Search

CBSE 10th हिंदी (A) बोर्ड परीक्षा 2020: क्षितिज पुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

CBSE 10th बोर्ड 2020 हिंदी कोर्स A की परीक्षा कल होने जा रही है। इस आर्टिकल में कोर्स A की क्षितिज बुक के हर पाठ से महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर को  पढ़कर अपने रिविज़न को सरल बनाये।

Feb 28, 2020 10:24 IST
facebook IconTwitter IconWhatsapp Icon
क्षितिज पुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
क्षितिज पुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

 CBSE 10th बोर्ड हिंदी कोर्स A की परीक्षा 29 फरवरी को होने जा रही है। इस परीक्षा को देने वाले सभी विद्यार्थी इस समय अपनी पूरी तैयारी से सिलेबस का रिविज़न कर रहे है। आपकी लास्ट मिनट रिविज़न में मदद के लिए हमने इस आर्टिकल में हिंदी कोर्स A की क्षितिज पुस्तक के सभी पाठो से इम्पोर्टेन्ट क्वेश्चन और आंसर दिए है।

Chapter 1 : सूरदास

प्रश्न 1 गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?

उत्तर: गोपियों के अनुसार राजा का धर्म हर तरह से अपनी प्रजा की रक्षा करना होता है तथा नीति से राजधर्म का पालन करना होता है। एक राजा तभी अच्छा राजा कहलाता है जब वह अनीति का साथ न देकर नीति से प्रजा पर शासन करे।

प्रश्न 2 उद्धव ज्ञानी थे, नीति की बातें जानते थे; गोपियों के पास ऐसी कौन-सी शक्ति थी जो उनके वाक्चातुर्य में मुखिरत हो उठी?

उत्तर: गोपियों के पास श्री कृष्ण के प्रति सच्चे प्रेम और भक्ति की शक्ति थी जिस कारण उन्होंने उद्धव जैसे ज्ञानी तथा नीतिज्ञ को भी अपने वाक्चातुर्य से हरा दिया।

प्रश्न 3 गोपियों को कृष्ण में ऐसे कौन-से परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं?

उत्तर: गोपियों के अनुसार श्री कृष्ण द्वारका जाकर राजनीति के विद्वान हो गए हैं और अब उनके साथ राजनीति का खेल खेल रहे हैं। उनके अनुसार श्री कृष्ण पहले से ही चतुर थे और अब ग्रंथो का ज्ञान प्राप्त करके औऱ भी चतुर बन गए हैं। द्वारका जाकर श्री कृष्ण का मन बदल गया है, जिसके कारण उनहोंने गोपियों से मिलने के स्थान पर योग की शिक्षा देने के लिए उद्धव को भेज दिया है। श्री कृष्ण के इस कदम से उनका हृदय बहुत आहत हुआ है अब वह अपने को श्री कृष्ण के प्रेम से वापस लेना चाहती हैं। 

Chapter 2 : तुलसीदास - राम लक्ष्मण परशुराम संवाद

प्रश्न 1 लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई?

उत्तर : लक्ष्मण के अनुसार वीर योद्धा की निम्नलिखित विशेषताएँ है 

1. वीर पुरुष स्वयं अपनी वीरता का बखान नहीं करते। उनका वीरतापूर्ण कार्य ही स्वयं वीरों का बखान करता है।

2. वीर पुरुष स्वयं पर कभी अभिमान नहीं करते। 

3. वीर पुरुष किसी के विरुद्ध गलत शब्दों का प्रयोग नहीं करते। वह सभी से आदर पुर्वक पेश आते हैं।

4. वीर पुरुष दीन-हीन, ब्राह्मण व गायों, दुर्बल व्यक्तियों पर अपनी वीरता का प्रदर्शन नहीं करते हैं।

5. किसी के ललकारने पर वीर पुरुष कभी पीछे कदम नहीं रखते और निडरता पूर्वक उसका जवाब देते हैं।

प्रश्न 2 परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?

