सूरत से अमेरिका के नंबर 01 एंटरप्रेन्योरशिप कॉलेज तक पहुंची ख़ुशी चिंदालिया, साबित किया कड़ी मेहनत से आपके सपने होते हैं साकार

भारत के गुजरात राज्य के सूरत शहर की ख़ुशी चिंदालिया को इस साल बाबसन कॉलेज से 2.5 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति मिली है. एक अति-सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाली ख़ुशी ने प्रतिष्ठित "बैब्सन ग्लोबल स्कॉलर्स" में शामिल होने के लिए 2.5 करोड़ रुपये की पूर्ण छात्रवृत्ति जीती है. विशेष बात तो यह है कि, इस छात्रवृत्ति में विश्व स्तर पर केवल 10 छात्रों को शामिल किया गया है. इस आर्टिकल में पढ़ें कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन ने अमेरिका के नंबर 01 एंटरप्रेन्योरशिप कॉलेज में शामिल होने के सपने को साकार करने में ख़ुशी की कैसे मदद की.

Created On: Jul 22, 2021 21:12 IST
Khushi Chindaliya proves Hardwork is key to realizing your Dreams
Khushi Chindaliya proves Hardwork is key to realizing your Dreams

जी.के. नेल्सन ने एक बार यह कहा था कि, 'सफल लोग प्रतिभाशाली नहीं होते, वे बस कड़ी मेहनत करते हैं और अपने उद्देश्य में सफल होते हैं.' खुशी चिंदालिया को बाबसन कॉलेज में शामिल होने के लिए 2.5 करोड़ रुपये की पूर्णकालिक छात्रवृत्ति हासिल हुई है. सूरत से अमेरिका के नंबर 01 एंटरप्रेन्योरशिप कॉलेज तक इस 18-वर्षीय लड़की की यह यात्रा एक ‘केक-वॉक’ तो बिलकुल नहीं रही है और अपने अकादमिक करियर में ख़ुशी ने बार-बार साबित किया है कि वह एक औसत किशोरी नहीं है. सुरत शहर में रहने वाली ख़ुशी एक अति-सामान्य  पृष्ठभूमि से संबद्ध हैं. उनकी इस नवीनतम उपलब्धि ने उन्हें एक विशेष लीग में शामिल कर दिया है क्योंकि, उन्होंने 2.5 करोड़ रुपये की समस्त छात्रवृत्ति हासिल की है और इस साल प्रतिष्ठित 'बैब्सन ग्लोबल स्कॉलर्स' प्रोग्राम का हिस्सा बनी हैं.

'बैब्सन ग्लोबल स्कॉलर्स' छात्रवृत्ति का विवरण

यह छात्रवृत्ति हासिल करने वाली ख़ुशी एकमात्र भारतीय छात्रा हैं और इस साल दुनिया भर से चुने गए कुल 10 वैश्विक विद्वानों में से एक भी हैं. खुशी को दी जा रही इस वित्तीय सहायता के हिस्से के रूप में, यह छात्रवृत्ति पूरे चार साल तक उनके अध्ययन - ट्यूशन, कमरा और बोर्ड, किताबें और अन्य जरुरी संबद्ध वस्तुओं की आपूर्ति, स्वास्थ्य बीमा, व्यक्तिगत और यात्रा खर्च - की पूरी लागत को कवर करेगी.

ख़ुशी की कुछ शानदार उपलब्धियां

एक छोटे व्यवसायी, बसंत चिंदालिया और बिनीता चिंदालिया की बेटी खुशी बाबसन कॉलेज से अर्थशास्त्र और एंटरप्रेन्योरशिप में स्नातक की डिग्री हासिल करेगी. उनके रास्ते में आने वाली अनेक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से हमेशा अपनी शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया है. इसी तरह, उनके गुरुओं के सही मार्गदर्शन ने उन्हें बाबसन कॉलेज का हिस्सा बनने के अपने सपने को साकार करने में काफी मदद की है.

