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जानें सकारात्मक सोच की शक्ति कैसे बदल देती है जिंदगी

इस आर्टिकल द्वारा जानिए किस तरह सकारात्मक सोच में कितनी शक्ति होती है और यह किस तरह सकारात्‍मक सोच आपके अंदर उर्जा का संचार करती है l जानिए कुछ रोचक और प्रेरणा दायक कहानियाँ, जिन्हे पड़ने के बाद शायद आपकी ज़िन्दगी बदल जाए l

Mar 16, 2019 17:20 IST
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सकारात्मक सोच की शक्ति
सकारात्मक सोच की शक्ति

कहते हैं सकारात्मक विचार एंव नकारात्मक विचार बीज की तरह होते है जिन्हे हम दिमागी रुपी ज़मीन में बोते हैं जो आगे चलकर हमारे दृष्टिकोण एंव व्यवहार रुपी पेड़ का निर्धारण करता है l  एक तरफ नकारात्मक विचार हमे घोर अंधकार में धकेल सकते हैं वहीं दूसरी तरफ सकारात्मक सोच हमें असफलता के अंधकार से निकाल सकती हैं l कुछ लोग कहते हैं की ये बातें कहने और सुनने में अच्छी लगती हैं पर हमारे बीच में ऐसे कई उदाहरण हैं जिनके बारें में आप जानेंगे तो आप भी सकारात्मक विचारों की शक्ति के बारे में समझ जाएंगे l आइये जानते हैं कुछ ऐसे उदाहरण जिनके द्वारा आपको सकारात्मक सोच की शक्ति महसूस होगी

स्कूल और कॉलेज लाइफ का सबसे प्रेरणादायी और मजेदार उदाहरण

A boy studying

Image Source: 2.bp.blogspot.com

सकारात्मक सोच का सबसे बड़ा उदाहरण हमे अक्सर स्कूल और कॉलेज लाइफ में देखने को मिलता है | अक्सर कुछ छात्रों को आखिरी समय में पढ़ने की आदत होती है, मान लीजिए एग्जाम शुरू होने में एक हफ्ता बचा हो और एक विद्यार्थी को कुछ भी तैयार न हो, तो उसके मित्र और अध्यापक उससे यही कहते हैं कि तुम्हारा एग्जाम में फेल होना पक्का है या तुम एग्जाम ही न दो इत्यादि l अगर कोई ऐसा विद्यार्थी हो जिसके आखिरी समय में पढ़ने की आदत न हो वह तो यही सोचेगा उसके दिमाग में नकारात्मक विचार आ जाएगा कि वो पास नहीं हो पाएगा l

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लेकिन किस विद्यार्थी की एग्जाम से कुछ दिन पहले पढ़ने की आदत हो वो किसी की बात पर ध्यान नहीं देता और अपनी प्लानिंग बना कर पढ़ाई करता है l  कभी-कभी ऐसे छात्र दूसरों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन भी करते हैं l आइये जानते है ऐसे तीन उदाहरण जिनसे सकारात्मक सोच की शक्ति साफ़-साफ़ झलकती है:

बाइबिल की एक प्रसिद्ध कहानी 

David and Goliath: A famous tale from Bible

Image Source: quizz.biz

एक गाँव में गोलियथ नाम का एक बहुत विशाल ऱाक्षस रहता थाl उससे गाँव का हर व्यक्ति डरता था और परेशान रहता थाl एक दिन डेविड नाम का चरवाहा उसी गाँव में आया जहाँ लोग राक्षस के आतंक से भयभीत थेl जब गाँव वालों ने डेविड को उस राक्षस के बारे में बताया और उसका भय दिखाया तो उसने गाँव वालों से कहा की आप लोग उस राक्षस से लङते क्यों नही हो? इस पर गाँव वालों ने लोगों से कहा की वो इतना बङा है कि उसे मारा नही जा सकता है l यह सुन कर डेविड ने कहा आप की आप लोग सही कह रहे है कि वह राक्षस बहुत बड़ा है लेकिन यह बात सही नहीं है कि बङा होने की वजह से उसे मारा नही जा सकता बल्कि हकीकत तो ये है कि वह इतना बङा है कि उस पर आसानी से निशाना लगाया जा सकता है l फिर डेविड ने एक दिन उस राक्षस से मुक़ाबला किया और अपने से कई फ़ीट लम्बे राक्षस को अकेले ही गुलेल से मार कर गिरा दिया l ये डेविड की सकारात्मक सोच का ही असर था जिसने उसे विजय दिलायी l