उत्तर: परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने पर निम्नलिखित तर्क दिए :

1. श्री राम को तो ये धनुष, नए धनुष के समान लगा।

2. श्री राम ने धनुष तोड़ा नहीं बस उनके छूते ही धनुष स्वत: टूट गया।

3.  इस धनुष को तोड़ते हुए उन्होंने किसी लाभ व हानि के विषय में नहीं सोचा था।

4. हमें तो यह असाधारण शिव धुनष साधारण धनुष की भाँति लगा।

प्रश्न 3 अवधी भाषा आज किन-किन क्षेत्रों में बोली जाती है?

उत्तर: अवधी भाषा उत्तर प्रदेश के कुछ इलाके जैसे की -गोरखपुर, गोंडा, बलिया, अयोध्या आदि क्षेत्र में बोली जाती है। 

Chapter 3 : देव

( ये पाठ केवल पढने के लिए है)

Chapter 4 : जयशंकर प्रसाद

(ये पाठ केवल पढने के लिए है)

Chapter 5 : सूर्यकांत त्रिपाठी निराला - उत्साह

प्रश्न 1 कवि बादल से फुहाररिमझिम या बरसने के स्थान पर 'गरजनेके लिए कहता हैक्यों?

उत्तर: कवि ने बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर 'गरजने' के लिए कहता है; क्योंकि 'गरजना' विद्रोह का प्रतीक है। कवि ने बादल के गरजने के माध्यम से कविता में नूतन विद्रोह का ऐलान किया है।

प्रश्न 2 कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?

उत्तर: फागुन का मौसम और दृश्य अत्यंत सुन्दर एवं मनमोहक होता है। चारों तरफ का दृश्य अत्यंत  हरा-भरा दिख रहा है। पेड़ों पर कहीं हरी तो कही लाल पत्तियाँ हैं, फूलों की मंद-मंद खुश्बू हृदय को मोहित कर रही है। इसीलिए कवि की आँख फागुन की सुंदरता से हट नहीं रही है।

प्रश्न 3 फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?

उत्तर: फागुन में वर्षा होती है जिससे बारिश की बूँदें वातावरण को स्वच्छ कर देती हैं और वातावरण सुंदर दिखने लगता है। आसमान साफ़ सुथरा लगता है, वातावरण शीतल तथा शांत हो जाता है, प्रकृति में चारों ओर हरियाली ही हरियाली होती है। इन्हीं विशेषताओं के कारण फागुन का मौसम अन्य सभी ऋतुओं से भिन्न होता है।

Chapter 6 : नागार्जुन - येह दन्तुरित मुस्काम/ फसल

 प्रश्न 1 बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर अत्यंत गहरा प्रभाव पड़ता है। कवि के अनुसार बच्चे की मुसकान बहुत मनमोहक है जो मृत शरीर में भी प्राण डाल दे।

 प्रश्न 2 मुसकान और क्रोध भिन्न-भिन्न भाव हैं। इनकी उपस्थिति से बने वातावरण की भिन्नता का चित्रण कीजिए।

उत्तर: मुसकान और क्रोध मानव के दो अलग-अलग स्वभावो के रुप हैं, जो एक दूसरे से भिन्न हैं। इनसे वातावरण भी प्रभावित होता है - एक तरफ निश्छल तथा प्रेम पूर्ण मुसकान किसी के भी हृदय को मोह सकती है, यह किसी का भी क्रोध कम करने में सक्षम है तथा यह मन की प्रसन्नता का प्रतीक है। वहीँ क्रोध व्यक्ति के मन में चल रहे असंतोष की भावना है।

प्रश्न 3 कवि के अनुसार फसल क्या है?

उत्तर: कवि के अनुसार फसल अनेक नदियों के पानी का जादू, अनेक लोगों के हाथों के स्पर्श की गरिमा तथा खेतों की मिट्टी के गुण का एकत्रित परिणाम है। इसका अर्थात ये है की फसल किसी एक की मेहनत का फल नहीं बल्कि इसमें सभी का योगदान सम्मिलित है।

Chapter 7 : गिरिजाकुमार माथुर - छाया मत छूना

प्रश्न 1 'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेयह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?

उत्तर: निमंलिखित पंक्तियों से कवी का ये भाव झलकता है :

क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?

जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण,

प्रश्न 2 कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?

