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टॉप  लॉ स्पेशलाइजेशन्स: सूटेबल लॉ स्पेशलाइजेशन करके इंडियन लॉ में बनाएं अपना करियर

भारत में आप कोई सूटेबल लॉ स्पेशलाइजेशन करके इंडियन लॉ फील्ड में अपना करियर बना सकते हैं. इस बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए ध्यान से जरुर पढ़ें यह आर्टिकल.

May 18, 2020 20:35 IST
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Top 5 Law Specialisations in India
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लॉ की विभिन्न फ़ील्ड्स हमेशा से ही स्टूडेंट्स और पेशेवरों के लिए काफी आकर्षक करियर ऑप्शन रही हैं. भारत में लॉ की प्रमुख फ़ील्ड्स में क्रिमिनल, सिविल, इंटेलेक्चुअल, कॉर्पोरेट और साइबर लॉ को शामिल किया जा सकता है. आप अपने टैलेंट और लॉ की फील्ड में दिलचस्पी के मुताबिक सूटेबल लॉ स्पेशलाइजेशन करके इंडियन लॉ में अपना करियर शुरू कर सकते हैं. इस आर्टिकल में हम आपके लिए सभी प्रमुख लॉ फ़ील्ड्स की जानकारी पेश कर रहे हैं ताकि आपको अपने लिए सूटेबल लॉ स्पेशलाइजेशन चुनते समय किसी प्रकार का कोई कंफ्यूजन या परेशानी न हो. आइये आगे पढ़ें यह आर्टिकल.

  • क्रिमिनल लॉ

इसे लॉ की फील्ड के सबसे पुराने स्पेशलाइजेशन के तौर पर जाना जाता है. जिन लोगों को क्राइम्स को सॉल्व करने, इन्वेस्टीगेशन्स और एविडेंस इक्कट्ठे करने का शौक होता है, यह फील्ड उनके लिए बहुत उपयुक्त है. एक क्रिमिनल लॉयर का काम क्रिमिनल मामलों में आरोपित अपने क्लाइंट को रिप्रेजेंट या डिफेंड करना होता है. आमतौर कोई भी व्यक्ति किसी मशहूर और प्रोफेशनल क्रिमिनल लॉयर के अधीन एक क्रिमिनल लॉयर के तौर पर अपना करियर शुरू करता है. क्रिमिनल डिफेंस लॉयर्स को सरकार पब्लिक डिफेंडर्स के तौर पर नियुक्त करती है. क्रिमिनल लॉयर का काम क्लाइंट्स के साथ कम्युनिकेशन, गवाहों से पूछताछ के द्वारा वास्तविक कारण और एविडेंसेज इक्कट्ठे करना, पुलिस के साथ इंटरेक्शन और संबद्ध मामले के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए रिसर्च कार्य करना है. यद्यपि इस फील्ड में काफी अच्छी कमाई होती है लेकिन कई बार यह कुछ टेंशन वाली जॉब लगती है. 

  • सिविल लॉ

सिविल लॉ एक ऐसी लॉ की फील्ड है जिसके तहत इंडिविजुअल्स के प्राइवेट राइट्स, डाइवोर्स, चाइल्ड कस्टडी, प्रॉपर्टी ओनरशिप, कॉन्ट्रैक्ट्स से असहमति, पर्सनल और/ या प्रॉपर्टी डैमेज आदि से संबद्ध झगड़े सुलझाए जाते हैं. सिविल लॉ के मामले अधिकतर पब्लिक लॉ के बजाय प्राइवेट लॉ से संबंधित होते हैं. ये मामले 4 विभिन्न श्रेणियों के तहत आते हैं जैसेकि, कॉन्ट्रैक्ट लॉज़, टोर्ट लॉज़, प्रॉपर्टी लॉज़ और फैमिली लॉज़. सिविल लॉ की श्रेणी में दर्ज मामले पर्सनल लेवल पर प्रॉब्लम्स सॉल्व करने के अवसर उपलब्ध करवाते हैं. सिविल लॉ में स्पेशलाइजेशन करने वाले लॉयर्स को अक्सर सरकारी संस्थानों, प्राइवेट लॉ फर्म्स, और नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन्स, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग और ऐसे अन्य कई संगठनों से जॉब के ऑफर मिलते हैं.

