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अगर आप सोचते हैं...अब एमबीए का जादू खत्म ? तो एमबीए से जुड़े 10 प्लेसमेंट फैक्ट्स बदल देंगे आपकी राय

Sep 12, 2018 15:52 IST
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10 MBA placement facts
10 MBA placement facts

एमबीए की हाइप अब समाप्त हो चुकी है.एमबीए के बाद कोई करियर नहीं है. केवल अमीर लोग ही  आजकल एमबीए की डिग्री खरीद सकते हैं. यदि आप एक एमबीए उम्मीदवार हैं, निश्चित रूप से हाल के वर्षों में अपने दोस्तों, साथियों, माता-पिता और यहां तक कि एकेडमिक विशेषज्ञों से इस तरह के बयान आपने कई बार सुने होंगे.

वास्तव में आने वाले कुछ वर्षों में कई लोगों ने एकेडमिक डोमेन के रूप में मैनेजमेंट स्टडी को बेकार बताने की चेष्टा की है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर इन दावों के पीछे की सच्चाई क्या है ?

एमबीए के विषय में फैल रही इन नकारात्मक भ्रान्तियों के बावजूद हाल ही में संपन्न एमबीए प्लेसमेंट सीजन डेटा से यह पता चलता है कि एमबीए करियर विकल्प के रूप अभी भी उतना ही महत्व रखता है जितना 10 साल पहले रखता था. यदि आपको एमबीए कोर्स के चयन को लेकर संदेह है तो आप  इन 10 महत्वपूर्ण और विचारणीय एमबीए प्लेसमेंट तथ्यों पर नज़र डालें. आप निश्चित रूप से इस बारे में अपनी राय बदल देंगे.

नोट: इस आर्टिकल में उपयोग किए गए सभी डेटा ईटी टॉप रिक्रूटमेंट सर्वे के अनुरूप हैं.

1. कीमतों में बढ़ोत्तरी

'डूम और ग्लूम' के सामान्य मूड के बावजूद एमबीए प्लेसमेंट सीजन 2017 से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कमोवेश छात्रों की प्लेसमेंट पहले के वनिस्पत बेहतर ही रहा. इसके अलावा एमबीए ग्रेजुएट्स को यह जानकर प्रसन्नता होगी कि उनको पेशकश की जाने वाली सैलरी में औसतन 5 से 10% की वृद्धि हुई है.इस प्रकार हम समझ सकते हैं कि मौजूदा हालात में एमबीए कोर्स का चयन करना संतोषजनक है तथा मार्केट में उसके वैल्यू में गिरावट नहीं आई है.एमबीए उम्मीदवारों के लिए जॉब मार्केट काफी हद तक संतोषजनक है. अगर औसतन सैलरी की बात की जाय तो टॉप बी स्कूल्स से एमबीए करने वाले उम्मीदवारों को लगभग 21.42 लाख रुपये तक का पैकेज ऑफर किया गया है जो पिछले साल की तुलना में मामूली ही सही लेकिन अधिक है. पिछले साल 21.03 लाख रुपये तक का पैकेज ऑफर किया गया था.

इतना ही नहीं भारत के टॉप एमबीए कॉलेजों से एमबीए करने वाले मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को 21 लाख रुपये सालाना का पैकेज ऑफर किया गया है, जिसमें लगभग 1 लाख रूपये की बढ़ोतरी हुई है. एमबीए ग्रेजुएट्स के लिए भारत में अभी भी औसतन सैलरी और मुआवजे की पेशकश की जा रही है. मैनेजमेंट अभी भी एक प्रोग्रेसिव करियर विकल्प है तथा यह नौकरी तलाशने वाले मिलेनियल्स के लिए एक बेहतर विकल्प है.

