कैसे बनाएं दूसरों की आलोचनाओं को अपनी हिम्मत

जब भी हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए दिक्कतों से जूझ रहे होते हैं तो आलोचक अपनी बातों से हमारी हिम्मत तोड़ने की कोशिश करते हैं l आइये जानते हैं कि कैसे हम आलोचनाओं को अपनी हिम्मत बना कर नकारात्मक बातों से बच सकते हैं। 

Created On: Mar 30, 2020 20:35 IST
आलोचना का महत्व
आलोचना का महत्व

हर व्यक्ति का जीवन अक्सर उतार चढ़ाव से भरा रहता है l कभी हमारे जीवन में ख़ुशियाँ होती हैं तो कभी गम, कभी हमे सफलता मिलती है और कभी असफलता l दिन-रात, हार-जीत, ख़ुशी-गम इत्यादि हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं l लेकिन अक्सर आपने महसूस किया होगा की जब भी हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए दिक्कतों से जूझ रहे होते हैं तो बहुत से लोग हमें अपनी बातों से हिम्मत देते हैं और बहुत से लोग अपनी बातों से हमारी हिम्मत तोड़ने की भी कोशिश करते हैं l ये जो लोग अपनी बातों से हमारी हिम्मत को तोड़ने की कोशिश करते है इन्हे हम आलोचक भी कहते हैं l

Child facing criticism

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कितनी बार ऐसा हुआ होगा कि आपसे लोगो ने कहा होगा, तुम सफल नहीं हो पाओगे? ये काम तुम्हारे बस का नहीं? तुम्हें तो कुछ भी नहीं आता फिर क्यों इस काम को करने की कोशिश क्यों कर रहे हो?

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स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को तो सबसे ज़्यादा ऐसी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है l अक्सर उनके सहपाठी, अध्यापक, मित्र और कभी-कभी तो माता-पिता उनसे इस तरह की नकारात्मक बात करते है जिससे कभी-कभी उनकी हिम्मत टूट जाती है I कई बार एक साधारण आदमी ऐसी नकारात्मक बातें सुनकर अक्सर हार मान बैठता है l

इस आर्टिकल में हम जानेंगे की कैसे आलोचनाओं और नकारात्मक बातों से बचे और उन्हें अपनी हिम्मत बनाए l

इस प्राचीन कहानी को ध्यान से पढ़े

The deaf frog

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एक जंगल में कई मेंढक रहते थे । एक बार जंगल के दूसरे जानवरों नें सोचा की क्यों ना इन मेंढकों की वृच्छ पर चढ़ने की प्रतियोगिता कराई जाये। इस प्रतियोगिता में मेंढकों को एक ऊँचे चीड़ के वृच्छ के ऊपर चढ़ना था और जो उस वृच्छ की चोटी पर सबसे पहले पहुँचेगा वही विजेता होगा ।
मेंढकों की दौड़ प्रतियोगिता के अवसर पर जंगल के सभी जानवर आये। वैसे तो इस दौड़ प्रतियोगिता में किसी भी दर्शक को यह विश्वास नहीं था कि कोई भी मेंढक वृछ की चोटी तक पहुँच पायेगा l  सारे जानवर प्रतियोगिता शुरू होने से पहले नकारात्मक बातें करने लगे जैसे:  आज तक कोई नहीं चढ़ा... ये असंभव है... नहीं चढ़ पाओगे… चोट लगेगी तब पता चलेगा इत्यादि l
यह सुनकर कई मेंढक तो प्रतियोगिता छोड़ कर चले गए जब रेस शुरू हुई तो बचे मेंढको ने वृछ पर चढ़ना शुरू किया थोड़ा ऊपर चढ़ने के बाद एक मेंढक गिर गया और उसे चोट लग गयी उसे देखकर फिर कुछ मेंढको ने प्रतियोगिता को वहीँ छोड़ दिया l यह देख कर दर्शक जानवर हंसने लगे और मजाक बनाने लगे यह देखकर दूसरे मेंढको की हिम्मत भी ज़वाब दे गई l लेकिन एक मेंढक पूरे जोश के साथ एक शाखा से दूसरी शाखा पर उछलता हुआ वृच्छ की चोटी में पहुँच गया l यह देखकर सभी जानवर अचंभित रह गए l सबने जब उस मेंढक से पूछा तो और अचंभित हुए  क्योंकि वो मेंढक बहरा था  जिससे वह किसी की भी बात नहीं सुन पाया और पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित किया l आपको भी उसी मेंढक की तरह बनना होगा और बिना कुछ दूसरों की सुने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर आगे बढ़ना होगा l

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कैसे बनेंगी आलोचनाएं आपकी हिम्मत

Image for Boiling Water

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ऊपर दिए गए चित्र को अगर आप ध्यान से देखिए,

अगर यहाँ पर आग न हो तो क्या पानी में कोई हलचल होती ? नहीं, लेकिन जैसे ही हम पानी के बर्तन को आग देते हैं, पानी उबलने लगता है वो और अपने अंदर मौजूद बैक्टीरिया इत्यादि को मारने लगता है l अगर इस बात को हम अपनी ज़िन्दगी से जोड़ कर देंखे तो हम पानी की तरह है और आलोचनाएं आग की तरह, अगर कोई हमारी बुराई या आलोचना करेगा तभी हम को गुस्सा आएगा परन्तु हमको इस गुस्से पर काबू पाना है और इसको एंजाइम की तरह प्रयोग करके अपने मिशन में और तेज़ी लाना होगा और कामयाब होकर इस आलोचना का जवाब देना होगा l

हम लोगो में बहुत कम लोग मानसिक तौर पर इतने मज़बूत होते हैं जो दूसरों की नकारात्मक बातों पर ज़रा भी ध्यान न दे और अपना काम करते रहें l अगर आप उन लोगो में से हैं जो दूसरों की बातों में ध्यान दिए बिना नहीं रह सकते तो आप उन नकारात्मक बातों को याद रखें, उन्हें कभी भूलिए नहीं l जितनी बार भी आपसे लोगों ने कहा ये असंभव है... नहीं कर पाओगे… गिरोगे तभी संभालोगे  इत्यादि इन सब बातों को याद रखिये कभी भी अपने आलोचकों से बहस न करें न उन्हें कुछ समझाने की कोशिश करें l बस मन में यह संकल्प लीजिए की उन सबको को एक दिन ये एहसास  करा देंगे की आप लोग गलत गलत हैं l

जब भी आप अपने लक्ष्य को पानें के लिए मेहनत कर रहें हो और आपका ध्यान भटक रहा हो तो उन सभी आलोचनाओं को याद करिये, यकीन मानिए उन आलोचनाओं को सुनकर आप में फिर से जोश भर जाएगा और आप फिर से और ज्यादा मेहनत करोगे l

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निष्कर्ष

अब कोई आपकी बुराई करे, आपकी आलोचना करे या आपको नीचा दिखाए तो ऊपर दी गयी बातों का ध्यान रखिये और आलोचनाओं को आग की तरह समझिए जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहीं हैं l इस तरह से आलोचनाओं को आप अपनी हिम्मत बना सकते हैं l

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