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Positive India: UPSC में 5वीं रैंक हासिल करने वाले शशांक मिश्रा को कभी भरपेट नहीं मिलता था खाना - जानें उनके संघर्ष के दिनों की कहानी

पिता की आकस्मिक मृत्यु और पैसो की तंगी के बावजूद UP के शशांक मिश्रा ने क्रैक किया UPSC IAS एग्ज़ाम। आइये जानते हैं इन होनहार IAS अफसर की सफलता की कहानी। 

May 6, 2020 10:03 IST
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Positive India: UPSC में 5वीं रैंक हासिल करने वाले शशांक मिश्रा को कभी भरपेट नहीं मिलता था खाना - जानें उनके संघर्ष के दिनों की कहानी
Positive India: UPSC में 5वीं रैंक हासिल करने वाले शशांक मिश्रा को कभी भरपेट नहीं मिलता था खाना - जानें उनके संघर्ष के दिनों की कहानी

सच्ची लगन और कड़ी मेहनत से व्यक्ति हर मुश्किल को पार कर किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। इस मिसाल का जीता जागता उदहारण हैं UP के शशांक मिश्रा। एक मल्टी नेशनल कंपनी की जॉब छोड़ कर शशांक ने कई विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए UPSC IAS की परीक्षा में 5वीं रैंक हासिल की।

यूपी के मेरठ जिले के रहने वाले हैं शशांक 

शशांक उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई मेरठ से ही पूरी की। इसके बाद उन्होंने IIT से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की। शशांक का स्कूली जीवन आरामदायक रहा परन्तु पिता की आकस्मिक मृत्यु ने उनका आगे का जीवन बदल दिया। 

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पिता की मृत्यु ने बदल दिया जीवन 

शशांक के पिता कृषि विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। जिस समय उनका निधन हुआ शशांक तब 12वीं क्लास में पढ़ते थे। अचानक हुई पिता की मृत्यु से तीन छोटे भाई बहन और माता की जिम्मेदारी शशांक के कंधों पर आ गई। इसके बाद उन्हें आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा। शशांक बताते हैं कि उन्होंने ऐसा समय भी देखा जब उनके पास फीस भरने के भी पैसे नहीं थे। 12वीं में अच्छे मार्क्स के कारण उनकी कोचिंग की फीस कम कर दी गई। इसके बाद आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में उनकी 137वीं रैंक आई जिसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक किया। इसके बाद उन्हें अमेरिका की मल्टी नेशनल कंपनी में नौकरी मिल गई। 

IAS बनने के लिए छोड़ दी MNC की नौकरी 

शशांक ने IAS बनने का सपना पूरा करने के लिए MNC में अच्छी जॉब और पैकेज को छोड़ दिया। तैयारी के लिए उन्होंने दिल्ली के एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में पढ़ाना शुरू किया। परन्तु दिल्ली जैसे महंगे शहर में कम पैसों में गुज़ारा करना मुश्किल था इसलिए उन्होंने रोज़ मेरठ से दिल्ली अप-डाउन किया। 

ट्रेन में की IAS की पढ़ाई 

शशांक ने साल 2004 में UPSC की पढ़ाई शुरू की। रोज़ाना दिल्ली से मेरठ की अप-डाउन जर्नी में उनके पास पढ़ने का कम समय रहता था। ऐसे में शशांक ने ट्रेन में ही पढ़ना शुरू किया। शशांक बताते हैं की कभी कभी समय और पैसे की किल्लत के कारण उन्होंने केवल बिस्कुट खा कर ही अपना पेट भरा। हर मुश्किल परिस्थिति का सामना करते हुए शशांक ने दो साल की तैयारी के बाद अपने पहले एटेम्पट में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की। परन्तु ख़राब रैंक के कारण उनका सिलेक्शन अलाइड सर्विसेज में हुआ। इसके बाद शशांक ने 2007 में एक बार फिर परीक्षा दी और इस बार वह 5वी रैंक पा कर IAS बन गए। 

शशांक ने अपने जीवन में आई हर कठिनाई का हँसते हुए सामना किया। उनका अडिग हौसला और IAS बनने की चाह ने उन्हें कामयाबी दिलाई। शशांक मिश्रा अब मध्य प्रदेश की उज्जैन जिले में कमिश्नर के पद पर कार्यरत है। 

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