2. आकर्षक सैलरी पैकेज

अब अगर हम व्यक्तिगत पैकेज की बात करें तो एमबीए छात्रों को आकर्षक सैलरी पैकेज का ऑफर मिल रहा है और उसमें पहले की तुलना में बढ़ोतरी ही हुई है.उन्हें अबतक की अधिकतम सैलरी ऑफर की जा रही है. भारत के सबसे सम्मानित एमबीए कॉलेजों में से एक एक्सएलआरआई से पास आउट एमबीए ग्रेजुएट्स को 43 लाख रुपये सालाना तक पैकेज ऑफर किया गया है. यह पिछले वर्ष की तुलना में 5 लाख रुपये अधिक है. अगर इस पैकेज पर आज की महंगाई और डीमोनेटाईजेशन को देखते हुए विचार किया जाय तो यह वाकई एक आकर्षक पैकेज है. एक्सएलआरआई से पास आउट एमबीए ग्रेजुएट्स की सैलरी में 70,000 रुपये की वृद्धि हुई और 1 9 .2 लाख रूपये सालाना तक पहुँच गयी है.

आईआईएम कोझिकोड के छात्रों की प्रस्तावित सैलरी या पैकेज में भी वृद्धि हुई है. इसके छात्रों का  प्रस्तावित पैकेज 37 लाख रुपये रहा. अगर आईआईएम काशीपुर की बात की जाय तो यहाँ के छात्रों को 53 लाख रुपये का सर्वश्रेष्ठ पैकेज ऑफर किया गया है.

किसी भी अन्य एकेडमिक डोमेन में क्या हम इतनी आकर्षक पैकेज की बात सोंच सकते हैं. फ्रेशर्स के लिए तो हम ऐसा कभी नहीं सोच सकते हैं.इसलिए भारत के टॉप बी स्कूल तथा इन-डिमांड डोमेन से की जाने वाली एमबीए डिग्री निश्चित रूप से आपको बहुत अच्छे पैकेज वाली नौकरी दिला सकती है. उतने पैकेज की कल्पना आप किसी अन्य डोमेन में नहीं कर सकते हैं.

3. टॉप बी स्कूल की डिमांड अभी भी बहुत ज्यादा है

वैसे आजकल एमबीए ग्रेजुएट्स के एडमिशन में थोड़ी कमी आई है. यह ज्यादातर टियर 2 शहरों वाले बी स्कूल तक ही सीमित है लेकिन डेटा से पता चलता है कि आईआईएम, एसजेएमएसएम और एक्सएलआरआई जैसे भारत के टॉप एमबीए कॉलेजों के कैंपस से पास आउट स्टूडेंट्स की संख्या अभी भी बहुत अधिक है.वस्तुतः आईआईएम त्रिची जैसे नए स्थापित आईआईएम के छात्रों का अधिकतम पैकेज 23.8 लाख रुपये से बढ़कर 33 लाख रुपये हो गया है. गैर-आईआईएम बी-स्कूलों में जैसे  शैलेश जे मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में 16.5 लाख रुपये की तुलना में औसत पैकेज 17.63 लाख रुपये तक बढ़ गया है.यहां तक कि आईआईटी में मैनेजमेंट स्टडीज विभागों ने अपने छात्रों को पेश किए जा रहे पैकेज में बढ़ोतरी की है.

इससे यह स्पष्ट है कि मार्केट में एमबीए ग्रेजुएट्स के लिए जॉब के पर्याप्त अवसर हैं और इन जॉब्स पर हायरिंग के लिए एकमात्र अनिवार्य योग्यता भारत के किसी टॉप एमबीए कॉलेज से प्रासंगिक डिग्री है.

