UP Board कक्षा 12वीं का जीव विज्ञान सिलेबस 2018-2019

Sep 10, 2018 12:48 IST
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UP Board Class 12th Biology Syllabus
UP Board Class 12th Biology Syllabus

UP Board कक्षा 12वीं के जीव विज्ञान का सत्र 2018-2019 का सिलेबस हम यहाँ उपलब्ध करा रहे हैं. UP Board कक्षा 12 में NCERT सिलेबस लागु करने के बाद अब छात्रों को इस विषय से सम्बंधित सबसे बड़ा फायदा यह है कि जीव विज्ञान का केवल एक ही पेपर पढ़ना होगा तथा अब न्यू सेशन से छात्रों को पहले ही तरह जीव विज्ञान प्रथम तथा जीव विज्ञान द्वितीय का अलग-अलग एग्जाम देने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी. दरअसल जहाँ पहले छात्रों को 35, 35 अंकों का दो प्रश्न पत्र हल करना पड़ता था तथा 30 अंक का प्रयोगात्मक होता था. अब उसकी जगह केवल एक प्रश्न पत्र 70 अंकों का हल करना होगा तथा 30 अंक का प्रयोगात्मक होगा. छात्रों को UP Board कक्षा 12 के जीव विज्ञान का सत्र 2018-2019 का सिलेबस यहाँ उपलब्ध कराने का उद्देश्य यह है कि छात्र अच्छी तरह अपने बदले हुवे सिलेबस से परिचित होकर अभी से अपने एग्जाम की तैयारी शुरू कर सकें.

जीव विज्ञान

कक्षा – 12 (सैद्धांतिक)

इसमें 100 अंकों का एक प्रश्नपत्र 70 लिखित एवं 30 प्रयोगात्मक का होगा|

समय-3 घंटा               

केवल प्रश्न-पत्र                  

अंक- 70

इकाई

शीर्षक

अंक भार

1

जनन

14

2

आनुवंशिकी और विकास

18

3

जीव विज्ञान और मानव कल्याण

14

4

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग

10

5

पारिस्थितिक एवं पर्यावरण

14

 

योग

70

 इकाई – 1 : जनन

(1) जीवों में जनन -

जनन : जीवों का एक प्रमुख लक्षण जो जातियों की निरन्तरता बनाए रखने में सहायक, जनन की विधियाँ- अलैंगिक और लैंगिक जनन, अलैंगिक जनन- द्विविभाजन, बीजाणुजनन, कलिका निर्माण, खंडीभवन, पुनरुद्र्भवन|

(2) पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन –

पुष्प की संरचना, नर एवं मादा युग्म्कोभिद का विकास, परागण – प्रकार, अभिकर्मक एवं उदाहरण, प्रजनन युक्तियाँ, पराग स्त्री केसर संकर्षण, दोहरानिषेचन, निषेचन पश्च घटनाएँ – भ्रूणपोष एवं भ्रूण का परिवर्धन, बीज का विकास एवं फल का निर्माण, विशेष विधियाँ- एपोमिक्सिस (असंगजनता) अनिषेकफलन, बहुभ्रुनता, बीजों के प्रकीर्णन एवं फल निर्माण का महत्व|

(3) मानव जनन –

नर एवं मादा जनन तंत्र, वृष्ण एवं अंडाशय की सूक्ष्मदर्शीय शरीर रचना, युग्म्क्जनन – शुक्रणुजनन एवं अंडजनन मासिक चक्र, निषेचन, अंतर्रोपन, भ्रूणीय परिवर्धन  (ब्लास्टोसाइड निर्माण तक) सगर्भता एवं प्लैसेंटा निर्माण (सामान्य ज्ञान) प्रसव एवं दुग्ध सत्रवण (सामान्य परिचय)

