पूरी करें ड्रीम कोई भी हो स्ट्रीम

एजुकेशनल लोन लेने में दिक्कतों का सामना करने पर आप हमारे कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हाल ही में जारी केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के इस बयान से लगता है कि अब उन छात्रों का सपना भी पूरा हो सकेगा, जो आर्थिक कारणों से मनपसंद कोर्स नहीं कर पाते थे। ऐसी स्थिति में वित्त मंत्रालय की दखल के बाद एजुकेशन लोन पाना आसान हो सकता है। लेकिन कैसे, बता रही हैं सीमा झा..
Created On: Oct 1, 2008 03:52 IST

शिक्षा को मानव जीवन की अनिवार्यता से जोडकर देखा जाना चाहिए। सरकार के सामने यह एक बडी चुनौती है कि किस तरह सबको अच्छी शिक्षा मुहैया कराई जाए। लेकिन यह तभी संभव है, जब सबको समान अवसर मिले। दरअसल, आज देश के बडे-बडे शिक्षण संस्थान ही नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की गारंटी देने वाले नए शिक्षा संस्थानों की फीस भी आसमान छू रही है। ऐसी स्थिति में जो छात्र कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के हैं, उनके लिए इन संस्थानों में पढने के बारे में सोचना भी मुश्किल है। हालांकि, मेधावी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप या फेलोशिप एक उम्मीद की तरह है, जिसके माध्यम से वे महंगी शिक्षा की फंडिंग कर सकते हैं। लेकिन देखा जाए, तो इनका लाभ उठाने वाले छात्रों की संख्या बेहद कम है। ऐसी स्थिति में हजारों-लाखों छात्रों के लिए केवल एजुकेशनल लोन ही एकमात्र जरिया है, जिसकी मदद से वे देश-विदेश के श्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों से गुणवत्तायुक्त शिक्षा हासिल कर देश के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं। पर एजुकेशनल लोन लेने की प्रक्रिया में सामने आने वाली तमाम तरह की परेशानियों के कारण कम ही छात्र बेहतर और क्वालिटी एजुकेशन का लाभ उठा पाते हैं। एसोचैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में केवल तीन प्रतिशत स्टूडेंट्स ही एजुकेशन लोन का लाभ उठा पाते हैं, जबकि यूके में 85 प्रतिशत, यूएस में 77 प्रतिशत, जर्मनी, फ्रांस आदि विकसित देशों के लगभग 70 प्रतिशत छात्रों को एजुकेशन लोन का लाभ मिलता है।

भारत में एजुकेशन लोन

उच्च शिक्षा को बढावा देने के लिए सरकार के निर्देशानुसार देश के सरकारी और निजी क्षेत्र के प्राय: सभी बैंकों द्वारा एजुकेशन लोन प्रदान किया जाता है। लेकिन यह लोन उन्हीं कोर्सो के लिए मिल सकता है, जिनकी अवधि एक साल या इससे ज्यादा हो। सामान्यतया निम्नलिखित कोर्सो के लिए लोन प्राप्त किया जा सकता है :

ग्रेजुएशन लेवॅल :  बीए, बीकॉम, बीएससी आदि।

पोस्ट ग्रेजुएशन लेवॅल :  मास्टर कोर्स, पीएचडी।

प्रोफेशनल कोर्स :  इंजीनियरिंग, मेडिकल, एग्रिकल्चर, वेटेरिनरी, लॉ, डेन्टल, मैनेजमेंट, कम्प्यूटर आदि।

अन्य कोर्स

प्रतिशतआईसीडब्ल्यूए, सीए, सीएफए आदि।

आईआईएम, आईआईटी, आईआईएससी, एक्सएल आरआई, एनआईएफटी  जैसे संस्थानों से संचालित कोर्सो के लिए।

रेगुलर डिग्री या डिप्लोमा कोर्स, जैसे- एयरोनॉटिकॅल, पॉयलट ट्रेनिंग, शिपिंग आदि कोर्सो को डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन/शिपिंग से अपू्रव होना चाहिए।

कम्प्यूटर सर्टिफिकेट कोर्सो को भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स से या किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से मान्य होना चाहिए।

एजुकेशन लोन की जरूरी शर्ते

बैंकों द्वारा प्रदान किया जाने वाला एजुकेशन लोन, इंडियन बैंक असोसिएशन की मॉडल एजुकेशन स्कीम पर आधारित होता है। इस स्कीम का उद्देश्य ही है-योग्य व प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स को भारत या विदेश में हायर एजुकेशन के लिए फाइनैंशियल सपोर्ट मुहैया कराना। वैसे, आमतौर पर कोई भी बैंक एजुकेशन लोन देने से पहले कुछ शर्तो का पालन सुनिश्चित करना चाहता है। इनमें कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं :

आपकी आर्थिक पृष्ठभूमि साउंड है या नहीं?