4. टियर 2 इंस्टीट्यूट्स के पैकेज में थोड़ी कमी आयी है

अगर टियर 2 इंस्टीट्यूट्स की बात की जाय तो इस मामले में रीजल्ट उतना आशाजनक नहीं रहा है तथा इस क्षेत्र के इंस्टीट्यूट से एमबीए करने वाले छात्रों के पैकेज में पहले के वनिस्पत थोड़ा गिरावट आई है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग (एनआईटीआईई) के छात्रों को 39.5 लाख रुपये के घरेलू सैलरी पैकेज के साथ एवरेज सैलरी 15.86 लाख रुपये की पेशकश की गयी है.एक अन्य लोकप्रिय लेकिन प्रीमियम बी-स्कूल यानी वी स्कूल के छात्रों को पिछले साल के 21 लाख रुपये की तुलना में 15 लाख रूपये अधिकतम पैकेज की पेशकश एम्प्लॉयर द्वारा की गयी है.

इसलिए, यदि आप किसी भी 2 टियर के बी-स्कूलों में एडमिशन की योजना बना रहे हैं, तो मिलने वाले पैकेजों के संबंध में कुछ चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें. इन बी स्कूल्स के छात्रों को भी कई रिक्रूटिंग एजेंसियां आर्थिक मंदी के बावजूद भी रिक्रूट करने को तैयार रहती हैं.

5. पीपीओ का बढ़ता प्रभाव

प्री-प्लेसमेंट ऑफर का बढ़ता प्रभाव भारत में एमबीए एजुकेशन के लिए एक शुभ संकेत है.रिक्रूटर्स / कंपनियां, युवा एमबीए प्रतिभाओं को हायर करने के लिए प्री-प्लेसमेंट ऑफ़र रूट को तेजी से अपना रही हैं. कंपनियां उन इंटर्नों को हायर करने का विकल्प चुन रही हैं जिन्होंने समर प्रोजेक्ट्स के दौरान उनके साथ काम किया था, कारण कि वे पहले से ही उनकी क्षमता और शैली से पूरी तरह से परिचित होते हैं.

इस साल, एक्सएलआरआई में पासिंग बैच को पेश किए जाने वाले पीपीओ की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिला है . इसी तरह, एनएमआईएमएस में भी छात्रों के प्री प्लेसमेंट ऑफ़र की संख्या में 42% का इजाफा हुआ है. प्री प्लेसमेंट ऑफ़र की संख्या में आईआईएम त्रिची में 19% की वृद्धि और सिम्बियोसिस में 37% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

6. एमबीए वर्ल्ड में बैंकिंग और फायनांस का दबदबा रहता है

अब अगर एमबीए प्लेसमेंट की बात की जाय तो यह पहचानना अति आवश्यक है कि एमबीए के किस डोमेन में  सर्वाधिक जॉब की डिमांड होती है. बैंकिंग और फायनांस, हमेशा अपने उत्कृष्ट मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी और प्रिसिपल्स पर निर्भर होने के कारण एमबीए उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त जॉब मार्केट उपलब्ध कराते हैं.

बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा) का प्रभुत्व आसानी से इस तथ्य के माध्यम से समझा जा सकता है कि आईआईएम शिलांग के पूरे बैच के लगभग 25% ने केवल एक ही इंडस्ट्रियल डोमेन में जाने का विकल्प चुना है. इसी तरह, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में मैनेजमेंट स्टडीज के कुल प्लेसमेंट नंबरों में बीएफएसआई का कुल हिस्सा 47% था.

एमबीए ग्रेजुएट्स को दी जाने वाली भूमिकाओं और नौकरी प्रोफाइल के संबंध में अगर विचार करें तो

2017 में यह देखा गया है कि विशिष्ट डोमेन जैसे रिस्क मैनेजमेंट, इंश्योरेंस मैनेजमेंट, सेक्युरिटी मैनेजमेंट और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग की डिमांड बढ़ी है. इनकी रिक्रूटमेंट में भी तेजी आई है.

