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आईबीपीएस क्लर्क परीक्षा के बारे में 7 मिथक : कितने सही और कितने गलत ?

Sep 20, 2016 18:22 IST
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आईबीपीएस क्लर्क परीक्षा 2016 की अधिसूचना हाल ही में प्रकाशित की गई है और कई उम्मीदवार वर्ष के इस बहुप्रतीक्षित परीक्षा में शामिल होने वाले हैं। आईबीपीएस क्लर्क परीक्षा, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है देश के राष्ट्रीयकृत बैंकों में लिपिक कैडर में कर्मचारियों की भर्ती के लिए आयोजित की जाती है। रिक्तियां बहुत अधिक हैं और ज्यादातर औसत उम्मीदवारों के लिए प्रतियोगिता उम्मीद से कहीं अधिक कठिन है। अक्सर देखा गया है कि उम्मीदवार लंबे समय से उपस्थित मिथकों से प्रभावित हो जाते हैं और बुरी बात यह है कि ये मिथक उनकी तैयारी को प्रभावित करते हैं जिसके परिणामस्वरूप वे प्रतिष्ठित बैंकों में नौकरी प्राप्त करने के अवसर को गंवा बैठते हैं। इस लेख में हम इन तथाकथित मिथकों पर प्रकाश डालने कि कोशिश करेंगे।

आईबीपीएस क्लर्कः मिथक

आईबीपीएस क्लर्क की परीक्षा बड़ी संख्या में रिक्तियों और भारत में पीएसबी जैसे प्रतिष्ठित संगठन में एक बैंक कर्मी के तौर पर नौकरी प्राप्त करने के अवसर की वजह से इस वर्ष की बहुप्रतीक्षित परीक्षा है। उम्मीदवारों के लिए करो या मरो वाला अवसर होने की वजह से इस परीक्षा की तैयारी सकारात्मक रवैये के साथ करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। एक लोकप्रिय परीक्षा होने के कारण इससे जुड़े मिथकों की संख्या भी यूपीएससी की परीक्षा से जुड़े मिथकों के जैसे ही बढ़ गई है। कोचिंग जरूरी है, आपको एक दिन में 20 घंटों की पढ़ाई करनी चाहिए आदि जैसे मिथक इस परीक्षा की तैयारी से जुड़ गए है।

मिथक 1: परीक्षा आसान है

यह मिथक इसलिए है क्योंकि उम्मीदवार अक्सर यह सोचते हैं कि प्रोबेशनरी ऑफिसर की तुलना में रिक्तियों की संख्या अधिक है जबकि परीक्षा का स्तर लिपिक स्तर का होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और रिक्तियों की संख्या अधिक होने के बावजूद भी आप सिर्फ अपने राज्य में उपलब्ध रिक्तियों के लिए ही प्रतियोगिता करते हैं। इसलिए दिमाग में यह बात जरूर रखें कि एक प्रतिष्ठित बैंक में कलर्क की नौकरी प्राप्त करने के लिए आपको अपने राज्य में अव्वल आने की जरूरत है।

मिथक 2 :  क्लर्कियल परीक्षा (लिपिक की परीक्षा) में गणित और रीजनिंग आसान होते हैं

वह समय बीत चुका है जब आप कलर्क की परीक्षाओं में सिर्फ देख कर ही किसी सवाल का जवाब दे सकते थे। आजकल, क्वांट खंड कई उम्मीदवारों के अंतिम चयन न होने की वजह बन जाता है या यही खंड प्रारंभिक परीक्षा में भी उम्मीदवार को विफल बना सकता है। रीजनिंग का खंड भी कम जिम्मेदार नहीं है क्योंकि इसमें आपको कई सारी पहेलियों को हल करना होता है। इन पहेलियों में बहुत समय लगता है या आपको तार्कशक्ति में बहुत अच्छा होना होगा ताकि आप इस खंड के कथन –निष्कर्ष प्रश्नों का सही– सही उत्तर दे सकें।

मिथक 3: कोचिंग बेहद जरूरी है

आईआईटी से लेकर आईएएस की परीक्षा तक भारत में यह किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए सत्य है। लेकिन यह भी सच है कि उम्मीदवारों को खुद अध्ययन करना होता है और इसका कोई शॉर्टकट नहीं है। कोचिंग सेंटर आपको सामग्री दे देंगे और टेस्ट ले लेंगे लेकिन इन पठन सामग्रियों और टेस्ट का किस प्रकार उपयोग करना है, यह आप पर निर्भर करता है। यदि आप अपने संसाधनों का सही तरीके से प्रबंधन कर सकते हैं तो क्लासरूम कोचिंग जाने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन हां, वास्तविक परीक्षा से पहले यदि आप अपना टेस्ट लेना चाहते हैं, तो इस क्षेत्र के किसी विशेषज्ञ संस्थान के मॉक टेस्ट में शामिल होना वाकई आपकी मदद कर सकता है क्योंकि इन संस्थानों के प्रश्न वास्तविक परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों से बहुत हद तक मेल खाते हैं।

