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बेटे के बोर्ड एग्जाम में फेल होने पर पिता ने दी दावत और मनाया जश्न

सोशल मीडिया में इन दिनों एक ऐसे पिता के बारे में चर्चा हो रही है जो अपने बच्चे के बोर्ड एग्जाम में फेल होने के बाद आतिशबाजी कर रहा है, मिठाई बांट रहा है और जश्न भी मना रहा है. यहाँ से जानिए वो ऐसा क्यों कर रहे हैं और समाज को वह क्या उदाहरण दे रहे हैं.

May 17, 2018 18:12 IST
MP Board Result 2018

इन दिनों कर्नाटक चुनाव के नतीज़ो के साथ-साथ एक और बेहद ख़ास खबर सोशल मीडिया में वायरल हो रही है. ये खबर MP Board कक्षा 10वीं के नतीजों से जुड़ी हुई है जिसमे एक पिता ने अपने पुत्र के कक्षा 10वीं में फेल होने पर आतिशबाजी की और, मिठाई बांटी और जश्न भी मनाया.

बहुत लोगों ने इस खबर को फेसबुक पर शेयर किया और कई लोगों ने इस खबर के पक्ष में कमेंट किये और कई ने इसके खिलाफ. इसके बाद फिर डिबेट छिड़ गया कि एक पिता का ऐसा कदम कितना जायज़ है?  

क्या है पूरा मामला?

मध्यप्रदेश के सुरेंद्र व्यास जो पेशे से कांट्रेक्टर हैं उनका बेटा आशु व्यास सरस्वती शिशु मंदिर शिवाजी वार्ड में 10वीं कक्षा में पढ़ता था और उसने इस बार 10वीं की बोर्ड परीक्षा दी. रिजल्ट आने पर पता चला कि आशु व्यास 6 में से 4 विषयों में फेल हो गया. यह पता चलने पर पिता ने उसे डांटने और डपटने के बजाय आतिशबाजी करी, मिठाई बांटी, जश्न मनाया और मोहल्ले में जुलूस निकाल कर लोगो को दावत के लिए बुलाया.

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क्या कहना है पिता का?

जब मीडिया में यह ख़बर पहुंची और आशु के पिता से मीडिया वालों ने बात की तो उन्होंने बताया कि, "इस तरीके से मैं अपने बेटे का उत्साह बढ़ाना चाहता हूँ. अक्सर ऐसा होता है कि परीक्षा में फेल होने पर कुछ बच्चे तनाव में आ जाते हैं जबकि कुछ अपनी जिन्दगी को ही खत्म करने की कोशिश करते हैं. मैं उन बच्चों को बताना चाहता हूं कि बोर्ड की परीक्षा आपकी जिन्दगी की आखिरी परीक्षा नहीं है. जिन्दगी में और भी बहुत कुछ आना बाकी है. मेरा बेटा अगर फेल हुआ है तो वह अगले साल फिर से परीक्षा दे सकता है”

क्या कहना है बेटे का?

जब मीडिया वालों ने बेटे से पिता के इस कदम के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि, "मैं अपने पिता के इस फैसले की सराहना करता हूँ. मैं अब वादा करता हूँ कि और भी मेहनत से पढ़ाई करते हुए अगले साल कहीं बेहतर नंबर लेकर आऊंगा."

 

ख़राब रिजल्ट के कारण इस साल मध्य प्रदेश में करीब 7 विद्यार्थियों ने की आत्महत्या

मध्य प्रदेश उच्चतर माध्यमिक बोर्ड के द्वारा 10वीं और 12वीं की परीक्षा के नतीजे 7 मई को घोषित हुए थे. नतीजे जारी होने के कुछ ही देर बाद करीब 6 विद्यार्थियों ने आत्महत्या कर ली थी और करीब 4 अन्य ने खराब परिणाम की वजह से आत्महत्या की कोशिश की.

पिछले साल भी करीब 12 के ऊपर विद्यार्थियों ने ख़राब रिजल्ट के कारण आत्महत्या की

पिछले साल, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य प्रदेश बोर्ड के 12 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की, आत्महत्या का कारण उनका ख़राब रिजल्ट बताया गया.  हर साल बोर्ड एग्जाम रिजल्ट आने के बाद विद्यार्थियों के आत्महत्या करने की खबरें आती हैं.

विद्यार्थियों के आत्महत्या करने का कारण सिर्फ ख़राब बोर्ड एग्जाम रिजल्ट नहीं होता, बल्कि अभिभावकों और रिश्तेदारों का अत्यधिक दबाव भी बहुत हद तक ज़िम्मेदार होता है.

जिस समाज में कुछ अभिभावक अपने बच्चे के परीक्षा परिणाम को अपने सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखते है वहीं सुरेंद्र व्यास जैसे पिता ऐसे दिखावे वाली मानिसकता के खिलाफ समाज के लिए एक मजबूत उदहारण पेश करते हैं.

एक साधारण से परिवार के पिता की ऐसी उच्च सोच वाकई कबीले तारीफ़ है और समाज के लिए एक बेमिसाल उदहारण है.

पूरे देश के अभिभावकों के लिए उदहारण

एक पिता के ऐसे कदम उठाने से न सिर्फ बेटे का आत्मविश्वास मजबूत हुआ बल्कि पिता और पुत्र के बीच संबंधों में भी और निकटता आयी.

एक साधारण से परिवार की ये कहानी पूरे देश के अभिभावकों के लिए उदहारण है जिनके बच्चों के बोर्ड एग्जाम का रिजल्ट या तो आ चूका है या फिर वो आने का इंतज़ार कर रहे हैं.

जब हमने कुछ करियर सलाहकारों से इस ख़बर के बारें में बात करी तो सबने उस पिता के ऐसे कदम उठाने की बहुत सराहना की. सभी को यकीन है कि उनका बेटा अगले साल बोर्ड परीक्षा में बहुत बेहतर प्रदर्शन करेगा.

खराब बोर्ड परीक्षा के परिणाम की वजह से जब बच्चा पहले से ही तनाव में होता है तो ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के साथ सख्ती नहीं बरतनी चाहिए. इससे बच्चों का आत्मविश्वास टूटता है और उन्हें गलत कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है.