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जानें कब और कैसे PCS अफसर IAS अधिकारी बनते हैं?

IAS देश के प्रतिष्ठित पदों में से एक है। यह स्पष्ट है कि अधिकांश PCS अधिकारी IAS रैंक में प्रमोट होने के लिए तत्पर हैं। हालांकि, PCS से IAS में प्रमोशन की काफी लंबी प्रक्रिया है। आइये जानते हैं PCS से IAS अधिकारी बनने की क्या प्रक्रिया है?

Sep 3, 2020 20:48 IST
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जानें कब और कैसे PCS अफसर IAS अधिकारी बनते हैं?
जानें कब और कैसे PCS अफसर IAS अधिकारी बनते हैं?

निजी क्षेत्र में अनेक अवसरों के बावजूद प्रशासनिक सेवाओं की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। IAS और PCS पदों के लिए प्राप्त आवेदनों की बढ़ी हुई संख्या इस बात का प्रमाण है। IAS के लिए परीक्षा तीन चरणों में होती है जिसे UPSC आयोजित करता है। उम्मीदवारों को एक IAS अधिकारी बनने के लिए सिविल सेवा के तीनों चरण -प्रारंभिक परीक्षा, मेन्स परीक्षा और इंटरव्यू क्लियर करना होता है। PCS परीक्षा कुछ हद तक UPSC के समान है। परीक्षा तीन राउंड में आयोजित की जाती है लेकिन यह वैचारिक क्षमताओं की तुलना में अधिक तथ्यात्मक होती है। हालाँकि एक PCS अधिकारी अपनी सेवा के कुछ वर्षों बाद IAS के पद पर प्रमोट किया जा सकता है। आइये जानते हैं ऐसा कब और कैसे होता है 

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कैसे बनता है एक PCS अधिकारी IAS?

IAS अधिकारियों का चयन भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है लेकिन वे राज्य सरकार के अधीन काम करते हैं। IAS और PCS के बीच निर्णायक शक्तियों, जिम्मेदारी और सुविधाओं का अंतर है। IAS अधिकारी के रूप में प्रमोट होने के लिए PCS अधिकारियों को विभिन्न पदोन्नतियों से गुजरना पड़ता है। उदहारण के लिए कोई अधिकारी UPPCS के तहत कार्यरत है तो शुरुआती पोस्ट SDM यानी लेवल -10 की होगी और उन्हें IAS अधिकारी होने के लिए पांच प्रमोशन लगेंगे। उन्हें लेवल 11, लेवल 12, लेवल 13, लेवल 13 ए, और लेवल 14 में प्रमोशन मिलेगा जिसके बाद ही वह आईएएस बन सकेंगे। PCS से IAS तक की प्रमोशन प्रक्रिया काफी धीमी है और IAS अधिकारी के रूप में प्रमोशन होने में 15-20 साल लगते हैं। जिन लोगों को 14 स्तर तक पदोन्नत करने के बाद IAS अधिकारी के रूप में पदोन्नत नहीं किया जाता है, उन्हें वेतन स्तर 15 दिया जाता है और उन्हें "अधिक्रमित" के रूप में जाना जाता है।

हर राज्य की है अलग प्रमोशन प्रक्रिया 

हर राज्य की प्रमोशन की अपनी अलग प्रक्रिया है। कुछ राज्य सरकारों के अधीन अधिकारियों को अन्य राज्यों की तुलना में प्रमोट होने में अधिक समय लगता है। तमिलनाडु राज्य में प्रमोट होने में कम समय लगता है जबकि बिहार में लेवल 14 तक पहुंचने में 20 साल तक का समय लग सकता है। बिहार में अगर किसी पीसीएस अधिकारी को संयुक्त सचिव के पद पर पदोन्नत किया जाता है तो वह एक IAS अधिकारी के रूप में प्रमोट होने के लिए पात्र है। सिफारिश की कमी के कारण यदि उन्हें IAS रैंक में पदोन्नत नहीं किया जाता है तो उन्हें डीएम के ही अनुरूप  एक पोस्ट मिलेगा। बहरहाल, डीएम का पद एक आईएएस अधिकारी के अधीन होता है। 

कैसे होता है PCS से IAS तक प्रमोशन 

केंद्र सरकार के साथ चर्चा  के बाद राज्य सरकार आईएएस अधिकारियों के रूप में पदोन्नति पाने के लिए पीसीएस अधिकारियों की एक सूची प्रदान करती है। भर्ती नियमों के नियम 9 के अनुसार, भर्ती के लिए केवल निर्दिष्ट और सीमित स्थान ही होते हैं। 

पात्रता मापदंड:

  • प्रशासक के पास चयनित अधिकारी के सेवाकाल के दौरान उसके खिलाफ कोई आरोप पत्र दाखिल नहीं होना चाहिए
  • चयनित व्यक्ति की उम्र चयन होने की मीटिंग के दिन तक 54 वर्ष से कम होनी चाहिए। 
  • यदि किसी अधिकारी ने नियुक्ति के लिए अपनी अनिच्छा व्यक्त की है तो उन्हें नई सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
  • समिति पूरी तरह से सूचीबद्ध करने से पहले अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड की जाँच करेगी।

चयन प्रक्रिया:

चयन समिति के सदस्य अधिकारियों को उत्कृष्ट, बहुत अच्छा, अच्छा और अनफिट के रूप में वर्गीकृत करते हैं। वे अधिकारी के ऑफ और ऑन रिकॉर्ड दस्तावेजों का आकलन करते हैं। समिति के सदस्य उनकी सफलता और विफलता के लिए उनके सेवा रिकॉर्ड की अच्छी तरह से जाँच करते हैं।  तैयार सूची में सबसे पहले उत्कृष्ट अधिकारियों को महत्व दिया जाता है और उसके बाद बहुत अच्छे और अच्छे की श्रेणियों से अधिकारीयों को चुना जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों के नाम हमेशा सूची में पहले प्रस्तावित किए जाते हैं।

यदि किसी प्रस्तावित अधिकारी के ऊपर कोई विभागीय और आपराधिक कार्यवाही लंबित है तो उसे अनंतिम माना जाएगा। यदि अगले साल तक उनके ऊपर कार्यवाही पूरी हो जाती है और उन्हे सेवा के लिए उपयुक्त पाया जाता है तो उसे अगले वर्ष की सूची में शामिल किया जाता है।

सूची प्रदान करने के बाद, राज्य सरकार को नियमन 5 का उल्लेख करते हुए इसे आयोग को अग्रेषित करना होता है। सूची के साथ, राज्य सरकार को आईएएस अधिकारियों की सूची में उल्लिखित अधिकारियों का रिकॉर्ड केंद्र सरकार को भेजना होता है। केंद्र सरकार तैयार सूची पर अपनी प्रतिक्रिया राज्य सरकार को भेजती है। सेवाओं में शामिल होने के इच्छुक अधिकारियों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। केंद्र सरकार के पास लोक कल्याण की सूची में शामिल किसी भी नाम को नियुक्त नहीं करने के सभी अधिकार हैं।

भारतीय प्रशासनिक सेवा और प्रांतीय सिविल सेवा दोनों को सुचारू और परेशानी मुक्त शासन के लिए स्थापित किया गया था। दोनों सेवाएं नागरिकों के लिए एक सुरक्षित और बेहतर समाज बनाने में मदद करती हैं। यद्यपि एक IAS अधिकारी और PCS अधिकारी की शक्ति और कर्तव्य अलग-अलग होते हैं परन्तु वे हमेशा लोक कल्याण के लिए काम करते हैं और समाज में सम्मानित स्थान प्राप्त करते हैं।

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