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कला एवं संस्कृति

General Knowledge for Competitive Exams

Read: General Knowledge | General Knowledge Lists | Overview of India | Countries of World

ऑस्कर पुरस्कारों में नामांकित एवं पुरस्कार विजेता भारतीयों की सूची

6 hrs ago

लॉस एंजेलिस में आयोजित विश्व प्रसिद्ध 89वें ऑस्कर अवॉर्ड समारोह में "मूनलाईट" को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के पुरस्कार से नवाजा गया जबकि "ला ला लैंड" को “सर्वश्रेष्ठ निर्देशक” और “सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री” सहित छह श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया है| इस समारोह में भारतीय मूल के ब्रिटिश अभिनेता देव पटेल "सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता" का पुरस्कार प्राप्त करने से चूक गए| इस लेख में हम ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित या विभिन्न श्रेणियों में नामांकित भारतीय/भारतीय मूल के व्यक्तियों की सूची दे रहे हैं|

गंधार, मथुरा और अमरावती शैलियों में क्या अंतर होता है

11 hrs ago

मूर्ति कला की तीन प्रमुख शैलियों अर्थात गंधार, मथुरा और अमरावती शैली का विकास अलग-अलग स्थानों पर हुआ है | गंधार शैली का विकास आधुनिक पेशावर और अफगानिस्तान के निकट पंजाब की पशिचमी सीमाओं में 50 ईसा पूर्व से लेकर 500 ईस्वी तक हुआ| मथुरा शैली का विकास पहली और तीसरी शताब्दी ई .पू के बीच की अवधि में यमुना नदी के किनारे हुआ और भारत के दक्षिणी भाग में, अमरावती शैली का विकास सातवाहन शासकों के संरक्षण में कृष्णा नदी के किनारे हुआ था | इस लेख में इन शैलियों के बीच के अंतर का अध्ययन करेंगे |

हड़प्पा सभ्यता: कला और वास्तुकला एक नज़र में

Feb 23, 2017

भारतीय कला और वास्तुकला विकास पर निर्भर करती है और इसके पीछे कई कहानियां है| इस लेख में हड़प्पा सभ्यता की कला और वास्तुकला के बारे में जानेंगे और देखेंगे की कैसे इन कलाओं का उदभव हुआ, कहा से हुआ आदि |

11 रोचक तथ्य मिर्ज़ा गालिब के बारें में

Feb 15, 2017

मिर्ज़ा गालिब का पूरा नाम मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” था। उनका जन्म आगरा मे 27 दिसंबर 1797 को एक सैन्य परिवार में हुआ था और निधन 1869 में हुआ| उनकी शायरीयों मे गहन साहित्य और क्लिष्ट भाषा का समावेश था| उन्हें पत्र लिखने का बहुत शौक था इसीलिए उन्हें पुरोधा कहा जाता था| इस लेख में मिर्ज़ा ग़ालिब के बारे में 11 रोचक तथ्य दे रहे है जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे|

बुद्ध की विभिन्न मुद्राएं एवं हस्त संकेत और उनके अर्थ

Feb 13, 2017

बुद्ध के अनुयायी, बौद्ध ध्यान या अनुष्ठान के दौरान शास्त्र के माध्यम से विशेष विचारों को पैदा करने के लिए बुद्ध की छवि को प्रतीकात्मक संकेत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। भारतीय मूर्तिकला में, मूर्तियाँ देवत्व का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करती है, जिसका मूल और अंत धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

जानें वसंत पंचमी क्यों और कैसे मनायी जाती है

Feb 1, 2017

वसंत पंचमी एक लोकप्रिय हिन्दू त्योहार है जिसे वसंत की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है| इस दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है, पीले रंग के कपड़े पहने जाते हैं| इस दिन को “श्री पंचमी” के रूप में भी जाना जाता है। आइये जानते हैं कि वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है |

गणतंत्र दिवसः भारतीय गणतंत्र की यात्रा

Jan 24, 2017

भारत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था और तब हमारे देश के पास संविधान नहीं था | 26 जनवरी 1950 को संविधान को अंगीकार किया गया था और उस दिन के बाद से प्रत्येक वर्ष पूरे देश में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में बहुत गर्व और खुशी के साथ मनाया जाता है। यह लेख भारतीय गणतंत्र दिवस के इतिहास, उत्पत्ति और पृष्ठभूमि से संबंधित है।

क्या है जल्लीकट्टू महोत्सव और क्यों इसे प्रतिबंधित किया गया है?

