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जाने कैसे होता है एक IAS Officer बर्खास्त...

Sep 28, 2018 10:41 IST
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Dismissal of an IAS officer
Dismissal of an IAS officer

IAS अधिकारी पूरे जिले में सबसे ज्यादा प्रभावशाली व्यक्ति होता है। वह जिले के हर वभाग का मार्गदर्शन करता है चाहें वो पुलिस विभाग हो या स्वस्थ्य विभाग। केंद्र में भी सभी मंत्रालयों के सचिव IAS अधिकारी ही होते हैं चाहें मंत्रालय कोई भी हो। अंग्रजों द्वारा बनायी  गयी इस सर्विस को “heaven born service” भी कहते हैं। जितना कठिन इस सर्विस में प्रवेश है उतना ही मुश्किल इस सर्विस के व्यक्ति को हटाना भी है।

आम तौर पर एक IAS अधिकारी का कार्य अपने क्षेत्र में तैनात होने के बाद सरकारी नीतियों को लागू करना है, जो कि एसडीएम, एडीएम, डीएम और विभागीय आयुक्त के रूप में होता है और जनता और सरकार के बीच मीडिएटर के रूप में कार्य करते हुए दैनिक मामलों का संचालन करना है। इसलिए एक IAS अधिकारी से ही योजनाओं और नीतियों के निर्माण तथा उनके क्रियान्वयन की अपेक्षा की जाती है।

लेकिन हाल के दिनों में IAS और IPS अधिकारियों की अक्षमता और घटिया प्रदर्शन के कारण सरकार अखिल भारतीय सेवा नियम के तहत निलंबन और बर्खास्तगी नीति की समीक्षा करने की कोशिश कर रही है। इस सन्दर्भ में भारत सरकार ने पुरानी सिविल सेवा प्रणाली की समीक्षा करने और सेवा के नियमों में से अनावश्यक नियमों को अपडेट करने का निर्णय लिया है ताकि IAS अधिकारियों को सरकार की जरूरतों की नवीनतम आवश्यकताओं के अनुकूल बनाया जा सके।

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IAS अधिकारी की बर्खास्तगी के लिए नियम

IAS अधिकारियों के सेवा नियम तथा बर्खास्तगी के नियम संविधान के अनुच्छेद 311 में वर्णित हैं। इस अनुच्छेद में संघ या राज्य के तहत सिविल सेवाओं वाली रैंक के व्यक्तियों की बर्खास्तगी, निष्कासन या उसमें कमी के मामलों का वर्णन है।

अनुच्छेद 311 के अनुसार, संघ या राज्य के अधीन सिविल हैसियत में नियोजित व्यक्तियों का पदच्युत किया जाना, पद से हटाया जाना या पंक्ति में अवनत किया जाना--(1) किसी व्यक्ति को जो संघ की सिविल सेवा का या अखिल भारतीय सेवा का या राज्य की सिविल सेवा का संदस्य है अथवा संघ या राज्य के अधीन कोई सिविल पद धारण करता है, उसकी नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी के अधीनस्थ किसी प्राधिकारी द्वारा पदच्युत नहीं किया जाएगा या पद से नहीं हटाया जाएगा।

इसके अलावा, उपरोक्त किसी भी व्यक्ति को ऐसे पदों से निलंबित या बर्खास्त कर दिया जाएगा, जिसमें जांच के बाद उसके खिलाफ आरोप साबित हुए हों और उन आरोपों के संबंध में सुनवाई का उचित मौका दिया गया हो।

IAS ऑफिसर की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा सरकार उसको भारतीय गजट में नोटिफाई करती है इसिलिए यह अधिकारी गज़ेटेड अधिकारी भी कहलाते है। इसका तात्पर्य यह हुआ की राष्ट्रपति के सिवाय इन अधिकारीयों को कोई भी बर्खास्त नही कर सकता। राज्य सरकार भी इनको सिर्फ निलंबित ही कर सकती है, बर्खास्तगी का अधिकार राज्य सरकार के पास भी नहीं है।

