मुश्किल नहीं है कॉमर्स की डगर

जागरण जोश में चुनिंदा विषयों पर गाइडेंस के इस खास कॉलम गुरु मंत्र में आप हर हफ्ते पढ़ रहे हैं किसी एक विषय पर एक्सपर्ट की एडवाइज। इस बार दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में सीनियर रीडर डॉ. डी.के.मित्तल कॉमर्स के स्टूडेंट्स को दे रहे हैं सक्सेस का गुरुमंत्र..
Created On: Sep 17, 2008 03:49 IST

कॉमर्स के स्टूडेंट को इकोनॉमिक्स, मैनेजमेंट, स्टैटिस्टिक्स और लॉज भी पढना होता है। बीकॉम (ऑनर्स) कोर्स के सभी विषय प्रैक्टिकल अप्रोच से जुडे हैं।

एंट्रप्रॅन्योर्स के बारे में पढें : बीकॉम (ऑनर्स) के बिजनेस ऑर्गनाइजेशन ऐंड मैनेजमेंट जैसे पेपर के लिए एक बढिया टेक्स्ट बुक तो जरूर लें, लेकिन विषय में आपकी रुचि तभी बढेगी, जब सफल कंपनियों के विकास और उनको बनाने वाले उद्योगपतियों और एंट्रपॅन्योर्स के जीवन एवं उनकी सोच के बारे में भी जानकारी हासिल करें।

सीखें बेसिक्स : अकाउंटिंग, मैथमेटिक्स, स्टैटिस्टिक्स जैसे विषयों के लिए उनके बेसिक्स पर मजबूत पकड जरूरी है। सवाल के हर स्टेप को समझें और शुरुआत में सरल प्रैक्टिकल क्वैश्चंस करें। इलॅस्ट्रेशंस को केवल पढें ही नहीं, बल्कि इसे खुद से भी सॉल्व करें। उसके बाद अपनी त्रुटियों को जानने के लिए किए गए सॉल्यूशन को बुक में दी गई शॉर्ट इलॅस्ट्रेशंस से तुलना करें।

लॉज हैं इम्पॉर्टेट: कॉमर्स में बहुत सारे विषयों का संबंध लॉज यानी कानूनों से है। जैसे बिजनेस लॉज, कॉरपोरेट लॉज, इनकम टैक्स लॉज आदि। लॉ के हर प्रॉविजन को पढते समय उन्हें न केवल रटें, बल्कि उनके महत्व को भी समझें। इनकम टैक्स से संबंधित प्रैक्टिकल क्वैश्चंस भी तभी आसानी से हल किए जा सकते हैं, जबकि उनसे संबंधित समस्त प्रॉविजंस पूरी तरह बारीकी से याद हों।

माइक्रो-इकोनॉमिक थ्योरी : इस बात को अच्छी तरह गांठ बांध लें कि माइक्रो-इकोनॉमिक थ्योरी की पक्की समझ मैक्रो- इकोनॉमिक्स और इंडियन इकोनॉमी को समझने के लिए भी जरूरी है। मैक्रो-इकोनॉमिक्स और इंडियन इकोनॉमी के लिए टेक्स्ट बुक्स के साथ गवर्नमेंट डॉक्यूमेंट्स और बिजनेस न्यूज पेपर्स पढना भी आवश्यक है। कुछ प्रमुख नाम हैं :

द इकोनॉमिक टाइम्स

फाइनेंशियल एक्सप्रेस

इकोनॉमिक सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट

आरबीआई बुलेटिन

अकाउंटिंग को दें फुल अटेंशन : कॉस्ट अकाउंटिंग और मैनेजमेंट अकाउंटिंग डिसीजंस मेकिंग के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि प्रत्येक निर्णय उनसे संबंधित लागत तथा उससे होने वाले बेनिफिट की तुलना पर निर्भर करता है। ध्यान रहे कि लागत निर्धारण में कुछ आधारभूत नियमों की अनदेखी आप न करें। इसी तरह थ्योरी को समझे बिना प्रैक्टिकल क्वैश्चंस करना भी ठीक नहीं होगा।

बिजनेस की बारीक समझ : व्यापार प्रबंध को राजनीतिक परिस्थितयों, एथिक्स ऐंड मॉरेलिटी तथा कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी के दायरे में समझने की कोशिश करें।

क्या करें, क्या न करें

1. कॉमर्स के हर टॉपिक बिजनेस और अर्थव्यवस्था में उसके व्यापारिक इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए पढें।

2. एक किताब तक ही सीमित न रहें।

3. बिजनेस जर्नल्स और अखबार नियमित रूप से पढें।

4. कंपनियों की रिपो‌र्ट्स और उनके संस्थापकों, संचालकों की कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त करें।

5. प्रैक्टिकल क्वैश्चंस में प्रत्येक स्टेप्स को पूरी तरह समझकर ही हल करें।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में सीनियर रीडर डॉ. डी.के.मित्तल कॉमर्स के स्टूडेंट्स को दे रहे हैं सक्सेस का गुरुमंत्र..

मुनमुन प्रसाद श्रीवास्तव

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