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स्टूडेंटस व्यू: 29 मई 2013

May 29, 2013 16:31 IST

    वक्त की बर्बादी है कोर्स

    विश्वविद्यालय का 4 वर्षीय डिग्री प्रोग्राम वक्त की बर्बादी है, जो चीज तीन साल में की जा सकती है उसके लिए 4 साल क्यों? ठीक है नई चीजें सीखने के लिए 1 और साल मिलेगा। लेकिन यह भी सोचिए कि 1 अतिरिक्त साल के चलते कितने स्टूडेंट्स की कॉम्पिटेटिव एग्जाम की एज निकल जाएगी। इसके अलावा उन पर फाइनेंशियल बर्डन अलग से पडेगा।

    व‌र्ल्ड क्लास बनेगा एजुकेशन स्ट्रक्चर

    4 साल के डिग्री कोर्सेज से भारत में हायर एजुकेशन व‌र्ल्ड क्लास बन सकेगी, क्योंकि दुनिया के ज्यादातर देशों में 4 वर्षीय डिग्री प्रोग्राम ही होते हैं। यदि भारतीय स्टूडेंट्स यूरोप या अमेरिका में पढने जाते हैं, तो उनकी डिग्री को मान्यता नहीं मिलती और उन्हें पीजी के लिए नए सिरे से कोर्स करने होते हैं। लिहाजा नया फैसला अब्रॉड शिक्षा की चाह रखने वालों के लिए अच्छा है।

    ज्यादा जॉब ओरिएंटेड बनेगा कोर्स

    यदि आप विदेश में जाएंगे, तो वहां सब जगह 4 साल के ग्रेजुएट कोर्स मिलेंगे। डीयू का यह सही फैसला है। एक साल एक्स्ट्रा बढ जाने से अब एजुकेशन प्रैक्टिकल ओरिएंटेड हो जाएगी, जिसका फायदा उन्हें जॉब पाने में मिलेगा। हां, नुकसान यह है कि 4 साल में जहां बीटेक जैसे कोर्स करके टेक्निकल डिग्री मिलती है, वहीं 4 साल में नॉन-टेक्निकल डिग्री ही मिलेगी।

    करीकुलर एक्टिविटीज कम


    पढाई के लिए स्टूडेंट्स को अब ज्यादा ऑप्शंस मिलेंगे। लेकिन पढाई का बोझ बढने से एक्स्ट्रा करीकुलर एक्टिविटीज के लिए उन्हें कम समय मिलेगा, जिससे कहीं न कहीं उनका ओवरऑल डेवलपमेंट प्रभावित होगा। हां, एक्स्ट्रा छुट्टियों को कम करके दोनों कामों को जरूर पूरा किया जा सकता है।

     

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