वित्तीय पर्यवेक्षण में संसद की भूमिका

यह आर्टिकल संसद के वितीय विभागों का विश्लेषण करता है. इसके अलावा संसद के वित्तीय पर्वेक्षण को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदमो का विश्लेषण भी करता है.

Created On: Apr 20, 2017 14:10 IST
Modified On: Apr 24, 2017 12:03 IST

parliament financial oversight executive

भारत के संविधान के अनुसार कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा विधानमंडल भारत की राजनीतिक संरचना के तीन मुख्य पहलू हैं. इन तीन शाखाओं में कार्यपालिका तथा विधानमंडल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योकि इसके अंतर्गत  प्रसाशनिक , राजनीतिक, तथा वित्तीय विभाग शामिल हैं.
इस परिपेक्ष्य में, हमने संसद के मौजूदा  वित्तीय कार्यो तथा इसकी वित्तीय पर्यवेक्षण को सुधारने के लिए कौन से कदम उठाये जाने चाहिये ये समझने का प्रयास किया है.
प्राथमिक रूप से भारत की संसद के चार प्रमुख कार्य हैं.
i. नागरिको के आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व
ii. कानूनों का अधिनियमन
iii. कार्यपालिका के कार्यो तथा नीतियों के लिए उसे उत्तरदायी बनाना.
iv. सरकार के वितीय गतिविधियों का पर्यवेक्षण करना.

इन चार कार्यो में से सरकार की वित्तीय गतिविधियों का पर्यवेक्षण करना सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है क्योकि यह देश के विकास से सीधे जुड़ा हुआ है.
 इस मुद्दे से जुड़े IAS के लिए मुख्य प्रश्न निम्नलिखित हैं.
प्रश्न 1 रेलवे बजट को सामान्य बजट में  विलय करने से यह भारतीय रेलवे की कार्यक्षमता बढ़ाएगा. टिप्पणी करिए.
प्रश्न 2. बीते हुए वर्षो में कार्यपालिका के उपर संसद के पर्यवेक्षण की गुणवत्ता में कमी आयी है.
प्रश्न 3. संसद की कार्यपालिका के ऊपर पर्यवेक्षण की गुणवत्ता सुधारने के लिए कौन कौन से कदम उठाने की जरूरत है.

संसद की सरकार की वित्तीय गतिविधियों के पर्यवेक्षण में मुख्यतया दो कार्य होते हैं. पहले समीक्षा करना तथा वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी देना तथा सरकार द्वारा व्यय किये गए पैसे की जांच करना.

वित्तीय पर्यवेक्षण के मौजूदा तरीके

वित्तीय पर्यवेक्षण के मौजूदा तरीके , संसद में वित्त मंत्री द्वारा पारित बजट की सन्वीक्षा तथा संसदीय समिति द्वारा पारित बजट की समीक्षा करना है..

बजट की संवीक्षा

संसद जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है. संसद के पास यह जरूरी अधिकार तथा उत्तरदायित्व रहता है कि जनता से करों  तथा उपकारों से जमा पैसे का बजट में कैसे इस्तेमाल किया गया है. संसद यह कार्य चार तरीको से करती है.
i. बजट के प्रस्तावों पर चर्चा
ii. विभाग से सम्बंधित सथाई समितियों द्वारा अनुदानों की मांग का अध्ययन.
iii. अनुदानों की माग पर वोटिंग
iv. विनियोग तथा वित्त विधेयको को पारित करना
• वित्त मंत्री द्वारा बजट को प्रस्तावित करने के एक दिन बाद बजट पर आम चर्चा होती है. इस परिचर्चा में वोटिंग नहीं होती है..
• सामान्य परिचर्चा के बाद  तीन हफ्ते के अवकाश में चली जाती है. इस दौरान डीआरएससी विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रस्तिवित व्ययों की जांच होती हैं.
•रिपोर्ट के जमा होने के बाद मंत्रालयों द्वारा की गई अनुदानो की मांग पर चर्चा होती है, जिस पर लोकसभा में वोटिंग भी होती है.
• अनुदानों की मांग के पारित होने के बाद इनको विनियोग विधेयको में बदला जाता है. यह बिल
भारत की समेकित निधि से व्यय के लिए पैसे निकल सकता है.
• अंत में वित्त विधेयक तथा विनयोग विधेयको के ऊपर वोटिंग होती है.
संसदीय समिति की समीक्षा
संसदीय समिति विधान मंडल का एक महत्वपूर्ण भाग है. बजटीय प्रक्रिया से दो तरह की समीतियाँ जुडी हैं. विभागों से सम्बंधित स्थायी समिति तथा वितीय समितियां.
विभागों से जुडी स्थाई समिति
यह समीतिया अनुदानों की मांगो तथा लोक सभा में हुयी चर्चो के ऊपर रिपोर्ट तैयार करती है. ये समीतिया  कटौती प्रस्ताव पारित नहीं कर सकती. 2014-15 के बजट सत्र में वक़्त के अभाव के चलते इन समीतियो से सलाह नहीं ली गयी थी.

