीक के द्वारा ही रोग प्रतिरोधक फसलें और सूखे में पैदा हो सकने वाली फसलों का उत्पादन किया जाता है। इसके जरिए पेड-पौधे और जानवरों में ऐसे गुण विकसित किए जाते हैं, जिसकी मदद से इनके अंदर बीमारियों से लडने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जाती है।

इस तरह के पेड-पौधे जीएम यानी जेनेटिकली मॉडिफाइड फूड के रूप में जाने-जाते हैं। बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जेनेटिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल बृहद पैमाने पर होता है।

योग्यता और कोर्स

योग्य जेनेटिक इंजीनियर उसे ही माना जा सकता है, जिनके पास जेनेटिक और इससे संबंधित फील्ड में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हो। इस कोर्स में एंट्री के लिए 12वीं बायोलॉजी, केमिस्ट्री और मैथ से पास होना जरूरी है।

इस समय अधिकतर यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट में जेनेटिक इंजीनियरिंग के लिए अलग से कोर्स ऑफर नहीं किया जाता है, लेकिन इसकी पढाई बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री में सहायक विषय के रूप में होती है। ग्रेजुएट कोर्स, बीई/बीटेक में एंट्री प्रवेश परीक्षा के आधार पर होता है। एमएससी इन जेनेटिक इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी हर साल 120 सीटों के लिए संयुक्त परीक्षा का आयोजन करती है।

रोजगार के अवसर

जानी-मानी करियर एक्सपर्ट परवीन मल्होत्रा कहती हैं कि जेनेटिक इंजीनियर के लिए भारत के साथ-साथ विदेश में भी जॉब के अवसर तेजी से बढ रहे हैं। इनके लिए मुख्यत रोजगार के अवसर मेडिकल व फार्मास्युटिकल कंपनी, एग्रीकल्चर सेक्टर, प्राइवेट और सरकारी रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर में होते हैं। टीचिंग को भी करियर ऑप्शन के रूप में आजमाया जा सकता है।

इसके अलावा, रोजगार के कई और भी रास्ते हैं। बायोटेक लेबोरेटरी में रिसर्च, एनर्जी और एंवायरनमेंट से संबंधित इंडस्ट्री, एनिमल हसबैंड्री, डेयरी फार्मिग, मेडिसिन आदि में भी रोजगार के खूब मौके हैं। कुछ ऐसे संस्थान भी हैं, जो जेनेटिक इंजीनियर को हायर करती है।

सैलरी पैकेज

जेनेटिक इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स को शुरुआती दौर में आठ से 12 हजार रुपये प्रति माह सैलरी मिलने लगती है। यदि डॉक्ट्रोरल डिग्री है, तो अनुभव केआधार पर सैलरी तय होती है।

इंस्टीट्यूट वॉच

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास, खडगपुर

आईआईटी गुवाहाटी

आईआईटी, दिल्ली

दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना

राजेंद्र एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, समस्तीपुर, बिहार

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली

सुनील अभिमन्यु

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