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विज्ञान

General Knowledge for Competitive Exams

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जाने आवर्त सारणी में शामिल 4 नये तत्व कौन से हैं

आवर्त सारणी को याद करने वाले विज्ञान के छात्रों की मशक्कत थोड़ी और बढ़ गई है, क्योंकि आवर्त सारणी में 4 नए तत्वों को शामिल किया गया है| इस लेख में हम आवर्त सारणी में शामिल किए गए इन 4 नए तत्वों का विवरण दे रहे हैं जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए काफी उपयोगी हैं|

कीट विज्ञान क्या होता है?

यह विज्ञान, जंतु विज्ञान या प्राणिविज्ञान का वह अंग है जिसके अंतर्गत कीटों अथवा षट्पादों का अध्ययन आता है। षट्पाद (षट्=छह, पाद=पैर) श्रेणी को ही कभी-कभी कीट की संज्ञा दी जाती हैं। जंतु जगत में 20 संघ है जिनमे आर्थोपोडा सबसे बड़ा है जिनका शरीर सिर, वृक्ष और उदर में विभक्त होता है | सामान्य तौर पर इस संघ के कीटों में तीन जोड़ा पैर और पंख पाये जाते हैं|

पौधों में प्रकाशसंश्लेषण पर सामान्यज्ञान के प्रश्न और उत्तर (भाग-2)

प्रकाश संश्लेषण पर आधारित प्रश्न-उत्तर (भाग 2) में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया, प्रक्रिया-स्थल और पौधों के लिए उसके महत्व जैसे विषयों से संबंधित प्रश्न शामिल किए गए हैं जो आईएएस, पीएससी, एसएससी, रेलवे जैसे विभिन्न परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है|

मानव कंकाल तंत्रः संरचना, कार्य और बीमारियां

कंकाल तंत्र मानव शरीर को सख्त संरचना या रूपरेखा प्रदान करता है जो शरीर की रक्षा करता है। यह अस्थियों, उपास्थियों, शिरा (टेंडन) और स्नायु/ अस्थिरज्जु (लिगमेंट) जैसे संयोजी ऊतकों से बना है। इस लेख में हम इसकी संरचना, कार्य, अस्थियों के विकारों एवं विभिन्न प्रकार के जोड़ों के बारे में पढ़ेंगे।

पौधों में प्रकाशसंश्लेषण पर सामान्यज्ञान के प्रश्न और उत्तर (भाग–1)

पौधों में प्रकाशसंश्लेषण पर सामान्यज्ञान के प्रश्न और उत्तर (भाग–1) में 10 बहुवैकल्पिक प्रश्न दिए गए हैं जो आपको प्रकाशसंश्लेषण, उसका महत्व, प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया में क्लोरोफिल की भूमिका, प्रकाशसंश्लेषण किस प्रकार की प्रतिक्रिया है आदि के बारे में समझ प्रदान करते हैं। ये प्रश्न यूपीएससी– पीटी, राज्य– पीएससी, एसएससी (10 और 10+2), रेलवे आदि जैसी परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं.

प्राचीन भारत के 5 वैज्ञानिक

आप यह जान कर आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि कई वर्षों पहले कई प्रकार की वैज्ञानिक जानकारियों की खोज प्राचीन भारत में हुई थी। इस अवधि के दौरान विज्ञान और गणित बहुत अधिक विकसित थे एवं प्राचीन भारतीयों ने इस क्षेत्र में बहुत योगदान दिया था। चिकित्सा की देसी प्रणाली आयुर्वेद थी जो प्राचीन काल में विकसित हुई थी। यहाँ तक कि योग को आयुर्वेद के संबद्ध विज्ञान के रूप में विकसित किया गया  था। इस लेख में हम प्राचीन भारत के कुछ वैज्ञानिकों के योगदानों के बारे में जानेंगे।

फलों में पाये जाने वाले विभिन्न विटामिन्स तथा खनिज

फलों में विभिन्न प्रकार के विटामिन्स तथा खनिज प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं, जो कि स्वास्थ्य तथा बृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं | संतुलित आहार की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 92 ग्राम फल खाना ही चाहिये | भारत में सर्वाधिक (22%) फलों का उत्पादन महाराष्ट्र में होता है |