उत्तर: यथार्थ मनुष्य जीवन के संघर्षों का एक कड़वा सच है। बीते समय की स्मृतियों को याद करते रहना और अपने वर्तमान से अंजान हो जाना मात्र समय की बर्बादी है। जीवन की कठिनाइयों को यथार्थ भाव से स्वीकार कर उन्हें अनदेखा न करना और सकारात्मक भाव से उसका सामना करना चाहिए। तभी मनुष्य स्वयं की भलाई की ओर एक कदम उठाया सकता है, अन्यथा सब मिथ्या ही है। इसलिए कवि ने यथार्थ के पूजन की बात कही है।

प्रश्न 3 छायाशब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ हैकवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?

उत्तर: छाया शब्द से तात्पर्य जीवन की बीत चुकी सुखद स्मृतियाँ हैं। कवि के अनुसार हमारे जीवन में सुख व दुख कभी एक समान नहीं रहता परन्तु उनकी अच्छी और बुरी यादें हमारे मस्तिष्क में स्मृति के रुप में हमेशा रहती हैं। अपने वर्तमान के कठिन पलों को बीते हुए पलों की स्मृति के साथ जोड़ना हमारे लिए बहुत कष्टपूर्ण हो सकता है। वह मधुर स्मृति हमें कमज़ोर बनाकर हमारे दुख को और भी कष्टदायक बना देती है। इसलिए हमें उन सभी  स्मृतियों को भूलकर अपने वर्तमान की सच्चाई को यथार्थ भाव से स्वीकार करना चाहिए।

Chapter 8 : ऋतुराज - कन्यादान

प्रश्न 1 आपकी दृष्टि में कन्या के साथ दान की बात करना कहाँ तक उचित है?

उत्तर: कन्या अपने माता पिता के लिए कोई वस्तु नहीं है बल्कि एक प्यारा सम्बन्ध  है। दान वस्तुओं का किया जाता है। बेटियों के अंदर भावनाएँ और अस्तित्व होता है। विवाह के बाद उसका सम्बन्ध नए लोगों से जुड़ता है परन्तु पुराने रिश्तों को छोड़ देना दु:खदायक होता है। इसलिए: कन्या का दान कर उसे त्याग देना उचित नहीं है।

प्रश्न 2 आपके विचार से माँ ने ऐसा क्यों कहा कि लड़की होना पर लड़की जैसी मत दिखाई देना?

उत्तर: हमारे समाज में लड़की की कोमलता को उसका सबसे बड़ा गुण माना जाता है, परन्तु लड़की की माँ उसे लड़की जैसा ना दिखने अर्थात् अपनी कमज़ोरी को प्रकट ना करने से सावधान करती है क्योंकि कमज़ोर लड़कियों को अक्सर शोषण का शिकार होना पड़ता है।

प्रश्न 3 माँ को अपनी बेटी 'अंतिम पूँजीक्यों लग रही थी?

उत्तर: माँ और बेटी का सम्बन्ध मित्रतापूर्ण होता है। इनका सम्बन्ध सभी सम्बन्धों से अलग  होता है। माँ, बेटी के साथ अपना सुख-दु:ख बाँट लेती है। बेटी उसके खुशियों और कष्टों का सहारा होती है। बेटी के चले जाने के बाद माँ के जीवन में खालीपन आ जाता। माँ बचपन से ही अपनी बेटी का पालन-पोषण एक मूल्यवान सम्पत्ति की तरह करती है। इसलिए माँ को उसकी बेटी अंतिम पूँजी लगती है क्योकि उसके चले जाने के बाद माँ के पास मुस्कुराने और दुःख बाटने का कोई सहारा नहीं रहेगा।

Chapter 9 : मंगलेश डबराल - संगतकार

प्रश्न 1 सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाता है तब उसे सहयोगी किस तरह सँभालते हैं?

