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IAS परीक्षा से संबंधित 13 मिथक

कई उम्मीदवारों और कोचिंग केद्रों ने सिविल सेवा परीक्षा के विषय में विभिन्न मिथकों को फैला रखा है. इन मिथकों का IAS उम्मीदवारों पर काफी प्रभाव पड़ता है और इन मिथकों के कारण उनके प्रयास और प्रदर्शन प्रभावित होते हैं। उम्मीदवारों के बीच सिविल सेवा IAS परीक्षा से संबंधित कुछ सबसे आम मिथक निम्नलिखित हैं

May 6, 2019 11:13 IST
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Myths about IAS Exam
Myths about IAS Exam

सिविल सेवा परीक्षा को भारत में शीर्ष परीक्षा के रूप में माना जाता है . सिविल सेवा परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों को समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त होती है और सर्वश्रेष्ठ भत्ते भी मिलते हैं। अखिल भारतीय सेवाओं के साथ-साथ केंद्रीय सिविल सेवाओं की आवश्यकता को पूरा करने के लिए Union Public Service Comission(UPSC) प्रत्येक वर्ष सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा से संबंधित सभी आवश्यक विवरणों के साथ प्रत्येक वर्ष फरवरी के महीने में आधिकारिक अधिसूचना प्रकाशित करता है। लेकिन, उम्मीदवारों और कोचिंग केद्रों ने सिविल सेवा परीक्षा के विषय में विभिन्न मिथकों को फैला रखा है । इन मिथकों का IAS उम्मीदवारों पर काफी प्रभाव पड़ता है और इन मिथकों के कारण उनके प्रयास और प्रदर्शन प्रभावित होते हैं।
उम्मीदवारों के बीच सिविल सेवा IAS परीक्षा से संबंधित कुछ सबसे आम मिथक निम्नलिखित हैं

मिथक 1: सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन है
सत्य: यह निश्चित रूप से सत्य नहीं है। हर परीक्षा को सही रणनीति और दृष्टिकोण के साथ पास किया जा सकता है। यह सच है कि सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया बहुत लंबी होती है और परीक्षा प्रक्रिया को पूरा होने  में लगभग एक वर्ष से अधिक का समय लगता है, किन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि परीक्षा सबसे कठिन है। हम यह कह सकते हैं की IAS परीक्षा का सिलेबस अपनी व्यापकता के कारण बहुत ज्यादा हो जाता है परन्तु  IAS परीक्षा के सिलेबस की भी कुछ सीमाएं हैं, ताकि इसे समय पर कवर किया जा सके और IAS की तैयारी प्रभावी तरीके से हो सके।

मिथक 2: IAS उम्मीदवारों को दिन में 15-20 घंटे अध्ययन करने की आवश्यकता होती है।
सत्य: यह IAS उम्मीदवारों के बीच सबसे आम मिथक है। IAS परीक्षा के टॉपर्स और IAS परीक्षा की तैयारी  से संबंधित शिक्षक, IAS परीक्षा को पास करने के लिए दिन में 8 घंटे अध्ययन करने का सुझाव देते हैं, लेकिन इन 8 घंटों का अध्ययन बहुत ही केंद्रित तरीके से और सर्वोच्य अध्ययन सामग्री के साथ होना चाहिए। हमारे पास विभिन्न उदाहरण हैं जहाँ पर अभ्यर्थियों ने अपने full टाइम जॉब के साथ IAS परीक्षा उतीर्ण की है। इसलिए हम यह नहीं कह सकते हैं कि IAS परीक्षा को पास करने के लिए प्रतिदिन 15-20 घंटे अध्ययन करने का नियम है।

मिथक 3: IAS उम्मीदवारों को सब कुछ पता होना चाहिए
सत्य: यह एक लोकप्रिय धारणा है कि IAS अभ्यर्थी को हर चीज के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए। यह सच नहीं है। सबसे पहला तथ्य तो यह है की UPSC ने बहुत ही स्पष्ट तरीके से अपने पाठ्यक्रम को परिभाषित किया है, जिसे IAS परीक्षा की तैयारी में अनुसरण किया जाता है। किसी भी विषय का महत्व, हमारे राष्ट्र और समाज के लिए महत्व के आधार पर तय किया जाता है । कुछ मानक पुस्तकें हैं जिनके माध्यम से हम UPSC पाठ्यक्रम को पूरी तरह से तैयार कर सकते हैं। UPSC अपनी अधिकारिक अधिसूचना में यह निर्धारित करता है की IAS अभ्यर्थी दिए गए हर विषय की सामान्य जानकारी रखता हो तथा वैचारिक स्पष्टता के साथ साथ वैज्ञानिक सिधान्तों के बारे में भी जानता हो . विचारपूर्ण यह है कि IAS एक सामान्य सेवा है, और UPSC को पाठ्यक्रम में निर्धारित सभी विषयों और विषयों की केवल सामान्य समझ की आवश्यकता होती है। तो  अभ्यर्थी को एक विशेषज्ञ होने की जरूरत नहीं है, बस एक वास्तविक शिक्षार्थी होने की आवश्यकता होती है ।

