नए जमाने का नया कोर्स जीआईएस

मॉडर्न टेक्नोलॉजी के वर्तमान दौर में जीआईएस एक ऐसी उन्नत तकनीक है, जिसे पूरी दुनिया तेजी से अपना रही है। वैसे, भारत में भी यह तकनीक प्रयोग में लाई जाने लगी है। ऐसे में इस क्षेत्र से संबंधित कोर्स करने वालों के लिए बेशुमार संभावनाएं हैं। क्या है जीआईएस और इससे संबंधित कोर्स कौन-कौन से हैं, जानें अमित निधि से..
Created On: Sep 24, 2008 03:57 IST

विज्ञान के क्षेत्र में हर वक्त कुछ न कुछ नया करने की कोशिशें होती रहती हैं। ऐसी ही एक कोशिश इन दिनों जिनेवा में लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (एलएचसी) मशीन के जरिए की जा रही है। इससे कई अनसुलझे रहस्यों पर से पर्दा हटने की उम्मीद है। जरा सोचिए, दिल्ली की सडकों पर आप भटक रहे हैं, क्योंकि आपको मालूम नहीं कि राष्ट्रपति भवन जाने का रास्ता कौन-सा है? पर बिना किसी परेशानी के क्षण भर में ही इस समस्या का निदान हो जाए, तो शायद इसे आप विज्ञान का कमाल ही कहेंगे। जी हां, यह सब संभव हुआ है जिओग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम यानी जीआईएस की वजह से। इससे संबंधित कोर्स कर आप तकनीक के इस बढते बाजार में करियर की बुलंदियों को छू सकते हैं, क्योंकि यह वर्तमान जरूरतों को देखते हुए पूरी दुनिया में यह सेक्टर तेजी से आगे बढ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2010-11  तक भारत में जीआईएस मार्केट 3000 करोड रुपये तक पहुंच जाने की उम्मीद है।

क्या है जीआईएस?

जीआईएस एक ऐसी तकनीक है, जिसके तहत विभिन्न एडवांस सॉफ्टवेयर्स की मदद से टारगेट एरिया की मैपिंग की जाती है। खासकर इस तकनीक का इस्तेमाल अर्थ साइंस, एग्रिकल्चर, डिफेंस, न्यूक्लियर साइंस, आर्किटेक्चर, टाउन प्लानर, मैपिंग, मोबाइल आदि क्षेत्र में खूब हो रहा है। इसके लिए सैटेलाइट की भी मदद ली जाती है। जीआईएस का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां अपनी कार्य-प्रणाली के हिसाब से कुछ खास तरह की जीआईएस टेक्निक्स,  जैसे-आर्कइंफो, ऑटोकैड मैप, मैपइंफो, जिओमीडिया, सीएआरआईएस जीआईएस, सीआईसी एडी, आर्कव्यू आदि का इस्तेमाल कर रही हैं।

विशेषज्ञता वाले क्षेत्र

यदि आप इस कोर्स में दाखिला लेने के इच्छुक हैं, तो आपके मन में यह जरूर आ रहा होगा कि किस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद बेहतर करियर बनाया जा सकता है। यदि कोर्स के दौरान और उसके बाद आप नीचे दिए गए क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर लेते हैं, तो अपने करियर में चार चांद लगा सकते हैं :

जिओग्रॅफिक इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी

फोटोग्रामैट्री

जीआईएस ऐप्लिेकशन

जीआईए डेवलॅपमेंट

जिओस्टेटिस्टिक

जीआईएस प्रोजेक्ट डेवलॅपमेंट

वेबजीआईएस आदि।

अमूमन इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए आप दो से छह माह की अवधि वाले कोर्स में दाखिला ले सकते हैं।