उत्तर: सफलता प्राप्त करने के मार्ग पर यदि व्यक्ति लड़खड़ाने लगता है तो उसके सहयोगी अपने सुझावों द्वारा उसके कदमों को नई दिशा देते हैं। वह अपने मनोबल द्वारा इसके मनोबल को शांत कर उसका मार्गदर्शन करते हैं। उसकी खोई आत्मशक्ति को जगा कर उसे फिर से उठने की हिम्मत देते हैं। यही हिम्मत उसकी प्रेरणा स्रोत बन कर यूज़ सफलता तक पहुंचती है।

प्रश्न 2 संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं?

उत्तर: 1. गायन के समय यदि मुख्य गायक-गायिका अपनी लय को लाँघकर भटक जाते हैं तो संगतकार उस भटकाव को सँभालता है।

2. यदि गायन के समय गायक-गायिका का स्वर भारी हो तो संगतकार अपनी आवाज़ से उसमें मधुरता भर देता है।

3. तारसप्तक के गायन के समय यदि गायक-गायिका का स्तर धीमा होने लगता है तो संगतकार गायन में अपने स्तर को मिलाकर गति को सुर का साथ देता है।

प्रश्न 3 किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। कोई एक उदाहरण देकर इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर: किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों के संघर्ष में अनेक लोग तरह-तरह से योगदान देते हैं। जैसे प्रसिद्ध गायक-गायिका जब प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं तो उसमें एक संगीत निर्देशक, गीतकार, तकनीकी विशेषज्ञ, वाद्य यंत्र बजाने वाले, संगतकार, निर्माता का महत्वपूर्ण हाथ होता है। अगर इन सब लोगों का सहयोग ना मिले तो एक गायक-गायिका अपनी प्रतिभा का  प्रदर्शन नहीं कर सकते।

 Chapter 10 स्वयं प्रकाश - नेताजी का चश्मा

प्रश्न 1 सेनानी  होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?

उत्तर: चश्मेवाला एक देशभक्त नागरिक था। उसके मन में देश के वीर जवानों के प्रति अत्यंत सम्मान था। इसलिए लोग उसे कैप्टन कहते थे।

प्रश्न 2 "बार-बार सोचतेक्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।"

उत्तर: देशभक्त नेताओं ने देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपनी हर कोशिश की तथा अपना सर्वस्व देश के प्रति समर्पित कर दिया। आज हमारा देश उन्हीं के कारण आज़ाद हुआ है। यदि किसी के मन में ऐसे देशभक्तों के लिए सम्मान की भावना नहीं है, वे उनकी देशभक्ति पर हँसते हैं तो यह एक निराशाजनक स्थिति है। ऐसे लोग सिर्फ़ अपने बारे में सोचते हैं और स्वार्थी स्वाभाव के होते है। लेखक ऐसे लोगों पर अपना क्षोभ व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 3 निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं -

1) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।

2) कैप्ट बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।

उत्तर: 1)

(क) हालदार साहब देशभक्त थे।

(ख) नेताजी के रोज़ बदलते चश्मे को देखने के लिए वे उत्सुक थे।

(ग) नेताजी को पहनाए गए चश्मे के माध्यम से वे कैप्टन की देशभक्ति देखकर खुश होते थे।

2 (क) नेताजी के लिए उसके मन में सम्मान की भावना थी। इसलिए नेताजी को चश्मे के बिना देखकर  उसे अच्छा नहीं लगता था।

(ख) वह एक देशभक्त था।

(ग) आर्थिक गरीबी के कारण वह नेताजी को स्थाई रुप से चश्मा नहीं पहना पाता था।

CBSE 10th हिंदी (B) बोर्ड परीक्षा 2020: संचयन (भाग 2) के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

Chapter 11 : रामवृक्ष बेनीपुरी - बालगोबिन भगत

प्रश्न 1 भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?

उत्तर: भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले छोड़कर नहीं जाना चाहती थी क्योंकि भगत के बुढ़ापे का वह एकमात्र सहारा थी। उसके चले जाने के बाद भगत की देखभाल करने के लिए कोई और नहीं था।

प्रश्न 2 भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त कीं?

उत्तर: बेटे की मृत्यु पर भगत ने उसके मृत शरीर को एक चटाई पर लिटा कर उसे सफे़द चादर से ढक दिया और गीत गाकर अपनी भावनाएँ व्यक्त की। उनके अनुसार उनके पुत्र की  आत्मा परमात्मा के पास चली गई, विरहनि अपने प्रेमी से जा मिली। यह आनंद की बात है, इससे दु:खी नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 3 बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?

