इंडियन स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स परफेक्शन सिंड्रोम के बारे में पढ़ें यहां कुछ अहम फैक्ट्स

इन दिनों अधिकतर लोगों के मन में यह सवाल जरुर आता होगा कि, आजकल के इस मॉडर्न विश्व में क्या हरेक काम में परफेक्ट होना अत्यावश्यक है? ......या इसकी कोई जरूरत नहीं है. टीन लाइफ कोच रजत सोनी ने परफेक्शन सिंड्रोम के बारे में यह बताया है कि, परफेक्शन सिंड्रोम अधिकतर लोगों की रोजाना की जिंदगी में काफी प्रेशर डालता है.  

Created On: Apr 14, 2021 21:11 IST
The Perfection Syndrome: Is it OK NOT to be Perfect?
The Perfection Syndrome: Is it OK NOT to be Perfect?

दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में और हरेक फील्ड में भी परफेक्ट बनना जरुर चाहता है. यह 21वीं सदी में सोशल मीडिया में अपना स्टेटस लगातार अपडेट करने वाले मिलेनियल्स के साथ-साथ अधिकतर मॉडर्न लोगों की एक ऐसी सच्चाई है जिसके पैकेज में काफी प्रेशर - वर्क प्रेशर, परफॉरमेंस प्रेशर, पीअर प्रेशर और इम्प्रेसिव पर्सनैलिटी से जुड़ा प्रेशर - भी शामिल है. बेशक परफेक्ट बनने की कोशिश या सभी कामों में परफेक्ट बनने की कोशिश करते रहना गलत नहीं है, लेकिन सही मायनों में, वैचारिक तौर पर परफेक्ट बनने की कोशिश अक्सर सभी लोगों पर बहुत ज्यादा प्रेशर डालती है.

चाहे आप अपनी एकेडेमिक परफॉरमेंस में सुधार लाना चाहते हों या आप अपनी आने वाली छुट्टियों की पहले से ही प्लानिंग करें, आप अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अवश्य ही परफेक्ट बनना चाहते हैं और इसी कारण अधिकतर लोग ‘परफेक्शन सिंड्रोम’ से ग्रस्त हो जाते हैं. हमारे इस वीडियो में, टीन लाइफ कोच और मोटिवेशनल स्पीकर रजत सोनी परफेक्ट बनने से जुड़े कई मिथकों को ख़त्म करने के लिए यह बता रहे हैं कि, हम सभी के लिए यह बिलकुल भी जरुरी नहीं है कि हम अपने प्रत्येक काम में परफेक्ट ही हों. आइये इस आर्टिकल में परफेक्शन सिंड्रोम के बारे में अधिक जानकारी पायें:

इंडियन स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स लगातार झेल रहे हैं परफेक्ट बनने का प्रेशर

चाहे वह एकेडेमिक्स, स्पोर्ट्स या एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज हों, मिलेनियल और यंगस्टर्स पर परफेक्ट बनने का काफी ज्यादा प्रेशर होता है. लोगों पर अक्सर कुछ प्रेशर तो समाज के लोग या उनके पीअर ग्रुप्स डालते हैं लेकिन, ज्यादातर प्रेशर तो हम लोग खुद अपने ऊपर डालते हैं. लेकिन परफेक्ट बनने की कोशिश करते समय, स्टूडेंट्स अक्सर यह नहीं सोचते हैं कि परफेक्ट होने की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है. वास्तव में, एक परफेक्ट व्यक्ति बनने की दौड़ में, स्टूडेंट्स अक्सर एक-दूसरे की नकल करना या अन्य लोगों के काम की नकल करना शुरू कर देते हैं. स्टूडेंट्स को यह समझना चाहिए कि जिस समय वे परफेक्ट बन जाते हैं, ठीक उसी समय उनका विकास रुक जाता है और वे कुछ नया नहीं सीख पाते हैं.

नीचे कुछ ऐसे महत्वपूर्ण पॉइंट्स दिए जा रहे हैं जो आपको परफेक्शन सिंड्रोम और प्रेशर से बचने में सहायता करने के साथ ही आसानी से परफेक्ट बनने में भी आपकी सहायता करेंगे.

खुद अपने बेस्ट फ्रेंड बनें

खुद अपने प्रति दोस्ताना रवैया अपनाना काफी महत्वपूर्ण है. इससे आपको अपनी सारी कमजोरियों और ताकतों के साथ खुद को स्वीकार करने में मदद मिलेगी. खुद अपने दोस्त होने के कारण आप अपने जीवन में जोखिम उठाने के लिए खुद पर पूरा भरोसा रखते हुए लगातार आगे बढ़ते रहेंगे. आपको अपनी गलतियों से सीख लेने में मदद मिलेगी और आप अपनी असुरक्षा की भावना को दूर हटा कर एक खुश और संतुष्ट इंसान बन जायेंगे. ये सभी आस्पेक्ट्स केवल एक परफेक्ट व्यक्ति बनने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.

