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छात्रों के पढ़ाई करने के कुछ खास तरीके

Apr 17, 2019 12:22 IST
Different Learning Styles

आज इस आर्टिकल में खास तौर पर हम बताने जा रहे हैं छात्रों के पढ़ाई करने के कुछ ख़ास तरीकों के बारे में| दरअसल हर किसी के पढ़ाई करने व समझने का तरीका अलग-अलग होता है| कई बार देखा गया है कि छात्र किसी विषय वस्तु के बारे में उससे जुड़ी विडियो देख कर समझ जाते हैं और कई छात्र क्लास रूम में लेक्चर सुन कर अच्छी तरह समझ पाते हैं| पढ़ने का तरीका चाहे जो भी हो ज़रूरत है तो बस इतनी की आप अपने पढ़ने के सही तरीके को समझे और उस प्रकार पढ़ाई करें जिस तरह आप चीजों को आसानी से समझ सकते हैं|

तो आइये जानते हैं छात्रों के पढ़ाई करने के 6 प्रमुख शिक्षण शैलियों को :

1. विजुवल लर्नर (Visual : special)

2. औरल लर्नर (Aural : auditory)

3. फिजिकल लर्नर (Physical : kinesthetic)

4. लॉजिकल लर्नर (Logical : mathematical)

5. सोशल लर्नर (Social : interpersonal)

6. सोलिटरी लर्नर (Solitary : intrapersonal)

नीचे हम इन सभी शिक्षण शैलियों को और अच्छी तरह से समझेंगे|

1. विजुवल लर्नर (Visual : special) -

कुछ ऐसे छात्र जिनको किसी भी विषय को समझने के लिए टेक्स्ट फॉर्मेट की जगह विडियो और चित्र के द्वारा जल्दी समझ आता है, वैसे छात्रों को विजुवल लर्नर कहते हैं| ऐसे छात्रों को हमेशा अपने नोट्स तैयार करते समय ज्यादा से ज्यादा डायग्राम और फ्लो चार्ट की मदद लेनी चाहिए| यदि आपको कोई टॉपिक समझने में परेशानी हो रही है तो आप उससे सम्बंधित विडियो भी देख कर बड़े आसानी से टॉपिक को समझ सकते हैं| विजुअल लर्नर जैसे छात्रों को हमेशा टेक्स्ट फॉर्मेट वाले टॉपिक को समझने के लिए छोटे- छोटे कांसेप्ट स्टोरी तथा डायग्राम का इस्तेमाल करना चाहिए|

2. औरल लर्नर (Aural : auditory) –

औरल लर्नर छात्र किसी भी टॉपिक को समझने के लिए उसे सुन कर समझना पसंद करते हैं| जैसे की क्लास रूम के लैकचर से, किसी स्पीच से, ऑडियो के फॉर्म में या अन्य किसी वर्बल कम्युनिकेशन के ज़रिए| तो ऐसे छात्र जिनको खुद से किताबें पढ़ के समझने की जगह सुन कर जल्दी और अच्छी तरह समझ आता है उनको हमेशा यह प्रयास करना चाहिए की वह अपने विषय से जुड़ी टॉपिक्स पर ऑडियो सुन कर समझें, या आप अपने टीचर के जरिये पढ़ाए गए लेक्चर को भी रिकॉर्ड कर सकते हैं ताकि जब आप उस टॉपिक को दुबारा पढ़ें या रिविज़न करे तो टीचर द्वारा समझाए टॉपिक को सुनकर अच्छी तरह समझ सकें| इसके लिए आज कल ऐसे कई ऑनलाइन साइट्स भी उपलब्ध हैं जहाँ से आप मदद ले सकते हैं|

3. फिजिकल लर्नर (Physical : kinesthetic) –

यहाँ हम बात करेंगे ऐसे छात्रों की जिनको किसी भी चीज़ को समझने के लिए प्रैक्टिकल एक्सपेरिमेंट्स की ज़रूरत पड़ती है| चलिए एक उदहारण की मदद से समझते हैं- माना कोई छात्र जिसे किसी कार के मैकेनिज्म को समझना है और वह क्लासरूम में उससे सम्बंधित लेक्चर भी ले रहा है| लेकिन वह इस टॉपिक को लेक्चर के ज़रिए उतनी अच्छी तरह नहीं समझ सकेगा जितनी जल्दी वह कार की एक्चुअल मैकेनिज्म प्रैक्टिकल तरीके से समझ पायेगा| इस तरह के छात्र क्लास रूम के अलावा लैबस में काफी अच्छा परफॉर्म करते हैं| तो ऐसे छात्रों को हमेशा प्रैक्टिकल तरीके से चीजों को रिलेट कर के समझना चाहिए, जिससे उन्हें पढ़ने में भी आसानी होगी और कोई भी टॉपिक अच्छी तरह समझ भी आएगा|

