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आईएएस परीक्षा 2012 में प्रथम स्थान पर चयनित हरिथा वी. कुमार: एक साक्षात्कार

May 15, 2013 13:23 IST

    हरिथा वी. कुमारकेरल की हरिथा वी. कुमार पहली बार की असफलता और दूसरे-तीसरे प्रयास में रैंकिंग बहुत पीछे होने के बावजूद हताश नहीं हुईं. जीतने की जिद ने ही उन्हें सिविल सेवा परीक्षा में पहला स्थान दिलाया. इस बड़ी कामयाबी पर उनसे एक्सक्लूसिव बातचीत..

    केरल की हरिथा वी. कुमार ने 3 मई 2013 को घोषित आईएएस मुख्य परीक्षा 2012 का परिणाम में पहला स्थान प्राप्त किया. यह इनका यह चौथा प्रयास था. संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा-2012 में पहला स्थान प्राप्त करने वाली केरल की हरिथा वी. कुमार के लिए असफलता ही सफलता की सीढ़ी बन गई. पहली बार मुख्य परीक्षा क्लियर न कर पाने वाली हरिथा ने अपने चौथे और आखिरी प्रयास में कामयाबी का सर्वोच्च शिखर छू लिया. केरल विश्वविद्यालय से बीटेक हरिथा इस समय दिल्ली के निकट फरीदाबाद में नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, एक्साइज एंड नारकोटिक्स में ट्रेनिंग ले रही हैं.


    केरल के एक कांट्रैक्टर आर.विजय कुमार व गृहिणी मां चित्र सीएस. की बेटी हरिथा 2009 की मुख्य परीक्षा में मात्र कुछ ही नंबर कम रह जाने के कारण इंटरव्यू में नहीं बुलाई गईं. लेकिन इससे उनका इरादा और पक्का हो गया. उनके मन में कुछ साबित करने की जैसे जिद बैठ गई थी. अगले ही साल यानी 2010 के एग्जाम में प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू तीनों को पार करते हुए 179वीं रैंक हासिल की और आईआरएस के लिए चुनी गईं, लेकिन यही उनका लक्ष्य नहीं था. हालांकि 2011 की परीक्षा में उन्हें 294वां रैंक मिल सका. कोई दूसरा शायद इससे हताश हो जाता, लेकिन रैंक घटने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपनी कमजोरियों का गहन विश्लेषण किया और अपने चौथे व आखिरी प्रयास में जी-तोड़ मेहनत की. मेहनत रंग लाई और यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में टॉप कर गईं. इस कामयाबी से उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आपमें जीतने की जिद हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं.. इस कामयाबी पर उन्होंने अपने राज कुछ यूं खोले..


    आईएएस बनने के बारे में कब सोचा और इसके लिए कब से तैयारी आरंभ की?
    शुरू से ही मेरा सपना था कि मैं आईएएस ऑफिसर बनकर देश व समाज की भलाई के लिए काम करूं. चूंकि सुदूर दक्षिण के केरल से हूं, इसलिए मैंने तटवर्ती इलाकों के मछुआरों के स्ट्रगल को काफी करीब से महसूस किया है. आईएएस को लक्ष्य बनाकर मैंने 5 साल पहले तैयारी शुरू कर दी थी.


    इस परीक्षा में यह आपका कौन-सा अटेम्प्ट था? पहले के प्रयासों से क्या सबक लिए?
    यह मेरा लगातार चौथा और आखिरी प्रयास था. एक तरह से इस बार मेरे लिए करो या मरो की स्थिति थी. 2009 के अपने पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास करने से मैं बेहद उत्साहित थी, लेकिन दुर्भाग्य से मुख्य परीक्षा पास नहीं कर सकी. उस समय तो मैं काफी निराश हो गई थी, लेकिन जल्द ही मैंने इस पर काबू पा लिया और अगले प्रयास के लिए जुट गई. जमकर मेहनत करने के कारण दूसरे प्रयास में मुङो कामयाबी तो मिली, पर रैंक नीचे थी. इसलिए अगले साथ फिर एग्जाम दिया, पर रैंक और कम हो गया. इससे मुङो शॉक लगा. लगा कि मुझमें कहीं न कहीं तो कोई कमी है. ऐसे में मैंने अपनी क्षमता-अक्षमता को लेकर गहन मंथन किया. होमवर्क किया कि आखिर मेरी तैयारी में कमी कहां रह जा रही है? इन कमियों को दूर करते हुए मैंने नये सिरे से तैयारी की. इस बार मैंने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी. अंतत: मुङो इसका प्रतिफल मिला. अब मैं टॉपर के रूप आप सभी के सामने हूं. सिविल सेवा परीक्षा में अपने चारों प्रयासों का विश्लेषण करने के बाद मैंने यही पाया कि यदि आपको अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा है, तो शुरुआती असफलताओं से निराश हुए बिना लगातार आगे बढ़ना चाहिए. कामयाबी जरूर मिलेगी.


    मुख्य परीक्षा आपने किन-किन ऐच्छिक विषयों को चुना था?
    मुख्य परीक्षा में मेरे ऐच्छिक विषय थे अर्थशास्त्र और मलयालम साहित्य.

    यूपीएससी ने इस साल भारतीय भाषाओं को हटाने की घोषणा की थी, जिसे विरोध के बाद हटाया गया. इस बारे में आपकी क्या राय है?
    अच्छा हुआ कि यूपीएससी ने कदम वापस खींच लिए. मलयालम एक भारतीय भाषा होने के साथ मेरी मातृभाषा भी है और मैं इसकी बदौलत ही बेहतर प्रदर्शन करने में कामयाब रही.

    क्या आपने इस खास परीक्षा के लिए कोई खास स्ट्रेटेजी अपनाई?
    मैंने कंपल्सरी और ऑप्शनल सभी विषयों की तैयारी ठोस स्ट्रेटेजी बनाकर की. सेल्फ स्टडी के साथ-साथ मैंने कोचिंग की भी मदद ली.

    सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे यूथ को आप क्या सुझाव देंगी?

    मैं उनसे यही कहूंगी कि अपनी क्षमता व काबिलियत को अच्छी तरह से पहचान कर कदम आगे बढ़ाएं. खुद पर पूरा भरोसा करें. अपनी कमियों का विश्लेषण कर उन्हें दूर करें और किसी भी मुश्किल परिस्थिति में हिम्मत न हारें.

    इंटरैक्शन : सुशील भाटिया

     

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