जनन स्वास्थ्य –

जनन स्वास्थ्य की आवश्यकता एवं यौन संचरित रोगों की रोकथाम, परिवार नियोजन- आवश्यकता एवं विधियाँ, गर्भ निरोध एवं चिकित्सीय संगर्भता समापन (MTP) एमिनोसेनटेसिस, बंध्यता एवं सहायक जनन प्रौद्धोगिकाएं- IVF, ZIFT, GIFT (सामान्य जागरूकता के लिए प्रारंभिक ज्ञान)

इकाई – 2 अनुवांशिकी और विकास

(1) वंशागति और विविधता, मेंडलीय अनुपात से विचलन –

अपूर्ण प्रभाविता, सहप्रभाविता, गुननात्मक विकल्पी एवं रुधिर वर्गों की वंशागति, प्लीओंट्रोफी, बहुजीनी वंशागति का प्रारंभिक ज्ञान, वंशागति का क्रोमोसोम सिद्धांत, क्रोमोसोम्स और जीन, लिंग निर्धारण- मनुष्य, पक्षी, मधुमक्खी सह्लगंता वंशागति – हिमोफिलिया, वर्नान्धता, मनुष्य में मेंडलीय विकार – थैलेसेमीया, मनुष्य में गुन्सुत्रिय विकार  - डाउन सिंड्रोम, टर्नर एवं क्लीनफैल्टर सिंड्रोम|

(2) वंशागति का आणविक आधार –

आनुवांशिक पदार्थ की खोज एवं डी0एन0ए0 व आर0एन0ए0 की संरचना, डी0एन0ए0 पैकेजिंग, डी0एन0ए0 प्रतिकृतियन, सेंट्रल डोगोमा, अनुलेखन, अनुलेखन, आनुवांशिक कूट, रूपांतरण, जीन अभिव्यक्ति का नियम, लैक ओपेरान जीनोम एवं मानव जीनोम प्रोजेक्ट, डी0एन0ए0 फिंगर प्रिंटिंग|

(3) विकास –

जीवन की उत्पत्ति, जैव विकास एवं जैव विकास के प्रमाण – पुराजीवी, तुलनात्मक शरीर रचना, भ्रोणीकी एवं आणविक प्रमाण, डार्विन का योगदान, Morden synthetic theory विकास की क्रिया विधि- विभिन्नताएं (उत्परिवर्तन एवं पुर्न्योजन) एवं प्राकृतिक चयन, प्राकृतिक चयन के प्रकार, जीन प्रवाह एवं अनुवांशिक अपवाह, हार्डी वेनवर्ग सिद्धांत, अनुकूलि विकिरण, मानव का विकास|

 

इकाई - 3 जीव विज्ञान और मानव कल्याण 14 अंक

(1) मानव स्वास्थ्य और रोग -

रोग जनक, मानव में रोग उत्पन्न करने वाले परजीवी (मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिएसिस, एस्केरिएसिस, टायफाइड, जुकाम, न्यूमोनिया, अमीबाइसिस रिंग वार्म) एवं उनकी रोकथाम। प्रतिरक्षा विज्ञान की मूलभूत संकल्पनाएं -टीके, कैंसर, एच0आई0वी0 और एड्स, यौवनावस्था- नशीले पदार्थ (ड्रग) और एल्कोहाल का कुप्रयोग।

(2) खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्य नीति - खाद्य उत्पादन में सुधार, पादप प्रजनन, ऊतक संवर्धन, एकल कोशिका प्रोटीन, Biofortification मौन (मधुमक्खी) पालन, पशु पालन ।

(3) मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव घरेलू खाद्य उत्पादों में, औद्योगिक उत्पादन, वाहित मल उपचार, ऊर्जा उत्पादन, जैव नियंत्रक कारक एवं जैव उर्वरक के रूप में,

इकाई – 4 जैव प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोग 10 अंक

(1) जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धान्त एवं प्रक्रम

आनुवंशिक इंजीनियरिंग (पुनर्योगज DNA तकनीक)

