कामयाबी का मंत्र है सही एटिटयूड

किसी भी क्षेत्र में कामयाबी पाने के लिए पॉजिटिव एटिटयूड के साथ अपने सोचने का दायरा भी बढ़ाना होगा। क्यों, बता रहे हैं, सक्सेस गुरु ए. के. मिश्रा..
Created On: Nov 12, 2008 03:59 IST

यदि हम असफल लोगों से मिलें, तो प्राय: वे अपनी असफलताओं के उत्तरदायित्व से बचने के लिए अनेक बहानों एवं कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं। वे इस बात को समझने में पूरी तरह से विफल होते हैं कि असली समस्या उनके एटिटयूड में है। सच तो यह है कि मनोवृत्ति या एटिटयूड ही हमारे जीवन का निर्माण करती है। क्योंकि इसी के द्वारा हमारी सफलताएं एवं असफलताएं निर्देशित होती हैं। सफल यक्तियों के इतिहास की गहराई से पडताल करने पर पता चलता है कि उनकी मनोवृत्ति सभी क‌र्त्तव्यों के उत्तरदायित्व को अपने ऊपर लेने की रही है। ऐसे लोग बहानों में विश्वास नहीं करते और न ही अपनी समस्याओं के लिए किसी अन्य को दोषी ठहराते हैं। दरअसल, किसी भी चीज को देखने का दो नजरिया होता है-सकारात्मक और नकारात्मक। निराशावादी व्यक्ति को जहां संभावनाओं में भी समस्याएं नजर आती हैं, वहीं आशावादी व्यक्ति समस्याओं में भी संभावनाएं तलाश ही लेता है। अधिकतर मामलों में हम अपनी नकारात्मक मनोवृत्ति के चलते ही वस्तुओं की उपयोगिता को नहीं समझ पाते। निगेटिव अप्रोच के कारण हम स्वयं के दोष को भी नहीं देख पाते हैं। घटनाओं एवं समस्याओं के प्रति पूर्वाग्रह के चलते प्राय: हम उनमें निहित संभावनाओं के बारे में भ्रमित रहते हैं और उनका निष्पक्ष विश्लेषण नहीं कर पाते। सकारात्मक मनोवृत्ति, खुले दिमाग एवं आत्मबल से मजबूत व्यक्तित्व का निर्माण होता है। ऐसे व्यक्तियों की सबसे बडी विशेषता यह होती है कि वे अपनी कमियों को जानते हैं और वे सकारात्मक ऊर्जा का इस्तेमाल अपनी कमियों को दूर करने के लिए करते हैं। यही कारण है कि उन्हें सहज ही सफलता मिल जाती है। हम जीवन में केवल उसी स्तर तक पहुंच सकते हैं, जिसके लिए हमारे पास उचित मनोवृत्ति हो। अभी तक हम जो भी हैं, वह हमारी पूर्व की मनोवृत्ति का प्रतिफल है और भविष्य में हम जो कुछ भी होंगे, वह हमारी आज की मनोवृत्ति पर निर्भर करेगा। दरअसल हमारे जीवन के निर्धारण में कर्मो की अपेक्षा एटिटयूड ही अन्य सभी कारकों को नियंत्रित करता है। सकारात्मक सोच डेवलॅप करने के लिए आवश्यक है कि आप जो कुछ भी बनना चाहते हैं, वैसी ही कल्पना करें, क्योंकि जो चीज आप सोच नहीं सकते, उसे पा भी नहीं सकते। दरअसल स्थिर मनोवृत्ति के लिए आवश्यक है कि हम अपने लक्ष्य को किसी के प्रति समर्पित करें। क्योंकि इससे हमें न केवल पे्ररणा प्राप्त होगी बल्कि, स्थिर मनोवृत्ति के विकास में मदद भी मिलेगी। इसके अतिरिक्त जरूरी यह भी है कि लिए गए निर्णय के प्रति हम ईमानदारी से कार्य करें। इससे अपने निर्णय पर और भी ज्यादा विश्वास हासिल होगा। परिणामस्वरूप हमें सफलता प्राप्त करने से कोई भी शक्ति नहीं रोक पाएगी। याद रखें, कोई भी परिणाम हम तभी प्राप्त कर सकते हैं, जब बिना किसी पूर्व धारणा, दबाव व तनाव के प्रयास करें। यानी सही एटिटयूड को अपनाकर ही किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

