Search

भारतीय बैंकिंग इंडस्ट्री की रोल मॉडल: अरुंधति भट्टाचार्य

एक अच्छा नेता भविष्य देख सकता है और अपने अनुयायियों को जितना संभव हो सके उतनी आसानी और बिना परेशानी के अपनाने में भी मदद करता है. एसबीआई की वर्तमान अध्यक्ष ने भी बिल्कुल ऐसा ही किया, उनके पास विजन है और उनमें उसे प्रयोग में लाने की हिम्मत भी है.

May 8, 2017 11:49 IST
facebook IconTwitter IconWhatsapp Icon

Arundhati Bhattacharya देश के सबसे बड़े व्यावसायिक ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक की पहली महिला अध्यक्ष बनने के बाद सुर्खियों में आईं थी अरुंधति भट्टाचार्य. लेकिन यही वह बात नहीं है जो आज तक मुख्य रूप से पुरुषों का गढ़ कहे जाने वाले इंडस्ट्री में उन्हें अलग बनाता है. बैंकिंग के लिए भविष्य के विजन ने उन्हें दूसरों से अलग बनाया है. उन्होंने अतीत के मानदंडों का अनुसरण नहीं किया बल्कि भविष्य में अधिक से अधिक प्रतिष्ठा हेतु रास्ते बनाए.

अरुंधति भट्टाचार्यः महान व्यक्तित्व

208 वर्ष पुराने ऋणदाता की पहली महिला बॉस ने कोलकाता के जाधवपुर विश्वविद्यालय  से अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रैजुएशन किया है. जैसा कि वे बताती हैं, उनके शिक्षक हमेशा यही चाहते थे कि वे कुछ ऐसा करें जिसमें उनकी प्रतिभा का और रचनात्मकता का उपयोग हो सके. इसलिए, बैंकिंग कभी भी उनका लक्ष्य नहीं था. लेकिन 1977 में, जब उन्होंने देखा कि उनके सभी मित्र एसबीआई पीओ का एप्लीकेशन फॉर्म भर रहे हैं, तो उन्होंने भी भर दिया और अंतिम सूची में जगह बनाई. इसके बाद, उन्होंने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और भारत में सबसे प्रतिष्ठित बैंक की सर्वोच्च बॉस बनीं.

एसबीआई को नई उंचाईयों पर ले गईं: नए क्षेत्रों को अपनाया

एसबीआई की अध्यक्ष बनने के बाद अरुंधति भट्टाचार्य के लिए काम खत्म नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने एसबीआई को दुनिया के सबसे अच्छे बैंकों में से एक बनाने के लिए अपने दो वर्ष के कार्यकाल में बहुत प्रयास किए और अन्य सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक के एसबीआई में नए विलय प्रस्ताव के  साथ एसबीआई शीर्ष 50 अंतरराष्ट्रीय बैंकों की सूची में शामिल हो जाएगा. इसलिए, क्या चीजें हैं जो उन्हें अलग बनाती हैं?

  • डिजिटल क्रांतिः एसबीआई की वर्तमान बॉस की एक चीज जो सबसे अच्छी है वह है उनका भविष्य का विजन. वे समझती हैं कि डिजिटल बैंकिंग भविष्य की बैंकिंग है और इसलिए, उन्होंने SBIiNTOUCH, SBI Buddy जैसी कई डिजिटल बैंकिंग उत्पादों की शुरुआत की.
  • लागत पर नियंत्रण लेकिन तर्कसंगतता के साथः उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खर्चों को कम किया जाना चाहिए लेकिन यह बैंक के लिए व्यापार बढ़ाने की लागत पर नहीं होना चाहिए. उन्होंने इस बात का जिक्र किया है कि बैंक अपने खर्चों में कटौती करे लेकिन सिर्फ अनावश्यक खर्चों में.
  • महत्वाकांक्षी महिलाओं की रोल मॉडलः दुनिया के वित्त क्षेत्र में सबसे शक्तिशाली महिलाओं की फोर्ब्स सूची में शीर्ष 10 में शामिल की गईं और दुनिया की शीर्ष 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में 25वें पायदान पर रहीं, अरुंधति भट्टाचार्य आज की महत्वाकांक्षी युवा महिलाओं के लिए बिल्कुल सही रोल मॉडल हैं.
  • महिला कर्मचारियों के लाभ के लिए कई योजनाएं चलाईं: उन्होंने महिला कर्मचारियों के लाभ के लिए कई योजनाएं चलाईं हैं जैसे– पढ़ाई के लिए दो वर्ष अध्ययन प्रोत्साहन अवकाश, कार्यालय आने –जाने का फ्लेक्सी टाइमिंग, परिवार वालों के निवास स्थान के करीबी स्थान पर स्थानांतरण आदि. एसबीआई में महाप्रबंधक स्तर पर 10 से अधिक महिलाएं हैं.
  • मशहूर "लाला–फीताशाही" को कम करनाः बैंक के इतिहास में यह सबसे कठिन कार्य है जिसे वे हासिल कर चुकी है. उन्होंने अपने प्रबंधकों और डीजीएम को अपने विवेक के आधार पर फैसले लेने का अधिकार दिया है.
  • एक स्पष्ट विजन का होनाः अन्य बैंकरों की तुलना करने पर यही वह बात है जो उन्हें दूसरों से अलग और अनूठा बनाती है. अगले दशक में बैंकिंग कैसी होगी, इसे वह स्पष्ट रूप से देख सकती है और उसी अनुसार फैसले करती हैं. प्रोबेशनरी अधिकारियों को दिए जाने वाले स्मार्ट (SMART) पैकेज, कर्मचारियों के साथ लाभ को साझा करना कुछ ऐसे विचार हैं जो सार्वजनिक क्षेत्र के लिए समय से आगे की पहल है लेकिन उन्होंने उसकी कल्पना पहले ही कर ली है.
  • उत्सुक व्यावसायिक कौशल का होनाः यही वह चीज है जो एसबीआई कैपिटल्स की एमडी–सीईओ के कार्यकाल और अपने अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट्स में उन्होंने सीखी थी. वे रणनीतिक विलयों और अधिग्रहणों के महत्व को समझती हैं और अमेजन, फिल्पकार्ट आदि जैसी कंपनियों के साथ टाई–अप से यह स्पष्ट है.

एसबीआई की वर्तमान अध्यक्ष के पास विजन है और उनमें उसे प्रयोग में लाने की हिम्मत भी है. यही उन्हें दूसरों से अलग बनाता है. महिला होने के नाते, मुंबई में एसबीआई के प्रधान कार्यालय में कोने के प्रतिष्ठित कमरे पर कब्जा करना आसान नहीं है लेकिन उन्होंने इससे भी कहीं अधिक कर के दिखायाः एक बेहतर एसबीआई के लिए, आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर बैंकिंग अनुभव के लिए. सच में, वे न सिर्फ महिलाओं के लिए बल्कि समग्रता में देखें तो नेताओं के लिए भी रोल मॉडल हैं.

भारत की सबसे शक्तिशाली महिला बैंकर्स

Related Stories