कंपनी सेके्रटरी बोर्ड रूम में डायरेक्ट एंट्री

अगर आप ऐसा प्रोफेशन चुनना चाहते हैं, जिसमें चुनौतियों के साथ पैसा, प्रतिष्ठा-रुतबा और जॉब सैटिस्फैक्शन भी हो, तो चुनें सीएस कोर्स। इस कोर्स की खासियत यह है कि सीएस के रूप में आपको बोर्ड रूम में सीधे डायरेक्टर्स के साथ काम करने का सुअवसर मिलता है। ब्रजेश बता रहे हैं इस कोर्स के विभिन्न पहलुओं के बारे में..
Created On: Sep 10, 2008 03:43 IST

ग्लोबलाइजेशन ने देश के युवाओं के सपनों में रंग भर दिया है। बदलते दौर में वे चुनौतियों का सामना करने और खुद को साबित करने के लिए तैयार हैं। यही कारण है कि आजकल वे वही कोर्स चुन रहे हैं, जो उन्हें एक चुनौतीपूर्ण करियर प्रदान करता हो। ऐसा ही एक कोर्स है सीएस यानी कंपनी सेक्रेटरी का। इस कोर्स को करने के बाद कॉर्पोरेट व‌र्ल्ड में आपकी कामयाबी का रास्ता खुल जाता है। सीएस के रूप में आपको ऐसे महत्वपूर्ण काम करने होते हैं, जिनके लिए आपको प्राय: हर दिन सीधे चेयरमैन, सीईओ, मैनेजिंग डायरेक्टर के साथ बातचीत करनी होती है। इतना ही नहीं डायरेक्टर्स की मीटिंग के दौरान सीएस को भी उपस्थित होना होता है। दरअसल, किसी भी कंपनी की प्रोग्रेस के पीछे कंपनी सेके्रटरी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। वह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, शेयर होल्डर्स, सरकार और दूसरी एजेंसियों के बीच कडी का काम करता है। लॉ, मैनेजमेंट, फाइनैंस, कॉर्पोरेट गवर्नेस आदि का एक्सपर्ट होने के कारण वह अपने ज्ञान और कुशलता का उपयोग कंपनी को आगे ले जाने में करता है। सीएस कोर्स करने का मतलब है एक ऐसा प्रोफेशन चुनना, जो न केवल प्रतिष्ठा और आर्थिक दृष्टि से बेहतर है, बल्कि जिसमें भरपूर जॉब सैटिस्फैक्शन भी है।

कैसे करें सीएस कोर्स

यह कोर्स कराने वाली देश की एकमात्र संस्था है-द इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया। यह संसदीय अधिनियम द्वारा स्थापित संवैधानिक निकाय है, जो भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की देख-रेख में काम करती है। ऐसे स्टूडेंट, जो बारहवीं पास करने के बाद सीएस बनना चाहते हैं, उन्हें कंपनी सेके्रटरी कोर्स पूरा करने के लिए तीन स्टेज से होकर गुजरना होता है। ये स्टेज हैं- फाउंडेशन प्रोग्राम, एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम और प्रोफेशनल प्रोग्राम।

फाउंडेशन प्रोग्राम : फाउंडेशन प्रोग्राम करने वाले छात्रों को चार पेपर पास करने होते हैं। ये चारों पेपर निम्नलिखित विषयों के होते हैं-इंग्लिश ऐंड बिजनेस कम्युनिकेशन, इकोनॉमिक्स ऐंड स्टैटेस्टिक्स, फाइनैंशियल अकाउंटिंग और एलिमेंट्स ऑफ बिजनेस लॉ ऐंड मैनेजमेंट।

एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम : एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम में 6 पेपर होते हैं। इनके अंतर्गत जनरल ऐंड कॉमर्शियल लॉ, कंपनी अकाउंट्स, कॉस्ट ऐंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग, टैक्स लॉ, कंपनी लॉ, इकोनॉमिक ऐंड लेबर लॉ, सिक्योरिटी लॉ ऐंड कम्प्लॉएंस आदि विषयों को पढाया जाता है।