उपलब्ध कोर्स

देश के तमाम प्रमुख शिक्षण संस्थानों में जीआईएस से संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थान इंस्टीटयूट ऑफ जिओ-इन्फॉर्मेटिक्स ऐंड रिमोट  सेंसिंग के अंतर्गत आने वाले इंस्टीटयूट से लॉन्ग और शॉर्ट टर्म कोर्स किए जा सकते हैं। यहां मुख्य रूप से बीटेक एवं एमटेक (रिमोट सेंसिंग), पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट इन जीआईएस ऐंड आरएस (अवधि : छह माह), पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट इन जीआईएस  प्रोग्रामिंग कोर्स (अवधि : चार माह) आदि उपलब्ध है। आईआईटी, रुडकी और आईआईटी,  कानपुर से रिमोट सेंसिंग और जिओ-इन्फॉर्मेटिक में ट्रेनिंग कोर्स और पीएचडी कर सकते हैं। इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (देहरादून) में जीआईएस से संबंधित एमटेक, एमएससी,  पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा, सर्टिफिकेट आदि कोर्स उपलब्ध हैं। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से भी दो वर्षीय एमएससी कोर्स (जीआईएस ऐंड रिमोट सेंसिंग) में दाखिला लिया जा सकता है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली से भी रिमोट सेंसिंग और जीआईएस ऐप्लिकेशन  में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कर सकते हैं। इसके अलावा, सिम्बॉयोसिस इंस्टीटयूट ऑफ जिओइन्फॉर्मेटिक्स, पुणे से जिओइन्फॉर्मेटिक्स में दो वर्षीय मास्टर डिग्री कर सकते हैं।

कैसी हो योग्यता

आमतौर पर जिओलॉजी, अप्लॉयड जिओलॉजी, अर्थ साइंस, जिओग्राफी, जिओसाइंस आदि विषयों से ग्रेजुएशन (बीए, बीएससी या बीई/बीटेक) पूरा करने वाले स्टूडेंट जीआईएस से संबंधित कोर्सो में प्रवेश ले सकते हैं।

क्या हैं संभावनाएं

आज पब्लिक सेक्टर के साथ-साथ निजी सेक्टर की कंपनियों में भी जीआईएस कोर्स कर चुके छात्रों के लिए भरपूर मौके हैं। यदि पब्लिक सेक्टर की बात करें, तो इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो), नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएसए), नेशनल इन्फॉर्मेटिक सेंटर (एनआईसी), स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर, अर्बन डेवलॅपमेंट ऑथोरिटी,  म्यूनिसिपल बॉडीज आदि में करियर की बेहतर संभावनाएं हैं। इसके अलावा, नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट, इमरजेंसी मैनेजमेंट, मिलिट्री कमांड, ट्रांसर्पोटेशन मैनेजमेंट, सोशियो-इकोनॉमिक डेवलॅपमेंट, बिजनेस ऐप्लिकेशन आदि क्षेत्रों में भी करियर के विकल्प तलाशे जा सकते हैं।

प्रमुख शिक्षण संस्थान

इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, देहरादून

(जीआईएस कोर्स : एमटेक, एमएससी, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और रिमोट सेंसिंग)

www.iirs-nrsa.gov.in

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, उ.प्र. ( पीजी डिप्लोमा कोर्स इन जीआईएस) www.allduniv.ac.in

बिडला इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची (एमएससी जिओ-इन्फॉर्मेटिक्स, एमटेक)

www.bitmesra.ac.in

एमडीएस यूनिवर्सिटी, अजमेर, राजस्थान (एमएससी रिमोट सेंसिंग)

www.mdsuajmer.com

इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुडकी(ट्रेनिंग ऐंड पीएचडी कोर्स इन रिमोट  सेंसिंग ऐंड जिओ-इन्फॉर्मेटिक)

www.iitr.ac.in

इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर(ट्रेनिंग ऐंड पीएचडी कोर्स इन रिमोट सेंसिंग और जिओ-इन्फॉर्मेटिक)

www.iitk.ac.in

जीआईएस इंस्टीटयूट, नोएडा(ट्रेनिंग प्रोग्राम जीआईएस)

www.gisinstitute.net

ईएसआरआई इंडिया, दिल्ली (ट्रेनिंग प्रोग्राम इन जीआईएस)

www.esriindia.com

इंस्टीटयूट ऑफ जिओइन्फॉर्मेटिक्स ऐंड रिमोट सेंसिंग

www.igrs-gis.com

जीआईएस का ग्लोबल मार्केट वर्ष 2010 तक 10 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाने की संभावना।

