कॉलेज स्टूडेंट्स डिप्रेशन को समझकर कुछ ऐसे करें कंट्रोल

कॉलेज स्टूडेंट्स आजकल जल्दी ही डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं क्योंकि उन्हें अपने स्टडी प्रेशर, एक्स्ट्रा करीकुलर एक्टिविटीज़ और इंटर्नशिप के साथ ही पीअर प्रेशर भी झेलना पड़ता है. इस आर्टिकल में आपको डिप्रेशन की जानकारी देने के साथ ही उससे बचने के टिप्स भी बताये जा रहे हैं.

Created On: Mar 6, 2020 16:11 IST
Modified On: Aug 17, 2020 17:02 IST
Depression and its treatment
Depression and its treatment

‘डिप्रेशन’ शब्द का अर्थ और गंभीर परिणाम

‘डिप्रेशन’ को अगर हम टेक्नोलॉजी और मॉडर्निटी का ‘बाय प्रोडक्ट’ कहें तो शायद यह गलत नहीं होगा. दरअसल, आजकल तकरीबन हरेक इंसान कम या ज्यादा इस डिप्रेशन का शिकार है. अगर हम डाटा की बात करें तो आप यह जानकर कुछ चिंता में पड़ जायेंगे कि पूरी दुनिया में 300 मिलियन से अधिक लोग इस डिप्रेशन की बीमारी से पीड़ित हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की तकरीबन 8 फीसदी आबादी आंशिक या पूरी तरह इस डिप्रेशन की चपेट में है. अगर हम डिप्रेशन के सबसे खतरनाक परिणाम की चर्चा करें तो बहुत बार डिप्रेस्ड लोग आत्महत्या भी कर बैठते हैं. हमारे देश भारत में भी तकरीबन 18 फीसदी लोग प्रत्येक वर्ष आत्महत्या कर लेते हैं या फिर, आत्महत्या करने की कोशिश करते हैं. दुनिया में औसतन 8 लाख लोग प्रत्येक वर्ष आत्महत्या कर लेते हैं. अब जो भी हो, हम किसी भी चुनौती या समस्या से मुंह तो नहीं मोड़ सकते हैं न क्योंकि जीवन का दूसरा नाम ही संघर्ष है जिससे हम पल-पल या रोज़ाना जूझते हैं. इसलिए आइये इस आर्टिकल में सबसे पहले डिप्रेशन को समझते हैं और फिर जानते हैं इस डिप्रेशन की बीमारी से निपटने के कुछ कारगर तरीकों के बारे में:

डिप्रेशन क्या है?

अमरीका के एक साइकियाट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक, ‘डिप्रेशन एक सामान्य और गंभीर मेडिकल बीमारी है जो आपकी सोच, कामकाज और महसूस करने की क्षमता पर नेगेटिव इफ़ेक्ट डालता है. सौभाग्य से आजकल इस डिप्रेशन का इलाज दुनिया में उपलब्ध है.’ इस डिप्रेशन के अनेक प्रत्यक्ष ओर अप्रत्यक्ष कारण होते हैं जैसेकि, शारीरिक बीमारी या शारीरिक शोषण, आर्थिक तंगी, नौकरी छूटना, हीन भावना या सामाजिक सम्मान को किसी भी वजह से ठेस पहुंचना. इसी तरह, कॉलेज स्टूडेंट्स भी बड़ी आसानी से डिप्रेशन का शिकार बन सकते हैं. इसके कई कारण हो सकते हैं जैसेकि आजकल कॉलेज स्टूडेंट्स का स्टडी प्रेशर काफी बढ़ गया है और उन्हें नई जिम्मेदारियों, पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट जैसी कई समस्याओं का सामना एक साथ करना पड़ता है. कभी-कभी किसी अनजान शहर में किसी कॉलेज, हॉस्टल या PG में अपना नया जीवन शुरू करना भी इन स्टूडेंट्स के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है जिससे आमतौर पर उनकी उदासी और स्ट्रेस लेवल बहुत बढ़ जाता है. अब अगर एक कॉलेज स्टूडेंट होने के नाते आप डिप्रेशन की अच्छी जानकारी रखेंगे तो आपको कभी भी डिप्रेशन से डर नहीं लगेगा और आप एक बैलेंस्ड लाइफ जी सकेंगे.