Jan 20, 2017

पिछले कुछ दिनों से तमिलनाडु का मशहूर सांड दौड़ यानी “जल्लिकट्टू महोत्सव” राष्ट्रीय सुर्खियों में छाया हुआ है| सुप्रीम कोर्ट ने इस खेल पर रोक लगा दी है जिसके विरोध स्वरूप पूरे तमिलनाडु में प्रदर्शनों का दौर जारी है। इस लेख में हम “जल्लीकट्टू” का अर्थ और “जल्लीकट्टू महोत्सव” के इतिहास और इससे जुड़े विवाद का विवरण दे रहे हैं|

मकर संक्रान्ति 2017: इतिहास, अर्थ एवं महत्व

Jan 12, 2017

मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार भगवान सूर्य को समर्पित है| यह त्योहार जनवरी महीने की 14वीं या 15वीं तिथि को ही मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिये इस पर्व को उत्तरायणी भी कहा जाता है|

जाने तानसेन समारोह कब, कहाँ और क्यों मनाया जाता है?

Dec 19, 2016

तानसेन समारोह भारत में आयोजित सबसे पुराने संगीत समारोहों में से एक है| इसका आयोजन अकबर के दरबार में रहने वाले महान संगीतकार तानसेन को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से किया जाता है। तानसेन समारोह या तानसेन संगीत समारोह का आयोजन हर वर्ष दिसम्बर महीने में मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के “बेहत” नामक गांव में किया जाता है।

कमल मंदिर (लोटस टेम्पल) अविस्मरणीय क्यों है?

Aug 17, 2016

नई दिल्ली का कमल मंदिर बहाई संप्रदाय से संबंधित है। बहाई धर्म दुनिया के नौ महान धर्मों का संयोजन है और इसकी स्थापना पैगंबर बहाउल्लाह ने की थी। यह मंदिर तालाबों और बगीचों के बीच आधे खुले तैरते कमल के आकार में बना है। कमल मंदिर एशिया में बना एक मात्र बहाई मंदिर है। एक वर्ष में यहां करीब 45 लाख पर्यटक आते हैं।

गोलकुंडा का किला क्यों विशेष है?

Aug 16, 2016

यह किला तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के पास स्थित है। यह किला 1143 में बनवाया गया था। ऐतिहासिक गोलकोंडा किले का नाम तेलुगु शब्द 'गोल्ला कोंडा' पर रखा गया है| किसी जमाने में गोलकुंडा के इलाके की हीरे की खान से कोहेनूर हीरा निकला था। यह पूरा किला एक बड़े ग्रेनाइट के पहाड़ पर बना है। इसके बगल में मूसी नदी बहती है।

भारत में सबसे अधिक प्रसिद्ध 10 उत्तम मार्शल आर्ट्स

Jul 6, 2016

भारत विविध संस्कृति और जातियों का देश है और इसलिए भारत अपने प्राचीन काल से ही विकसित मार्शल आर्ट के लिए प्रसिद्ध है। आजकल इन कला के रूपों का कई अनुष्ठानो में उपयोग किया जाता है जैसे शास्रविधि समारोह में, खेल में, शारीरिक योग्यता के लिए आत्म रक्षा के रूप में आदि लेकिन इससे पहले इन कलाओं का युद्ध के लिए प्रयोग किया जाता था । कई कला नृत्य, योग आदि करने से संबंधित हैं।

क्या आप एलीफेंटा गुफाओं के बारे में ये रोचक तथ्य जानना चाहेंगे ?