आम तौर पर एक कर्मचारी को बर्खास्त करने से पहले दो तरीके अपनाए जाते हैं – पहला आरोपों की जाँच और बाद में बर्खास्त किया जाना। लेकिन इसे संविधान के 42 वें संसोधन अधिनियम के तहत बदल दिया गया है। इसके तहत जांच के दौरान प्राप्त साक्ष्य के आधार पर बर्खास्तगी, पद से हटाने या रैंक में कमी की, सजा दी जा सकती है।

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अनुच्छेद 311 (2) के अंतर्गत स्थायी और अस्थायी दोनों सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण प्राप्त  है।

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सरकार केंद्रीय सिविल सेवा/अखिल भारतीय सेवाओं में अक्षम अधिकारियों को हटाने के लिए कई कदम उठा रही है। नौकरशाही को प्रदर्शन-उन्मुख और जवाबदेह बनाने  लिए सरकार ने अखिल भारतीय सेवाओं में मृत्यु तथा सेवानिवृति लाभ के विषय में हाल ही में सभी मंत्रालयों/विभागों को FR 56 (J) के तहत CCS (पेंशन नियम, 1972) के Rule 48 के तहत आवधिक समीक्षा करने और Rule 16 (3) के निर्देश जारी किए हैं।

इन निर्देशों के अनुसार, सरकारी सेवकों के प्रदर्शन का 50/55 वर्ष की आयु प्राप्त करने से या 30 साल की क्वालीफाइंग सेवा पूरी होने पर पहले छह माह की समीक्षा की जानी चाहिए जिससे यह निष्कर्ष निकला जा सके की उसे सेवा में बने रहना चाहिए या सार्वजनिक हित में सेवा से सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए।

सरकार ने IAS (छुट्टी) नियम 1955 के Rule 7 (2) के तहत ऐसे नौकरशाहों को इस्तीफा देने के लिए निर्देश जारी किए जो छुट्टी/अध्ययन की छुट्टी/विदेशी कामकाज की समाप्ति के बाद भी अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे हैं।

सरकार ने IAS अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के लिए सभी मंत्रालयों/विभागों को समय-सीमाबद्ध प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए Cadre Controlling Authority को निर्देश दिये है। जब बर्खास्तगी की प्रक्रिया चल रही हो, तो सभी सिविल सर्विस कैडर में अधिकारी को स्वयं का बचाव करने की अनुमति दी जाती है। भारत सरकार ने अभी तक 13 नौकरशाहों को बर्खास्त या अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है तथा सार्वजनिक सेवाओं में असंतोषजनक प्रदर्शन और वितरण के कारण 45 अन्य लोगों के पेंशन में कटौती कर दी है।

IAS अधिकारियों के बीच अयोग्यता की हालिया घटनाएं:

2017-

भारत के पूर्व सचिव और कुछ अन्य IAS अधिकारियों को दिल्ली में सीबीआई विशेष अदालत ने कोयला आवंटन घोटाले के लिए जेल की सजा सुनाई थी। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने यह सूचना दी कि 381 ग्रुप ए सर्विस अधिकारियों सहित 24 आई एएस अधिकारी समय से पहले सेवानिवृत्त हुए और उनकी पारिश्रमिक में कटौती की गई। हाल के वर्षों में  मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने उनके ननपरफॉरमेंस के कारण कुछ IAS अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है।

2016 -

भारत सरकार ने भ्रष्ट IAS अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आम आदमी को सशक्त बनाने का निर्णय लिया है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (डीओपीटी) ने किसी भी उचित प्रस्ताव और समर्थन दस्तावेजों के बिना IAS अधिकारियों के संबंध में अभियोजन पक्ष के लिए मंजूरी लेने वाले निजी व्यक्तियों के अनुरोध को सुनने की बात की है

2015-

भारत सरकार के अनुसार, भ्रष्टाचार नौकरशाहों की सूची में 100 IAS अधिकारी शामिल हैं और भ्रष्टाचार के मामलों में कथित संलिप्तता के कारण सीबीआई रिपोर्टों में उनका नाम शामिल है। इसके अलावा, भारत सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, 1,800 से अधिक IAS अधिकारी 2016 में संघीय सरकार को अपनी अचल संपत्तियों का ब्योरा प्रस्तुत करने में विफल रहे। हाल ही में  भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कई मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों को गिरफ्तार किया गया था। IAS अधिकारियों के पास  बहुत अधिक संपत्ति होने की सूचना है। कभी कभी यह राशि 31 मिलियन अमरीकी डॉलर तक भी पहुँच जाती है।