दि हम असफल लोगों से मिलें, तो प्राय: वे अपनी असफलताओं के उत्तरदायित्व से बचने के लिए अनेक बहानों एवं कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं। वे इस बात को समझने में पूरी तरह से विफल होते हैं कि असली समस्या उनके एटिटयूड में है। सच तो यह है कि मनोवृत्ति या एटिटयूड ही हमारे जीवन का निर्माण करती है। क्योंकि इसी के द्वारा हमारी सफलताएं एवं असफलताएं निर्देशित होती हैं। सफल व्यक्तियों के इतिहास की गहराई से पडताल करने पर पता चलता है कि उनकी मनोवृत्ति सभी क‌र्त्तव्यों के उत्तरदायित्व को अपने ऊपर लेने की रही है। ऐसे लोग बहानों में विश्वास नहीं करते और न ही अपनी समस्याओं के लिए किसी अन्य को दोषी ठहराते हैं। दरअसल, किसी भी चीज को देखने का दो नजरिया होता है-सकारात्मक और नकारात्मक। निराशावादी व्यक्ति को जहां संभावनाओं में भी समस्याएं नजर आती हैं, वहीं आशावादी व्यक्ति समस्याओं में भी संभावनाएं तलाश ही लेता है। अधिकतर मामलों में हम अपनी नकारात्मक मनोवृत्ति के चलते ही वस्तुओं की उपयोगिता को नहीं समझ पाते। निगेटिव अप्रोच के कारण हम स्वयं के दोष को भी नहीं देख पाते हैं। घटनाओं एवं समस्याओं के प्रति पूर्वाग्रह के चलते प्राय: हम उनमें निहित संभावनाओं के बारे में भ्रमित रहते हैं और उनका निष्पक्ष विश्लेषण नहीं कर पाते। सकारात्मक मनोवृत्ति, खुले दिमाग एवं आत्मबल से मजबूत व्यक्तित्व का निर्माण होता है। ऐसे व्यक्तियों की सबसे बडी विशेषता यह होती है कि वे अपनी कमियों को जानते हैं और वे सकारात्मक ऊर्जा का इस्तेमाल अपनी कमियों को दूर करने के लिए करते हैं। यही कारण है कि उन्हें सहज ही सफलता मिल जाती है। हम जीवन में केवल उसी स्तर तक पहुंच सकते हैं, जिसके लिए हमारे पास उचित मनोवृत्ति हो। अभी तक हम जो भी हैं, वह हमारी पूर्व की मनोवृत्ति का प्रतिफल है और भविष्य में हम जो कुछ भी होंगे, वह हमारी आज की मनोवृत्ति पर निर्भर करेगा। दरअसल हमारे जीवन के निर्धारण में कर्मो की अपेक्षा एटिटयूड ही अन्य सभी कारकों को नियंत्रित करता है। सकारात्मक सोच डेवलॅप करने के लिए आवश्यक है कि आप जो कुछ भी बनना चाहते हैं, वैसी ही कल्पना करें, क्योंकि जो चीज आप सोच नहीं सकते, उसे पा भी नहीं सकते। दरअसल स्थिर मनोवृत्ति के लिए आवश्यक है कि हम अपने लक्ष्य को किसी के प्रति समर्पित करें। क्योंकि इससे हमें न केवल पे्ररणा प्राप्त होगी बल्कि, स्थिर मनोवृत्ति के विकास में मदद भी मिलेगी। इसके अतिरिक्त जरूरी यह भी है कि लिए गए निर्णय के प्रति हम ईमानदारी से कार्य करें। इससे अपने निर्णय पर और भी ज्यादा विश्वास हासिल होगा। परिणामस्वरूप हमें सफलता प्राप्त करने से कोई भी शक्ति नहीं रोक पाएगी। याद रखें, कोई भी परिणाम हम तभी प्राप्त कर सकते हैं, जब बिना किसी पूर्व धारणा, दबाव व तनाव के प्रयास करें। यानी सही एटिटयूड को अपनाकर ही किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