जिस संस्थान या कोर्स में आप पढने के लिए आवेदन कर रहे हैं, उसका प्रॉस्पेक्टस कैसा है?

बैंक के जिस ब्रांच से लोन ले रहे हैं, वहां से आपके निवास स्थान की दूरी कितनी है आदि।

लोन की अधिकतम राशि

आपको अधिकतम कितना लोन मिल सकता है, यह अलग-अलग बैंकों, कोर्स और उन शैक्षिक संस्थानों पर भी निर्भर करता है, जहां आप दाखिला लेने जा ले रहे हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप एमबीए में एडमिशन लेना चाहते हैं, तो अलग-अलग बी-स्कूल के लिए अलग राशि आपको मिलेगी। देश में पढाई के लिए अधिकतम दस लाख रुपये और विदेश में पढने के लिए अधिकतम बीस लाख रुपये या इससे अधिक का भी लोन मिल सकता है।

लोन में शामिल खर्चे

कॉलेज या हॉस्टल से संबंधित खर्चे।

परीक्षा, लाइब्रेरी, लेबोरेट्री से जुडी फीस।

किताब, उपकरण, यूनिफॉर्म खरीदने से संबंधित खर्चे।

कॉशन डिपॉजिट (जमानती धनराशि), बिल्डिंग फंड, रिफंडेबॅल डिपॉजिट आदि से जुडे खर्चे।

आने-जाने के खर्चे।

लोन लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज

संबंधित बैंक का कम्प्लीट ऐप्लिकेशन फॉर्म।

राशन कार्ड, वोटर आई कार्ड, पासपोर्ट या इलेक्ट्रिसिटी बिल की फोटो कॉपी।

कॉलेज या संबंधित शिक्षा-संस्थान में एडमिशन लेने का प्रूफ।

कोर्स शेड्यूल।

पिछले छह माह का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट।

पारिवारिक संपत्ति का संक्षिप्त ब्योरा।

सिक्योरिटी और गारंटर

यदि आप चार लाख रुपये तक का लोन लेते हैं, तो इसके लिए कोई सिक्योरिटी जमा नहीं करानी पडेगी।

चार लाख रुपये से ज्यादा और लगभग साढे सात लाख तक के लोन पर थर्ड पार्टी की गारंटी की जरूरत पडेगी। हालांकि यह अलग-अलग बैंकों द्वारा निर्धारित शर्तो पर निर्भर करता है कि उन्हें इसकी जरूरत पडती है या नहीं! कुछ मामलों में बैंक स्टूडेंट की आर्थिक पृष्ठभूमि से संतुष्ट होते हैं और इसीलिए थर्ड पार्टी गारंटी की मांग नहीं करते।

सिक्योरिटी के रूप में लैंड/बिल्डिंग/गवर्नमेंट सिक्योरिटीज/यूनिट्स ऑफ यूटीआई, एनएससी, लाइफ पॉलिसी, गोल्ड के अलावा, शेयर्स/म्यूचुअॅल फंड यूनिट्स/डिबेंचर्स आदि जमा कराने पडते हैं।

प्रमुख बैंकों की वेबसाइट्स

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

www.statebankofindia.com

बैंक ऑफ इंडिया

www.bankofin-dia.com

इंडियन बैंक

www.indian-bank.com

इलाहाबाद बैंक

www.allahabadbank.com

इंडियन ओवरसीज बैंक

www.iob.in

सिंडिकेट बैंक

www.syndicatebank.in

पंजाब नेशनल बैंक

www.pnbindia.com 

लोन लेने से पहले अपनाएं सावधानियां

लोन लेने से पहले उसकी सभी शर्तो की छानबीन जरूर करें।

लुभावने विज्ञापनों पर न जाकर या सुनी-सुनाई बातों की बजाय संबंधित बैंक अधिकारी से पूरी प्रक्रिया समझें।