प्रोफेशनल प्रोग्राम : प्रोफेशनल प्रोग्राम में आठ पेपर पास करने होते हैं। इनके अंतर्गत छात्रों को निम्नलिखित विषयों का अध्ययन करना होता है-कंपनी सेके्रटरी प्रैक्टिस, ड्रॉफ्टिंग, अपीयरेंस ऐंड प्लीडिंग्स, फाइनैंशियल, ट्रेजरी ऐंड फॉरेक्स मैनेजमेंट, कॉर्पोरेट री-स्ट्रक्चरिंग ऐंड इन्सॉल्वेंसी, स्टै्रटेजिक मैनेजमेंट, एलायंस ऐंड इंटरनेशनल ट्रेड, एडवांस टैक्स लॉ ऐंड प्रैक्टिस, ड्यू डिलिजेंस ऐंड कॉर्पोरेट कम्प्लाएंस मैनेजमेंट, गवर्नेस, बिजनेस इथिक्स ऐंड सस्टेनेबिलिटी आदि।

ट्रेनिंग :  एग्जीक्यूटिव या प्रोफेशनल प्रोग्राम पास करने के बाद स्टूडेंट्स को पंद्रह महीने की मैनेजमेंट ट्रेनिंग भी दी जाती है। इसके अंतर्गत छात्रों को किसी कंपनी में या किसी कंपनी सेके्रटरी फर्म में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग लेनी होती है। पंद्रह महीने की ट्रेनिंग के बाद स्टूडेंट्स को पंद्रह दिन की एक और ट्रेनिंग करनी होती है। यह ट्रेनिंग रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी, मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज, सेबी, कंपनी लॉ बोर्ड आदि में होती है। प्रोफेशनल प्रोग्राम पास करने और पै्रक्टिकल ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले स्टूडेंट्स आईसीएसआई यानी द इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया के असोसिएट मेंबर बन जाते हैं। इसके बाद वे अपने नाम के बाद एसीएस (असोसिएट कंपनी सेक्रेटरी) लिखने के अधिकारी हो जाते हैं।

फाउंडेशन कोर्स के लिए योग्यता

फाउंडेशन प्रोग्राम की अवधि आठ महीने है। इसमें फाइन आ‌र्ट्स को छोडकर आ‌र्ट्स, साइंस या कॉमर्स किसी भी स्ट्रीम के बारहवीं पास छात्र एडमिशन ले सकते हैं। फाउंडेशन प्रोग्राम पास करने वाले छात्र रेगुलर कोर्स में रजिस्ट्रेशन की योग्यता प्राप्त कर लेते हैं, जिसमें एग्जीक्यूटिव और प्रोफेशनल प्रोग्राम भी शामिल हैं।

एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम में सीधे प्रवेश

जिन लोगों के पास निम्नलिखित योग्यताएं हैं, उन्हें फाउंडेशन प्रोग्राम करने की आवश्यकता नहीं है। वे कंपनी सेके्रटरीशिप के लिए सीधे एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम में प्रवेश ले सकते हैैं : 

अगर उनके पास कॉर्पोरेट सेके्रटरीशिप या कॉमर्स में डिग्री या मास्टर डिग्री हो।

फाइन आ‌र्ट्स को छोडकर किसी भी स्ट्रीम से ग्रेजुएट छात्र सीधे एग्जीक्यूटिव कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।

जिन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट ऐंड व‌र्क्स अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की फाइनल परीक्षा पास कर ली हो।

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया या किसी भारतीय अकाउंटेंसी इंस्टीट्यूट की परीक्षा पास की हो या किसी मान्यता प्राप्त विदेशी संस्थान से इसके समकक्ष परीक्षा पास की हो।

प्रवेश व परीक्षा

सीएस कोर्स में एडमिशन साल में कभी भी लिया जा सकता है। वैसे, फाउंडेशन प्रोग्राम में प्रवेश लेने की अंतिम तिथि हर वर्ष 31 मार्च और 30 सितंबर है। 31 मार्च तक प्रवेश लेने वाले छात्र उसी साल दिसंबर में होने वाली परीक्षा में भाग ले सकते हैं, जबकि 30 सितंबर तक एडमिशन लेने वाले छात्रों को अगले साल जून महीने में आयोजित होने वाली परीक्षा में भाग लेना होता है। एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम में प्रवेश की अंतिम तिथि 28 फरवरी और 31 अगस्त होती है। जो छात्र 28 फरवरी तक एडमिशन ले लेते हैं, वे उसी साल दिसंबर में होने वाली परीक्षा में बैठ सकते हैं, जबकि 31 अगस्त तक एडमिशन लेने वाले छात्र अगले साल जून महीने में होने वाली परीक्षा में शामिल होते हैं।