जानें विज्ञान से संबंधित 15 रोचक तथ्य

कभी कभी हम विभिन्न विचारों और सोच में फँस जाते हैं और अपने मन को इस उलझन की स्थिति से निकालने के लिए हमें कुछ अलग सोचने की जरूरत होती है। विज्ञान के बारे में निम्नलिखित 15 आश्चर्यजनक तथ्य आपको सोचने पर मजबूर करेंगे कि विज्ञान वह नहीं है जिसे केवल हमने किताबों में पढ़ा है| वास्तव में ये तथ्य विज्ञान के प्रति आपकी रूचि में और भी बढ़ोतरी करेंगें|

फलों में पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोग

फलों में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थय तथा वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं| संतुलित आहार की दृष्टि से एक व्यक्ति को प्रतिदिन 92 ग्राम फल का सेवन करने की सलाह दी जाती है| वर्तमान समय में भारत फलों के उत्पादन के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है| कई बार विभिन्न फलों में कई प्रकार के रोग लग जाते है जिसका प्रमुख कारण फलों में पोषक तत्वों की कमी होना है| इस लेख में हम विभिन्न फलों में पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों का विवरण दे रहे है जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टिकोण से बहुत उपयोगी है|

क्या होगा यदि धरती पर 5 सेकेंड के लिए ऑक्सीजन न रहे?

जीवन के लिए ऑक्सीजन सबसे अनिवार्य आवश्यकताओं में से एक है। जिस प्रकार धरती के जीव बिना भोजन और पानी के जीवित नहीं रह सकते हैं, उसी प्रकार ऑक्सीजन के बिना भी वे जीवित नहीं रह सकते हैं| ऑक्सीजन कई प्रकार से उपयोगी होता है। जैसे- उद्योगों में इसका प्रयोग सल्फ्यूरिक एसिड एवं नाइट्रिक एसिड आदि बनाने में किया जाता है। व्यवसायिक स्तर पर, इस्पात उद्योग में वात्य–भट्ठी में लौह-इस्पात तैयार करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। यदि हमारे वायुमंडल से ऑक्सीजन समाप्त हो जाए तो इसका नतीजा विनाशकारी होगा।

सामान्य विज्ञान से संबंधित प्रश्न-उत्तर (सेट 4)

सामान्य विज्ञान (सेट 4) में 10 ऐसे वस्तुनिष्ठ प्रश्न-उत्तरों को शामिल किया गया है जिससे आपको दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले कई शब्दों एवं घटनाओं के बारे में जानकारी मिलेगी, इसके अलावा ये प्रश्न IAS, PSC, SSC और रेलवे की परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं|

सामान्य विज्ञान से संबंधित प्रश्न-उत्तर (Set-3)

सामान्य विज्ञान (Set 3) में 10 ऐसे वस्तुनिष्ठ प्रश्न-उत्तरों को शामिल किया गया है जिससे आपको दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले कई शब्दों एवं घटनाओं के बारे में जानकारी मिलेगी, इसके अलावा ये प्रश्न IAS, PSC, SSC और रेलवे की परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं|

सामान्य विज्ञान से संबंधित प्रश्न-उत्तर (सेट -2)

सामान्य विज्ञान (सेट 2) में 10 ऐसे वस्तुनिष्ठ प्रश्न-उत्तरों को शामिल किया गया है जिससे आपको दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले कई शब्दों एवं घटनाओं के बारे में जानकारी मिलेगी, इसके अलावा ये प्रश्न IAS, PSC, SSC और रेलवे की परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं|

सामान्य विज्ञान से संबंधित प्रश्न-उत्तर (Set-1)

सामान्य विज्ञान (Set-1) में 10 ऐसे वस्तुनिष्ठ प्रश्न-उत्तरों को शामिल किया गया है जिससे आपको दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले कई शब्दों के बारे में जानकारी मिलेगी, इसके अलावा ये प्रश्न IAS, PSC, SSC और रेलवे की परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है|

अब तक के प्रमुख सौर मिशनों का एक संक्षिप्त परिचय

सूर्य एक चमकीला खगोलीय पिण्ड है जिसके चारों तरफ पृथ्वी और अन्य ग्रह परिक्रमा करते हैं। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम से बना है। सूर्य के उच्च रेजलूशन और करीबी– दृश्य एवं उसके आंतरिक हेलिओस्फियर (हमारी सौर प्रणाली के सबसे भीतर का क्षेत्र) का अध्ययन करने एवं इस विशालकाय तारे जिस पर हमारा जीवन निर्भर है, के अशांत व्यवहार को और अधिक अच्छे से समझने के लिए वेधशालाओं द्वारा कई सौर मिशन शुरु किए गए।

पशुओं के प्रमुख रोग कौन-कौन से हैं?

