ये गलतियां आपको IAS बनने से रोक सकती हैं

Sep 7, 2018 11:19 IST
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Common Mistakes in the IAS Preparation
Common Mistakes in the IAS Preparation

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में निस्संदेह कड़ी मेहनत सबसे महत्वपूर्ण होता है। जब मेहनत स्मार्ट तरीके से की जाए तो आपके प्रयास अधिक अच्छा फल दे सकते हैं। तैयारी करने की रणनीति, किस पर अधिक मेहनत करना है, क्या अनावश्यक है, किसे धैर्यपूर्वक तैयार करना है, किसे काफी विस्तार से विश्लेषित करना है, विषयों के बीच समय को किस अनुपात में बांटना है आदि भी कड़ी मेहनत के अलावा समान रूप से महत्व रखते हैं। इस संदर्भ में निम्नलिखित कुछ संभावित गतलियों को आईएएस उम्मदीवारों को करने से बचना चाहिए।

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कई किताबों से पढ़ना

सिविल सेवा परीक्षा के लिए बाजार में अध्ययन सामग्रियों और किताबों की भरभार ने सभी सीमाओं को पार कर लिया है। प्रत्येक विषय पर सैंकड़ों किताबें और नोट्स उपलब्ध हैं। इसके अलावा इनमें से ज्यादातर किताबें सभी विषयों और उप–विषयों को कवर करती हैं। इसलिए उम्मीदवारों के लिए सही किताब को चुनना बहुत मुश्किल हो जाता है। वास्तव में कई छात्र एक ही विषय के लिए कई किताबों से पढ़ाई करने लगते हैं।

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यह स्पष्ट कर दें कि यूपीएससी उम्मीदवारों से विषय के विश्लेषण की भी अपेक्षा करता है सिर्फ तथ्यों के स्पष्टीकरण भर की मांग नहीं करता । तथ्यों, स्थापित विचारों और संबंधित आंकड़ों वाली किताबें या पत्रिकाएं इनकी पुष्टि करने वाली होती हैं। इसलिए किसी विषय विशेष की तुलना में जानकारी पर पकड़ बनाने के लिए किताबें पढ़ना अनिवार्य है। हालांकि तथ्यों को जमा करने की बजाय  उनका विश्लेषण और व्याख्या करना अधिक महत्वपूर्ण होता है। एक ही विषय पर एक से अधिक किताबों को पढ़ने से उस विषय पर आपकी जानकारी बढ़ेगी लेकिन इससे आप में स्वतः अपने नजरिये से उस विषय का विश्लेषण करने की क्षमता पैदा नहीं हो सकती।  इसलिए एक ही विषय पर कई किताबों को पढ़ना सिर्फ समय का अकुशल उपयोग कहा जाएगा। एक विषय पर कई किताबें पढ़ने की बजाय एक ही किताब को कई बार पढ़ने की सलाह दी जाती है।

 

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लेखन अभ्यास के बिना पढ़ना

सिविल सेवा की परीक्षा को सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की मां माना जाता है और इसलिए ढेर सारी किताबों को पढ़ना उचित माना जाता है। किताबों की संख्या और विविधता बहुत अधिक है। यह मायने नहीं रखता कि कोई कितनी किताबें पढ़ता है, बहुत सारी किताबें पढ़ने के बावजूद भी सब्जेक्ट पर पकड़ की कमी महसूस की जाती है और इसलिए उम्मीदवार और अधिक पढ़ाई एवं पुनरावृत्ति की राह पर चल पड़ते हैं। पढ़ाई करना सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का सिर्फ एक हिस्सा है। पढ़ाई उम्मीदवार को तथ्यों और जानकारियों को इक्ट्ठा करने में सक्षम बनाता है। सिविल सेवा परीक्षा सिर्फ ज्ञान की परीक्षा नहीं होती। यह उम्मीदवार के सोचने की क्षमता, विश्लेषण करने की क्षमता, समझने की क्षमता, तर्क क्षमता और परीक्षा कक्ष में समय प्रबंधन की क्षमता की भी जांच करता है। यदि बिना लेखन अभ्यास के एक उम्मीदवार काफी पढ़ भी ले तब भी परीक्षा में बहुत बुरा प्रदर्शन कर सकता है।

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उचित जानकारी प्राप्त करने के बाद, सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने के लिए उसका इस्तेमाल किस प्रकार करें, यह सीखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक परीक्षा से पहले किसी भी उम्मीदवार को बहुवैकल्पिक प्रश्नों का काफी अभ्यास कर लेना चाहिए क्योंकि इसमें सिर्फ बहुवैकल्पिक प्रश्न ही पूछे जाते हैं। एक उम्मीदवार को अपनी जानकारी का उपयोग करने के अलावा विकल्पों में से छांटने, प्रश्न के कथन से विकल्पों को संबद्ध करने, कई विकल्पों में से प्रश्न को सम्बद्ध करते हुए और ऐसे ही अन्य उपायों के जरिए बहुवैकल्पिक प्रश्नों को हल करने में निपुण होना चाहिए।