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  • इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ

इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ किसी किसी इंडिविजुअल की इन्वेंशन्स और क्रिएशन्स के लिए लीगल राइट्स को लागू करने और सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न रूल्स और रेगुलेशन्स के सेट को डिफाइन करता है. आसान शब्दों में, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ पेटेंट्स, कॉपीराइट्स और ट्रेडमार्क्स से संबद्ध मामलों को सुलझाता है. पेटेंट्स ऐसे खास राइट्स होते हैं जो किसी इन्वेंशन को सुरक्षित करते हैं. किसी इन्वेंशन के लिए पेटेंट प्राप्त करने पर, उस इन्वेंशन को एक निश्चित समय-अवधि के लिए अन्य पार्टीज या पक्षों द्वारा विकसित करने, बेचने या इस्तेमाल करने पर रोक लग जाती है. कॉपीराइट्स एक्सप्रेसिव आर्ट्स की सुरक्षा करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. ये राइट्स ओनर्स को अपने काम को लोगों के सामने प्रस्तुत करने और पुनर्प्रस्तुत/ रिप्रोड्यूस करने के लिए विशेष राइट्स उपलब्ध करवाते हैं. ये राइट्स ओनर्स को अपने काम से फायदा प्राप्त करने के लिए इकनोमिक राइट्स भी प्रदान करते हैं और ओनर की पूर्व अनुमति के बिना अन्य लोग उसके काम या क्रिएशन से फायदा नहीं ले सकते हैं. ट्रेडमार्क्स नामों के साथ ही प्रोडक्ट्स तथा कंपनियों के पहचान चिन्हों या आइडेंटिफाइंग मार्क्स को सुरक्षित करते हैं. एक बार जब कोई व्यापार या ट्रेड अपनी पहचानने के लिए कुछ चिह्नों/ मार्क्स का उपयोग शुरू कर देता है तो ये ट्रेडमार्क्स ऑटोमेटिकली स्वीकार कर लिए जाते हैं.

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  • साइबर लॉ

लॉ के क्षेत्र में साइबर लॉ की फील्ड अभी एक नया स्पेशलाइजेशन है. साइबर लॉ एक ऐसी फील्ड है जो गैर-कानूनी एक्टिविटीज या इंटरनेट के माध्यम से किये जाने वाले साइबर क्राइम्स से संबद्ध है. साइबर क्रिमिनल्स विभिन्न क्रिमिनल एक्शन्स जैसेकि, फ्रॉड, डिफामेशन, फॉर्जरी, थेफ़्ट और मिसचीफ को अंजाम देते हैं. आजकल सबसे मशहूर साइबर क्राइम्स में से एक इंडिविजुअल के पर्सनल एकाउंट्स को हैक करना, साइबर टेरोरिज्म और कंप्यूटर वायरसेज को फैलाना है. साइबर क्राइम्स के 3 प्रमुख प्रकार हैं – किसी व्यक्ति के खिलाफ क्राइम्स, प्रॉपर्टी के खिलाफ क्राइम्स और सरकार के खिलाफ क्राइम्स. साइबर लॉ में डिग्री प्राप्त करने के बाद किसी भी पेशेवर को पुलिस डिपार्टमेंट्स, आईटी कंपनियों, कॉर्पोरेट हाउसेज, पब्लिक एंड प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन्स, यूनिवर्सिटीज में लेक्चरर्स और अन्य कई संस्थानों में करियर के बेहतरीन अवसर मिल सकते हैं.

  • कॉर्पोरेट लॉ

यह देश में लॉ स्टूडेंट्स के बीच सबसे ज्यादा पसंदीदा लॉ स्पेशलाइजेशन कोर्सेज में से एक है. कॉर्पोरेट लॉ में डिग्री प्राप्त करने पर पेशेवर को बड़े कॉर्पोरेट ऑर्गेनाइजेशन्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट्स, आर्डिनेंसेज, कॉर्पोरेट प्रिविलेजेज और अन्य संबद्ध टॉपिक्स पर सलाह मशवरा करने के अवसर मिलते हैं. कॉर्पोरेट लॉ सभी कॉर्पोरेशन्स के लिए समान अवसर मुहैया करवाने में मदद करता है. कॉर्पोरेट लॉ की फील्ड उन स्टूडेंट्स के लिए उपयुक्त है जिन्हें रीडिंग करना पसंद है, जिनके पास अच्छी रीजनिंग स्किल्स हैं और जो लंबे समय के लिए क्लाइंट बेस का विचार करके संतुष्ट रहते हैं. किसी कॉर्पोरेट लॉयर की जिम्मेदारियों में मर्जर और एक्वीजीशन्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों में अपने क्लाइंट को एडवाइस देना या क्लाइंट के लीगल वर्क को हैंडल करना और कोर्ट की कारवाई के दौरान डिफेंस और प्रॉसिक्यूशन के मामलों में अपने क्लाइंट्स को रिप्रेजेंट करना शामिल है. कॉर्पोरेट लॉयर्स के लिए बड़े कॉर्पोरेट घरानों और इंडस्ट्रीज, लीगल पब्लिशर्स, कंसल्टेंसीज आदि में रोज़गार के कुछ बेहतरीन अवसर हमेशा मौजूद रहते हैं.   

कॉरपोरेट व‌र्ल्ड के लीगल कंसल्टेंट

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