(2) जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग -

जैव प्रौद्योगिकी का स्वास्थ्य एवं कृषि में उपयोग, मानव इंसुलिन और वैक्सीन उत्पादन, जीन चिकित्सा, आनुवंशिकीय रुपान्तरित जीव - बी0टी0 (BT) फसलें, ट्रांसजीनिक जीव, जैव सुरक्षा समस्याएं, बायोपायरेसी एवं पेटेंट।

इकाई - 5 पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण 14 अंक

(1) जीव तथा समष्टियाँ

जीव और पर्यावरण, वास स्थान एवं कर्मता, समष्टि एवं पारिस्थितिकीय अनुकूलन, समष्टि पारस्परिक

क्रियाएं-सहोपकारिता, स्पर्धा, परभक्षण, परजीविता, समष्टि गुण-वृद्धि, जन्म एवं मृत्युदर, आयु वितरण। (2) पारितंत्र -

प्रकार, घटक, उत्पादकता एवं अपघटन, ऊर्जा प्रवाह, पारिस्थितिक पिरामिड-जीव संख्या, भार एवं ऊर्जा के पिरामिड, पोषक चक्र (कार्बन एवं फास्फोरस) पारिस्थितिक अनुक्रमण, पारितंत्र सेवाएं- कार्बन स्थिरीकरण, परागण, आक्सीजन अवमुक्ति।

(3) जैव विविधता एवं संरक्षण –

जैव विविधता की संकल्पना, जैव विविधता के प्रतिरूप, जैव विविधता का महत्व, क्षति एवं जैव विविधता का संरक्षण- हाट स्पाट, संकटग्रस्त जीव, विलुप्ति, रैड डाटा बुक, बायोस्फीयर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान, सेन्चुरीज।

(4) पर्यावरण के मुद्दे वायु प्रदूषण एवं इसका नियंत्रण, जल प्रदूषण एवं नियंत्रण, कृषि रसायन एवं उनके प्रभाव, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन, रेडियोएक्टिव अपशिष्ट प्रबन्धन, ग्रीन हाउस प्रभाव एवं विश्वव्यापी उष्णता, ओजोन अवक्षय, वनोन्मूलन, पर्यावरणीय समस्याओं से सम्बन्धित कोई एक केस स्टडी।

प्रयोगात्मक

समय-3 घंटा अंक-30

(क) प्रयोगों की सूची

1. स्लाइड पर पराग अंकुरण का अध्ययन।।

 2. कम से कम दो स्थानों से मृदा एकत्र कर उसमें मृदा की बनावट, नमी, निहित वस्तुएं Content, जल धारण| क्षमता एवं उसमें पाये जाने वाले पौधों से सहसम्बन्ध का अध्ययन करना।

3. अपने आस-पास के दो अलग-अलग जलाशयों से पानी एकत्र कर पानी के pH शुद्धता एवं जीवित जीवों का अध्ययन करना।

4. दो व्यापक रूप से भिन्न स्थलों की वायु में निलम्बित कणिक पदार्थ की उपस्थिति का अध्ययन करना। |

5. क्वाड्रेट विधि द्वारा पादप समष्टि घनत्व का अध्ययन करना।

6. क्वाड्रेट विधि द्वारा पादप समष्टि Frequency का अध्ययन करना।

7. समसूत्री विभाजन का अध्ययन करने के लिए प्याज के मूलाग्र की अस्थायी स्लाइड बनाना।

8. स्टार्च पर लार एमाइलेज की सक्रियता पर विभिन्न तापमानों और तीन अलग-अलग चर्भ के प्रभाव का अध्ययन करना।

9. उपलब्ध पादप सामग्री जैसे-पालक, हरी मटर, पपीता आदि से DNA को पृथक करना।

(ख) निम्नलिखित का अध्ययन/प्रेक्षण (स्पाटिंग)