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मिथक 4: आपको अपने विद्यार्थी जीवन में मेधावी छात्र होना चाहिए
सत्य: यह भी एक बहुत ही सामान्य मिथक है कि IAS अभ्यर्थी को अपने विद्यार्थी जीवन में अव्वल रहने की आवश्यकता है परन्तु सत्य यह है कि विभिन्न IAS टॉपर ऐसे रहे हैं जो अपने विद्यार्थी जीवन के दौरान एक औसत छात्र थे। हमारे पास विभिन्न उदाहरण हैं, यहां तक कि एक IAS तो नौवीं कक्षा में फेल हो गयी थी. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसी के पास एक गौरवशाली और सफल विद्यार्थी जीवन था या नहीं। इस परीक्षा में केवल इस परीक्षा के अंकों की आवश्यकता होती है, इसलिए अधिसूचना में डिग्री परीक्षा में न्यूनतम प्रतिशत की आवश्यकता नहीं होती है।

मिथक 5: IAS परीक्षा के लिए दर्जनों किताबें पढ़नी होती हैं
सत्य: IAS उम्मीदवारों को IAS परीक्षा की अपेक्षाओं को पूरा करने की आवश्यकता होती है और विषय या विषय में स्नातकोत्तर बनने की आवश्यकता नहीं होती । यह परीक्षा, विषयों की वैचारिक स्पष्टता और अभिव्यक्ति की स्पष्टता का परीक्षण करती है क्योंकि केवल अवधारणाओं और सिद्धांतों को लागू करने से ही समस्याओं का व्यावहारिक समाधान प्राप्त किया जा सकता है। सभी IAS टॉपर्स तथा शिक्षक, प्रत्येक विषय के लिए एक मानक पुस्तक पढ़ने का सुझाव देते हैं और पुस्तकालय न बनाने का सुझाव भी देते हैं । किसी भी विषय पर समस्त पुस्तकें नहीं खरीदनी चाहिए बल्कि कुछ अच्छी पुस्तकें ही सहायक होंगी .

मिथक 6: कोचिंग करना IAS परीक्षा पास करने के लिए आवश्यक है
सत्य: यह भी सच नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता अलग होती है और एक ही विषय और विषय से संबंधित सेक्शन की भी अलग-अलग समझ होती है। हर साल, ऐसे कई IAS टापर्स होते हैं जिन्होंने कभी किसी कोचिंग की सहायता नहीं ली । आजकल इन्टरनेट सेवाओं के विस्तार की वजह से विभिन्न स्रोत उपलब्ध हो गए हैं जैसे youtube, facebook, unacademy इत्यादि मोबाइल एप्लिकेशनस से घर बैठ कर भी महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री मिल जाती है ।
कोचिंग लेने के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है जैसे कि स्थानांतरण, भोजन की सुविधा और अन्य चीजें जिनके लिए बहुत सारे धन की आवश्यकता होती है।

मिथक 7: केवल अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवार ही IAS बन सकते हैं
सत्य: यह हिंदी मीडियम के उम्मीदवारों के बीच बहुत प्रचलित भ्रांति है कि केवल अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवार ही IAS ऑफिसर बन सकते हैं। यह सच नहीं है क्योंकि प्रत्येक वर्ष हिंदी माध्यम के उम्मीदवार भी IAS परीक्षा उत्तीर्ण कर रहे हैं और IAS अधिकारी के रूप में अपनी पोस्टिंग प्राप्त कर रहे हैं। IAS परीक्षा को पास करने में  उत्तर लेखन के माध्यम का नहीं बल्कि अभिव्यक्ति की स्पष्टता और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के  व्यावहारिक समाधान का द्रष्टिकोण होना आवश्यक है। हालांकि, IAS परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों में अंग्रेजी माध्यम का अनुपात ज्यादा है। इसका एक कारण जो इसमें योगदान देता है वह है अंग्रेजी अध्ययन सामग्री।

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मिथक 8: IAS भारत में सबसे अच्छी नौकरी है
सत्य: यह एक स्थापित धारणा है कि IAS किसी भी अन्य नौकरी की तुलना में भारत की सबसे अच्छी नौकरी है। लेकिन वास्तव में, ऐसा नहीं है। वेतन और भत्तों के संदर्भ में, यह सबसे अच्छी नौकरी नहीं है और निजी क्षेत्र में एक IAS अधिकारी की तुलना में बेहतर वेतन और भत्ते वाले विभिन्न अवसर उपलब्ध हैं। इसके अलावा, IAS को ग्रामीण क्षेत्रों में और कई बार तो सूखे की आशंका वाले क्षेत्रों में पोस्टिंग मिलती है जहाँ कोई सुविधाएं नहीं होती हैं। लेकिन निजी क्षेत्र की नौकरी के मामले में, हमेशा ही महानगर के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय असाइनमेंट पर भी पोस्टिंग मिल सकती है।
असमय ट्रान्सफर भी इस सेवा की बहुत हो सामान्य सी बात है जिसके कारण किसी एक शहर में अपना घर बनाना बहुत ही मुश्किल होता है.

