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20 अंडर 20 थील फेलोशिप में चयनित प्रथम भारतीय रितेश अग्रवाल से साक्षात्कार

May 29, 2013 17:04 IST

    क्रिएटिविटी का कमाल

    एक आइडिया आपकी दुनिया बदल सकता है। आइडिया हम सभी के दिमाग में आते हैं, लेकिन विनर वही होता है, जो उस पर पहले वर्कआउट करके उसे फंक्शनल बनाता है। बहुत से आइडिया आते हैं, लेकिन दो-तीन ही ग्राउंड रियल्टी पर खरे उतरते हैं। अपने आइडिया को सही दिशा दें, तो वह सक्सेस की इबारत लिख देंगे। थील फेलोशिप दुनिया में बदलाव के लिए बनाई गई है। इसके फाउंडर मिस्टर थील उन 20 सबसे क्रिएटिव युवाओं को सिलेक्ट करते हैं, जिनकी उम्र 20 वर्ष से कम है। स्कॉलरशिप के रूप में सिलेक्टेड यंगस्टर्स को एक लाख डॉलर मिलते हैं, ताकि वे अपने सपने को साकार करें। फेलोशिप देते समय यह भी देखा जाता है कि आइडिया लोगों से किस तरह कनेक्ट हो सकता है। मेरा भी एक सपना है और मैं उस पर काम भी कर रहा हूं। मेरे इसी ड्रीम को थील फाउंडेशन ने आगे बढाने का निर्णय लिया है। वे चाहते हैं कि मैं अपने इस काम को और भी तेजी से करूं। मैं चाहता हूं कि मेरे जैसे और भी भारतीय युवा जनसरोकारों से जुडी चीजों पर काम करें। मैं ऐसे लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार हूं।

    आइडिया से निकलता है आइडिया

    फेसबुक भी माई स्पेस से आइडिया लेकर डेवलप किया गया था, लेकिन वह उससे कहीं ज्यादा हिट और पापुलर हो गया। दूसरों के आइडिया से भी नए आइडिया निकलते हैं। उन्हें लेने में हर्ज नहीं है। हालांकि यह जरूरी है कि हम लिए गए आइडिया में कुछ अपनी नई चीजें डालें और उसे डेवलप करें। सेम टू सेम आइडिया से सक्सेस नहीं मिलेगी। हमें कुछ तो नया करना ही होगा।

    किसे बनाएं मेंटर?

    बिना टारगेट के हम बढेंगे किस तरफ? सक्सेस के लिए किसी को तो मेंटर बनाना ही पडेगा। बच्चा भी दूसरों को देखकर ही बहुत कुछ सीखता है। किसी भी महान हस्ती, जिसने संघर्ष के बल पर सक्सेस की नई इबारत लिखी हो, उसे अपना आइडियल बनाएं। मैं बिल गेट्स और मार्क जुकरबर्ग से इंप्रेस हूं। उन्हीं के जैसा कुछ करना चाहता हूं।

    रियल मीनिंग ऑफ एजुकेशन?

    मेरा बचपन साउथ ओडिशा में बीता। मैं वहां 15 वर्ष की उम्र तक रहा। इंजीनियरिंग के लिए कोटा गया, मैंने देखा अधिकतर लोग अच्छे मॉ‌र्क्स लाना चाहते हैं, सीखना नहीं चाहते। मैं सीखना चाहता था। आज भी मानता हूं कि एजुकेशन का मतलब सीखना है। जो सीखते हैं, वही आगे बढते हैं।

    कैसे मिले सक्सेस?


    इंडियन यूथ अपने पैशन को सही दिशा दें और कम उम्र में ही रिस्क लेने की आदत डालें। लोग तो बहुत कुछ करने को कहेंगे, लेकिन हमें वही करना है जो हम चाहते हैं। आइडिया लाएं, रिस्क लें, काम करें। सक्सेस हाथ आ जाएगी। निगेटिव थॉट मन में न लाएं। अपने आइडिया और आशावदी विचारों से निगेटिव थॉट रखने वालों को राह बदलने के लिए प्रेरित करें।

    फेल्योर से सक्सेस

    जी हां, सक्सेस कई बार असफलता से ही सामने आती है। सीखने का बेस्ट तरीका यही है कि अगर असफल हो जाएं, तो गंभीरता से सोचें कि हमसे कमी कहां रह गई है। इन कमियों को दूर करने की कोशिश ईमानदारी से करें। नए आइडिया माइंड में आएंगे, जो हमें सक्सेस की ओर ले जाने का काम करेंगे।

    प्रोफाइल

    ओरेवल कंपनी के फाउंडर और कॉलेज ड्रॉपआउट 19 साल के यंगस्टर रितेश अग्रवाल को थील फाउंडेशन ने साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स की स्टडी करने और एंटरप्रेन्योरल स्किल्स सीखने का चांस दिया है। वह पहले भारतीय हैं, जिन्हें थील फाउंडेशन एक लाख डॉलर यानी तकरीबन 55 लाख रुपये की रकम देगा। साथ ही उन्हें फाउंडेशन से जुडे इंडस्ट्रियलिस्ट, इन्वेस्टर्स, साइंटिस्ट आदि से सलाह लेने के लिए मेंबरशिप भी दी जाएगी। फाउंडेशन की योजना है कि थील फेलो के रूप में ये आगे आ रही इकोनॉमी के लिए लो कास्ट पर मजबूत आवास मुहैया कराने की टेक्नोलॉजी का प्रयोग करेंगे। इसकी शुरुआत भारत से ही होगी।

     

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