1. विभिन्न कारकों (वायु, कीट, पक्षी) के द्वारा परागण के लिए पुष्पों में पाये जाने वाले अनुकूलनों का अध्ययन करना।

2. एक स्थायी स्लाइड की सहायता से वर्तिकाग्र पर पराग अंकुरण का अध्ययन करना।

3. स्थायी स्लाइडों की सहायता से वृषण और अंडाशय की अनुप्रस्थ काट में युग्मक परिवर्धन की विभिन्न अवस्थाओं का अध्ययन (किसी भी स्तनधारी) ।

4. स्थायी स्लाइड की सहायता से प्याज की मुकुल कोशिका अथवा टिड्डे के वृषण में अर्द्धसूत्री विभाजन का अध्ययन करना।

5. स्थायी स्लाइड की सहायता से स्तनधारी के ब्लास्टुला की अनुप्रस्थ काट का अध्ययन करना।

6. किसी पौधे के विभिन्न रंग एवं आकार के बीजों की सहायता से मेंडलीय वंशागति का अध्ययन करना।

7. तेयार वंशावली चार्ट की सहायता से आनुवंशिक विशेषताओं (जैसे-जीभ को गोल करना, रूधिर वर्ग, विंडोपीक, वर्णान्धता आदि) का अध्ययन करना।

8. नियंत्रित परागण, बंध्यीकरण, टैगिंग और बैगिंग पर अभ्यास ।

9. स्थायी स्लाइड अथवा प्रतिरूप की सहायता से सामान्य - रोग कारक जंतु जैसे- एस्केरिस, एंटअमीबा, प्लाजमोडियम, रिंग वर्म की पहचान। उनके द्वारा उत्पन्न रोगों के लक्षणों पर टिप्पणी लिखना।

10. मरूभिदी परिस्थितियों में पाये जाने वाले दो पौधों एवं जन्तुओं के आकारिकी अनुकूलनों पर टिप्पणी लिखना।।

11. जलीय परिस्थितियों में पाये जाने वाले दो पौधों एवं जन्तुओं का अध्ययन एवं उनके आकारिकी अनुकूलनों पर टिप्पणी लिखना।

कक्षा-12

प्रयोगात्मक

समय-3 घंटा   अंक-30

बाह्य परीक्षक – 5 अंक

स्लाइड निर्माण – 6 अंक

स्पाटिंग – 2 + 2 = 4 अंक

योग - 15 अंक

आंतरिक परीक्षक

4. एक दीर्घ प्रयोग (प्रयो0 सं0 5, 6, 8, 9) – 5 अंक

5. एक लघु प्रयोग (प्रयो0 2, 3, 4) – 4 अंक

6. प्रोजेक्ट कार्य + मौखिकी – 4 + 2 = 6 अंक

- 15 अंक

- 30 अंक

नोटः- छात्रों का मूल्यांकन आन्तरिक एवं वाह्य परीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। अभ्यास पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट कार्य परीक्षार्थियों द्वारा परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा

व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु उन विद्यालयों के संबंधित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आंतरिक परीक्षक के रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।

यहाँ हमने छात्रों को गत वर्ष जीव विज्ञान का भी सिलेबस उपलब्ध कराया है ताकि छात्र बदले हुवे सिलेबस को ठीक तरीके से समझ सकें.

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद्, इलाहाबाद
कक्षा-12 जीव विज्ञान
पाठ्यक्रम तथा पाठ्य–पुस्तकें

इसमें 35-35 अंक के दो प्रश्न-पत्र एवं 30 अंक का प्रयोगात्मक होगा।

प्रथम प्रश्न–पत्र
(जन्तु विज्ञान)

इकाई संख्या

शीर्षक

अंक

1.

आनुवंशिकी

10

2.

जैव विकास

07

3.

 जैव प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोग

07

4.

जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण

07

5.

