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विदेश में शिक्षा

भारत में ढेर सारे छात्र विदेश में पढ़ने की इच्छा रखते हैं। खासकर अमेरिका, यूके, फ्रांस, कनाडा, जापान जैसे किसी देश से पढ़ाई करने के बाद न केवल एक्सपोजर मिलता है, बल्कि बड़ी व मल्टीनेशनल कंपनियों में आसानी से नौकरी भी मिल जाती है। विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाने का एक कारण यह भी है कि निजी क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार कई देशों के शैक्षिक संस्थाओं में पाठ्यक्रम भारत से पहले शुरू कर दिए जाते हैं और वहां पर एक उपयुक्त वातावरण में व्यावहारिक शिक्षा सुलभ होती है।

Oct 21, 2010 13:59 IST
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Overseas Education
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भारत में ढेर सारे छात्र विदेश में पढ़ने की इच्छा रखते हैं। खासकर अमेरिका, यूके, फ्रांस, कनाडा, जापान जैसे किसी देश से पढ़ाई करने के बाद न केवल एक्सपोजर मिलता है, बल्कि बड़ी व मल्टीनेशनल कंपनियों में आसानी से नौकरी भी मिल जाती है। विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाने का एक कारण यह भी है कि निजी क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार कई देशों के शैक्षिक संस्थाओं में पाठ्यक्रम भारत से पहले शुरू कर दिए जाते हैं और वहां पर एक उपयुक्त वातावरण में व्यावहारिक शिक्षा सुलभ होती है।
यूनेस्को की एक 'रिपोर्ट ग्लोबल एजुकेशन डाइजेस्ट-2009'  के मुताबिक चीन के बाद सबसे अधिक भारतीय छात्र ही विदेश पढ़ने जाते हैं। जहां तक टॉप स्टडी डेस्टिनेशन की बात है, तो इसमें अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और जापान प्रमुख हैं। रिपोर्ट के मुताबिक , पहले अमेरिका भारतीय छात्रों का मुख्य स्टडी डेस्टिनेशन हुआ करता था। तकरीबन 71 फीसदी भारतीय छात्र अमेरिका पढ़ने जाते थे। इसके बाद 8 प्रतिशत यूके और 7.6 प्रतिशत ऑस्ट्रेलिया। लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जापान, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, चीन और साउथ कोरिया भी भारतीय छात्रों के पसंदीदा स्टडी स्पॉट बनते जा रहे हैं। वहीं भारत के उद्योग चेंबर संगठन एसोचैम के मुताबिक, प्रति वर्ष करीब पांच लाख भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए विदेश का रुख करते हैं।
विदेश में पढ़ाई के लिए शैक्षिक संस्थानों में एडमिशन पाने हेतु टीओईएफएल, आईईएलटीएस, जीएमएटी, जीआरई जैसे टेस्ट को पास करना होता है।

किस देश में कौन-सा टेस्ट
यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन के लिए टॉफेल, जीआरई, जीमैट और एसएटी स्कोर मान्य हैं। यूके के संस्थानों में एडमिशन के लिए जीसीई क्लियर करना पड़ता है। कनाडा, आयरलैंड व न्यूजीलैंड जैसे देशों में पढ़ने के लिए टॉफेल या आईईएलटीएस पर्याप्त है। ऑस्ट्रेलिया के सभी शैक्षणिक संस्थानों में आईईएलटीएस का स्कोर मान्य है। महत्वपूर्ण टेस्ट से सम्बंधित जानकारी निम्नलिखित है:

• इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम (IELTS): आईईएलटीएस टेस्ट के जरिए कैंडिडेट्स के अंग्रेजी ज्ञान को जांचा-परखा जाता है। इस परीक्षा का आयोजन ब्रिटिश काउंसिल, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, ईएसओएल और आईडीपी एजुकेशन, ऑस्ट्रेलिया द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है। आईईएलटीएस स्कोर ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका के शैक्षणिक संस्थानों के अलावा, कुछ अमेरिकी संस्थानों में भी मान्य हैं।

• टेस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज (TOEFL) : अमेरिका सहित दुनिया के 130 देशों के संस्थानों में इसका स्कोर मान्य है। वैसे, तो टॉफेल का स्कोर दो साल के लिए मान्य होता है, लेकिन अधिकतर संस्थान ताजा स्कोर ही मांगते हैं। अब अधिकतर सेंटरों पर सीबीटी यानी कंप्यूटर आधारित टेस्ट लिया जाता है। टॉफेल टेस्ट में मुख्य रूप से रीडिंग, लिसनिंग, राइटिंग और स्पीकिंग (केवल सीबीटी) की परीक्षा होती है।