7. ईकॉमर्स और आईटी तथा एफएमसीजी भी रफ़्तार पकड़ रहे हैं

2015-16 में ई-कॉमर्स और आईटी डोमेन में जाने वाले कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है. लेकिन  इस साल इन दोनों ने एमबीए प्लेसमेंट सीजन में पुनः वापसी की है. कई आईटी मेजर और ई-कॉमर्स दिग्गज जैसे आमेजन ने टॉप बी-स्कूलों के प्लेसमेंट सेशन में भाग लिया.एफएमएस दिल्ली और आईएमआई दिल्ली में प्लेसमेंट सीजन के दौरान कई एमबीए मार्केटिंग ग्रैड्स को सम्मानजनक ऑफ़र प्रदान किया गया. दूसरी तरफ, एफएमसीजी (तेजी से चलने वाले उपभोक्ता सामान) ने एमबीए ग्रेजुएट्स  की हायरिंग में वृद्धि पायी है, खासकर मार्केटिंग, सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन नौकरी प्रोफाइल की भूमिका के लिए.

8. सार्वजनिक क्षेत्र के कंपनियों का प्रवेश

इस वर्ष एमबीए प्लेसमेंट सीजन के संबंध में एक और बहुत ही रोचक बात देखने को मिली कि अब पीएसयू कम्पनियां भी इनकी हायरिंग कर रही हैं.

एसबीआई और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन जैसे सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों ने भारत के टॉप बी-स्कूलों से एमबीए ग्रेजुएट्स की हायरिंग की संख्या में वृद्धि की है.

एक्सआईएमबी (जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, भुवनेश्वर) को एसबीआई द्वारा 10 प्रस्ताव दिए गए जबकि नवीन इंस्टीट्यूट आईआईएम उदयपुर और आईआईएम त्रिची को एसबीआई द्वारा उनके छात्रों को 6 प्रस्ताव दिए गए.यह टेंडेंसी एमबीए के फील्ड में एक सकारात्मक विकास का संकेत दे रही है.इसे  एमबीए छात्रों को गंभीरता से लेना चाहिए.

सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां अब ब्यूरोक्रेसी व्यवस्था से दूर जा रही हैं और भारत के टॉप बी-स्कूलों से योग्य, प्रशिक्षित और कुशल मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स को उच्च प्रोफ़ाइल पदों पर हायर करने की तलाश में हैं.

9. फर्स्ट टाइम रिक्रूटर्स भी ग्रोथ चाहते हैं

वर्तमान प्लेसमेंट सीजन के दौरान एक सबसे अच्छी टेंडेंसी यह देखने को मिली कि फर्स्ट टाइम रिक्रूटर्स ने भी आईआईएम और अन्य टॉप एमबीए कॉलेजों के मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को हायर करने के लिए प्लेसमेंट सेशन में हिस्सा लिया. इस कदम को छात्रों,इंस्टीट्यूट्स तथा रिक्रूटर्स के लिए वीन- वीन सिचुएशन के रूप में देखा जाना चाहिए. क्योंकि फर्स्ट टाइम रिक्रूटर्स मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में प्लेसमेंट नंबर बनाए रखने में सक्षम हैं.2017 में आईआईएम लखनऊ में 52 फर्स्ट टाइम रिक्रूटर्स ने उसके प्लेसमेंट सेशन में भाग लिया.

इसी तरह, एक्सएलआरआई और एसपीजेआईएमआर में क्रमशः 42 और 30 नई कंपनियों ने पहली बार उसके प्लेसमेंट सेशन में हिस्सा लिया. आईआईएम इंदौर में 20 नए फर्स्ट टाइम रिक्रूटर्स प्लेसमेंट सीजन में आये.

लेकिन एमबीए रिक्रूटमेंट के सम्बन्ध में एक बात यह ध्यान रखना चाहिए कि फर्स्ट टाइम रिक्रूटर्स के अतिरिक्त अच्छी तरह से स्थापित और प्रतिष्ठित कंपनियों का भरमार भी होता है.