उत्तर: वृद्ध होते हुए भी उनकी स्फूर्ति में कोई कमी नहीं थी। सर्दी के मौसम में भी, भरे बादलों वाले भादों की आधी रात में भी वे भोर में सबसे पहले उठकर गाँव से दो मील दूर स्थित गंगा स्नान करने जाते थे, खेतों में अकेले ही खेती करते तथा गीत गाते रहते। विपरीत परिस्थिति होने के बाद भी उनकी दिनचर्या में कोई परिवर्तन नहीं आता था। एक वृद्ध में अपने कार्य के प्रति इतनी सजगता को देखकर लोग दंग रह जाते थे।

Chapter 12 : यशपाल - लखनवी अंदाज़

प्रश्न 1 लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?

उत्तर: लेखक के अचानक डिब्बे में कूद पड़ने से नवाब-साहब की आँखों में उनके एकांत चिंतन में विघ्न पड़ जाने का असंतोष दिखाई दिया। लेखक के आने पर नवाब साहब ने नयी संगति के लिए कोई विशेष उत्साह नहीं दिखाया। इससे लेखक को स्वयं के प्रति नवाब साहब की उदासीनता का आभास हुआ।

प्रश्न 2 बिना विचारघटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है। यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर: अपने इस कथन के द्वारा लेखक ने नई कहानी के दौर के लेखकों पर व्यंग किया है। किसी भी कहानी की रचना उसके आवश्यक घटनाकर्म, पात्र आदि के बिना अधूरी होती है। घटना तथा कथावस्तु कहानी को आगे बढ़ाते हैं, पात्रों द्वारा संवाद कहे जाते हैं। ये कहानी के लिए आवश्यक तत्व हैं।

प्रश्न 3 क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है?

उत्तर: सनक के दो रुप होते हैं - सकारात्मक और नकारात्मक। नकारात्मक सनक किसी व्यक्ति को समाज में हँसी का पात्र बना देता है वहीं सनक का सकारात्मक पक्ष उसे रातों-रात प्रसिद्धी प्राप्त करा देता है।

Chapter 13 : सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - मानवीय करुना की दिव्य चमक

प्रश्न 1 फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?

उत्तर: देवदार का वृक्ष आकार में लंबा-चौड़ा होता है तथा छायादार भी होता है। फ़ादर बुल्के का व्यक्तित्व भी देवदार के वृक्ष जैसा ही है। जिस प्रकार देवदार का वृक्ष विशाल होने के कारण लोगों को छाया देकर शीतलता प्रदान करता है उसी प्रकार फ़ादर बुल्के भी अपने शरण में आए लोगों को आश्रय देते थे। वह उनके दु:ख के समय में सांत्वना के वचनों द्वारा उनको शीतलता प्रदान करते थे।

प्रश्न 2 लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमकक्यों कहा है?

उत्तर: फ़ादर बुल्के मानवीय करुणा की प्रतिमा थे। उनके मन में सभी के लिए प्रेम भाव था जो कि उनके चेहरे पर स्पष्ट दिखाई देता था। आपदा की घड़ी में वे सांत्वना के दो बोल द्वारा किसी भी मनुष्य का धीरज बंधा देते थे। किसी भी मानव का दु:ख उनसे देखा नहीं जाता था। उसके कष्ट दूर करने के लिए वे यथाशक्ति प्रयास करते थे।

प्रश्न 3  फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है। इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए 

उत्तर: फ़ादर को याद करके दु:ख होता है और यह दु:ख एक उदास शांत संगीत की तरह हृदय पर छाप छोड़ जाता है। उनको याद कर मन दु:खी हो जाता है।

Chapter 14 : मन्नू भंडारी - एक कहानी यह भी

प्रश्न 1 इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?