4. लॉजिकल लर्नर (Logical : mathematical) :

ऐसे छात्र जिनको गणित और उससे जुड़े विषय में काफी रूचि होती है वह सभी विषय को लॉजिकल तरीके से सोंच कर पढ़ने की कोशिश करते हैं| ऐसे छात्र विशेष रूप से किसी भी चीज़ पढ़ते समय रटने की जगह उसे लॉजिकल तरीके से समझने की कोशिश करते हैं| तो ऐसे छात्र जो लॉजिकल तरीके से अपने विषय को रिलेट कर के पढ़ते हैं वह जब भी किसी विषय को पढ़ें कोशिश करें की उसे माईंड मैप, ब्रांचिंग ट्री जैसे तरीकों से समझने की कोशिश करें क्यूंकि यह तरीका आपको अन्य तरीकों की तुलना में टॉपिक को समझने में ज्यादा आसान साबित होगा|

5. सोशल लर्नर (Social : interpersonal) :

सोशल लर्नर छात्र हमेशा ग्रुप स्टडी को प्राथमिकता देते हैं| ऐसे छात्रों को अकेले पढ़ने की तुलना में एक ग्रुप में पढ़ना ज्यादा पसंद होता है| जो छात्र सोशल लर्नर होते हैं उन्हें हमेशा यह कोशिश करनी चाहिए की जब भी उन्हें कोई टॉपिक समझ नहीं आ रहा हो वह अपने दोस्तों से उस टॉपिक पर चर्चा करें| अपने स्कूल में कुछ दोस्तों के साथ अपना एक स्टडी ग्रुप बनाएं और हर एक टॉपिक को पढ़ने के बाद उसपर मिल कर चर्चा करें ताकि वह टॉपिक अच्छी तरह समझ आ जाए| आप चाहें तो अपने कुछ दोस्तों के साथ मिल कर कुछ टॉपिक को पढ़ने के लिए आपस में बाट लें और फिर एक दुसरे को पढ़ीहुई टॉपिक समझाने की कोशिश करें| यह तरीका भी आपको विषय को समझने और रूचि बनाये रखने में मददगार साबित होगा|

6. सोलिटरी लर्नर (Solitary : intrapersonal) :

जैसा की मैंने सोशल लार्नेर्स के बारे में अभी बताया, ठीक इसके विपरीत कुछ ऐसे भी छात्र होते हैं जिनको ग्रुप की जगह अकेले पढ़ना ज्यादा पसंद होता है| ऐसे छात्र ग्रुप स्टडी की जगह अकेले शांत जगह बैठ कर पढ़ना पसंद होता है| यदि सोलिटरी लार्नेर्स को आप ग्रुप स्टडी के लिए बोले तो उनके लिए यह संभव नहीं होगा की वह सबके साथ बैठ कर किसी भी टॉपिक को उतनी अच्छी तरह समझ सकें जितना की वह अकेले बैठ कर पढ़ सकते हैं| हमेशा ऐसे छात्रों को पढ़ते समय यह कोशिश करना चाहिए की वह दोस्तों के साथ ग्रुप में पढ़ने की जगह अकेले बैठ कर पढ़ने की कोशिश करें ताकि वह पढ़ाई में और बेहतर प्रदर्शन कर सकें|

निष्कर्ष : ऊपर हमने 6 प्रमुख शिक्षण शैली यानि की learning style के बारे में काफी अच्छी तरह चर्चा किया है ताकि आप अपने पढ़ने के तरीके को परख कर अपनी खुद की learning style समझ सकें| यदि आपने अपने learning style  के अनुसार पढ़ाई करना शुरू कर दिया तो आपको अपने पढ़ाई करने के तरीके में अच्छे बदलाव नज़र आने लगेंगे जोकि आपके करियर को सफलता की ओर ले जाने में काफी मददगार साबित होगा|

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