मिथक 9: IAS अधिकारी ज्यादातर जिला मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात होते हैं
सत्य: अधिकांश IAS अभ्यर्थी जिला मजिस्ट्रेट (DM) पद और पद से जुड़ी शक्तियों के बारे में सपने देखते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है, एक राज्य में सैकड़ों IAS अधिकारी तैनात हैं और DM का पद सभी को नहीं दिया जाता है। बहुत कम IAS अधिकारी ऐसे हैं जिन्हें DM की जिम्मेदारी दी जाती है। औसतन, DM के रूप में IAS अधिकारी को पूरे करियर में 4 से 5 साल के लिए पोस्टिंग दी जाती है। कुछ IAS अधिकारियों को अपने करियर में कभी भी DM बनने का मौका नहीं मिलता है।

मिथक 10: IAS अधिकारी IPS, IRS, IFS से अधिक शक्तिशाली होते हैं
सत्य: भारत के संविधान में किसी भी अधिकारी की शक्तियों का उल्लेख नहीं किया गया है। अधिकारियों के पद के अधिकार के साथ शक्तियां और जिम्मेदारियां जुड़ी हुई हैं। IAS अधिकारी एक सामान्य प्रबंधक सेवा है इसलिए वे किसी विशेष आयोग या बोर्ड के मुखिया नहीं बन सकते हैं। सभी सेवाओं में उनके कार्यक्षेत्र और कार्यक्षेत्र के परिभाषित क्षेत्र हैं इसलिए हम यह नहीं कह सकते हैं कि IAS सभी अधिकारिओं को आदेश देता है और अन्य सभी सेवाएं इतनी शक्तिशाली नहीं हैं। उदाहरण के लिए, CBI का नेतृत्व केवल एक IPS अधिकारी कर सकता है और केवल IRS अधिकारी ही सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क या आयकर आयोग का अध्यक्ष हो सकता है। हालाँकि विभिन्न मंत्रालयों में सचिव पद से नेतृत्व, मंत्रालय में कार्य की प्रकृति के बावजूद, IAS अधिकारी ही  करते हैं।

मिथक 11: एक DM एक जिले का बॉस होता है
सत्य:
जिला मजिस्ट्रेट (DM) जिले में प्रमुख समन्वयक हैं जो विभिन्न अधिकारियों को बैठक और परामर्श के लिए बुलाते हैं और अन्य विभागीय अधिकारियों की मदद से समावेशी और सभी की सहमती से योजना भी बनाते हैं। सभी राज्य सरकार के विभागों के लिए एक DM केवल एक समन्वय अधिकारी होता है। IPS, IFoS और IRS अधिकारियों जैसे विभिन्न जिला पदाधिकारियों पर उनका कोई सीधा नियंत्रण नहीं है। यहां तक कि राज्य सरकार के अधिकारी अपने स्वयं के श्रेष्ठ को रिपोर्ट करते हैं जो उनकी प्रदर्शन रिपोर्ट लिखते हैं। DM को केवल अन्य सरकारी अधिकारियों पर ढीला नियंत्रण प्राप्त है।

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मिथक 12: IAS अधिकारियों को सेवा से नहीं हटाया जा सकता है?
सत्य: हमारे देश में, भारत के राष्ट्रपति को भी पद से हटाया जा सकता है और इस से सम्बंधित नियम और प्रक्रिया सम्विधान में लिखी है। IAS भी इसका अपवाद नहीं है। एक IAS अधिकारी को भ्रष्टाचार, दुर्व्यवहार और अक्षमता के आधार पर राज्य सरकार द्वारा एक निर्दिष्ट तरीके से निलंबित किया जा सकता है। उसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा सेवा से हटाया जा सकता है। हाल के एक मामले में, कई वरिष्ठ IAS अधिकारी थे जो अनिवार्य रूप से भारत सरकार द्वारा सेवा से सेवानिवृत्त किये गए थे।
IAS अधिकारियों को हटाने की प्रक्रिया लगभग भारत सरकार के किसी अन्य ग्रुप ए अधिकारी के समान है। हर साल कई IAS अधिकारियों को विभिन्न कारणों से निलंबित, गिरफ्तार और सेवा से हटा दिया जाता है।

मिथक 13: IAS परीक्षा में चयन के लिए भाग्य अनिवार्य है
सत्य: भाग्य, समर्पण और प्रयास का परिणाम है जो IAS की तैयारी में लगा है। केवल भाग्य ही IAS परीक्षा में चयन के लिए आश्वासन नहीं दे सकता है। IAS परीक्षा में अंक प्राप्त करना विभिन्न कारकों का संयोजन है और भाग्य उनमें से एक है। हम यह नहीं कह सकते हैं कि IAS परीक्षा में चयन के लिए भाग्य एकमात्र आवश्यक कारक है।

हमें उम्मीद है कि हमने IAS परीक्षा से जुड़े सभी प्रचलित मिथकों को दूर कर दिया है और भ्रांतियों से संबंधित आपके संदेह को स्पष्ट कर दिया है। भारत में सिविल सेवा परीक्षाओं के संबंध में नवीनतम और सबसे प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करने के लिए, हमारे पेज पर visit करते रहें।

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