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एजुकेशन में बैचलर या मास्टर डिग्री कर बनें एक्सपर्ट टीचर

एक बच्चे के लिए उसके माता-पिता के बाद अगर कोई भगवान का रूप ले सकता है तो वह है उसका टीचर. किसी की जिन्दगी सँवारना कोई आसान काम नहीं होता और अगर कोई इस काम में वाकई सफल हो जाता है तो सही मायने में मानवता की सेवा वही कर रहा है.

 
Jan 25, 2019 17:52 IST
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एजुकेशन में बैचलर
एजुकेशन में बैचलर

एक अरब से अधिक आबादी वाले इस देश में लगभग 50 प्रतिशत आबादी 0-25 वर्ष के बीच है. भारत में अभी भी पर्याप्त टीचर्स नहीं हैं.भारत के अधिकांश स्कूलों तथा कॉलेजों में स्टूडेंट्स एक औसत दर्जे य फिर उत्साहरहित शिक्षण पद्धति के जरिये अध्ययन करते हैं. कुछ शैक्षणिक पहलों द्वारा किये गए राष्ट्रव्यापी अध्ययनो से यह पता चलता है कि मैथ और साइंस में तो अच्छे अच्छे नामी गिरामी स्कूल्स में भी बच्चों की स्थति सराहनीय नहीं है. इसलिए आज के परिवेश में कुछ ऐसे शिक्षको की जरुरत है जो बच्चों के जरुरत तथा नेचर के हिसाब से उसे पढ़ाने में माहिर हो. साथ ही बच्चों की बौद्धिक और रचनात्मक क्षमता को भी पूरी तरह से विकसित करने में सक्षम हो.

सरकार अगले पांच वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग पांच प्रतिशत टीचिंग पर खर्च करने की योजना बना रही है. आज के शैक्षणिक माहौल को देखते हुए अच्छे शिक्षकों की नियुक्ति और स्टूडेंट्स के विकास के लिए गंभीर, निरंतर और महत्वपूर्ण प्रयास की आवश्यकता है.

इसलिए एजुकेशन विषय में ग्रेजुएशन करने वाले लोगों के अतिरिक्त इस फील्ड में रूचि रखने वाले लोग भी इस फील्ड में महारत हासिल कर सकते हैं और टीचिंग की जॉब अपनाकर बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं.

शिक्षा के महत्त्व को समझते हुए शिक्षण कार्य करने के लिए भारत में एक विशेष डिग्री हासिल करने की आवश्यकता होती है जिसे बी.एड. कहते हैं. यदि आप सरकारी स्कूल में टीचर बनना चहाते हैं तो आपके पास बी.एड. की डिग्री होना बहुत जरुरी होता है और अब तो सरकार ने घोषणा की है कि साल 2019 तक चाहे सरकारी टीचर हो या निजी स्कूल के टीचर सबके पास बी.एड की डिग्री होना अति आवश्यक है. बीएड दो  वर्ष का ग्रेजुएशन कोर्स है. बीएड करने के लिए छात्रों को शिक्षा, संस्कृति और मानवमूल्य, शैक्षणिक मनोविज्ञान, शैक्षणिक मूल्यांकन, शिक्षा दर्शन आदि विषय पर ध्यान देना पड़ता है. बी.एड कर लेने के बाद उम्मीदवार के पास किसी भी स्कूल में पढ़ाने की योग्यता आ जाती है. ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि यदि किसी ने बीएड की डिग्री हासिल नहीं की है तो वैध रूप से वह किसी स्कूल में पढ़ाने के योग्य नहीं है.

बीएड करने के लिये आवश्यक शैक्षणिक योग्यता

बीएड में प्रवेश के लिए बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए), बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) या बैचलर ऑफ कॉमर्स (बीकॉम) व अन्य स्नातक, जो कम से कम 50% अंकों के साथ एक मान्यता प्राप्त बोर्ड / विश्वविद्यालय आदि से प्राप्त डिग्री का होना अनिवार्य है.

रेगुलर बीएड करने के लिए सबसे पहले एक प्रवेश परीक्षा देनी पड़ती है.उसके बाद एक काउन्सलिंग के दौरान उम्मीदवार को उसके रैंक के अनुसार कॉलेज मिलता है. भारत में बीएड करने के लिए बहुत सारे प्राइवेट और गवर्नमेंट कॉलेज हैं. किसी सरकारी कॉलेज से बीएड करने पर उसकी लागत काम आती है जबकि किसी प्राइवेट कॉलेज से बीएड करने पर फीस एक लाख से ऊपर तक पहुँच सकती है.इसकी परीक्षा आम तौर पर जून-जुलाई के महीने में आयोजित की जाती हैं. तथा सामान्यतः इसके प्रश्न पत्र में अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान, प्रयोग, मूल अंकगणित शिक्षण क्षमता और एक स्थानीय भाषा के बारे में सवाल पूछे जाते हैं. इन परीक्षाओं के परिणाम आम तौर पर जुलाई / अगस्त तक घोषित कर दिए जाते हैं. इसके अंतर्गत क्लासरूम स्टडी के अतिरिक्त प्रैक्टिकल भी करवाया जाता है.

