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सोच को विस्तार देने हेतु विदेश में शिक्षा ग्रहण करें

May 9, 2013 11:48 IST

    एब्रॉड में स्टडी की चाह, सभी मुल्कों के स्टूडेंट्स में बढ रही है। इसमें इंडियन स्टूडेंट भी शामिल हैं। साल दर साल यूरोपीय देशों एवं अमेरिका जाने वाले भारतीय विद्यार्थियों की बढती संख्या इस बात को प्रमाणित कर देती है। एब्रॉड में स्टडी का क्रेज कई कारणों से बढ रहा है।

    कई देशों में दोस्त

    दोस्तों की चाह भला किसे नहीं होती है। एब्रॉड में एजूकेशन के दौरान आपको कई देशों के लोगों से दोस्ती के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होते हैं। किसी दूसरे देश में पढने के लिए गया विद्यार्थी अपने घर परिवार, संस्कृति, भाषा आदि से दूर हो जाता है। अकेलापन खत्म करने के लिए उसे दोस्तों की जरूरत पडती है। वह वहां रह रहे अपने देश के लोगों को तो दोस्त बनाता ही है साथ ही उसकी इस लिस्ट में दूसरे देशों से वहां पढने आए अन्य स्टूडेंट एवं स्थानीय युवक भी शामिल हो जाते हैं। नए लोगों से होने वाली दोस्ती कुछ नई भाषाओं, संस्कृतियों, रीति-रिवाजों की संक्षिप्त जानकारी देती है।

    होगी अपनी जानकारी

    हम कहां हैं और बाकी कहां, इसको समझना है तो हमें घर से बाहर निकलना ही पडेगा। नहीं तो हम अपने में ही खोए रहेंगे। खुद में सुधार के प्रयास ही नहीं करेंगे और बाकी सबसे कहीं पीछे होते चले जाएंगे। एब्रॉड में स्टडी करके लौटा स्टूडेंट अपने साथ कई नए आइडिया लेकर आता है, जिनके जरिए वह न केवल अपने, बल्कि अपने समाज में व्याप्त व्यर्थ की पुरानी सोच को बदलने का काम करता है।

    चलें दुनिया के साथ

    वैश्वीकरण के इस युग में तकनीक में हो रहे बदलावों ने दुनिया को काफी छोटा कर दिया है। इंटरनेशनल लेवल पर इसे फायदेमंद माना जा रहा है। विदेश में शिक्षा हासिल करके आने वाले भारतीय छात्र टेक्निकल थिंकिंग का विस्तार देश में कर रहे हैं, परिणामस्वरूप उनके संपर्क में रहने वालों की सोच और रहन-सहन में भी कुछ स्तर तक परिवर्तन दिखाई देने लगा है। एक दूसरा फायदा यह भी है कि एब्रॉड से पढकर लौटे व्यक्ति छोटे-छोटे निजी एवं सामाजिक इश्यू पर बहुत ध्यान नहीं देते हैं। वे सोचते हैं किस तरह अधिक से अधिक लोगों को लेकर आगे बढा जाए एवं विपरीत परिस्थितियों में विकास कैसे संभव है।

    नया एजूकेशन सिस्टम

    एब्रॉड में स्टडी करते समय स्टूडेंट एक बिल्कुल नए एजूकेशन सिस्टम से रूबरू होता है। उस सिस्टम को समझने और उसकी अच्छाइयों को सीखने के बाद जब वह अपने देश आता है तो अपने एजूकेशन सिस्टम में कहां किस तरह की कमियां हैं, उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है, इन सब पर विचार करता है। अपने अनुभव से उन्हें दूर करने की कोशिश भी कर सकता है।

    एम्प्लॉयमेंट: नो प्रॉब्लम

    अगर आप अमेरिका और यूरोपीय देशों से एजूकेशन लेते हैं तो आपके पास इन जगहों पर जॉब करने के पर्याप्त अवसर हमेशा उपलब्ध रहेंगे। आप चाहें तो इन देशों की बडी कंपनियों की भारत में मौजूद ब्रांचों में जॉब कर सकते हैं। ये कंपनियां यूरोप एवं अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा लेकर आए युवाओं को अपने यहां जॉब में प्राथमिकता देती हैं। अमेरिकी एवं यूरोपीय देशों में नए-नए तरह के कोर्स सबसे पहले सामने आते हैं। इसमें निपुणता हासिल कर लेने वालों की डिमांड कुछ वर्षो में पूरी दुनिया में हो जाती है.

     

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