कॉन्सेप्ट पर रखें ध्यान जियोलॉजी बनाएं आसान

अगर मन लगाकर पढें़, तो पृथ्वी के अंदर की हलचलों का अध्ययन करने वाला जियोलॉली विषय बिल्कुल आसान हो जाता है। इस बार जियोलॉजी विषय में कामयाबी का गुरु मंत्र दे रहे हैं, दिल्ली यूनिवर्सिटी मेंडिपार्टमेंट ऑफ जियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. सी. एस. दुबे..
Created On: Oct 22, 2008 03:51 IST

पृथ्वी के गर्भ और सतह पर होने वाले विकास के अध्ययन का विज्ञान है-जियोलॉजी। इसमें स्टूडेंट्स को मुख्यत: अर्थ सिस्टम साइंस, क्रिस्टेलोग्राफी ऐंड मिनरोलॉजी, स्ट्रक्चरल जियोलॉजी  ऐंड टेक्टोनिक्स, स्ट्रैटिग्राफी व सेडीमेंट्रेशन के सिद्धांत, पैलेन्टोलॉजी, इग्निस ऐंड मेटामॉर्फिक  पेट्रोलॉजी के साथ-साथ भारत के भू-भाग, भूमि संसाधन व उनका प्रबंधन, फोटो-जियोलॉजी, रिमोट सेंसिंग ऐंड जीआईएस, हाइड्रो-जियोलॉजी ऐंड इंजीनियरिंग जियोलॉजी को प्रमुखता से पढना होता है।

फिजिकल जियोलॉजी को बनाएं आसान

फिजिकल जियोलॉजी का अध्ययन विद्यार्थियों को बेहद मुश्किल लगता है। इसमें पृथ्वी की उत्पत्ति और विकास के साथ-साथ कई तरह की थ्योरीज और कॉन्सेप्ट्स पढने के साथ-साथ उनका तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। मसलन हिमालय इतना ऊंचा क्यों है? एक स्थान की मिट्टी और चट्टानें दूसरे स्थान से भिन्न क्यों होती हैं? ग्लेशियर, पहाड, पठार किसी क्षेत्र विशेष में ही क्यों पाए जाते हैं। कहने का आशय यह है कि फिजिकल जियोलॉजी का दायरा काफी विस्तृत है। इसलिए इनका अध्ययन करते समय इन बातों का अवश्य ध्यान रखें :

कॉन्सेप्ट को डायग्राम, रेखाचित्र व मानचित्र के आधार पर समझें।

चार्ट बनाकर तुलनात्मक स्टडी करें।

जो भी पढें, उसे विजुअलाइज करने की कोशिश करें, जिससे टॉपिक याद रहे।

सीखें कम्प्यूटर की बारीकियां

जियोलॉजी की क्लास में आमतौर पर प्राध्यापक पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए लेक्चर देते हैं। इसलिए स्टूडेंट्स को कम्प्यूटर के विभिन्न टूल्स, जैसे-वर्ड, एक्सेल, पॉवर प्वाइंट, कोरल ड्रा, ऑटोकैड की जानकारी होनी चाहिए।

किताबों से बढाएं ज्ञान

टेक्स्ट बुक के अलावा इस सब्जेक्ट पर आपको कुछ अन्य बेहतर किताबों का अध्ययन करना भी आवश्यक है। कुछ ऐसी उपयोगी पुस्तकें इस प्रकार हैं :

अंडरस्टैंडिंग अर्थ-फ्रैंक पेस ऐंड रैमंड सीवर

होम्स प्रिंसिपल्स ऑफ फिजिकल जियोलॉजी-डफ. पीएमडी, ईएलबीएस

रिमोट सेंसिंग इन जियोलॉजी-सेबिंस

रिमोट सेंसिंग ऐंड इमेज इंटरप्रिटेशन- लिलिसलैंड ऐंड आरडब्ल्यू कीफर 

पत्रिकाओं व जर्नल्स से लें जानकारी

जियोलॉजी विषय पर नवीनतम जानकारियां व लेख पत्रिकाओं और जर्नल्स में छपते रहते हैं। ऐसे कुछ प्रमुख जर्नल्स के नाम हैं:

एनुअल रिव्यू ऑफ अर्थ साइंसेज, करंट साइंस, जर्नल ऑफ अर्थ सिस्टम साइंस, जियोलॉजी, जर्नल ऑफ मेटामोर्फिक जियोलॉजी, जर्नल ऑफ पेट्रोलॉजी, नेचर, साइंस और जर्नल ऑफ जियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया

क्या करें, क्या न करें

हर टॉपिक से संबंधित केस स्टडी जरूर देखें।

चट्टानों और उनके स्ट्रक्चर को पहचानें। -उनके सीक्वेंस और आयु का अध्ययन आवश्यक है।

प्रैक्टिकल करते समय माइक्रो-स्ट्रक्चर्स के ऑब्जर्वेशन पर ध्यान दें।

क्लास मिस न करें।

एनवॉयरनमेंटल जियोलॉजी और इंजीनियरिंग जियोलॉजी पर विशेष ध्यान दें।

फील्ड-वर्क जियोलॉजी का प्रमुख आधार है। फील्ड वर्क में प्राध्यापक के दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे।

रिमोट सेंसिंग व जीआईएस तकनीक सीखें

संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक की उपयोगिता पिछले कुछ वर्षो में तेजी से बढी है। दरअसल, इसके अंतर्गत सैटेलाइट के जरिए उस हिस्से की अति-सूक्ष्म तस्वीरें ली जाती हैं, जहां किसी विकास योजना की आधारशिला रखनी हो। मसलन, कहीं बांध बनाना, हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट लगाना हो या फिर संकरी गलियों वाली बस्ती में सीवर डालने का काम। आज रिमोट सेंसिंग व जीआईएस तकनीक विकास कार्यो के लिए वरदान साबित हो रही है। ऐसे में स्टूडेंट्स को रिमोट सेंसिंग व जीआईएस के सॉफ्टवेयर-आरजीआईएस, आरक्यू, माइक्रोडैम,  और एरडास इमेजिन पर काम करना सीखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

इंटरनेट का करें भरपूर उपयोग

जियोलॉजी विषय पर जानकारी, गाइडेंस और स्टडी मैटीरियल्स के लिए कुछ अच्छी वेबसाइट्स  के नाम इस प्रकार हैं : 

www.mineralogie.uni-wuerzburg.de

www.geolab.unc.edu

www.teachserv.earth.ox.ac.uk

दिल्ली यूनिवर्सिटी मेंडिपार्टमेंट ऑफ जियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. सी. एस. दुबे से मुनमुन प्रसाद श्रीवास्तव की बातचीत पर आधारित

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