गायों, भेड़ों और कभी-कभी मनुष्यों को प्रभावित करने वाला रोग ‘एंथ्रेक्स’ है | पालतू जानवरों के कुछ अन्य मुख्य रोग हैं, पोंकनी (Rinder Pest), स्तन की सूजन, निमोनिया, चेचक और तपेदिक आदि|  चूंकि ये जानवर बोल नहीं पाते हैं इस कारण से ये सभी रोग इनके लिए बहुत ही असाध्य होते हैं |

मानव शरीर में विभिन्न ग्रंथियां और हार्मोन्स

हमारे शरीर में कुछ विशेष ऊतक होते हैं जिन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियां कहते हैं। ये ग्रंथियां रसायनिक पदार्थ स्रावित करती हैं जिन्हें हार्मोन्स कहा जाता है। ये हार्मोन जीवों और उनके विकास की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने में मदद करते हैं।

पुरुष प्रजनन प्रणाली

प्रजनन के लिए मनुष्य यौन रीति का प्रयोग करते हैं। मनुष्यों में प्रजनन प्रणाली एक निश्चित आयु में काम करना शुरु कर देती है, इसे यौवन कहते हैं। मनुष्य जैसी जटिल बहुकोशिकीय जीवों में शुक्राणु और अंडे बनाने, शुक्राणुओं और अंडों को निषेचन के लिए एक साथ लाने और शिशु के रूप में युग्मनज के विकास के लिए विशेष प्रजनन अंग होते हैं।

जैविक विज्ञान में आविष्कार और खोज की सूची

प्रधान भाग: समकालीन  समय  में कई कई विभिन्न खोजे और अविष्कार हुए जैसे  सेल बायोलॉजी , तंत्रिका विज्ञान और विकासवादी जीवविज्ञान जिससे  न केवल जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ बल्कि जीवन प्रत्याशा भी बढ़ गई।

मनुष्य का उत्सर्जन तंत्र किस तरह से कार्य करता है?

किसी जीव के शरीर से विषाक्त अपशिष्ट (Toxic Wastes) को बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन (Excretion) कहलाती है। कार्बन डाईऑक्साइड और यूरिया मानव शरीर द्वारा उत्सर्जित किए जाने वाले प्रमुख अपशिष्ट है। वृक्क (kidney) मानव शरीर का मुख्य उत्सर्जक अंग है|

पौधों में परिसंचरण तंत्र की क्रियाविधि

पौधों में परिसंचरण तंत्र का अर्थ है-किसी पौधे के द्वारा अवशोषित या निर्मित पदार्थों का पौधे के अन्य सभी हिस्सों तक पहुंचाना। पौधों में जल और खनिजों को उसके अन्य हिस्सों में तक पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। पौधों को पत्तियों में बने भोजन को भी पौधे के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। जाइलम और फ्लोएम पौधे के परिसंचरण तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं|

पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन

जनक पौधों द्वारा अपनी सेक्स कोशिकाओं या युग्मकों (Gametes) का प्रयोग कर नए पौधे को जन्म देने की क्रिया ‘लैंगिक प्रजनन’ कहलाती है| पादपों या पौधों में भी नर और मादा जनन अंग होते हैं। पौधों के ये जनन अंग पुष्पों और फलों के भीतर पाए जाने वाले बीजों में पाये जाते हैं। पुष्प  का नर अंग ‘पुंकेसर’ (Stamen) और मादा अंग ‘अंडप/कार्पेल’ (Carpel) कहलाता है।

जंतुओं में लैंगिक प्रजनन

माता–पिता द्वारा अपनी सेक्स कोशिकाओं या युग्मकों (Gametes) का प्रयोग कर नए जीव या संतान को जन्म देने की क्रिया ‘लैंगिक प्रजनन’ कहलाती है| मनुष्य, मछलियाँ, मेढ़क, बिल्लियाँ और कुत्ते-ये सभी लैंगिक प्रजनन द्वारा संतान को जन्म देते हैं।

पादपों में पोषण किस तरह से होता है?