दृढ संकल्प

हम खुद से जो कहते हैं, वह काफी महत्वपूर्ण होता है. हम अपने अवचेतन मन (सबकॉन्शियस माइंड) में जो भी विचार बार-बार लाते हैं, वे विचार हमें अपनी कार्य-नीतियां बनाने में सहायता करते हैं और इससे हमें अपने लक्ष्य प्राप्त करने में मदद मिलती है. इसलिए, अपने जीवन के मूल सिद्धांतों को बार-बार दोहराते रहें जैसेकि, आप सच्चे, ईमानदार और अपने लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं. एक परफेक्ट इंसान बनने के बजाय जीवन में आपका लक्ष्य नए-नए काम या स्किल्स सीखना होना चाहिए.  

जरूरत से ज्यादा सोच-विचार करने से बचें

क्या आपको पता है कि रोजाना हमारा दिमाग अधिक से अधिक 60,000 विचार सोचने में सक्षम है. इसके बावजूद, हम अक्सर एक या दो विचारों पर निर्भर रहना चाहते हैं और केवल उन्हीं विचारों पर अक्सर अपना सारा ध्यान केंद्रित कर देते हैं. यह जरूरत से ज्यादा सोच-विचार का कारण बन जाता है. इसलिए, केवल एक या दो मामलों पर जरूरत से ज्यादा सोचने के अलावा भी, आप अपने विचारों को ज्यादा अच्छे तरीके से व्यवस्थित कर सकते हैं. इससे आपको अपने दिमाग और मन को शांत, तनावमुक्त और व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी.

विभिन्नताओं की सराहना करें और इन्हें स्वीकार करें  

जिस तरह आपकी अपनी खास पहचान और व्यक्तित्व होता है, अन्य लोगों की भी ठीक उसी तरह अपनी अलग पहचान और व्यक्तित्व होते हैं. परफेक्शन सिंड्रोम से बचने के लिए. लोगों के बीच मौजूद विभिन्नताओं और उनके विभिन्न दृष्टिकोणों को स्वीकार करने के साथ ही हमारे लिए इन विभिन्नताओं की सराहना करना भी बहुत महत्वपूर्ण है. हरेक व्यक्ति अपने में ‘खास’ होता है. हम में अपनी कुछ खास कमियां हैं जो हमें अन्य लोगों से अलग बनाती हैं. हम कई बार रंग, काबिलियत, शारीरिक आकृति, मानसिक संतुलन और ऐसी कई बातों को लेकर लोगों के बीच भेदभाव करने लगते हैं. हमें लोगों को उनके इम्परफेक्ट होने के बावजूद भी, जैसे वे लोग हैं, उन्हें वैसे ही रूप में स्वीकार करना सीखना चाहिए. हमें अपनी तरफ से लोगों को उनकी कमियां दूर हटाने में पूरी सहायता करनी चाहिए ताकि वे लोग भी अपने जीवन में कुछ नया सीखते हुए लगातार अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकें.

खुद को दें बधाई

सबसे पहले, खुद को बधाई दें, अपने से यह अक्सर पूछें कि क्या आप पिछले साल, पिछले महीने या बीते हुए कल के दिन से आज एक ज्यादा अच्छे इंसान बन चुके हैं? अगर हां! .....तो आप बड़ा अच्छा काम कर रहे हैं. खुद को इस नेक काम की बधाई दें. आपको पूरे जीवन एक स्टूडेंट्स बनकर कुछ-न-कुछ सीखते रहना चाहिए और अपने परिवार, समाज और देश में अपना सकारात्मक योगदान देते हुए लगातार अपने व्यक्तित्व का विकास भी करना चाहिए.

एक्सपर्ट के बारे में:

रजत सोनी एक टीन कोच और मोटिवेशनल स्पीकर हैं. इन्होंने राजत सोनी इंटरनेशनल संगठन की स्थापना की है. यह संगठन टीनएजर्स के समस्त व्यक्तिगत विकास के लिए काम करता है. रजत सोनी टीन्स और प्री-टीन्स को संकोच, सामाजिक चिंता, सीखने में आने वाली दिक्कतों और ऐसे कई कारकों पर काबू पाने में सहायता करते हैं जो कारक टीनएजर्स को उनकी पूरी क्षमता हासिल करने से रोकते हैं.

ऐसे ही अन्य प्रेरक आर्टिकल्स पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट www.jagranjosh.com पर विजिट कर सकते हैं.

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