‘डिप्रेशन’ की पहचान कुछ ऐसे करें

डिप्रेशन से पीड़ित लोगों में पाये जाने वाले कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं -

  • लंबी अवधि के लिए डिप्रेशन/ उदासी या शून्यता महसूस करना.
  • जो चीज़ें या कार्य पहले अच्छे लगते थे, उन चीजों या कार्यों में रुचि की कमी
  • नींद न आना या नींद का पैटर्न भंग होना
  • अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • ज्यादातर समय चिंतित रहना या बेचैनी महसूस करना
  • डिप्रेशन के गंभीर मामलों में मर जाने या आत्महत्या का विचार या फिर, कभी-कभी आत्महत्या के प्रयास भी शामिल होते हैं
  • अनजाने ही वजन घटना या भूख कम लगना
  • बिना वजह अपने को सब पर बोझ समझना या गुनाह की भावना

अगर आपको लगता है कि इनमें से कोई एक भी लक्षण आप में है तो आप बिना किसी विलंब के किसी अच्छे डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक से सलाह लें. मौजूदा समय में इस समस्या के हानिकारक प्रभावों के बारे में लोग पहले से काफी जागरूक हो गये हैं. इसलिए अब, युवाओं के लिए इस समस्या का समाधान करने के लिए अपनी चुप्पी तोड़ने और इस समस्या का सामना करने के लिए चर्चा करना आसान हो गया है. यहां तक ​​कि अगर आप इस मामले को लेकर किसी डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक के पास नहीं जाना चाहते हैं तो भी आपको इस मुद्दे पर किसी ऐसे व्यक्ति से अवश्य बातचीत करनी चाहिए जिस पर आप अपने परिवार के किसी सदस्य की तरह ही भरोसा कर सकते हैं.

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डिप्रेशन की सही ट्रीटमेंट भी है जरुरी

डिप्रेशन के उपचार में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम इस समस्या की पहचान करना है. पहचान करने के द्वारा, हमारा अभिप्राय इस समस्या का मूल कारण जानने की कोशिश करना नहीं है क्योंकि डिप्रेशन का सही कारण समझना वास्तव में काफी मुश्किल होता है. लेकिन यह पहचान करना और स्वीकार करना कि आप डिप्रेशन के रोग या समस्या से पीड़ित हैं, अपने आप में ही मुख्य बात है. एक बार इस समस्या की पहचान हो जाने के बाद, आपके लिए किसी व्यक्ति, दोस्त, रिश्तेदार, शिक्षक आदि के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करना बहुत आसान हो जाता है. ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जब आप किसी ऐसे व्यक्ति से इस मुद्दे पर बात करते हैं जो डिप्रेशन पर काबू पाने में आपकी बहुत मदद कर सकता है. खासकर डिप्रेशन के शुरुआती चरणों में आपको इस मुद्दे पर चर्चा करने से काफी लाभ मिल सकता है. डिप्रेशन की समस्या से पीड़ित होने पर किसी भी व्यक्ति के लिए अन्य लोगों और अपने शुभचिंतकों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करना बहुत ही महत्वपूर्ण है.

हालांकि, जैसे-जैसे यह समस्या बढ़ती है, आपको इसका चिकित्सकीय उपचार करवाना पड़ सकता है. ऐसे समय में किसी अच्छे थेरेपिस्ट का महत्व पता चलता है. थेरेपिस्ट या मनोवैज्ञानिक बातचीत के जरिये भी उपचार को प्रोत्साहित करते हैं. लेकिन जब आप अपने किसी परिवार के सदस्य से बात करते हैं तो इसकी तुलना में उनके तरीके कहीं अधिक प्रभावी और परिणाम उन्मुख होते हैं. इसलिये, यदि आपकी समस्या बढ़ती है तो आपको मनोचिकित्सक के साथ से इस विषय में अवश्य सलाह लेनी चाहिए. लेकिन ऐसा आमतौर पर तब होता है जब डिप्रेशन का रोग आपमें शारीरिक रूप से प्रकट होने लगता है. ऐसा ज्यादातर डिप्रेशन के अत्यंत गंभीर मामलों में होता है या फिर, जिन लोगों ने लंबे समय से अपने डिप्रेशन के रोग का ईलाज न करवाया हो, उन लोगों को किसी अच्छे थेरेपिस्ट की मदद लेनी पड़ती है.

डिप्रेशन से बचने के कुछ अन्य प्रभावी उपचार और तरीके हैं - नियमित रूप से व्यायाम करना, अपने पसंदीदा कार्य करना, प्रकृति के साथ कुछ समय बिताना, अपने आहार और नींद के पैटर्न में सुधार करना, शराब या अन्य ड्रग्स का सेवन न करना और स्वस्थ जीवनशैली.