जो चीज उनकी उपलब्धि को और भी खास बनाती है, वह यह है कि, वे विश्व स्तर पर सुप्रसिद्ध एक ऐसे संस्थान का हिस्सा होंगी, जिसे लगातार 24 वर्षों के लिए अमेरिका के नंबर 01 कॉलेज फॉर एंटरप्रेन्योरशिप के रूप में स्थान (यूएस न्यूज रैंकिंग) दिया गया है. वर्ष, 1919 में स्थापित, बाबसन कॉलेज के पास एक शानदार पूर्व छात्र आधार है जिसमें कई एंटरप्रेन्योर्स, अरबपति, उद्योगपति और फॉर्च्यून लिस्ट में शामिल 500 CEOs शामिल हैं.

इससे पहले, ख़ुशी राष्ट्रीय समाचारों में तब चर्चा में थीं, जब उन्हें वर्ष, 2020 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) टुंजा इको-जेनरेशन के लिए एकमात्र भारतीय राजदूत के तौर पर नियुक्त किया गया था. वे यूनेस्को द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की निबंध प्रतियोगिता की विजेता भी हैं.

ख़ुशी को मिली सही समय पर उपयुक्त सलाह और सटीक मार्गदर्शन

15 साल की छोटी उम्र में उनकी उपलब्धियों को डेक्सटेरिटी ग्लोबल द्वारा पहचान लिया गया, जो एक एक ऐसा राष्ट्रीय संगठन है जो अगली पीढ़ी के नेताओं को शैक्षिक अवसरों और प्रशिक्षण के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए महत्त्वपूर्ण मदद प्रदान करता है. इसके बाद, उन्हें 'डेक्टेरिटी टू कॉलेज' - एक करियर विकास कार्यक्रम में शामिल किया गया, जिसने उन्हें विश्व स्तर पर प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी, प्रसिद्ध विचारक, शक्तिशाली वक्ता और व्यापक रूप से भारतीय युवाओं के प्रेरणा पुंज शरद सागर के तत्वावधान में सही मार्गदर्शन और सलाह प्राप्त करने में मदद प्रदान की.

अपनी इस यात्रा के बारे में बताते हुए ख़ुशी ने यह कहा कि, “एक कम आय वाले परिवार से होने के कारण, मैंने कभी नहीं सोचा था कि, एक दिन मैं अमेरिका के नंबर 01 रैंक वाले कॉलेज फॉर एंटरप्रेन्योरशिप में पढ़ूंगी. मेरे लिए यह वास्तव में अविश्वसनीय है!" खुशी की प्रतिभा को स्वीकार करते हुए डेक्सटेरिटी ग्लोबल के CEO के शरद सागर ने यह कहा कि, "मुझे खुशी और हमारे कॉलेज के ऐसे सभी साथियों पर गर्व है जो इस साल वैश्विक संस्थानों में अध्ययन करेंगे. ये युवा सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं लेकिन, उन्होंने कुछ असाधारण हासिल किया है. वे हमारे देश और दुनिया के सामने आने वाली सभी चुनौतीपूर्ण समस्याओं को हल करने के लिए अपनी विश्व स्तरीय शिक्षा का उपयोग करेंगे.”

इसी तरह. यह भी एक ख़ुशी की बात है कि, ख़ुशी ने सार्वजनिक सेवा और राष्ट्रीय निर्माण के लिए अपना पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद अपना जीवन समर्पित करने की योजना बनाई है. ऐसा करने में, वह भारत और दुनिया के लिए समान विकास और समावेशी प्रगति के नए युग की शुरुआत करने में अपने कई हमवतन में शामिल होंगी.

कुशी GenX की ‘यह संभव है’ भावना का प्रतीक है क्योंकि, एक अति-सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि के बावजूद, उन्होंने बाबसन कॉलेज में शामिल होने के अपने सपने को साकार किया और आखिरकार वे 10 वैश्विक विद्वानों के बीच उभरने और प्रतिष्ठित "बैब्सन ग्लोबल स्कॉलर्स" कार्यक्रम में शामिल होने में सफल रहीं.

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