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Positive India: कभी बेचा था अख़बार, फिर कड़ी मेहनत से क्लियर किया UPSC -जानें IAS नीरीश राजपूत की कहानी

 बिना कोचिंग का सहारा लिए  UPSC सिविल सेवा 2013 में 370वीं रैंक हासिल कर बनें IAS अफसर निरीश राजपूत देश के हर युवा के लिए एक प्रेरणा है। 

May 21, 2020 14:41 IST
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Positive India: कभी बेचा था अख़बार, फिर कड़ी  मेहनत से क्लियर किया UPSC -जानें  IAS नीरीश राजपूत की कहानी
Positive India: कभी बेचा था अख़बार, फिर कड़ी मेहनत से क्लियर किया UPSC -जानें IAS नीरीश राजपूत की कहानी

अपने भाग्य और भविष्य को बदलने की चाह में हर मुश्किल परिस्थिति का सामना करते हुए निरीश राजपूत ने जो सपना देखा उसे सच कर दिखाया। तीन बार UPSC सिविल सर्विस की परीक्षा में फेल होने के बाद 2013 की परीक्षा में 370वीं रैंक हासिल कर बने IAS अफसर। हालाँकि उनका यह सफर काफी कठिनाइयों से भरा रहा। कोचिंग की फीस और किताबें खरीदने के पैसे ना होने के बावजूद निरीश ने नहीं मानी हार और करते रहे कठिन परिश्रम। आइये जानते हैं IAS निरीश राजपूत की कहानी। 

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निरीश के पिताजी हैं दर्जी

निरीश मध्य प्रदेश के भिंड जिले के महु गाँव के रहने वाले हैं। निरीश का बचपन से IAS बनने तक का सफर गरीबी में ही गुज़रा। उनके पिताजी सिलाई का काम कर के पाँच लोगों के परिवार का पेट भरते थे। निरीश अपने परिवार के साथ महज 15 बाई 40 फीट के छोटे से मकान में रहते थे। परिवार की तंग आर्थिक हालत के कारण निरीश ने गाँव के ही सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। 

अखबार बाँट कर भरी थी कॉलेज की फीस 

नीरीश बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज़ थे। परन्तु पिता की कम आय के कारण उनका कॉलेज में दाखिला होना मुश्किल था। अपनी फीस के पैसे जुटाने के लिए निरीश ने सुबह उठ कर घरों में अखबार डालने का काम किया। इस नौकरी से मिले पैसों से उन्होंने ग्वालियर के एक सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया। निरीश ने सरकारी कॉलेज से ही BSc और MSc की डिग्री हासिल की। .

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UPSC की तैयारी के दौरान हुआ एक बुरा अनुभव 

निरीश बताते हैं कि उनके एक दोस्त ने उत्तराखंड में नया कोचिंग इंस्टीट्यूट खोला था और उन्हें वहाँ पढ़ाने के लिए बुलाया गया। इसके बदले में उनके  दोस्त ने उनसे वादा किया कि बदले में उन्हें UPSC की तैयारी के लिए स्टडी मैटेरियल उपलब्ध कराएंगे। अपने दोस्त की बात पर विश्वास कर निरीश ने 2 साल तक इंस्टिट्यूट में पढ़ाया परन्तु प्रसिद्धि पाने के बाद निरीश के दोस्त ने उन्हें यह कहकर नौकरी से निकाल दिया कि वह एक गरीब परिवार से हैं और उनमें IAS अफसर बनने की काबिलियत नहीं है। 

दूसरों के नोट्स पढ़ कर की UPSC सिविल सेवा की तैयारी 

अपने दोस्त के बर्ताव से निरीश को निराशा ज़रूर हुई परन्तु उन्होंने अपने आत्म विश्वास को डगमगाने नहीं दिया। निरीश इस बात को भलाई भांति समझ चुके थे की अपने हालातों को बदलने का एक मात्र सहारा शिक्षा प्राप्त कर एक कामयाब इंसान बनना ही है। और इसी सपने को पूरा करने के लिए वह दिल्ली चले गए। दिल्ली में उनकी मुलाक़ात कई ऐसे लोगो से हुई जो उन्हीं की तरह IAS बनना चाहते थे। उन्हीं में से एक दोस्त के साथ वह मुख़र्जी नगर के छोटे से घर में किराए पर रहने लगे। निरीश के हालात इतने ख़राब थे कि उनके पास ना तो कोचिंग में दाखिला लेने के पैसे थे और ना ही किताबें खरीदने के। इसीलिए उन्होंने सारी पढ़ाई दोस्त के नोट्स पढ़ कर की। निरीश कभी अपने हालातों से डरे नहीं बल्कि एक सुखद भविष्य की चाह में कड़ी ममेहनत करते रहे। 

चौथे एटेम्पट में मिली UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता 

IAS बनने का सफर निरीश के लिए किसी चुनौती से काम नहीं रहा। तीन एटेम्पट में फ़ैल होने के बाद जहाँ व्यक्ति सफलता की उम्मीद छोड़ देता है वहीं निरीश यह जानते थे कि परिश्रम करने के अलावा उनके पास कोई और दूसरा रास्ता नहीं था। वह सकारात्मक सोच के साथ मेहनत करते रहे और 2013 में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा में 370वी रैंक हासिल कर IAS बन गए। 

IAS निरीश राजपूत आज उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपनी आर्थिक और  सामाजिक स्थिति सुधारना चाहते हैं। निरीश कहते हैं कि अपने जीवन में सुधार लाने का सबसे आसान और सस्ता मार्ग है शिक्षा प्राप्त करना और कामयाबी के लिए निरंतर मेहनत करते रहना। 

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