दि हम असफल लोगों से मिलें, तो प्राय: वे अपनी असफलताओं के उत्तरदायित्व से बचने के लिए अनेक बहानों एवं कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं। वे इस बात को समझने में पूरी तरह से विफल होते हैं कि असली समस्या उनके एटिटयूड में है। सच तो यह है कि मनोवृत्ति या एटिटयूड ही हमारे जीवन का निर्माण करती है। क्योंकि इसी के द्वारा हमारी सफलताएं एवं असफलताएं निर्देशित होती हैं। सफल व्यक्तियों के इतिहास की गहराई से पडताल करने पर पता चलता है कि उनकी मनोवृत्ति सभी क‌र्त्तव्यों के उत्तरदायित्व को अपने ऊपर लेने की रही है। ऐसे लोग बहानों में विश्वास नहीं करते और न ही अपनी समस्याओं के लिए किसी अन्य को दोषी ठहराते हैं। दरअसल, किसी भी चीज को देखने का दो नजरिया होता है-सकारात्मक और नकारात्मक। निराशावादी व्यक्ति को जहां संभावनाओं में भी समस्याएं नजर आती हैं, वहीं आशावादी व्यक्ति समस्याओं में भी संभावनाएं तलाश ही लेता है। अधिकतर मामलों में हम अपनी नकारात्मक मनोवृत्ति के चलते ही वस्तुओं की उपयोगिता को नहीं समझ पाते। निगेटिव अप्रोच के कारण हम स्वयं के दोष को भी नहीं देख पाते हैं। घटनाओं एवं समस्याओं के प्रति पूर्वाग्रह के चलते प्राय: हम उनमें निहित संभावनाओं के बारे में भ्रमित रहते हैं और उनका निष्पक्ष विश्लेषण नहीं कर पाते। सकारात्मक मनोवृत्ति, खुले दिमाग एवं आत्मबल से मजबूत व्यक्तित्व का निर्माण होता है। ऐसे व्यक्तियों की सबसे बडी विशेषता यह होती है कि वे अपनी कमियों को जानते हैं और वे सकारात्मक ऊर्जा का इस्तेमाल अपनी कमियों को दूर करने के लिए करते हैं। यही कारण है कि उन्हें सहज ही सफलता मिल जाती है। हम जीवन में केवल उसी स्तर तक पहुंच सकते हैं, जिसके लिए हमारे पास उचित मनोवृत्ति हो। अभी तक हम जो भी हैं, वह हमारी पूर्व की मनोवृत्ति का प्रतिफल है और भविष्य में हम जो कुछ भी होंगे, वह हमारी आज की मनोवृत्ति पर निर्भर करेगा। दरअसल हमारे जीवन के निर्धारण में कर्मो की अपेक्षा एटिटयूड ही अन्य सभी कारकों को नियंत्रित करता है। सकारात्मक सोच डेवलॅप करने के लिए आवश्यक है कि आप जो कुछ भी बनना चाहते हैं, वैसी ही कल्पना करें, क्योंकि जो चीज आप सोच नहीं सकते, उसे पा भी नहीं सकते। दरअसल स्थिर मनोवृत्ति के लिए आवश्यक है कि हम अपने लक्ष्य को किसी के प्रति समर्पित करें। क्योंकि इससे हमें न केवल पे्ररणा प्राप्त होगी बल्कि, स्थिर मनोवृत्ति के विकास में मदद भी मिलेगी। इसके अतिरिक्त जरूरी यह भी है कि लिए गए निर्णय के प्रति हम ईमानदारी से कार्य करें। इससे अपने निर्णय पर और भी ज्यादा विश्वास हासिल होगा। परिणामस्वरूप हमें सफलता प्राप्त करने से कोई भी शक्ति नहीं रोक पाएगी। याद रखें, कोई भी परिणाम हम तभी प्राप्त कर सकते हैं, जब बिना किसी पूर्व धारणा, दबाव व तनाव के प्रयास करें। यानी सही एटिटयूड को अपनाकर ही किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

के. मिश्रा.

(लेखक चाणक्य आईएएस एकेडमी के निदेशक हैं)

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