• ग्रेजुएट मैनेजमेंट टेस्ट (GMAT): मैनेजमेंट कॉलेजों में एडमिशन के लिए जीमैट एग्जाम देना जरूरी होता है। दुनिया में तकरीबन 1900 ऐसे बिजनेस स्कूल हैं, जहां जीमैट स्कोर मान्य हैं। जीमैट सामान्यतया तीन सेक्शनों में बंटा होता है: एनालिटिकल राइटिंग एसेसमेंट, क्वांटिटेटिव और वर्बल। आमतौर पर इसमें रीजनिंग, कॉम्प्रिहेंशन, प्रॉब्लम सॉल्विंग क्वेश्चन आदि से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।

• स्कॉलिस्टिक एप्टीट्यूड टेस्ट (SAT): अमेरिका के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए सैट यानी स्कॉलिस्टिक एप्टीट्यूड टेस्ट से होकर गुजरना होता है। यह परीक्षा ईटीएस (एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विस) द्वारा संचालित की जाती है। इसके जरिए कैंडिडेट्स की समझने की क्षमता, मैथ्स और वर्बल रीजनिंग के ज्ञान की जांच की जाती है। परीक्षा में वस्तुनिष्ठ टाइप प्रश्न पूछे जाते हैं।

• ग्रेजुएट रिकॉर्ड एग्जामिनेशन (GRE): अमेरिका के कई ग्रेजुएट कॉलेजों में एडमिशन जीआरई स्कोर के आधार पर होता है। आमतौर पर जीआरई का स्वरूप सैट एग्जाम की तरह की होता है। जीआरई कम्प्यूटर आधारित परीक्षा है।

• मेडिकल कॉलेज एडमिशन टेस्ट (MCAT): अमेरिकी यूनिवर्सिटी और कनाडा के उच्च स्तरीय मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए एएएमसी (असोसिएशन ऑफ अमेरिकन मेडिकल कॉलेज) यानी एमकैट आयोजित करता है। एमकैट की परीक्षा में वर्बल रीजनिंग, फिजिकल साइंस, बायोलॉजिकल साइंस और राइटिंग सैंपल से सवाल पूछे जाते हैं। पहले तीन सेक्शन में मल्टीपल च्वाइस टेस्ट होते हैं।

• टोईक (TOEIC) : टोईक अर्थात टेस्ट ऑफ इंग्लिश फॉर इंटरनेशनल कम्युनिकेशन अंग्रेजी भाषा के ज्ञान के लिए होता है। बिजनेस संस्थाएं अंग्रेजी भाषा की परीक्षा लेने के लिए टोईक का उपयोग करती हैं। इसमें कॉर्पोरेट डेवलपमेंट, फाइनेंस, बजटिंग, कॉर्पोरेट प्रॉपर्टी, आईटी पर्सनल, टेक्निकल मामले, हेल्थ व बिजनेस ट्रेवल से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

• लॉ स्कूल एडमिशन टेस्ट (LSAT): अमेरिका एवं कनाडा के लॉ कॉलेजों में प्रवेश के लिए यह टेस्ट लिया जाता है। इसमें लॉजिकल रीजनिंग, रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, एनालिटिकल रीजनिंग आदि से सवाल पूछे जाते हैं।

• जनरल सर्टिफिकेट ऑफ एजुकेशन (GCE): यूके से उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल शिक्षा हासिल करने के लिए जीसीई एग्जाम में सफल होना जरूरी है। इसमें दो लेवॅल पर एग्जाम होता है। ए लेवॅल का स्कोर यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए मान्य होता है।


टेस्ट की तैयारी की रणनीति
इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्ट (IELTS) और टेस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज (TOEFL) में पूछे जाने वाले प्रश्नों का पैटर्न करीब-करीब एक जैसा ही होता है। इसमें सफल होने के लिए जरूरी है कि अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ हो। तैयारी के लिए अंग्रेजी न्यूजपेपर और मैग्जीन नियमित रूप से पढ़ें तथा किसी स्तरीय इंस्टीट्यूट की सहायता भी ले सकते हैं।
जीमैट के लिए अंग्रेजी के साथ-साथ मैथ्स पर भी काफी अच्छी पकड़ होनी चाहिए, इसमें क्रिटिकल रीजनिंग, कॉम्प्रिहेंशन आदि से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। लेकिन इस टेस्ट में एक बात और देखी जाती है कि कम से कम समय में कितने प्रश्नों को हल कर सकते हैं। इसके लिए नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है। जीआईई और सैट में पूछे जाने वाले प्रश्नों का पैटर्न भी कुछ-कुछ एक जैसा ही होता है। टेस्ट की तैयारी के लिए किसी भी संस्थान में एडमिशन अपनी क्षमता और योग्यता को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए।

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