बीएड के अंतर्गत पढ़ाये जाने वाले विषय

बीएड के अंतर्गत निम्नांकित विषयों को पढ़ाया जाता है.   

  • मार्गदर्शन और परामर्श
  • समग्र शिक्षा
  • शिक्षा का दर्शन,
  • शैक्षिक मूल्यांकन और आकलन
  • शैक्षणिक मनोविज्ञान
  • संस्कृति और मानव मूल्य

इसके अतिरिक्त बीएड के अंतर्गत निम्नांकित विषयों के साथ स्पेशलाईजेशन कर उस विषय का टीचर बना जा सकता है-

  • व्यापार      
  • शारीरिक शिक्षा
  • कंप्यूटर विज्ञान       
  • भौतिक विज्ञान
  • अर्थशास्त्र    
  • विशेष शिक्षा
  • अंग्रेज़ी
  • तमिल
  • भूगोल
  • गणित
  • हियरिंग इम्पेरेड
  • राजनीति विज्ञान
  • हिन्दी
  • होम साइंस   
  • रसायन विज्ञान
  • जीव विज्ञानं एवं अन्य

बीएड करने में आने वाली कुल लागत

बीएड मूलतः 2 वर्ष का कोर्स होता है. अगर कोई बीएड डिस्टेंस से करता है तो उसके लिए फीस अलग है और अगर रेगुलर करता है तो उसका अलग है. रेगुलर क्लासेज के लिए कोर्स फी लगभग 50,000-70,000 है और डिस्टेंस से करने वालो के लिए फीस कम है. अगर आप बीएड सरकारी कॉलेज से  करते है तो आपको और कम फीस देनी पड़ेगा. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय बीएड के लिए लगभग 32,000 प्रति वर्ष का शुल्क लेता है. जबकि बिहार के वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी में  बीएड के लिए लगभग 16,500 रुपये का शुल्क लिया जाता है. वहीं केरल में सभी निजी कॉलेजों की फीस लगभग 29,000 रु है.

बीएड की डिग्री प्रदान करने वाले मुख्य कॉलेज

  • अन्नामलाई विश्वविद्यालय
  • बेंगलुरु विश्वविद्यालय
  • जामिया मिलिया इस्लामिया इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज एंड रिसर्च
  • केरला विश्वविद्यालय
  • इंस्टीट्यूट ऑफ डिस्टेंस एजुकेशन
  • मद्रास विश्वविद्यालय
  • महर्षि दयान्द विश्वविद्यालय,रोहतक
  • मदर टेरेसा महिला विश्वविद्यालय, कोडाईकोनाल,
  • पटना विश्वविद्यालय
  • एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय,मुंबई
  • गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन,केरल
  • अजीज प्रेम जी विश्वविद्यालय, बेंगलूर

बीएड करने वाले टीचर्स को मिलने वाली सैलरी

बीएड करने वाले टीजीटी टीचर्स को 2.5 लाख से 3.5 लाख रुपए तथा पीजीटी अध्यापकों को 4 लाख से 5 लाख रुपए वार्षिक सैलरी मिलने की संभावना रहती है.

बीएड करने के बाद किस क्षेत्र में तथा किस प्रोफाइल पर हो सकती है रिक्रूटमेंट ?

बीएड करने के बाद निम्नांकित जगहों जैसे कोचिंग सेंटर्स, एजुकेशन कंसल्टेंट,होम ट्यूटर, ,पब्लिशिंग हाउस,रिसर्च एंड डेवलपमेंट एजेंसियों,स्कूल और कॉलेजों में शिक्षक,प्रशासक,सहायक डीन,कंटेंट राइटर,कंसल्टेंट तथा रिसर्चर के रूप में काम कर सकते हैं.

वस्तुतः एक बच्चे के लिए उसके माता-पिता के बाद अगर कोई भगवान का रूप ले सकता है तो वह है उसका टीचर. किसी की जिन्दगी सँवारना कोई आसान काम नहीं होता और अगर कोई इस काम में वाकई सफल हो जाता है तो सही मायने में मानवता की सेवा वही कर रहा है.

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