किसी प्राइवेट बैंक से लोन लेने से पहले हिडेन-चार्जेज का जरूर पता कर लें।

जहां तक हो सके, लोन को जल्द से जल्द चुकता करने का प्रयास करें।

केंद्र सरकार देगी सब्सिडी

सबको गुणवत्तायुक्त शिक्षा आसानी से प्राप्त हो सके, इस उद्देश्य से सरकार एजुकेशन लोन पर सब्सिडी स्कीम के साथ-साथ सेंट्रल स्कॉलरशिप स्कीम भी लाने जा रही है, ताकि बैंकों को लोन के रूप में दिया गया पैसा डूबने की चिंता न करनी पडे और वे बिना हीला-हवाली के लोन दे सकें। हाल ही में सेंट्रल स्कॉलरशिप स्कीम को मंजूरी भी मिल गई है। एजुकेशन लोन पर सब्सिडी के लिए चार हजार करोड रुपये और स्कॉलरशिप स्कीम के लिए कुल एक हजार करोड रुपये मंजूर किए गए हैं। गौरतलब है कि यह राशि 2012 में समाप्त होने वाली ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत दी जाएगी।

आश्वस्त होकर ही लें लोन

हालांकि लोन लेकर शिक्षा प्राप्त करना एक मजबूरी है, लेकिन इसमें भी कठिनाइयों का सामना क्यों करना पडता है?

यह सही है कि शिक्षा हमारी मूलभूत जरूरत है। इसलिए सरकार को ही नहीं, बल्कि गैर-सरकारी संस्थाओं को इस दिशा में अपना योगदान जरूर देना चाहिए। लेकिन हकीकत कडवी है। क्योंकि सरकार अपनी ओर से पहल जरूर कर रही है, लेकिन आरबीआई, सरकारी बैंकों और सरकार के बीच सही-सही तालमेल का अभाव है। यही वजह है कि बैंकों को कई तरह से रिस्क लेकर एजुकेशन लोन देना पडता है। दरअसल, लोन प्राप्त करने के बाद कुछ छात्र समय पर री-पेमॅन्ट नहीं कर पाते हैं या कई शर्तो को पूरा नहीं करते हैं। वहीं, इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रबंधन शिक्षा आदि के लिए एजुकेशन लोन देने में बैंकों को कोई दिक्कत नहीं आती है। लेकिन बदलते समय के साथ आज ऐसे कई प्रोफेशनल कोर्स आ गए हैं, जो अभी नए हैं, लेकिन जिनके भविष्य का अभी पता नहीं है। ऐसे कोर्सो के लिए बैंकों को लोन देते समय सोचना पडता है। यही वे बातें हैं, जिनके कारण कुछ बैंक आना-कानी करते हैं और छात्रों को इससे कठिनाइयों का सामना करना पडता है।

लोन आसानी से मिल सके, इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

आसानी से लोन मिल सके, इसके लिए छात्रों को कुछ बातों को तो जरूर ध्यान में रखना होगा, जैसे-जिस बैंक से लोन ले रहे हैं, उस स्कीम के बारे में पहले ही जान लें। जो भी शर्ते हैं, उन्हें समय पर पूरा करने की कोशिश करें। अपनी तरफ से जितना हो सके, वे सभी सूचनाएं दें, जिनसे आश्वस्त होकर बैंक आपको लोन आसानी से उपलब्ध करा सके।

प्राइवेट बैंकों से लोन लेते समय किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए?

महंगी होती शिक्षा के कारण पब्लिक सेक्टर के बैंकों की देखा-देखी प्राइवेट सेक्टर के बैंक भी एजुकेशन लोन उपलब्ध करा रहे हैं। खास बात यह है कि इन लोन स्कीमों में निहित शर्ते भी अपेक्षाकृत लचीली होती हैं। इनका मकसद ही होता है कि इस लोन स्कीम के तहत अधिक से अधिक छात्रों को लाभ मिल सके। पर खामियां यहां भी हैं। कुछ प्राइवेट बैंक एजुकेशन लोन के लिए प्रॉसेसिंग चार्ज भी लेते हैं। छात्रों को चाहिए कि वे लोन स्कीम के अंतर्गत किए गएलुभावने वादों पर न जाते हुए ऐसे चार्जेज की सही पडताल कर लें। सभी शर्तो के प्रति पहले आश्वस्त होकर ही लोन के लिए आवेदन करें।

अपना लोन डॉट कॉम के सीईओ हर्षव‌र्द्धन रुंगटा से सीमा झा की बातचीत पर आधारित

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