कोर्स की फीस

सीएस फाउंडेशन प्रोग्राम की फीस 3600 रुपये है। एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम की फीस कॉमर्स ग्रेजुएट के लिए 7000 रुपये है, जबकि अन्य स्ट्रीम के छात्रों के लिए यह फीस 7500 रुपये है। प्रोफेशनल प्रोग्राम की फीस 7500 रुपये ली जाती है।

रोजगार संभावनाएं

कंपनी सेके्रटरी का कोर्स करने के बाद आपके पास नेशनल-मल्टीनेशनल कंपनियों में जॉब करने या स्वतंत्र प्रैक्टिस करने का विकल्प होता है। ऐसे लोग, जो सीएस करने के बाद नौकरी करना चाहते हैं, उनके लिए निम्नलिखित क्षेत्रों में जॉब के अवसर उपलब्ध हैं :

किसी ऐसे कंपनी सेके्रटरी के यहां एक प्रोफेशनल के रूप में जॉब प्राप्त कर सकते हैं, जो स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर रहा हो।

ऐसी कंपनी में सीएस के रूप में, जिसका पेडअप शेयर कैपिटल दो करोड या उससे ज्यादा हो।

ऐसी कंपनियां, जो स्टॉक एक्सचेंज में दर्ज होना चाहती हैं, उन्हें भी अपने यहां पूर्णकालिक सीएस रखना होता है।

सीएस कोर्स करने के बाद कें द्र सरकार के अंतर्गत काम करने का मौका भी मिल सकता है।

कुछ विश्वविद्यालय सीएस पास व्यक्तियों को पीएचडी में सीधा प्रवेश देते हैं। इस प्रकार आप पीएचडी करके कॉमर्स और मैनेजमेंट विषयों के लेक्चरर के रूप में भी काम कर सकते हैं। यदि आप सीएस कोर्स करने के बाद जॉब नहीं करना चाहते, तो स्वतंत्र प्रैक्टिस करते हुए भी आप अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। स्वतंत्र प्रैक्टिस करते हुए आपको निम्नलिखित क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा :

प्रत्येक कंपनी, जिसका पेड-अप शेयर कैपिटल दस लाख रुपये से ज्यादा और दो करोड रुपये से कम है, उन्हें कम्प्लॉयंस सर्टिफिकेट के लिए सीएस की सेवाएं लेनी पडती हैं। इसलिए स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए आप इस तरह की कंपनियों को अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

कंपनी सेके्रटरी को कम्प्लॉयंस सर्टिफिकेट जारी करने का भी अधिकार होता है।

कौन-कौन से हैं पद

कंपनी सेके्रटरी को कंपनी सेके्रटरी ऐंड एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, कंपनी सेके्रटरी ऐंड वाइस प्रेसिडेंट या चीफ कंप्लॉयंस ऑफिसर, असिस्टेंट कंपनी सेके्रटरी या लीगल ऑफिसर, कंपनी सेके्रटरी ऐंड फाइनैंस ऑफिसर आदि पदों पर काम करने का मौका मिलता है।

कहां से पाएं जानकारी

सीएस कोर्स से संबंधित अधिक जानकारी के लिए नीच लिखे पते पर संपर्क करें या लॉग-ऑन करें : आईसीएसआई हाउस, 22 इंस्टीट्यूशनल एरिया, लोदी रोड, नई दिल्ली-110003 फोन : 011-41504444, 24617321-24

ई-मेल : info@icsi.edu

वेबसाइट : www. icsi.edu

सीएस में प्रवेश की तिथियां

फाउंडेशन प्रोग्राम

31 मार्च-30 सितंबर (प्रति वर्ष)

एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम

28 फरवरी-31 अगस्त 

फिलहाल भारत में 20 हजार सीएस हैं, जबकि वर्ष 2015 तक करीब 50 हजार सीएस की और जरूरत होगी।

सीएस को सीधे बोर्ड रूम में डायरेक्टर्स के बीच बैठने का मौका मिलता है।

सीएस को आरंभ में दो-तीन लाख से लेकर पांच-सात लाख रुपये वेतन मिलता है।

दो-तीन साल के अनुभव के बाद कमाई 20 लाख रुपये से भी अधिक हो सकती है।

निजी प्रैक्टिस करने वाले अनुभवी सीएस को एक हीयरिंग के लिए 70-75 हजार रुपये का भुगतान हो जाता है।

ब्रजेश

असीमित संभावनाओं का क्षेत्र है सीएस

भारत में कंपनी सेक्रेटरी के प्रोफेशन को विकसित तथा रेगुलेट करने करने के लिए संसद के अधिनियम द्वारा द इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया की स्थापना की गई। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। सीएस कोर्स और संभावनाओं के बारे में इसके सेक्रेटरी और सीईओ एनके जैन से खास बातचीत की गई। पेश हैं इसके मुख्य अंश :

भारत में कॉर्पोरेट सेक्टर की मजबूती को देखते हुए यहां सीएस की डिमांड कितनी बढी है?

