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भारतीय स्टेट बैंक के प्रोबेशन अधिकारी के लिए आयोजित होने वाले सामूहिक चर्चा के लिए दिशा-निर्देश

भारतीय स्टेट बैंक के प्रोबेशन अधिकारी के लिए आयोजित लिखित परीक्षा का परिणाम आ जाने से इन पदों पर नियुक्ति का दूसरा चरण अक्टूबर माह से शुरू हो सकता हैं.

Sep 13, 2014 17:09 IST
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भारतीय स्टेट बैंक के प्रोबेशन अधिकारी के लिए आयोजित लिखित परीक्षा का परिणाम आ जाने से इन पदों पर नियुक्ति का दूसरा चरण अक्टूबर माह से शुरू हो सकता हैं. लिखित परीक्षा के बाद इस परीक्षा के दूसरे चरण में सामूहिक चर्चा और व्यक्तिगत साक्षात्कार का आयोजन होना है. पहले चरण में ली जाने वाली लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवार ही सामूहिक चर्चा और व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए चयनित होते हैं.

जहाँ व्यक्तिगत साक्षात्कार में उम्मीदवारों को नियोक्ता के सामने अकेले उपस्थित होना पड़ता है वहीं, सामूहिक चर्चा में किसी विशेष विषय अथवा मुद्दे पर अपने प्रतियोगियों के साथ एक साथ बैठ कर अपना प्रदर्शन करना पड़ता है जिसके मूल्यांकन के लिए सदस्यों का एक पैनल सामने बैठा होता है. उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनके प्रदर्शनों के आधार पर किया जाता है. इस नियुक्ति में सामूहिक चर्चा का विशेष महत्तव होता है क्योंकि इससे उम्मीदवारों का यह गुण देखा जाता है कि किसी मुसीबत में वो अपनी टीम के साथ काम कर पाता है या भाग जाता है. इस चरण में उम्मीदवारों को भविष्य में नौकरी की कठिनाईयों के लिए तैयार करने के लिए उनकी विश्लेष्णात्मक क्षमता और विस्तृत शैली की परख की जाती है.
सामूहिक चर्चा के इस चरण में उम्मीदवारों के उम्दा प्रदर्शन व उनकी सहायता के लिए कुछ दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं.

समसामयिक विषय को सिलसिलेवार ढ़ंग से पढ़ें: हालाँकि, यह कोई लिखित परीक्षा नहीं है तथापि समसामयिक विषयों की समझ और ज्ञान अत्यंत आवश्यक है. उम्मीदवारों को सभी नवीन घटनाक्रमों की जानकारी होनी चाहिए ताकि सामूहिक चर्चा के दौरान दिए गए विषय अथवा अपनी रूचि के विषय पर वो अपना पक्ष दृढतापूर्वक रख सकें. सामने उपस्थित नियोक्ताओं को अपने प्रदर्शन से संतुष्ट कर देने से नौकरी पाने की संभाव्यता बढ जाती है.

अपने वाद-विवाद कौशल की परिधि को विस्तार दें: सामूहिक चर्चा में अपने बैच के बीच अपनी बात को कहने और मनवाने के लिए आपको अपनी बात तर्कों के साथ कहनी पड़ेगी. उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों मूल्य आधारित होने चाहिए और आधारहीन तो कभी नहीं. प्रस्तुत तर्क को साबित करने के लिए आपके पास कुछ बिंदु होने जरूरी हैं. कई दूसरे उम्मीदवार अपना पक्ष रखेंगे जिसके इतर आपको अपनी बात के समर्थन में तर्कों को प्रस्तुत करते जाना है और अपनी बातों के खंडन करने वालों की थोड़ी प्रतीक्षा कर लेनी चाहिए.

अपनी आवाज और पिच को सुधारने का प्रयास करें: सामूहिक चर्चा के दौरान आपको पूर्ण विश्वास के साथ बोलना चाहिए. उम्मीदवारों की पिच वाद-विवाद के स्थान के हिसाब के अनुकूल होनी चाहिए. एक स्वस्थ्य वाद-विवाद से उम्मीदवारों की आस-पास की समझ और एन्टैलिजैंस कोशेन्ट के लिए यह जरूरी है.

परिधान का विशेष ध्यान रखें: सामूहिक चर्चा व्यक्तिगत साक्षात्कार से किसी भी मायने में कम नहीं है इसलिए अपनी बात कहते हुए स्पष्ट रहें. उनके भविष्य निर्धारण और  और अधिक अंकों की प्राप्ति में एक समुचित परिधान का पहनना आपको अन्य उम्मीदवारों से विशिष्ट बना सकता हैं. सामूहिक चार्चा के इस चरण में आपकी बुद्धिमता व ज्ञान फॉर्मल परिधान के साथ आपको स्मार्ट व गंभीर बना सकता हैं.

धैर्य के साथ सुनें: यह चरण केवल अपनी बात बोलने और अपनी प्वाइंट्स को स्पष्ट करने के लिए नहीं है. बल्कि, इस चरण में उम्मीदवारों के लिए एक अच्छा श्रोता भी बनना जरूरी है. दूसरे उम्मीदवारों को सुनकर आपके दिमाग में कई महत्तवपूर्ण बिंदु आ सकती हैं. इससे आप अपनी एक अच्छी शुरूआत भी कर सकते हैं. दूसरे लोगों को सुनने से आपके अपने विषय के बारे में भी सहायता व सूचना मिलेगी. आपको उम्मीदवारों और नियोक्ता की बातों को सुनना चाहिए जब वो कोई बात कह रहे हों.

नियमों का पालन करें: इस चरण के शुरू होने से पहले नियोक्ता इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए कुछ नियम व कायदों की घोषणा करेंगे जिसे ध्यान लगा कर सुनें और उसका भरसक पालन करें. उम्मीदवारों को इन सब नियमों-कायदों को सुनने के बाद ही अपनी किसी बिंदु को सामने रखना चाहिए. किसी विशेष नियम का पालन न करना आपकी एक गलती हो सकती है जिसके कारण आप अपने अंतिम चयन का अवसर खो सकते हैं.

संयमित रहें: सामूहिक चर्चा और वाद-विवाद इतना आसान नहीं होता. कभी-कभी ऐसी स्थितियाँ आती हैं कि अपने विचार को रखने के लिए आपके दिमाग में कोई बिंदु ही ना आएँ. ऐसे में परेशान होने की कतई जरूरत नहीं. अपने आप को दोहराएँ नहीं. अपने चित्त को शांत करने के लिए कुछ समय लें. आपको महसूस होगा कि ऐसा करने के साथ ही आपके दिमाग में विचार आने शुरू हो जाएँगे.

समय का ध्यान रखें: सामूहिक चर्चा में कभी भी देर से ना आएँ. क्योंकि, अन्य उम्मीदवारों के साथ आपका जोड़ा बनाया जा सकता है. समय पर आने के साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि विषय पर बोलने के लिए आपको कितना समय दिया गया है. आपके शब्दों का चयन बेहतर होना चाहिए ताकि आपके द्वारा बोला गया हर शब्द या वाक्य नीरस ना प्रतीत हों. एक अच्छे वक्ता की तरह बोल कर आप सह-उम्मीदवारों और नियोक्ता के सामने अपनी विशेष छाप छोड़ सकते हैं.

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