मुख्य परीक्षा में प्रति घंटे 1500 शब्दों से भी अधिक के औसत से 27 घंटों तक लिखना होता है। एक उम्मीदवार के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि लेखन कौशल को विकसित करने के लिए उत्तर लिखने का अभ्यास करें । अच्छे लेखन कौशल के साथ पढ़ने में अच्छा होना उम्मीदवार को सिर्फ पढ़ने वाले किसी भी उम्मीदवार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम बनाएगा।

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अखबारों पर बहुत अधिक निर्भरता

निस्संदेह अखबार सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की रीढ़ होते हैं। यह करेंट अफेयर्स, विचारों और विषय के विश्लेषण का महत्वपूर्ण स्रोत है। प्रारंभिक परीक्षा का बड़ा हिस्सा और मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन पेपर 2 और 3 का काफी हिस्सा सीधे– सीधे अखबारों से संबंधित होता है। इसके अलावा वर्तमान मुद्दे इंटरव्यू का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। छात्रों में अखबार पर काफी समय खर्च करने की आदत होती है। कई छात्र तो एक अखबार के प्रत्येक खबर, प्रत्येक राय और उसमें दी गई प्रत्येक चर्चा को विस्तार से पढ़ते हैं। यदि उम्मीदवार को एक से अधिक अखबार पढ़ने की आदत है तो इसमें काफी समय लग जाता है।

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अखबार को चुनिंदा खबरों, विचारों और विश्लेषणों का स्रोत होना चाहिए। अखबारों को रणनीति बनाकर और स्मार्ट तरीके से पढ़ना चाहिए। सरकार की नीतियों, महत्वपूर्ण कानूनों पर चर्चाओं, पर्यावरण संबंधी प्रमुख मुद्दों, कल्याण योजनाओं और ऐसे ही अन्य महत्वपूर्ण विषयों को अखबार से पढ़ना चाहिए। अखबार से सारांश या नोट्स बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। इसी तरह काफी समय लगाकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को भी पढ़ने से बचना चाहिए क्योंकि मुख्य परीक्षा में यह काफी कम पूछा जाता है।

ज्यादा समय तक पढ़ने के लिए कम सोना

इसमें कोई दो राय नहीं है कि सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने के लिए रोजाना कई– कई घंटों तक पढ़ाई करनी होती है। लेकिन शरीर की भी कुछ सीमाएं हैं, जिसके पार जाने पर मस्तिष्क की दक्षता कमजोर होती जाती है। मानव का मस्तिष्क कुछ समय के बाद आंकड़ों को समझने और विश्लेषित करने में अक्षम हो जाता है। कड़ी प्रतिस्पर्धा की वजह से आईएएस उम्मीदवार अपनी इच्छा के अनुसार अधिक– से–अधिक पढ़ाई करना चाहता है जिसकी वजह से उसके मस्तिश्जक को घंटों तक बिना रुके काम करना पड़ता है। इसके लिए वह सोने, मनोरंजन और आराम से जुड़े गतिविधियों में लगने वाले समय में कटौती करने लगता है।

प्रभावशाली समय सारिणी कैसे बनाएं

बिना रूके और पर्याप्त नींद लिए बिना बहुत अधिक और लगातार पढ़ाई करते रहने से उम्मीदवार कुशल और प्रखर नहीं हो सकते। अच्छी नींद के माध्यम से प्राप्त की गई जानकारी को मन में बैठाने की जरूरत होती है। वास्तव में नींद स्थिरता प्रदान करता है और नींद से जागने के बाद हर उम्मीदवार पहले से अधिक तरोताजा औऱ स्वस्थ महसूस करता है। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए 7-8 घंटों की गहरी नींद बहुत आवश्यक है।

स्व–अध्ययन के मुकाबले कोचिंग संस्थानों पर ज्यादा निर्भरता

बीते कुछ समय से कॉलेज की पढ़ाई के दौरान या उसके तुरंत बाद दाखिला लेना आदर्श बन गया है। लोग सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने के लिए किसी की संभावनाओं को काफी हद तक बढ़ा देने हेतु कोचिंग संस्थाओं पर भरोसा करने लगे हैं। ज्यादातर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग कक्षाओं में जाने को सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानने लगे हैं।

आईएएस और पीसीएस में क्या अंतर है

वैसे छात्र जो कोचिंग संस्थानों और उनके तरीकों पर बहुत अधिक भरोसा करते हैं अक्सर स्व–अध्ययन नहीं करने पर अफसोस जताते हैं। कोचिंग संस्थान किसी को राह दिखा सकते हैं और किन विषयों की पढ़ाई करनी है, के बारे में बता सकते हैं। वे छात्रों को किसी अवधारणा को सरल कर समझने और उसके अभ्यास में मदद कर सकते हैं। लेकिन ऐसे अभ्यास और तैयारियां तब तक सार्थक नहीं होंगी जब तक कि इसके साथ कड़ी मेहनत, स्व– अध्ययन और आत्मविश्वास न हो।

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