IAS अधिकारी की Salary

अनुच्छेद 311 के तहत बर्खास्तगी के प्रसिद्ध मामले निम्नानुसार हैं:

• प्रदीप कुमार बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य, 14 दिसंबर 2012

• यूपी बनाम एएन सिंह, एआईआर 1965 - सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि कर्मचारी सिविल सेवक होना चाहिए और स्टेट तथा कर्मचारियों के मध्य मालिक और दास जैसा सम्बन्ध होना चाहिए और राज्य अधिनियम 1956 के तहत Registered Statutory Corporations के कर्मचारी सिविल सेवक नहीं हैं।

• महेश बनाम स्टेट ऑफ यूपी, एआईआर 1955 - सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक ही रैंक के एक अधिकारी द्वारा बर्खास्तगी मान्य है

• डी रामास्वामी बनाम राज्य तमिलनाडु, एआईआर 1982 : सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पदोन्नति के तुरंत बाद अनिवार्य सेवानिवृति अवैध है।

IAS अधिकारियों के निलंबित और बर्खास्त होने की हालिया घटनाएं:

• 2015 में  मध्यप्रदेश कैडर के IAS दंपति अरविंद जोशी और टिना जोशी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया क्योंकि उनके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था।

• केरल कैडर के IAS अधिकारी एम।पी। जोसेफ, जिन्होंने राज्य सरकार से लंबी छुट्टी ली थी तथा आईएलओ के साथ विदेश में काम किया,को बाद में राज्य सरकार का कार्यालय संभालने की जिम्मेदारी इस आधार पर नहीं दी गयी कि कार्यालय से 5 वर्ष की निरंतर अनुपस्थिति इस्तीफे के बराबर है।

• गृह मंत्रालय ने कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को भी बर्खास्त कर  दिया है। 1992 बैच के एजीएमयूटी कैडर अधिकारी मयंक शीएल चौहान और 1992 बैच छत्तीसगढ़ कैडर अधिकारी राजकुमार देवानंगन को भी समयपूर्व सेवानिवृत्ति दी गयी।

• ऑल इंडिया सर्विसेज (डेथ-कम-रिटायरमेंट बेनिफिट) अधिनियम 1958 के नियम 16 (3) के अंतर्गत  केंद्र सरकार के सार्वजनिक सेवा में सभी भारतीय सेवाओं के अधिकारी (भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा) की लिखित में कम से कम तीन महीने पहले नोटिस या तीन महीने के वेतन और भत्ते देने के बाद सेवानिवृत्त हो सकती है।

निष्कर्ष

केंद्र सरकार के हालिय रुख से यह साफ़ ज़ाहिर है की सरकार काम में किसी भी प्रकार की की लापरवाही नही चाहती और सिविल पदों पर तैनात अधिकारिओं की जवाबदेहि सुनिश्चित करना चाहती है ।

जमीनी वास्तविकताओं पर पर्यवेक्षण और उचित प्रवर्तन की आवश्यकता के अनुरूप IAS अधिकारी की कार्यप्रणाली में संबंधित मंत्रालय के मंत्री के परामर्श से नीति तैयार करने और उसके कार्यान्वयन का कार्य भी शामिल है।

इसके अलावा, एक महीने पहले भी मंत्रालय ने गैर-निष्पादक होने और अवैध गतिविधियों में शामिल होने के कारण 381 सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ पारिश्रमिक में कटौती समयपूर्व सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाइयां की हैं,जिसमें 24 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी भी शामिल हैं।

IAS, IPS और IFoS जैसे 2,953 ALL India Services सहित 11,828 Group A अफसरों के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई और 19,714 Group B अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड की समीक्षा भी की गई। वास्तव में नए नियम के अनुसार प्रदर्शन करो अन्यथा पद से छुट्टी लो की धारणा पर काम करने की कोशिश की जा रही है।

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