मिथक 4: गणित में आपको बहुत अच्छा होने की जरूरत है

वास्तव में आपको हर विषय में बहुत अच्छा होने की जरूरत है। आजकल कई बैंक परीक्षाओं के पैटर्न बदल रहे हैं और आपको नहीं पता की परीक्षा कक्ष में आपके सामने किस प्रकार के प्रश्न आने वाले हैं। आपको परीक्षा के प्रत्येक विषय को समान महत्व देने की आवश्यकता है क्योंकि प्रत्येक खंड में अच्छा अंक लाए बगैर, अंतिम सूची में खुद को लाने का आपका अवसर बहुत कम हो जाता है। इसलिए सिर्फ एक या दो विषयों में अच्छा बनने की कोशिश न करें। बजाए इसके इस दौड़ में चुने जाने के लिए सभी विषयों में अच्छा बनने की कोशिश करें ।

मिथक 5: सटीकता मायने रखती है, हल किए गए प्रश्नों की संख्या नहीं

प्रत्येक परीक्षा के बाद, उम्मीदवार बाहर आते हैं और कहते हैं कि मैंने इतने प्रश्न हल किए, मैंने उतने प्रश्न हल किए, लेकिन सटीकता के बारे में क्या? यह कोई नहीं जानता और इनमें से कई उम्मीदवार अंतिम लड़ाई हार जाते हैं क्योंकि वे सटीकता का ध्यान रखे बगैर ज्यादा– से– ज्यादा प्रश्न हल करने की मूर्खता कर बैठते हैं। इसलिए अच्छा यही रहेगा कि आप सटीकता के साथ अपनी गति को बढ़ाने पर ध्यान दें क्योंकि इसके बगैर सभी प्रश्नों को हल करने का प्रयास भी आपके लिए फायदेमंद नहीं रहेगा।

मिथक 6 : मॉक परीक्षा में अंक लाना मतलब वास्तविक परीक्षा में अंक लाना

लोग अक्सर यह समझ लेते हैं कि वास्तविक परीक्षा में अंक लाना मॉक परीक्षाओं में अंक लाने जैसा ही है। इसी वजह से आजकल आप अक्सर लोगों को अलग– अलग संगठनों द्वारा कराए जाने वाले मॉक टेस्ट में ज्यादा– से– ज्यादा अंक लाने की कोशिश में लगा पाएंगे। लेकिन वास्तविक परीक्षा में तनाव और दबाव होता है और यह दो चीजें अंक लाना मुश्किल बना देती हैं। इसलिए अपने मॉक टेस्ट के अंकों पर बहुत अधिक भरोसा न करें। इसकी बजाए वास्तविक परीक्षा में शांत और अधिक व्यवस्थित होकर अधिक अंक लाने पर ध्यान लगाएं। किसी को भी मॉक परीक्षा के टॉपर का नाम याद नहीं रहता लेकिन सफल उम्मीदवार को सभी याद रखते हैं।

मिथक 7: सामान्य जागरूकता खंड परीक्षा में भाग्य से जुड़ा है

वास्तव में ऐसा नहीं है क्योंकि सामान्य जागरुकता खंड में पूछे जाने वाले प्रश्नों का एक पैटर्न होता है और आपको उसे समझने की आवश्यकता है और तभी आप इस खंड की तैयारी भी कर सकते हैं। वे दिन गए जब आपको परीक्षा में पूछे जाने वाले सामान्य जागरुकता के प्रश्नों के बारे में कोई आईडिया नहीं होता था। इसलिए तदनुसार तैयारी करें क्योंकि किसी भी परीक्षा में आजकल सफल होने के लिए जीके का खंड बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि आप इस खंड में किसी प्रश्न का बिल्कुल सही जवाब न जानते हों तो तुक्का मारने की कोशिश न करें क्योंकि इस खंड में नकारात्मक अंकन किया जाता है और यह कई अच्छे उम्मीदवारों की सफलता की राह का बाधा बन जाता है।

आईबीपीएस क्लर्क परीक्षा आने वाली है और इसके लिए काफी पहले ही पंजीकरण की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। अब बारी आपकी है– परीक्षा का पैटर्न सही तरीके से समझें और फिर असली परीक्षा की तैयारियों में जुट जाएं। पहले पाठ्यक्रम पूरा करें, फिर भरोसेमंद मॉक टेस्ट दें और अपनी तैयारी के स्तर को आंकें। इसके बाद परीक्षा कक्ष में खुद को शांत रखें और परीक्षा दें।

शुभकामनाएं।

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