Jun 29, 2016

एलीफेंटा की गुफाएं (स्थानीय भाषा में इन्हें घारापुरीची लेनी के रूप में भी जाना है, मूल रूप घारापुरी) महाराष्ट्र के एलिफेंटा द्वीप या घारापुरी (मुंबई) में स्थित मूर्ति गुफाओं का एक नेटवर्क (शाब्दिक अर्थ "गुफाओं के शहर") है। यह द्वीप अरब सागर के किनारे स्थित है जहां गुफाओं के दो समूह हैं, पहला- पांच हिंदू गुफाओं का एक बड़ा समूह है, दूसरा- दो बौद्ध गुफाओं का एक छोटा समूह है। हिंदू गुफाओं में चट्टानों में पत्थर की मूर्तियां बनी हैं।

जल महल अद्वितीय क्यों ?: 10 तथ्य एक नज़र में

Jun 29, 2016

शब्द "जल महल" का मतलब है "पानी का किला" ,जो कि जयपुर में स्तिथ है। इसका निर्माण 1750 वीं सदी में आमेर के महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा  ठीक आम सागर के बीचों-बीच किया गया था । यह लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। यह "'जल महल" राजपूत और मुग़ल शैली की वास्तुकला का एक नायब सयोंजन है। यह एक पांच मंजिला इमारत है।  जब झील के पानी से भर जाती है तब इसकी चार मंज़िले पानी से डूब जाती है और फिर केवल शीर्ष मज़िल दिखाई पड़ती है।

दशहरा: अच्छाई की बुराई पर विजय

Sep 29, 2014

इस पर्व का मुख्य उद्देश्य अच्छाई की बुराई तथा सत्य की असत्य पर विजय को दर्शाना है I

विश्व की भाषायें

Jul 22, 2011

दुनिया की कितनी भाषाएं हैं इसका ठीक ठीक उत्तर देना संभव नहीं है। एक अनुमान के अनुसार दुनिया में कुल भाषाओं की संख्या 6809 है, इनमें से 90 फीसदी भाषाओं को बोलने वालों की संख्या 1 लाख से भी कम है। लगभग 200 से 150 भाषाएं बोलने वालों की संख्या 10 लाख से अधिक है जबकि लगभग 357 भाषाएं बोलने वालों की संख्या मात्र 50 और 46 भाषाएं बोलने वालों की संख्या मात्र 1 है।

पश्चिमी चित्रकला

Jul 22, 2011

27000-13000 ई.पू. में दक्षिण-पश्चिम यूरोप में गुफा कला के द्वारा तत्कालीन मानव ने अपने जीवन का चित्रण किया। अफ्रीकी कला, इस्लामिक कला, भारतीय कला, चीनी कला और जापानी कला- इन सभी का पूरा प्रभाव पश्चिमी चित्रकला पर पड़ा है।

भारतीय चित्रकला

Jul 22, 2011

भारतीय चित्रकारी के प्रारंभिक उदाहरण प्रागैतिहासिक काल के हैं, जब मानव गुफाओं की दीवारों पर चित्रकारी किया करता था। भीमबेटका की गुफाओं में की गई चित्रकारी 5500 ई.पू. से भी ज्यादा पुरानी है। 7वीं शताब्दी में अजंता और एलोरा गुफाओं की चित्रकारी भारतीय चित्रकारी का सर्वोत्तम उदाहरण हैं।

पश्चिमी नृत्य कला

Jul 22, 2011

पश्चिमी नृत्य कला का इतिहास उसकी प्राचीन संस्कृति में निहित है। पश्चिमी देशों में पोलैण्ड, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, चेक व स्लोवाकिया, रूस इत्यादि शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी एक विशिष्ट नृत्य शैली है। विभिन्न संस्कृतियों के मिलन से भी नई नृत्य शैलियों का उद्भव व विकास हुआ है| आधुनिक पश्चिमी नृत्यों में कैनकैन, टैप और जैज डांस, फ्री फॉर्म एवं रॉक एंड रोल अथवा ट्विस्ट प्रमुख हैं।