पादप प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं, इसलिए उन्हें ‘स्वपोषी’ कहा जाता है| वे क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइ ऑक्साइड, जल और सूर्य के प्रकाश के माध्यम से अपना भोजन निर्मित करते हैं| पादपों में पोषण समभोजी व विषमभोजी, दो तरह से होता है|

पुरुष प्रजनन प्रणाली

मानव प्रजनन की लैंगिक पद्धति का प्रयोग करते हैं। मानव एक निश्चित उम्र के बाद ही प्रजनन क्रिया को सम्पन्न कर सकने में सक्षम हो पाता है, इसे ‘यौवन’ (Puberty) कहते हैं। मानवों जैसे जटिल बहुकोशिकीय जीवों में शुक्राणु और अंडाणु के निर्माण, शुक्राणुओं एवं अंडाणु के निषेचन और शिशु के रूप में युग्मनज (Zygote) की वृद्धि और विकास के लिए विशेष प्रजनन अंग पाये जाते हैं।

जंतुओं में पोषण किस तरह से होता है?

भोजन को ग्रहण करना तथा उसका ऊर्जा प्राप्ति और शारीरिक वृद्धि व मरम्मत के लिए उपयोग करना ‘पोषण’ कहलाता है| वे पदार्थ जो जंतुओं की जैविक क्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक होते हैं, ‘पोषक पदार्थ’ कहलाते हैं| पोषण प्रणाली दो तरह की होती है: ‘स्वपोषी’ व ‘परपोषी’|जंतुओं में पोषण प्रणाली के पाँच चरण पाये जाते हैं|

कोशिका विभाजन: असूत्री, समसूत्री व अर्द्धसूत्री विभाजन

पुरानी कोशिका का विभाजित होकर नयी कोशिकाओं का निर्माण करना कोशिका विभाजन कहलाता है| कोशिका विभाजन को सर्वप्रथम 1955 ई. में विरचाऊ ने देखा था| कोशिकाओं का विभाजन तीन तरीकों- असूत्री (Amitosis ),समसूत्री (Mitosis) और अर्द्धसूत्री (Meiosis) से होता है|

पौधों में अलैंगिक प्रजनन क्या है और यह किन विधियों से होता है?

अलैंगिक प्रजनन ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें नया जीव एकल जनक से बनता है और इसमें युग्मक या जनन कोशिकाओं की कोई भूमिका नहीं होती। कई एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीव अलैंगिक प्रजनन करते हैं। इस प्रक्रिया में, जनक जीव या तो विभाजित हो जाता है या फिर जनक जीव का एक हिस्सा नया जीव बनाने के लिए अलग हो जाता है। अलैंगिक प्रजनन छह प्रकार का होता है।

गोलीय दर्पण से प्रकाश का परावर्तन

गोलीय दर्पण वैसा दर्पण होता है, जिसकी परावर्तक सतह काँच के खोखले गोले का हिस्सा होती है। गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैः अवतल दर्पण और उत्तल दर्पण। अवतल दर्पण में प्रकाश की परावर्तक सतह भीतर की तरफ मुड़ी हुई या अवतल सतह वाली होती है। उत्तल दर्पण में प्रकाश की परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी हुई या उत्तल सतह वाली होती है।

पर्यावरणीय रसायन विज्ञान क्या है?

पर्यावरणीय रसायन विज्ञान के अंतर्गत पर्यावरण में पाये जाने वाले रसायनों के स्रोत क्षेत्र, स्थानांतरण व प्रभाव के साथ-साथ पर्यावरणीय रसायनों पर मानवीय व अन्य जैविक क्रियाओं के प्रभाव का अध्ययन किया जाता है| पर्यावरणीय रसायन विज्ञान की वर्तमान में पर्यावरणीय असंतुलन व प्रदूषण के अध्ययन व उनके निवारण के उपायों को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका है|

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