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भारतीय इंजीनियरों द्वारा किए गए आधुनिक आविष्कार जो बदल सकते हैं दुनिया को

Aug 22, 2016 16:02 IST

    स लेख में हम उन भारतीय भारतीय इंजीनियरों द्वारा किए गए आधुनिक आविष्कार के बारे में बात करेंगे जिन्होंने पुरेसंसार में भारत को टेक्नोलॉजी के इस दौरमें एक नइ पहचान दी है |

    "वैज्ञानिक काम को करने के बारे में सपने देखते हैं । इंजीनियर्स उन्हें करते हैं।"– जेम्स ए मिशनर

    अब, इससे पहले कि वैज्ञानिक और इंजीनियर इस उद्धरण पर एक दूसरे से विवाद शुरु कर दें, मैं जो बात कहना चाहता हूं वह यह है कि इंजीनियर्स प्राथमिक रचनाकार होते हैं। ये सपनों, विचारों और कल्पनाओं को मशीन, उपकरण और चीजों का रूप देकर मानव जीवन के लिए उपयोगी उपकरणों में जान डाल देते हैं। कुछ नया और परिवर्तनात्मक करने का यह उत्साह और उसे जीवंत होते देखना तथा उसे वास्तिक रूप देना ही इंजीनियरिंग को शानदार और आत्मसंतुष्टि से भरा पेशा बनाता है।

    एक हद तक यह आईआईटी और एनआईटी जैसी प्रतिष्ठित संस्थानों में इंजीनियरिंग की सीट प्राप्त करने की प्रतिस्पर्धा में शामिल उच्च विद्यालय के छात्रों के द्वारा इसे जीवन के हर क्षेत्र में सही ठहराया जाता  है। हालांकि कई छात्र इन संस्थानों में स्थिर करिअर के उद्देश्य के साथ दाखिला लेते हैं, फिर भी कई ऐसे छात्र भी होते हैं जिनमें वास्तव में इंजीनियरिंग के प्रति जुनून होता है। इंजीनियरिंग के ऐसे छात्र वास्तव में अपने काम के प्रति जुनूनी होते हैं औऱ अपनी कल्पना को वास्तविकता में बदलने तक लगातार काम करते रहते हैं। अगर ईमानदारी से कहूं तो कभी–न– कभी इंजीनियरिंग के सभी छात्र खुद को "3 इडियट्स" फिल्म का "रैंचो", कुछ नया और निराला करने की कोशिश करने वाला, के जैसे बनने की कल्पना करते हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि कुछ नया या इंजीनियरिंग की प्रतिभा का प्रयोग कर कुछ अलग करने की कोशिश करने की भावना सिर्फ आप में ही है तो आप गलत हैं। भारत के कई ऐसे इंजीनियर हैं जिन्होंने आज की दुनिया को आकार दिया है।
    अभी भी आपको हम पर विश्वास नहीं हो रहा है तो यहं भारतीय इंजीनियरों और उनके नवीन आविष्कारों की सूची दी जा रही हैः

    1. हवा में उड़ सकने वाली बाइक


    यह किसी साइंस– फिक्शन फिल्म के जैसा लग सकता है लेकिन हमारे इंजीनियरों को धन्यवाद जिनके अथक प्रयासों से एक बाइक आज हवा में भी चल सकती है। बीवीबी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, हुबली (कर्नाटक) के 5 इंजीनियरिंग छात्रों की अवधारणा वाली इस बाइक का नाम बीवीबौरा (BVBaura) है और ईंधन के रूप में यह संपीड़ित (compressed) वायु का प्रयोग करती है। इसके अलावा बीवीबौरा (BVBaura) स्वच्छ ऊर्जा वाहन है क्योंकि इससे वायु ही बाहर निकलती है और वह रसायनों एवं प्रदूषण से रहित है।

    2. ट्रूएचबी हेमोमीटर (TrueHb Hemometer)

    3. गूगल न्यूज (Google News)