निश्चित तौर पर अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ सरकारी और निजी कंपनियों द्वारा कंपनी सेक्रेटरी की मांग में काफी बढोत्तरी हुई है। फिलहाल देश में 20 हजार कंपनी सेक्रेटरी हैं। लेकिन बढती जरूरत को देखते हुए वर्ष 2015 तक करीब 50 हजार सीएस की जरूरत होगी।

क्या केवल आईसीएसआई सीएस कोर्स का संचालन करता है? इस कोर्स के प्रति जागरूकता बढाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

आईसीएसआई संसदीय अधिनियम द्वारा एकमात्र ऐसी संस्था है, जो कंपनी सेक्रेटरी कोर्स संचालित करने और अपने मेंबर्स (कार्यरत सीएस) की गतिविधियों को रेगुलेट करने का काम करती है। अधिक से अधिक स्टूडेंट्स को इससे जोडने के लिए देश भर में कई सेंटर खोले गए हैं। इसके अलावा ई-लर्निग की मदद से भी शिक्षा दी जा रही है। सभी को प्रवेश देने की नीति के तहत ही इसमें नामांकन के लिए कोई टेस्ट नहीं देना होता है और न ही कोई अधिकतम उम्र सीमा रखी गई है। यानी देश का कोई भी नागरिक सीएस कोर्स में प्रवेश ले सकता है। यह एकमात्र ऐसा पेशा है, जिसमें कमाई की कोई लिमिट नहीं है और पहले दिन से ही सीएस को डायरेक्टर के साथ उठना-बैठना होता है।

सीएस प्रोफेशन में कामयाबी के लिए व्यक्ति में किस तरह की क्वालिटी होनी चाहिए?

चूंकि सीएस को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के साथ रहना होता है, इसलिए ज्ञान के साथ-साथ उसे सॉफ्ट स्किल को भी डेवलॅप करना होता है। इस प्रोफेशन में कामयाबी के लिए नॉलेज को लगातार अपडेट करते रहें, एटीटयूड पॉजिटिव हो और कॉन्फिडेंस से लबरेज रहें।

कमाई की दृष्टि से सीएस कैसा प्रोफेशन है?

भारत के लिए सीएस एक उभरता हुआ प्रोफेशन है। सीएस कोर्स करने वाला चाहे तो किसी कॉर्पोरेट कंपनी में सीएस के रूप में जॉब करे या फिर खुद की प्रैक्टिस। दोनों रूपों में खूब इनकम होती है। शुरुआत में 3 लाख से लेकर 5-6 लाख रुपये सालाना वेतन मिल जाता है, जबकि अनुभव बढने के साथ वेतन 15-20 लाख रुपये वार्षिक हो सकता है। प्रैक्टिस करने वाले सीएस को ओपिनियन और हीयरिंग के हिसाब से पेमॅन्ट मिलता है। प्रत्येक हीयरिंग के लिए 20-25 हजार से लेकर 70-75 हजार रुपये मिल जाते हैं।

द इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एनके जैन से अरुण श्रीवास्तव की एक्सक्लूसिव बातचीत

ई-लर्निग से करें सीएस

देश के दूर-दराज इलाकों के छात्र ई-लर्निग के माध्यम से भी कंपनी सेके्रटरी फाउंडेशन प्रोग्राम कर सकते हैं। वे चाहें, तो आगे भी ई-लर्निग के माध्यम से ही एग्जीक्यूटिव और प्रोफेशनल प्रोग्राम कर सकते हैं। ई-लर्निग के अंतर्गत छात्र चौबीस घंटे में अपनी सुविधा के अनुसार जब चाहें ऑनलाइन गाइडेंस की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। ई-लर्निग के अंतर्गत छात्रों के साथ इंटरैक्शन के लिए डिस्कशन बोर्ड और ऑनलाइन चैट की भी सुविधा दी गई है। ई-लर्निग के लिए छात्रों से 250 रुपये वार्षिक फीस ली जाती है। ई-लर्निग से संबंधित जानकारी के लिए लॉग-ऑन करें :  http://elearning.icsi.edu 

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