भारत में जीआईएस ऑउटसोर्सिग के क्षेत्र में भरपूर संभावना।

ग्लोबल जीआईएस सालाना कारोबार 12 से 15 फीसदी की दर से बढ रहा है।

प्राइवेट के साथ-साथ पब्लिक सेक्टर कंपनियों में भी हैं भरपूर मौके।

तेजी से उभरता क्षेत्र है जीआईएस

जीआईएस के क्षेत्र में किस तरह की क्वालिटी रखने वाले लोग कामयाबी हासिल कर सकते हैं?

यदि किसी के पास जिओग्राफी की आधारभूत जानकारी और कम्प्यूटर ऑपरेशन का ज्ञान हैं, तो इस क्षेत्र में कामयाब हो सकते हैं। दरअसल, इस फील्ड में मैपिंग से जुडा हुआ काम होता है। इसलिए जिओग्राफी के स्टूडेंट्स के लिए इस फील्ड में बेहतरीन संभावनाएं हैं, बशर्ते स्टूडेंट शॉर्ट या लांग टर्म कोर्स कर ले।

जीआईएस, जीपीएस से कितना अलग है?

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस भी जीआईएस से मिलती-जुलती तकनीक ही है, लेकिन इसका इस्तेमाल आमतौर पर एयर ट्रांसपोर्ट, रोड ट्रांसपोर्ट, रेल ट्रांसपोर्ट, शिपिंग, मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों आदि द्वारा किया जाता है, जबकि जीआईएस उससे अधिक एडवांस तकनीक है।

जीआईएस इंस्टीटयूट में किस तरह के कोर्स संचालित किए जा रहे हैं?

यहां एक महीने का सर्टिफिकेट कोर्स चलाया जाता है। इसके अलावा, तीन महीने का एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स भी उपलब्ध है। साथ ही, पीजी कोर्स भी है। वर्किग प्रोफेशनल्स के लिए इवनिंग और पार्टटाइम बैच भी संचालित है।

अमूमन कोर्स की फीस कितनी होती है?

यहां कोर्स के अनुसार फीस भी अलग-अलग है। एक महीने के कोर्स की फीस 30  हजार रुपये है, जबकि एक वर्ष के कोर्स की फीस 1,35,000 रुपये तक है।

जीआईएस में भारत और विदेश में किस तरह की संभावनाएं हैं?

देखिए, आने वाले दिनों में जीआईएस का उपयोग तकरीबन हर क्षेत्र में होने लगेगा, जैसे- डिजास्टर मैनेजमेंट, डेवलॅपमेंट अथॉरिटी आदि। यदि भारत की बात करें, तो आज भी यहां पूरे देश का डिजिटल मैप उपलब्ध नहीं है। इस लिहाज से देखें, तो इस क्षेत्र में करियर की बेहतर संभावनाएं देखी जा रही हैं। विकसित देशों में यह टेक्नोलॉजी पहले से ही इस्तेमाल में लाई जा रही है। वहां डाटा एनालिसिस के लिए इस क्षेत्र से जुडे स्किल्ड  लोगों की खूब जरूरत है। भारत में इस टेक्नोलॉजी का उपयोग बढने के साथ-साथ स्किल्ड  प्रोफेशनल्स की मांग में भी तेजी आएगी।

इस फील्ड में फे्रशर को कितनी सैलॅरी मिल जाती है?

फ्रेशर की सालाना सैलॅरी तकरीबन कम से कम डेढ से दो लाख रुपये के बीच होती है। चार से पांच वर्ष के कार्य-अनुभव के बाद आप सीनियर लेवॅल तक पहुंच कर अच्छी कमाई कर सकते हैं।

जीआईएस इंस्टीटयूट, नोएडा के डायरेक्टर डॉ. सत्यप्रकाश से अमित निधि की बातचीत पर आधारित

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