जहां तक सैलरी पैकेज का सवाल है तो फर्स्ट टाइम रिक्रूटर्स/ कम्पनियां भी औसतन टॉप एमबीए कॉलेज से पास आउट होने वाले ग्रेजुएट्स को औसतन मिलने वाले सैलरी पैकेज के लगभग बराबर ही पैकेज ऑफर करती हैं. फर्स्ट टाइम रिक्रूटर्स कम्पनियों में एडोब, अल्स्टोम, सिप्ला, कमिन्स और अन्य इसी तरह के ब्रांड शामिल हैं.

10. स्टार्ट-अप मंदी के दौर में है

अंततः हम बात करते हैं गोल्डन वर्ड स्टार्ट-अप की. लगभग सभी एमबीए उम्मीदवार इंटरप्रेन्योर बनने तथा अपनी स्टार्ट-अप कंपनी खोलने का सपना जरुर देखते हैं. पिछले कुछ वर्षों में भारत के स्टार्ट-अप कल्चर विशेष रूप से बैंगलोर और पवई (मुंबई) के अपने कोर इक्युबेशन सेंटर्स में कई असफलताएं देखी हैं. आजकल वेंचर कैप्टलिस्ट दिनोदिन चतुर होते जा रहे हैं और फंड रेजिंग का उन्माद कम होता जा रहा है. इन स्टार्ट–अप कंपनियों द्वारा अच्छी हायरिंग नहीं की जा पा रही है क्योंकि इनकी रिक्रूटमेंट कैपसिटी बहुत मजबूत नहीं है.

भारत के टॉप एमबीए कॉलेजों के प्लेसमेंट सीजन के दौरान बामुश्किल कोई स्टार्ट-अप कंपनी दिखती होगी. भारत का सबसे सफल स्टार्ट-अप कंपनी 'फ्लिपकार्ट' ई-कॉमर्स की विशाल कंपनी अमेज़ॅन की कॉम्पीटीटर बनी हुई है. लेकिन फंड की कमी तथा रेवेन्यू के नए सोर्स के अभाव में कंपनी को इस वर्ष अपने हायरिंग बजट में कटौती करना पड़ा.

यह सफल स्टार्ट-अप की कहानी है जिन्हें भारतीय इको सिस्टम द्वारा ही प्रोड्यूस किया गया था.

ओला कैब्स और पेटीएम ने आईआईएम बैंगलोर से तीन छात्रों को रिक्रूट करके अपनी उपस्थिति का एहसास दिलाया है.उबर और स्विगी ने भी एक एक उम्मीदवार को रिक्रूट किया है.

सारांश

अब एमबीए प्लेसमेंट सीजन 2017 का पूरा मूल्यांकन और एमबीए ग्रेजुएट्स के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आपके समक्ष है. इस साल एमबीए पास आउट छात्रों का भविष्य कैसा रहेगा ? इसका अनुमान आप स्वतः लगा सकते हैं. इसमें कोई संदेह नहीं कि इस आर्टिकल में एमबीए से सम्बन्धित कुछ चिंताजनक बातों को अलार्म के रूप में उठाया गया है ताकि आप उस विषय में सही जानकारी रखें तथा सचेत रहें. लेकिन इसमें ऐसा कोई भी लक्षण नहीं दिखाई दिया है कि एमबीए का जादू अब कम हो गया है तथा यह दम तोड़ रहा है.

किसी भी अन्य एकेडमिक फील्ड में आपको ऊपर लिखित सैलरी पैकेज मिलने की संभावना कम ही है और जहाँ तक एमबीए प्लेसमेंट का सवाल है तो हो सकता है कि आर्थिक मंदी की वजह से इसमें थोड़ा बहुत उतार चढ़ाव देखने को मिले. लेकिन यह निश्चित रूप से सबसे आकर्षक फील्ड में से एक है और मिलेनियल्स अपने समृद्ध करियर के लिए बे हिचक इसका चुनाव कर सकते हैं.

एमबीए प्लेसमेंट तथा एमबीए और करियर से जुड़े अन्य अपडेट्स की जानकारी के लिए Career in MBA, को सबस्क्राइब करें और अधिकतम जानकारी पाएं.

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