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कैसे माँ की सकारात्मक सोच ने बेटे को बना दिया विश्व का प्रसिद्ध वैज्ञानिक

Thomas Alva Edison

Image Source: ziarovky.eu

एक दिन एक छोटा सा बालक जो कि प्राइमरी स्कूल का छात्र था अपने घर वापस आया उसके हाथ में एक कागज़ का टुकड़ा था जो उसे स्कूल में दिया गया था उसने अपनी माँ को बताया "मेरे शिक्षक ने यह कागज दिया है और कहाँ है कि इसे अपनी माँ को ही देना” उसने यह भी बताया की उसके शिक्षक ने यह भी कहा की कल से उसे स्कूल  आने की ज़रूरत नहीं हैं l

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उस कागज को पढ़ते ही माँ कि आँखों में आँसू आ गए अपनी माँ के आँखों में आँसू देख उस बालक ने पूछा की कागज़ में ऐसा क्या लिखा है जो आपकी आँखों आँसू आ गये तो उसकी माँ ने कहा यह ख़ुशी के आँसू हैं इस कागज़ में लिखा है कि आपका बेटा बहुत ज़्यादा जीनियस है पर हमारा स्कूल बहुत छोटे स्तर का है और यहाँ के शिक्षक भी बहुत प्रशिक्षित नही है, इसलिए आप अपने बेटे को स्वंय शिक्षा दे l कुछ सालों बाद उस बालक कि माँ का स्वर्गवास हो गया l

वह बालक कुछ सालों बाद एक सफल वैज्ञानिक बना उसका नाम जिन्हे हम थॉमस एल्वा एडिसन के नाम से भी जानते हैं जिन्होंने कई महान अविष्कार किए l एक दिन वह अपने घर के पुराने सामान को देख रहे थे तो उन्हें अलमारी के एक कोने में उन्हें कागज का एक टुकड़ा मिला जब उन्होंने उसे खोलकर देखा और पढ़ा तो उन्हें याद आ गया की यह वही कागज़ है जो वो स्कूल से लाए थे l उस कागज में लिखा था, ”आपका बच्चा बौद्धिक तौर पर कमजोर है, उसे इस स्कूल में अब और नही आना है” एडिसन यह पढ़कर बहुत रोये l इस तरह एक महान माँ की सकारात्मक सोच ने बौद्धिक तौर पर कमजोर समझें जाने वाले बच्चे को एक महान वैज्ञानिक बना दिया l

एक टैक्सी वाले की सकरात्मक सोच

A driver in taxi

Image Source: indiaonline.me

एक व्यक्ति टैक्सी से रेलवे स्टेशन जा रहा था l टैक्सी वाला बड़े आराम से ठीक ठाक गति से टैक्सी चला रहा थाl एक कार अचानक ही पार्किंग से निकलकर बीच रोड पर आ गईl यह देख टैक्सी ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार उसके ऑटो से टकराते-टकराते बची l टैक्सी वाले ने कार वाले की बातों पर गुस्सा नहीं किया और क्षमा माँगते हुए आगे बढ़ गयाl यह सब देख टैक्सी में बैठे व्यक्ति को गुस्सा आ गया उसने टैक्सी वाले से पूछा तुमने उस कार वाले को कुछ कहा क्यों नहीं हमारा एक्सीडेंट भी हो सकता था l

टैक्सी वाले ने कहा साहब बहुत से लोग कूड़ेदान की तरह होते हैं उनके दिमाग में क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा जैसा कूड़ा भरा रहता है l जब उनके दिमाग में यह  कूड़ा अधिक हो जाता है तो वे अपना बोझ हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका ढूँढ़ते हैं  l ऐसे लोगो को मैं मुँह नहीं लगाना चाहता क्यूँकि फिर मैं भी कूड़ेदान की तरह हो जाऊँगा और फिर मेरे साथ-साथ मेरे आस पास के लोगो पर भी कूड़ा गिरेगा l

अब उस वक़्त उसका चुप रहना सही हो या गलत पर उसकी सोच में सकारात्मकता साफ़ झलक रही थी वो अपना समय और शक्ति व्यर्थ नकारात्मक बातों में व्यर्थ नहीं करना चाहता था जो की बिल्कुल सही है l

निष्कर्ष

ऊपर दी गयी बातों से आपको समझ आ ही गया होगा की सकारात्मक सोच में कितनी शक्ति होती है l सकारात्‍मक सोच आपके अंदर उर्जा का संचार करती है और आपको एक बेहतर इंसान भी बनाती हैl इसलिए हालत चाहे कितने भी बुरे हों सोच हमेशा सकारात्‍मक रखनी चाहिए l

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