जानें कैसे होती है एक IPS अधिकारी की ट्रेनिंग

IPS अधिकारी हमारे देश के कानून एवं व्यवस्था की बुनियाद माने जाते है। IPS अधिकारियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग के बारे में जानने से अभ्यर्थियों में एक नया जोश भर जाता है और उन्हें तैयारी करने की प्रबल प्रेरणा मिलती है इसलिए यहां हम आपको IPS अधिकारी को दी जाने वाली ट्रेनिंग के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

Apr 19, 2019 11:15 IST
IPS Training Course
IPS Training Course

IPS प्रशिक्षण को हमारे देश में सबसे ज्यादा कठिन प्रशिक्षण माना जाता है क्योंकि IPS अधिकारियों को इस देश के सभी भारतीय राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में सशस्त्र पुलिस बल को निर्देशित करना होता है। IPS अधिकारियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग के बारे में जानने से अभ्यर्थियों में एक नया जोश भर जाता है और उन्हें तैयारी करने की प्रबल प्रेरणा मिलती है इसलिए यहां हम आपको IPS अधिकारी को दी जाने वाली ट्रेनिंग के बारे में विस्तार से बता रहे हैं ।

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IPS की ट्रेनिग भी IAS तथा Central Civil Services के साथ ही होती है. इन सभी का चयन UPSC द्वारा Civil Services Exam के माध्यम से किया जाता है. IPS ट्रेनिग के पड़ाव विस्तार पूर्वक निम्नवत हैं. IPS की ट्रेनिंग भी IAS की तरह ही सैंडविच पारूप में होती है. सैंडविच का मतलब है training का प्रारूप सैंडविच की तरह होता है – पहले अकादमी में फिर फील्ड में और फिर से अकादमी में .

LBSNAA - पहला चरण (Foundation Course)

LBSNAA अकादमी न केवल सिविल सेवा क्षमता संवर्धन का कार्य करती है बल्कि इसके साथ साथ अंतर-सेवा सौहार्द और सहयोग पर भी केंद्रित है। Foundation Course का उद्देश्य अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं (समूह ए) के नए भर्ती हुए अफसरों को एक दुसरे को जानने के लिए तथा समन्वय स्थापित करना है। यह नए अफसरों को अपेक्षित कौशल, ज्ञान और व्यवहार करें के तरीके सिखाता है ।

Foundation Course के मुख्य उद्देश्य हैं:

• विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं के बीच अधिक सहयोग और समन्वय स्थापित करना

• एक अधिकारी प्रशिक्षु के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना जो कि बौद्धिक, नैतिक, शारीरिक भी हो सकता है

Foundation Course के बाद केवल IAS अधिकारी अकादमी में अपने पेशेवर प्रशिक्षण जारी रखते हैं, जबकि अन्य सेवाओं के अधिकारी संबंधित स्टाफ कॉलेजों में चले जाते हैं जैसे कि

• भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों के लिए हैदराबाद में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी।

• भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के लिए देहरादून में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी।

• भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों के लिए विदेश सेवा संस्थान, नयी दिल्ली

Parade during ips training

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राष्ट्रीय पुलिस अकादमी- हैदराबाद

सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) को युवा IPS अधिकारी प्रशिक्षुओं को पेशेवर पुलिस अधिकारियों में बदलने के लिए कार्य सौंपा गया है। सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) हैदराबाद, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए मुख्य संस्थान है।

IPS प्रशिक्षण का दूसरा चरण दो चरणों में होता है। पहला चरण हैदराबाद में राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से शुरू होता है। IPS अधिकारियों को भी IPS अकादमी में प्रशिक्षण के दो चरणों के बीच उनके कैडर के एक जिले में एक निश्चित समय का प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है।

IPS प्रशिक्षु, प्रशिक्षण के दूसरे चरण के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस एकेडमी, हैदराबाद (SVPNPA) में शामिल होते हैं, जिन्हें बेसिक ट्रेनिंग कोर्स कहा जाता है। यह चरण 11 महीनों की अवधि का होता है जहां IPS अधिकारी प्रशिक्षुओं (ओटीएस) विभिन्न इनडोर, आउटडोर और योग्यता वाले विषयों का अध्ययन करते हैं।

बुनियादी प्रशिक्षण

बुनियादी प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस की ड्यूटी में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होने के लिए अधिकारी प्रशिक्षुओं की क्षमता का निर्माण करना है। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारियों को आवश्यक कौशल, ज्ञान, समझ, व्यवहार और एक पुलिस अधिकारी के कर्तव्यों का निर्वहन करना प्रभावी ढंग से आ जाना चाहिए। यह प्रशिक्षण शुरूआती और बाद में विभिन्न वरिष्ठ पर्यवेक्षी कार्यों के लिए जिले में पुलिस अधीक्षक के पद और पुलिस विभाग की विशेष इकाइयों के लिए सक्षम बनाता है।

