यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान साल्व्ड प्रैक्टिस प्रश्न पत्र सेट- 9

यह प्रैक्टिस पेपर पिछले वर्ष प्रश्न पत्रों का संक्षिप्त विश्लेषण करने के बाद jagranjosh के विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है, और यह आने वाले 2017 के विज्ञान परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है |

Created On: Jan 3, 2017 18:26 IST
Modified On: Jan 19, 2017 14:52 IST

Jagranjosh प्रस्तुत करता है UP Board कक्षा 10वी का साल्व्ड प्रैक्टिस प्रश्न पत्र जो आने वाले विज्ञान परीक्षा सत्र 2016 – 17 के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है |  यह प्रैक्टिस पेपर पिछले वर्ष प्रश्न पत्रों का संक्षिप्त विश्लेषण करने के बाद jagranjosh  के विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है |छात्र यदि प्रश्न पत्र का अभ्यास करेंगे तो आने वाले हाईस्कूल के परीक्षा में बेहतर से बेहतर अंक प्राप्त कर सकेंगे |

यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं विज्ञान प्रैक्टिस प्रश्न पत्र की विशेष जानकारी :

संक्षिप्त विश्लेषण के बाद यह पूर्ण रूप से प्रतीत होता है की परीक्षा प्रश्न पत्र में ऐसे काफी प्रश्न होते है जो परीक्षा में बार- बार दोहराए जाते हैं | इसलिए पुरे संशोधन के बाद jagranjosh  ने सभी  कांसेप्ट बेस्ड प्रश्नों के आधार पर इस प्रैक्टिस प्रश्न पत्र को तैयार किया हैं जो 2017 में होने वाले परीक्षा के लिए काफी सहायक होंगे |

कुछ साल्व्ड प्रश्न और उनकें उत्तर यह हम आपको सैंपल के तौर पर उपलब्ध कर रहे हैं :

प्रश्न : एक विलयन में हाइड्राक्साइड अम्ल का सान्द्रण 1*〖10〗^(-12)मोल प्रति लीटर है। इस विलयन pH मान होगा। 
i). 2 
ii). 4 
iii). -2 
iv). -4 
उत्तर: (iii) .इस विलयन का pH मान = 14 – 12 = 2 होगा। 

प्रश्न : तनाव के इलाज के लिए इस्तेमाल दवाओं की श्रेणी में है:
i). दर्दनाशक दवा
ii). सड़न रोकने वाली दवा 
iii). बेहोश करने वाली दवा 
iv). शांति दायक दवा

उत्तर: शांतिदायक दवा

प्रश्न : आक्सीजन की संयोजकता है-
i). 2 
ii). 3 
iii). 4 
iv). 6
उत्तर: (i).आक्सीजन की संयोजकता 2 है।

प्रश्न : निकट दृष्टि दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त होता है-
i. अवतल लेंस           
ii.उत्तल लेंस 
iii. उत्तल दर्पण
iv. अवतल दर्पण 
उत्तर: निकट दृष्टि दोष  आँखों का दोष है जिसमें निकट की चीजें तो साफ-साफ दिखतीं हैं किन्तु दूर की चीजें नहीं। निकट दृष्टि दोष को दूर करने के लिए उचित फोकस दूरी के अवतल लेंस प्रयोग किया जाता है।अत: विकल्प (i) सही हैं |

प्रश्न : नलिका विहीन ग्रंथि से आप क्या समझते है? थाइराइड ग्रंथि कि संरचना तथा उसके कार्यों का वर्णन कीजिए?
उत्तर: नलिका विहीन ग्रंथि या अंत:स्रावी ग्रंथि:
शरीर के विभिन्न भागों हार्मोन स्त्रावित करने वाली ग्रंथि को नलिका विहीन ग्रंथि या अंत:स्रावी तंत्र कहते हैं। शरीर की सभी रासायनिक क्रियाओं का नियंत्रण इन्हीं हार्मोनों द्वारा होता है। रुधिर के साथ हार्मोन शरीर में विशिष्ट स्थान पर पहुँच कर परिवर्तन करता है जैसे वृद्धिदर, गौण लैंगिग लक्षणों का प्रतिलक्षित होना, लैंगिग परिपक्वता आदि। 
मानव शरीर में पायी जाने वाली प्रमुख अंत: स्त्रावी ग्रंथियां निम्नलिखित हैं-
•पीयूष ग्रंथि- यह मस्तिष्क में स्थित होती है। स्ट्रावित हार्मोन ऑक्सीटोसीन, बेसोप्रोसिन आदि।
•थाइराइड ग्रंथि- यह गले के सामने की ओर,श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यन्त्र के दोनों तरफ दो भागों में बनी होती है। इसका आकार तितली की तरह होता है। एक स्वस्थ व्यरक्ति में थायरायड ग्रंथि का भार 25 से 50 ग्राम तक होता है | यह ‘ थाइराक्सिन ‘ नामक हार्मोन बनाती है। पैराथायरायड ग्रंथियां, थायरायड ग्रंथि के ऊपर व मध्य भाग की ओर जोड़ों के रुप में होती है और इनकी संख्या चार होती है। यह ‘पैराथारमोन’ हार्मोन का उत्पादन करती हैं|
•पैराथाइराइड ग्रंथि- यह गले में स्थित होती है।
•एड्रीनल ग्रंथि अधिवृक्क- यह उदर में वृक्क के पास स्थित होती है।
•पीनियल काय- यह ग्रंथि मस्तिष्क में स्थित होती है।

प्रश्न :
 लिंग सहलग्न लक्षण किसे कहते हैं? मनुष्य में पाये जाने वाले किन्ही दो लिंग सहलग्न का नाम लिखिए तथा उसमें से किसी एक का वर्णन कीजिए?
उत्तर: लिंग गुण सूत्रों पर कुछ जींस लैंगिक लक्षणों के अतिरिक्त अन्य लक्षणों वाले अर्थात कायिक या दैहिक लक्षणों वाले होते हैं, जो लिंग सहलग्न जींस कहलाते हैं और लिंग सहलग्न लक्षण उत्पन्न करते हैं। मनुष्य में पाये जाने वालेसह्लग्न दुर्बल लक्षणों में वर्णान्धताएवं हीमोफीलियाके रोग महत्वपूर्ण हैं।
हीमोफीलिया : हीमोफीलिया आनुवंशिक रोग है जिसमें शरीर के बाहर बहता हुआ रक्त जमता नहीं है। इसके कारण चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा साबित होती है। इस रोग का कारण रक्त प्रोटीन की कमी होती है, जिसे 'क्लॉटिंग फैक्टर' कहा जाता है। इस फैक्टर की विशेषता यह है कि यह बहते हुए रक्त के थक्के जमाकर उसका बहना रोकता है। यह रोग केवल पुरुषों में ही होता है। इसका कारण रोग के जीन का अप्रभावी होना तथा x गुण सूत्र पर उपस्थित होना है। स्त्री में यह रोग केवल तभी हो सकता है जब यह दोनों xx गुणसूत्रो पर यह अप्रभावी जीन उपस्थित हों।

पुरे प्रश्न पत्र के लिए यहाँ पर क्लिक करें

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