जैव विविधता एवं संरक्षण

04

                                 कुल योग

35

इकाई-1. आनुवंशिकी (10 अंक)

मनुष्य, पक्षी एवं मधुमक्खी

वंशागति और विभिन्नताएं

मेन्डलीय वंशागति

मेन्डलीय अनुपात से विचलनः अपूर्ण प्रभावित सह प्रभाविता, Multiple Alleles

गुणनात्मक-विकल्पी रुधिर वर्गों की वंशागति, Pleiotropy

बहुजीनी वंशागति का प्रारम्भिक ज्ञान

वंशागति का कोमोसोमवाद

क्रोमोसोम्स और जीन

लिंग निर्धारण

मनुष्य, पक्षी एवं मधुमक्खी

सहलाग्नता और जीव विनिमय (Linkage q Crossing Over)

लिंग सहलग्न वंशागति-हीमोफीलिया, वर्णान्धता

मनुष्य में मेंडेलियन व्यतिक्रम

मनुष्य में गुणसूत्रीय व्यतिक्रम

डाउन सिन्ड्रोम, टर्नर व क्लीनफैल्टर सिन्ड्रोम

आनुवांशिक पदार्थ के लिए खोज एवं डी०एन०ए० एक आनुवांशिकी पदार्थ

डी०एन०ए० व आर०एन०ए० की संरचना

DNA Packaging

DNA replication (प्रतिकृतियन)

Central dogoma

अनुलेखन, आनुवांशिक कोड, अनुरूपण (Transcription, Genetic Code, Translation)

जीन अभिव्यक्ति एवं नियमन

जीनोम और धान जीनोम व मानव जीनोम प्रोजेक्ट

डी०एन०ए० फिंगर प्रिंटिंग

इकाई-2. जैव विकास (07 अंक)

जीवन की उत्पत्ति

जैव विकास एवं जैव विकास के प्रमाण–पुराजीवी प्रमाण, तुलनात्मक शरीर रचना, भ्रौणिकी एवं आणविक प्रमाण

डार्विन का योगदान, विकास का आधुनिक संश्लेषणात्मक सिद्धान्त

हार्डी वेनबर्ग सिद्धान्त

विकास की क्रिया विधि–विभिन्नताएं उत्परिवर्तन और पुनर्योजन (Mutation & Recombination) एवं प्राकृतिक चयन (उदाहरण सहित) प्राकृतिक चयनके प्रकार

जीन प्रवाह एवं आनुवांशिक अपवाह (Genetic drift)

अनुकूली विकिरण

मानव का विकास

इकाई-3. जैव प्रोद्यौगिकी और उसके अनुप्रयोग (07 अंक)

जैव प्रोद्यौगिकी के सिद्धान्त एवं प्रक्रियाएं

आनुवांशिक इंजीनियरिंग (पुनर्योग न DNA तकनीक)

जैव प्रोद्यौगिकी का स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुप्रयोग

मानव इंसुलिन और वैक्सीन उत्पादन, जीन चिकित्सा

जैव सुरक्षा समस्याएं

बायोपाइरेसी एवं पेटेंट

इकाई-4. जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण (07 अंक)

स्वास्थ्य एवं रोग

प्रतिरक्षा विज्ञान की मूलभूत संकल्पनाएं-टीके

रोगजनक (Pathogens) मानव में रोग उत्पन्न करने वाले परजीवी- (मलेरिया, फाइलेरिएसिस, एस्केरिएसिस, टाइफाइड, न्यूमोनिया, जुकाम, अमिबाइसिस, रिंगवार्म), डेगू, स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया

कैंसर एच०आई०वी० और एड्स

स्टेम कोशिकाओं अंग प्रत्यारोपण का संक्षिप्त ज्ञान

यौवनावस्था- नशीले पदार्थ और एल्कोहाल का अतिप्रयोग

कीट और मानव कल्याण

रेशम, शहद, लाख

मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव

घरेलू खाद्य उत्पादों में, औद्योगिक उत्पादन, वाहित मल उपचार, ऊर्जा उत्पादन, जैव नियंत्रक कारक एवं जैव उर्वरक।