भारतीय नृत्य कला

Jul 22, 2011

भारत में नृत्य की परंपरा प्राचीन समय से रही है| हड़प्पा सभ्यता की खुदाई से नृत्य करती हुई लड़की की मूर्ति पाई गई है, जिससे साबित होता है कि उस काल में भी नृत्यकला का विकास हो चुका था| भरत मुनि का नाट्य शास्त्र भारतीय नृत्यकला का सबसे प्रथम व प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है| इसको पंचवेद भी कहा जाता है|

भारतीय शास्त्रीय संगीत

Jul 22, 2011

भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है। सामवेद में संगीत के बारे में गहराई से चर्चा की गई है। भारतीय शास्त्रीय संगीत गहरे तक आध्यात्मिकता से प्रभावित रहा है, इसलिए इसकी शुरुआत मनुष्य जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति के साधन के रूप में हुई। संगीत की महत्ता इस बात से भी स्पष्ट है कि भारतीय आचार्र्यों ने इसे पंचम वेद या गंधर्व वेद की संज्ञा दी है। भरत मुनि का नाट्यशास्त्र पहला ऐसा ग्रंथ था जिसमें नाटक, नृत्य और संगीत के मूल सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया है।

गुफा स्थापत्य

Jul 22, 2011

भारत में सर्वप्रथम मानव निर्मित गुफाओं का निर्माण दूसरी शताब्दी ई.पू. के आसपास हुआ था।
अजंता की गुफा: अजंता की गुफाएं महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित हैं। इनका सर्वप्रथम जिक्र चीनी तीर्थयात्री ह्वेन सांग ने भी किया था।

भारतीय स्थापत्य कला और मूर्तिकला

Jul 22, 2011

भारत में स्थापत्य व वास्तुकला की उत्पत्ति हड़प्पा काल से माना जाता है। स्थापत्य व वास्तुकला के दृष्टिकोण से हड़प्पा संस्कृति तत्कालीन संस्कृतियों से काफी ज्यादा आगे थी। भारतीय स्थापत्य एवं वास्तुकला की सबसे खास बात यह है कि इतने लंबे समय के बावजूद इसमें एक निरंतरता के दर्शन मिलते हैं। इस मामले में भारतीय संस्कृति अन्य संस्कृतियों से इतर है।

आधुनिक काल

Jul 22, 2011

यूरोपीय स्थापत्य कला में 1900 के आसपास का समय भारी परिवर्तन का युग था। इस काल के दौरान कई ऐसी इमारतों का निर्माण किया गया जिसकी विशेषताएं समान थीं। इन निर्माणों में रूप-रंग में सरलता के दर्शन होते हैं और अलंकरण भी नाम-मात्र का है।

मध्यकालीन पश्चिमी स्थापत्य कला

Jul 22, 2011

प्रारंभिक मध्यकाल के दौरान पश्चिमी स्थापत्य कला को प्रारंभिक ईसाई काल व पूर्व-रोमांसक्यू काल में विभाजित किया जा सकता है। इस काल के दौरान दुर्ग मुख्य रूप से लौकिक स्थापत्य के प्रमुख उदाहरण हैं।

पश्चिमी स्थापत्य एवं मूर्तिकला

Jul 22, 2011

ग्रीक स्थापत्य व मूर्तिकला- ग्रीक संस्कृति की सबसे खास बात यह थी कि कला व संस्कृति में उसकी दृष्टि काफी हद तक लौकिक थी। उनकी इसी सोच का पूरी तरह से प्रभाव उनके स्थापत्य व मूर्तिकला में परिलक्षित होता है।

रोमन शैली- प्राचीनकाल में रोमन साम्राज्य काफी विशाल था। इस साम्राज्य की विशालता की झलक उसके विशाल भवनों में देखा जा सकता है। रोमन वास्तुशिल्पियों ने सर्वप्रथम चापाकार निर्माण अद्र्ध वृत्ताकार मेहराब का प्रयोग किया।

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