कॉमन टाइप्स ऑफ़ डिप्रेशन:

डबल डिप्रेशन

यह डिप्रेशन की एक ऐसी स्थिति है, जहां किसी व्यक्ति का मूड कभी सामान्य और कभी असामान्य रूप से 'उन्माद' के रूप बदलता रहता है. उन्माद की ये अवधियां अलग-अलग होती हैं जैसेकि लोगों में हल्के उन्माद को हाइपोमैनिया के रूप में जाना जाता है और अपने चरम पर पहंचने के साथ ही यह उन्माद रोगी के जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है. दुतरफा डिप्रेशन से पीड़ित लोग आत्महत्या करने के बारे में काफी सोचते हैं. दुतरफा डिप्रेशन से पीड़ित लोगों में पाए जाने वाले कुछ सामान्य लक्षण-

  • थकान, अनिद्रा, और सुस्ती
  • बेवजह दर्द, और मानसिक बेचैनी
  • निराशा और आत्मसम्मान खो जाना
  • चिड़चिड़ापन और चिंता
  • अनिर्णय और अव्यवस्था

प्रमुख डिप्रेशन डिसऑर्डर्स

आपने शायद 'नैदानिक ​​डिप्रेशन' शब्द के बारे में सुना होगा. जब लोग नैदानिक ​​डिप्रेशन के बारे में बात करते हैं तो वे आम तौर पर 'मेजर डिपरेशनिव डिसऑर्डर (एमडीडी)' का जिक्र करते हैं. प्रमुख डिप्रेशन डिसऑर्डर के कुछ सामान्य लक्षण निम्नानुसार हैं -

  • उदास होना या खराब मूड
  • अपनी पसंद के काम करने में मन न लगना
  • वजन और नींद के पैटर्न में परिवर्तन
  • थकान और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • अपने को सब पर बोझ समझना या गुनाह की भावना

कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए कुछ प्रेरक हेल्थ एवं फिटनेस टिप्स

सीजनल एजीटेशन डिसऑर्डर (एसएडी)

यदि आपको लगता है कि आप सर्दियों के मौसम में डिप्रेशन, नींद और वजन ज्यादा बढ़ने का अनुभव कर रहे हैं लेकिन वसंत के मौसम के दौरान आपको सब ठीक लगता हैं तो यह हो सकता है कि आप डिप्रेशन के मौसमी उत्तेजना विकार से पीड़ित हों. यह आमतौर पर शरीर के सामान्य सर्कैडियन रिदम में बदलाव के कारण होता है. हमारी आंखों के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश करने वाला प्राकृतिक प्रकाश इस रिदम को प्रभावित करता है. इसलिये, दिन और रात की अवधि में कोई भी बदलाव इस रिदम में गड़बड़ी कर देता है जिससे अनिद्रा, नींद में कमी और डिप्रेशन जैसी समस्यायें बढ़ जाती हैं.

डिप्रेशन के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट क्यों है जरुरी?

डिप्रेशन के लिए चिकित्सा सहायता लेना बहुत महत्वपूर्ण है. इसके लिए यह बहुत जरुरी है कि आप जिस प्रकार के डिप्रेशन से पीड़ित हैं, उसे समझ कर ही अपना ईलाज करवाएं. डिप्रेशन के विभिन्न प्रकार के विकारों के लिए विभिन्न प्रकार की चिकित्सा की आवश्यकता होती है. जितनी जल्दी आप अपनी समस्या की पहचान कर लेते हैं, उतनी ही जल्दी आप इस समस्या को हल कर सकते हैं. हालांकि, अगर आप समय रहते कोई चिकित्सा सहायता प्राप्त नहीं करते हैं या डिप्रेशन की समस्या की पहचान नहीं करते हैं तो लंबे समय तक उपचार न करवाने पर डिप्रेशन आपके जीवन पर अपने जानलेवा प्रभाव डाल देता है.

बहुत से लोग यह बात मानने से डरते हैं कि वे डिप्रेशन से पीड़ित हैं क्योंकि अभी भी हमारे देश में किसी मानसिक बीमारी को एक कलंक के रूप से देखा जाता है. ऐसे भी कई लोग हैं जो इसे किसी बीमारी के रूप में स्वीकार करने से भी मना कर देते हैं. इसी तरह, मरीजों से उनकी डिप्रेशन संबंधी समस्याओं के बारे में बात करना अक्सर सबसे बड़ी चुनौती होता है. इसलिए, अगर आपको संदेह है कि आप किसी भी प्रकार के डिप्रेशन से पीड़ित हैं तो बिना किसी देरी के चिकित्सा सहायता लें. अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो डिप्रेशन से पीड़ित है तो उसे समझने की कोशिश करें और फिर, उसे इस बारे में अच्छी तरह समझाएं ताकि वह पीड़ित व्यक्ति जितनी जल्दी हो सके अपना इलाज करवा ले.

स्ट्रेस मैनेजमेंट: कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए कारगर तरीके

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