इकाई-5. जैव विविधता एवं संरक्षण (04 अंक)

खतरे एवं जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता।

हाट स्पाट, संकटग्रस्त जीव, विलुप्त, रैड-डाटा बुक।

जैव विविधता का संरक्षण- बायोस्फीयर रिजर्व, नेशनल पार्क एवं सैन्चुरीज।

द्वितीय प्रश्नपत्र

(वनस्पति विज्ञान)

इकाई संख्या

शीर्षक

निर्धारित अंक

1.

पादक कार्यिकी

15

2.

पौधों में जनन

07

3.

पारिस्थितकी और पर्यावरण

08

4.

खाद्य उत्पादन में सुधार

05

                             कुल योग

35

इकाई-1. पादप कार्यिकी एवं जनन (15 अंक)

पौधों में परिवहन (Transportation in Plants)

जल, भोजन, पोषक पदार्थ और गैसों का संचलन

Cell to Cell transport (कोशिकीय परिवहन)

विसरण, सहज विसरण (Faciliated diffusion) संक्रिय परिवहन (Active Transport)

पादप जल सम्बन्ध

अन्तः शोषण, जल विभव, परासरण, जीवद्रव्य कुंचन

लम्बी दूरी का परिवहन (Long distance Transport)

एपोप्लास्ट सिम्प्लास्ट, मूलदाब वाष्पोत्सर्जनाकर्षण (Transpiration Pull)

वाष्पोत्सर्जन एवं बिन्दुस्त्रवण

स्टोमेटा का खुलना एवं बन्द होना

K+ आयन का कार्य

खनिज लवणों का अंर्तग्रहण एवं परिवहन

जाइलम एवं फ्लोएम द्वारा परिवहन

पौधे और खनिज पोषण

आवश्यक खनिज बड़े एवं सूक्ष्म पोषक तत्व एवं उनका कार्य

कमी के लक्षण

खनिज लवणीय विषाक्तता (Mineral Toxicity)

हाइड्रोपोनिक्स का प्रारम्भिक ज्ञान – खनिज पोषण के अध्ययन की एक विधि के रूप में

नाइट्रोजन उपापचय – नाइट्रोजन चक्र, जैवीय नाइट्रोजन – स्थरीकरण।

पौधों में श्वसन

गैसों का आदान प्रदान

कोशिकीय श्वसन – ग्लाइकोलिसिस, किण्वन (अवायवीय) TCA चक्र एवं इलेक्ट्रान स्थानान्तरण तंत्र (वायवीय)

ऊर्जा सम्बन्ध – उत्पादित ATP अणुओं की संख्या

Amphibiotic pathways

पोषक तत्वों का श्वसन गुणांक

प्रकाश संश्लेषण

स्वपोषी पोषण

प्रकाश संश्लेषण का क्षेत्र

प्रकाश संश्लेषी वर्णक (प्रारम्भिक ज्ञान)

प्रकाश रासायनिक एवं जैव संश्लेषी प्रावस्था

चक्रीय एवं अचक्रीय फास्फोराइलेशन

रसायनी परासरण परिकल्पना

प्रकाशीय श्वसन

C3C4 Pathway

प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक

सीमाकारी कारकों का सिद्धांत

पादप वृद्धि एवं परिवर्धन

पादप वृद्धि की प्रावस्थाएं एवं वृद्धि दर

वृद्धि की परिस्थितियां-

विभेदीकरण, विविभेदीकरण, पुनर्विभेदीकरण (Differentiation) De-differentiation एवं Redifferentiation.