वितीय समिति

यह संसद के कार्यपालिका से जुड़े वित्तीय मुद्दों की संवीक्षा करती है. यह समिति सरकार को दिए अपने सुझावो के आधार पर एक करवाई रिपोर्ट तैयार करती है और उसे संसद में पेश करती है.वित्तीय समितियां तीन तरह की होती हैं. लोक लेखा समिति, अनुमान समिति, तथा सार्वजानिक उपक्रम समिति.
लोक लेखा समिति सरकार के व्ययों को सुनिश्चित करती है. अनुमान समिति आवंटित धनराशी के आवंटन की जांच करती है तथा सार्वजानिक उपक्रम समिति नियंत्रक तथा महालेखापरीक्षक द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट की जांच करती है.

संसद की वित्तीय पर्यवेक्षण को मजबूत करने हेतु आवश्यक कदम

संसद की वित्तीय पर्यवेक्षण को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित कदमो के उठाये जाने की जरूरत है.

वित्तीय व्ययों को परिणामों में बदलना

अभी तक मंत्रालयों तथा विभागों की आवंटित धन राशि तथा उसके क्रियान्वयन में बीच कोई सहलग्नता नहीं है. सत्ता के  उत्तरदायित्व को यथार्थ में अमल में लाने हेतु पर्याप्त प्रयासों की जरुरत है.

संसदीय  बजट के दफ्तर का स्थापन

संसदीय बजट का दफ्तर बजट से सम्बंधित तथा वित्तीय  अनुसन्धान के लिए एक विशेष निकाय है. इस तरह के दफ्टर कई विकसित देशों में पहले से मौजूद  हैं.

लोक लेखा समिति को मजबूत करना

लोक लेखा समीति की रिपोर्ट की लोकसभा में वित्त मंत्री  द्वारा औपचारिक प्रस्ताव के तहत चर्चा होनी चाहिए.यह कदम इसीलिए जरूरी है कि इस समिति की रिपोर्ट्स का संसद में परिचर्चा करना महत्वपूर्ण है. इसके अलावा लोक लेखा समिति के द्वारा जमा की जाने वाली रिपोर्टों की संख्या को बढ़ाना चाहिए.

अनुमान समिति का मजबूतीकरण करना

राष्ट्रीय कमीशन  संविधान के कार्यचालन के लिए यह सुझाव दिया कि अनुमान समिति को बजट से जुड़े नीतिगत दस्तावेजों की समीक्ष्या करनी चाहिए. यह पहल  संसद में चर्चा परिचर्चा में सुधर लाएगी.

अनुदानों की अनुपूरक मांगों की संवीक्षा

वर्तमान में डीआरएससी के द्वारा अनुदानों की पूरक मांगो की संवीक्षा नहीं की जाती है. इस चीज के लिए एक उचित तंत्र को विकसित करने की जरूरत है. इसके अलावा अनुमान समिति द्वारा  पूरक मांगों  का निरीक्षण भी जरूरी है.

उपसंहार

पिछले तीन दशको कई तरह के सामाजिक, आर्थिक, तथा तकनीकी बदलावों की वजेह से, लोगो की सरकार के प्रति अपेक्षाएं बहुत बढी हैं. और सरकार करडाता के पैसे को जब तक अच्छे से क्रियान्वयित नहीं कर पायेगी जनता की अपेक्ष्याओं पर खरा उतर पाना असंभव होगा. इसीलिए आने वाले समय में संसद को इस मामले में मुख्य भूमिका निभाने की जरूरत है.

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