उत्तर: 'भटियारखाना' शब्द भट्टी (चूल्हा) शब्द से बना है। लेखिका के पिता का मानना था कि चूल्हे के संपर्क में आकर उनकी बेटी की प्रतिभा नष्ट हो जाएगी। रोटी पकाने से उसकी देश तथा समाज की समझ विकसित नहीं हो पाएगी। इसलिए लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर संबोधित किया।

प्रश्न 2 वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को  अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?

उत्तर: लेखिका के कॉलिज के दिनों में एक बार उनके पिता जी के नाम प्रिंसिपल का पत्र आया जिसमे उनकी पुत्री की गतिविधियों के कारण उसे उचित दंड दिया जाए या न दिया जाए के सन्दर्भ में बाते लिखी गयी थी। इस पर लेखिका के पिताजी को लगा जैसे लेखिका ने कोई ऐसा अपराध किया है जिससे ख़ानदान की प्रतिष्ठा खराब हो सकती है। इस कारण वे गुस्से में प्रिंसिपल से मिलने गए। परन्तु प्रिंसिपल से मिलने और असली अपराध के पता चलने पर लेखिका के पिता को अपनी बेटी से कोई शिकायत नहीं रही। पिताजी के व्यवहार में परिवर्तन देख लेखिका को न तो अपने आँखों पर भरोसा हुआ और न ही अपने कानों पर।

प्रश्न 3 लेखिका  ने  बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।

उत्तर: उस समय में लेखिका को खेलने तथा पढ़ने की आज़ादी तो थी लेकिन अपने पिता द्वारा निर्धारित गाँव की सीमा तक ही। लेकिन आज के समय में स्थिति काफी बदल गई है। आज लड़कियाँ एक शहर से दूसरे शहर शिक्षा ग्रहण करने और काम करने के लिए जाती हैं। सिर्फ दुसरे शहर नहीं  बल्कि आज भारतीय महिलाएँ विदेशों तक और अंतरिक्ष जाकर दुनिया में अपने भारत का नाम रौशन कर रही हैं। परन्तु आज भी कुछ गाँव और परिवारमें लडकियों को बहार जाने के स्वंतत्रता नहीं हैं।

Chapter 15 : महावीर प्रसाद द्विवेदी - स्त्री शिक्षा के विरोधी

( ये पाठ केवल पढने के लिए है)

Chapter 16 : यतीन्द्र मिश्र - नोबतखाने में इबादत

प्रश्न 1 सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय हैशहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाहकी उपाधि क्यों दी गई होगी?

उत्तर: अरब देशो में फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य जिसमें नाड़ी (नरकट या रीड) होती है, को 'सुषिर-वाद्य' कहते हैं। शहनाई भी एक सुषिर वाद्य है। यह अन्य सभी सुषिर वाद्यों में श्रेष्ठ है। इसलिए शहनाई को 'सुषिर-वाद्यों' में शाह' कहा जाता है।

प्रश्न 2 काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?

उत्तर: काशी से बहुत सी परंपराएँ लुप्त हो रही है। संगीत, साहित्य और नृत्य की परंपरा में भी धीरे-धीरे कमी आ गई है। इन सब के साथ साथ अब काशी से धर्म की प्रतिष्ठा भी लुप्त होती जा रही है। वहाँ हिंदु और मुसलमानों में पहले जैसा भाईचारा नहीं है। पहले काशी खानपान की चीज़ों के लिए विख्यात हुआ करता था। परन्तु अब उनमें परिवर्तन हुए हैं। काशी की इन सभी लुप्त होती परंपराओं के कारण बिस्मिल्ला खाँ दु:खी थे।

प्रश्न 3 'मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।' का आश्रय स्पष्ट कीजिये

उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ पाँचों वक्त नमाज़ के बाद खुदा से सच्चा सुर पाने की प्रार्थना करते थे। वे खुदा से दुआ करते थे की उनके सुर में इतनी ताकत हो कि उसे सुनने वालों की आँखों से सच्चे मोती की तरह आँसू निकल जाए। और यही उनके सुर की सच्ची कामयाबी होगी।

Chapter 17 : भन्दत आनंद कोसल्यायन - संस्कृति

( ये पाठ केवल पढने के लिए है)

CBSE 10th हिंदी (A) बोर्ड परीक्षा 2020: कृतिका पुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Related Stories