मल्टीटास्किंग व्यक्तियों के लिए है ऑक्शनर के रूप में कैरियर

आपने बॉलीवुड फिल्मों में अक्सर घर या किसी आर्ट वर्क का ऑक्शन होते हुए देखा होगा। ऐसे में जब कभी आपके सामने किसी ऑक्शनर का चेहरा सामने आता है, तो एक ऐसा शख्स दिखाई देता है...

Created On: Aug 29, 2013 15:16 IST

आपने बॉलीवुड फिल्मों में अक्सर घर या किसी आर्ट वर्क का ऑक्शन होते हुए देखा होगा। ऐसे में जब कभी आपके सामने किसी ऑक्शनर का चेहरा सामने आता है, तो एक ऐसा शख्स दिखाई देता है, जो हाथों में गैवेल लिए जोर-जोर से आवाजें लगाता है और लोगों को बिडिंग के लिए एक्साइट करता है। बिडिंग एक ऑक्शनर के जॉब का वैसे तो इंपॉर्र्टेट पार्ट होता है, लेकिन जब हम इसके दूसरे पहलुओं को देखेंगे, तो ये एक चैलेंजिंग करियर हो सकता है। यानी जो लोग मल्टीटास्किंग में बिलीव करते हैं, उनके लिए ऑक्शनिंग फील्ड में काफी अपॉच्र्युनिटीज हैं।

मल्टीटास्किंग जॉब

एक ऑक्शनर का वर्क कैनवास जितना लार्ज होता है। वह एक ऑफिस मैनेजर, पब्लिक रिलेशन मैनेजर, अकाउंटेंट, कोऑर्डिनेटर जैसे कई रोल्स निभाता है। इनके लिए हर दिन नया होता है। कोई फिक्स्ड रूटीन नहींहोती। जब जैसा ऑक्शन होता है, उसी के मुताबिक इनका टाइम टेबल चेंज होता रहता है। हां, जब कोई बिड न हो, तो बोरिंग लग सकता है, लेकिन जो लोग करियर स्टार्ट करने जा रहे हैं, वे चैरिटी या फंड रेजिंग ऑक्शन में शामिल होकर एक्सपीरिएंस गेन कर सकते हैं।

स्किल्स


ऑक्शनिंग एक लुक्रेटिव करियर हो सकता है, लेकिन यहां सक्सेस पाना इतना आसान भी नहीं है। ट्रेनिंग, डिटरमिनेशन और स्किल्स के जरिए यहां बेहतर किया जा सकता है क्योंकि यह फील्ड दूसरे प्रोफेशन से काफी डिफरेंट है। इस कारण इसके प्रोफेशनल्स से एक अलग एटीट्यूड और क्वॉलिटी की उम्मीद की जाती है। ऑक्शनर बनने के लिए सबसे पहले एटीट्यूड होना चाहिए। आपको ऑडिएंस को लंबे टाइम तक बांधे रखने की आर्ट आनी चाहिए। साथ ही बायर्स के लिए ऐसा माहौल तैयार करना आना चाहिए, जिससे कि वे दोबारा ऑक्शन में आएं। ऑक्शनिंग में सक्सेस हासिल करने के लिए कुछ क्वॉलिटी कंपल्सरी हैं:

  • कॉन्फिडेंस
  • कॉमर्शियल अवेयरनेस
  • इंट्रेस्ट इन पेंटिंग्स एंड एंटिक्स
  • गुड नॉलेज ऑफ द मार्केट
  • गुड एडवर्टाइजिंग स्किल
  • ऑनलाइन मार्केटिंग स्किल
  • सेल्स व टैक्स रिलेटेड नॉलेज
  • कम्युनिकेशन स्किल एंड पेशेंस


ट्रेनिंग प्रोग्राम्स

इसमें एंट्री के लिए किसी तरह का स्पेशलाइजेशन जरूरी नहीं है। भारत में कोई डिप्लोमा या डिग्री कोर्स नहीं चलाया जाता, लेकिन कुछ म्यूजियम कल्चरल हेरिटेज से रिलेटेड ट्रेनिंग प्रोग्राम्स, शॉर्ट टर्म कोर्स या इंटर्नशिप कराते हैं। इस तरह अगर आर्ट या एंटीक ऑक्शनर बनना है, तो विजुअल आ‌र्ट्स में ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट होने से बात बन जाएगी।

पैकेज


अगर ऑक्शनर बनकर करियर बनाना चाहते हैं, तो चैरिटी फ‌र्म्स, बैंक, म्यूजियम, रियल एस्टेट फर्म आदि में काफी संख्या में ऑक्शनर रखे जाते हैं। आप एंटरप्रिन्योर बनकर लर्निग और अर्निग दोनों कर सकते हैं। सेल्स कमीशन के रूप में 40 से 50 हजार रुपये की इनकम हो जाती है। बडे ऑक्शन हाउसेज में भी अच्छा पैकेज मिल जाता है। एक अप्रेंटिस को 30 हजार मंथली जबकि एक्सपीरियंस्ड एक लाख रुपये तक की सैलरी मिलती है।

कस्टमर्स से हेल्दी-रिलेशनशिप जरूरी ऑक्शनर का जॉब टफ है। इसमें सक्सेस पाने के लिए अपने प्रोफेशन से लव करना होगा। अगर सिर्फ अर्न करने के लिए इस प्रोफेशन में आते हैं, तो यह फायदेमंद करियर कभी नहीं बन सकता है। इस प्रोफेशन में बिडर्स को हैंडल करने की कला आनी चाहिए। यह आर्ट किसी इंस्टीट्यूट या यूनिवर्सिटी में नहीं सिखाई जाती है, बल्कि अनेक तरह के कस्टमर को हैंडल करने के बाद आती है। आपके पास कस्टमर तभी आएंगे, जब हेल्दी रिलेशन बनाने की क्वॉलिटी होगी। इस प्रोफेशन में वर्क इन्हीं लोगों के फीडबैक से मिलते हैं। इसके चलते स्ट्रॉन्ग कम्युनिकेशन स्किल्स भी कंपल्सरी हैं।

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