    मैं जानता हूं कि इस पर पहली प्रतिक्रिया होगी "बिल्कुल नहीं", गूगल न्यूज (Google News) जैसी कोई बड़ी चीज किसी भारतीय द्वारा कैसे बनाई जा सकती है। लेकिन आपकी सोच से परे सच यही है कि गूगल न्यूज (Google News) एक छोटी परियोजना से ली गई थी जिसकी कल्पना कृष्ण भारत नाम के भारतीय ने की थी। भारत आईआईटी– मद्रास के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने गूगल न्यूज (Google News– समाचार एकत्रीकरण उपकरण) को 11 सितंबर को हुए आतंकवाद हमलों के बाद की घटनाओं के बारे में खुद को अपडेट रखने के लिए व्यक्तिगत परियोजना के तौर पर बनाया था। आज गूगल न्यूज (Google News) दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन द्वारा प्रदान की जाने वाली और सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली सेवाओं में से एक है। खबरों के संसाधनों का सारांश प्रदान करने के लिए इसमें 25 से अधिक भाषाओं में 25,000 से अधिक समाचार वेबसाइट्स हैं।

    4. नेत्र – ड्रोन


    फिल्म "3 इडियट्स" के लिए अपने प्यार को जारी रखते हुए, फिल्म का हिस्सा बने उस ड्रोन को याद करें, वह बताता है कि वह सिर्फ एक खिलौना या प्रॉप नहीं है लेकिन आईआईटी बॉम्बे के छात्र की कल्पना का चमत्कार है। नेत्र ड्रोन से जाना जाने वाला मानवरहित वायु वाहन (Unmanned Aerial Vehicle– UAV) ने 2013 में उत्तराखंड में आई बाढ़ के दौरान अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दिया है। भारतीय सेना ने बाढ़ राहत अभियान के दौरान नेत्र ड्रोन का इस्तेमाल किया था और अपने नाम को साकार करते हुए इसने सेना को बाढ़ में फंसे लोगों का पता बताने और उन्हें बाहर निकालने में मदद की थी। आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र अंकित मेहता, आशीष भट्ट, राहुल सिंह, विपुल जोशी और अमरदीप सिंह द्वारा शुरु किए गए स्टार्टअप– आईडियाफोर्ज (ideaForge) नेत्र ड्रोन का निर्माण करती है।

    5. EVo 4.0 फॉर्मूला स्टूडेंट इलेक्ट्रिक कार


    आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की एक और उत्कृष्ट रचना– EVo 4.0 फॉर्मूला स्टूडेंट इलेक्ट्रिक कार नाम की बिजली से चलने वाली रेसिंग कार है । इसका डिजाईन, विकास और बनाने का काम आईआईटी बॉम्बे की रेसिंग टीम ने किया है; EVo 4.0 रेसिंग कार का उद्देश्य भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र में बदलाव लाना है। यह कार 0 से 100 किमी प्रति लीटर की रफ्तार से महज 3.5 सेकेंड में अपना लक्ष्य  प्राप्त कर सकती है। अपनी इस खूबी के कारण इसने बाजार में फिलहाल उपलब्ध कई परंपरागत कारों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, उत्पादन संस्करण से काफी दूर EVo 4.0 कार निश्चित रूप से कुछ ऐसी चीज है जो दूसरों को बिजली से चलने वाले वाहनों के क्षेत्र में कुछ अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। 