प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए अकादमी में 'एकीकृत प्रशिक्षण' प्रारूप का इस्तेमाल तीन आयामों के एकीकरण पर केंद्रित होता है: संवेदनशीलता (व्यक्तिगत और सामाजिक), दिशानिर्देश(नैतिक और कानूनी) और योग्यता (डोमेन और अंतर-कमानी)। नेशनल पुलिस एकेडमी IPS प्रशिक्षुओं में मानव मूल्यों का पोषण करता है जो की न केवल अच्छे पुलिस अधिकारी होने के लिए बल्कि प्रभावी और अच्छे इंसान बनने में भी सहायक होते हैं ।

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इस प्रकार, बुनियादी प्रशिक्षण का उद्देश्य है:

• संवेदीकरण, उन्मुखीकरण और योग्यता का क्षमता निर्माण व संवर्धन।

• पेशेवर ज्ञान और समझ प्रदान करना

• पेशेवर, संगठनात्मक और सामुदायिक कौशल का विकास

• मानव मूल्यों, सही व्यवहार और पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में उचित संतुलन और संवेदनशीलता को जन्म देने के लिए।

• समग्र व्यक्तित्व का विकास जिसमें आत्म-अनुशासन, चरित्र, व्यावहारिक कौशल, आदतें मानदंड और शिष्टाचार शामिल हैं।

• IPS प्रशिक्शुयों को पुलिस स्टेशनों और पुलिस जिले के लीडर के रूप में तैयार करना।

SVPNPA में अपने प्रशिक्षण के दौरान, ओ.टी.(Officers trainees) सेना, वायु सेना, नौसेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CRPF) के विभिन्न इकाइयों के लिए 'संलग्न' किये जाते हैं, जो उन्हें राष्ट्र निर्माण में अन्य संगठनों की भूमिका की सराहना करने में मदद करता है। ओ.टी. का passing out parade 11 महीने बाद आयोजित की जाती है ।

shooting-practice in IPS trainingफेज 2

दूसरे चरण में आवंटित राज्य कैडर के बारे में ज्ञान को बढ़ाने में सहायता की जाती है जिसमे की वहाँ की भाषा, तौर तरीके , संस्कृति आदि आते हैं। यह प्रशिक्षण राज्य पुलिस अकादमियों में होता है जो तीन सप्ताह की अवधि की होती है।

इस चरण में व्यावहारिक प्रशिक्षण का घटक भी शामिल है जहां प्रशिक्षुओं को पुलिस स्टेशनों में कानूनी मामलों से निपटने की जिम्मेदारी दी जाती है। IPS प्रशिक्शुयों को पुलिस मुख्यालयों के साथ भी संलग्न किया जाता है जहां वे जिला स्टार की कार्यवाही के बारे में भी अवगत होते हैं । यह चरण छह महीने की अवधि का होता है।

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इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य

• IPS प्रशिक्शुयों को अगले स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार करना होता है जो की मुख्य रूप से सार्वजनिक संपर्क से संबंधित है।

• उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के लिए आवश्यक कौशल और व्यवहार करने के लिए सक्षम बनाना होता है

निष्कर्ष

हाल ही में, कमल कुमार पैनल ने राज्य पुलिस और केंद्रीय पुलिस संगठनों में सेवा दे रहे पुलिस अधिकारियों की IPS के रिक्त पड़े पदों पर पार्श्विक नियुक्ति की सिफारिश की है । उनकी सिफारिश ये है कि इन अधिकारीयों को सिर्फ 5 महीनों के प्रशिक्षण के बाद IPS पदों पर तैनात किया जा सकता है।

IPS प्रशिक्षण में सुधार की आवश्यकता काफी सालों से महसूस की जा रही है ताकि प्रभावी पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके क्योंकि आजकल IPS अधिकारी एक लीडर की जगह एक प्रबन्धक बनते जा रहे हैं । उनका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक नतीजों को लेकर और राजनेताओं के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए किया जाता है और इसलिए दिन-प्रतिदिन कामकाज को कम करने के लिए छोड़ दिया जाता है। आम लोगों में शायद ही कभी फोकस होता है

हालांकि भारतीय पुलिस हमारे देश में कानून और व्यवस्था का प्रमुख अभिभावक है, फिर भी यह 1861 में पारित होने वाले औपनिवेशिक और पुराने पुलिस कानूनों द्वारा शासित होने के लिए जारी है। भारतीय संविधान ने एक राज्य विषय बना दिया है ताकि राज्य सरकारों को इसकी जिम्मेदारी दी जा सके पुलिस सेवाओं के साथ उनके समुदायों लेकिन पुलिस सुधारों पर कई समितियों ने व्यवस्थित जवाबदेही के साथ पुलिस प्रणाली में प्रमुख सुधारों की सिफारिश की है।

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