पादप कोशिका के विकास कां वृद्धि क्रम

वृद्धि नियंत्रक – आक्सिन, जिन्जरेलिन, साइटोकाइनिन, इथाइलीन, एब्सीसिक अम्ल (ABA)

Photomorphogenesis including brief account of phytochromes (प्रारम्भिक ज्ञान)

बीजों का अंकुरण

बीज प्रसुप्तावस्था

बसन्तीकरण

दीप्तिकालिता

इकाई-2. पौधों में जनन (07 अंक)

जनन-जीवों का प्रमुख लक्षण जो जातियों की निरन्तरता बनाए रखने में सहायक

जनन की विधियां – अलैंगिक और लैंगिक

अलैंगिक जनन

एकल जीव जनन,

विधियां – द्विविभाजन, बीजाणुजनन, मुकुलन, जैम्यूल (कलिका) खंडीभवन, पुररूद्भवन

पौधों में कायिक जनन

माइक्रोप्रोपोगेशन

पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन

पुष्प की संरचना

नर एवं मादा युगमकोभिद का विकास

परागण- प्रकार, एजेन्सीज एवं उदाहरण

बहिःप्रजनन युक्तियां

पराग-स्त्री केसर संकर्षण (पारस्परिक क्रिया)

निषेचन – पश्च घटनाएं

भ्रूणपोष एवं भ्रूण का परिवर्धन

बीज का परिवर्धन एवं फल का निर्माण

बीज का विकास

फल का निर्माण

विशेष विधियां – असंगजनता (Apomixis) अनिषेकफलन (Parthenocarpy), बहुभ्रूणता (Polyembryony)

बीज एवं फल निर्माण का महत्व,

इकाई-3. पारिस्थितिकी और पर्यावरण (08 अंक)

पारिस्थितिकी पर्यावरण, वासस्थान एवं कर्मता (Niche) की अर्थ

जीव और पर्यावरण

समष्टि एवं पारिस्थितिकी अनुकूलन

समष्टि पारस्परिक क्रियाएं – सहोपकरिता (Mutualism) प्रतिस्पर्धा।

(Competition), प्रभक्षण (Predation), परजीविता (Parasitism)

समष्टि गुण-वृद्धि जन्म दर, मृत्युदर्, आयु वितरण

पारितंत्र

प्रकार, घटक, ऊर्जा प्रवाह, पोषक तत्वों का चक्रीकरण (कार्बन और फास्फोरस चक्र) अपघटन और उत्पादकता

जीव संख्या, भार एवं ऊर्जा के पिरामिड

पारिस्थितिक अनुक्रमण (Ecological Succession)

पारितंत्र सेवाएं : कार्बन स्थिरीकरण, परागण आक्सीजन अवमुक्त

पर्यावरण के मुद्दे (Environmental Issues)

वायु प्रदूषण एवं इसका नियंत्रण

जल प्रदूषण एवं उसका नियंत्रण

कृषि रसायन एवं उनके प्रभाव

ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन

रेडियोएक्टिव अपशिष्ट प्रबन्धन

ग्रीन हाउस प्रभाव एवं वैश्विक तपन

ओजोन अवक्षय, वनोन्मूलन

पर्यावरणीय समस्याओं से सम्बन्धित कोई तीन Case-Studies.

इकाई-4. खाद्य उत्पादन में सुधार (05 अंक)

पादप प्रजनन, ऊतक- संवर्धन, एकल कौशिका प्रोटीन

जैव प्रबलीकरण (Biofortification)

आनुवंशिकीय रूपान्तरित जीव – बीटी फसलें

प्रयोगात्मक परीक्षा
(अंक-30) न्यूनतम उत्तीर्णाक-30

वाह्य परीक्षक

सेक्शन काटना (01 अंक सेक्शन, 01 अंक चित्र, 01 अंक वर्णन पर) (03 अंक)

वनस्पति सज्जा (01 अंक)

पुष्प कुल (02 अंक)

स्पाट पहचान (03 अंक जंतु, 03 अंक वनस्पति) (06 अंक)