    6. एडवांस्ड ब्रीथलाइजर हेलमेट


    इंजीनियर न सिर्फ दौड़ में शामिल होने वाले वाहनों के लिए एड्रीनलीन– पंपिंग के लिए जिम्मेदार होते हैं बल्कि वे सुरक्षित सड़कों के निर्माण में भी विश्वास करते हैं। साथ ही सूची का अगला आविष्कार किसी भी प्रकार के संदेह को दूर कर देगा। एडवांस्ड ब्रीथलाइजर हेलमेट (Advanced Breathalyzer Helmet) अपने नाम के अनुसार ही काम करता है। यह हेलमेट शराब की उच्च मात्रा का निर्धारण करने के लिए चालक के सांस का विश्लेषण करता है और सकारात्मक संकेत मिलने पर यह बाइक को चालू करने की अनुमति नहीं देता। आईआईटी– बीएचयू के छात्र शुभम जायसवाल, ऋषभ बाबेली और नमन सिंघल की अवधारणा एडवांस्ड ब्रीथलाइजर हेलमेट (Advanced Breathalyzer Helmet) शराब पी कर गाड़ी चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं, जो भारत में होने वाले सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में से एक है, को रोकने की दिशा में स्वागत योग्य कदम है।

    7. iDitya सौर पैनल (iDitya Solar Panel)


    आधुनिक समय के सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है ऊर्जा पर हमारी निर्भरता। हमारे इंजीनियरों को निश्चित रूप से इस समस्या का एहसास है और इसके समाधान के तौर पर उन्होंने हमें ‘iDitya’ स्मार्ट दिया सौर पैनल दिया है जो ऊर्जा की उपयोगिता को सुधारता है। ‘iDitya’ खुद से करें प्रकार का सौर पैनल असेंबली है जिसे कोई भी व्यक्ति कहीं भी आवश्यक जगह पर रख सकता है और सौर पैनल लगाने की लागत और शुल्क को कम कर सकता है। पैनल तीन यूनिट वाले हार्डवेयर पैकेज में आता है जो सौर ऊर्जा को बेहद प्रभावी तरीके से विद्युत ऊर्जा में बदल सकता है।

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    बाजार में उपलब्ध अन्य सौर पैनलों के मुकाबले यह खास क्यों है? अपने कॉम्पैक्ट प्रकृति और अनूठे डिजाइन की वजह से। इस सौर पैनल को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह खुद पर लगे लोकेशन सेंसर का प्रयोग कर स्वतः समायोजित हो जाता है और पैनलों के लिए अधिकतम कोण प्रदान करता है और अधिकतम ऊर्जा पैदा करता है। इसे प्रो. पी.वी.एम. राव के मार्गदर्शन में आईआईटी दिल्ली की प्रनीत अग्रवाल, नवनीत सैनी और अंशुमान कुमार की टीम ने बनाया है।

    आज के समय के भारतीय इंजीनियरों द्वारा तैयार किए गए ये कुछ एक मिसालें हैं जिनका उद्देश्य हमारे जीवन में परिवर्तन लाना है। इसलिए, इंजीनियर बनने की इच्छा रखने वाले सभी छात्र, जो ये सोच रहे हैं कि रैंचों बॉलीवुड फिल्म का सिर्फ एक काल्पनिक चरित्र है, के लिए यह वास्तिवकता जांचने का समय है। अगर आप वास्तव में कठिन परिश्रम करें और इंजनीयरिंग के क्षेत्र में खुद की प्रतिबद्धता तय करें तो ऐसा कुछ भी नहीं जो आप नहीं कर सकते।

    "वैज्ञानिक काम को करने के बारे में सपने देखते हैं । इंजीनियर्स उन्हें करते हैं।"– जेम्स ए मिशनर

    अब, इससे पहले कि वैज्ञानिक और इंजीनियर इस उद्धरण पर एक दूसरे से विवाद शुरु कर दें, मैं जो बात कहना चाहता हूं वह यह है कि इंजीनियर्स प्राथमिक रचनाकार होते हैं। ये सपनों, विचारों और कल्पनाओं को मशीन, उपकरण और चीजों का रूप देकर मानव जीवन के लिए उपयोगी उपकरणों में जान डाल देते हैं। कुछ नया और परिवर्तनात्मक करने का यह उत्साह और उसे जीवंत होते देखना तथा उसे वास्तिक रूप देना ही इंजीनियरिंग को शानदार और आत्मसंतुष्टि से भरा पेशा बनाता है।

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