मौखिकी (03 अंक)
योग 15 अंक

आंतरिक परीक्षक

प्रोजेक्ट कार्य व उस पर आधारित मौखिकी 4+1 = (05 अंक)

प्राणि एवं वनस्पति शरीर क्रिया विज्ञान (एक जंतु शरीर) एवं एक वनस्पति शरीर क्रिया विज्ञान प्रयोग) 2+2 = (04 अंक)

सत्रीय कार्य एवं संग्रह (06 अंक)
योग 15 अंक

नोट– छात्रों का मूल्यांकन आन्तरिक एवं वाह्य परीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। अभ्यास पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट कार्य विद्यार्थियों द्वारा परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

व्यक्तिगत परीक्षार्थियो की प्रयोगात्मक परीक्षा–
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्ष द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक बाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।

प्रयोग सूची–

द्विबीजपत्री और एक बीज पत्री जड़ और तने की अनुप्रस्थ काट तैयार करना और उनका अध्ययन करना।

चार सामान्य पुष्पी पौधों (क्रूसीफेरी), सोलेनेसी, फेबेसी लिलिएसी का अध्ययन एवं वर्णन, पुष्प का विच्छेदन एवं पुष्पीय चक्रों का प्रदर्शन तथा परागकोष एवं अंडाशय के कक्षों का प्रदर्शन।

समसूत्री विभाजन का अध्ययन करने के लिए प्याज के मूलाग्र की अस्थायी, स्लाइड बनाना।

मानव रूधिर की स्लाइड का निर्माण तथा रूधिर कोशिकाओं की पहचान।

पेपर क्रोमेटोग्राफी द्वारा पादप वर्णकों को पृथक करना।

ल्यूकोप्लास्ट, क्लोरोप्लास्ट, क्रोमोप्लास्ट का आरोपण।

आलू के परासरणमापी द्वारा परासरण प्रक्रिया का अध्ययन।

पत्ती की ऊपरी और निचली सतहों पर वाष्पोत्सर्जन की दर का तुलनात्मक अध्ययन।

प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश, कार्बन डाई आक्साइड, क्लोरोफिल की आवश्यकता।

अंकुरणशील बीजों में श्वसन की दर का अध्ययन।

प्रकाश अनुवर्तन का प्रदर्शन।

बीजों किशमिश में अन्त:शोषण प्रक्रिया का अध्ययन।

कम से कम दो स्थानों से मृदा एकत्र कर उसमें मृदा की बनावट, pH, जल धारण क्षमता एवं उसमें पाये जाने वाले पौधों में सहसम्बन्ध का अध्ययन।

क्वाड्रेट विधि द्वारा पादप समष्टि घनत्व का अध्ययन।

SC/ST/OBC छात्रों के लिए बिहार स्टेट पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति 2018

टिप्पणी प्रत्येक विद्यार्थी के पास जीव विज्ञान की एक प्रयोगात्मक नोटबुक होगी जिसमें प्रयोगात्मक कार्य का दैनिक रिकार्ड दर्ज किया जायेगा। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को संग्रह एवं चार्ट तैयार करने का कार्य भी दिया जाय और प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत किया जाय। शिक्षक छात्रों की रूचि को दृष्टिगत रखते हुए पाठ्यक्रमानुसार प्रोजेक्ट कार्य का विषय निर्धारित कर सकते हैं।

निम्नलिखित का अध्ययन/प्रेक्षण (Spotting)

विभिन्न कारकों वायुकीट के द्वारा परागण के लिये पुष्पों में पाये जाने वाले अनुकूलनों का अध्ययन करना।

एक स्थायी स्लाइड की सहायता से वर्तिकाग्र पर पराग अंकुरण का अध्ययन करना।

किसी पौधे के विभिन्न रंग एवं आकार के बीजों की सहायता से मेंडलीय वंशागति का अध्ययन करना।

तैयार वंशावली चार्ट की सहायता से अनुवांशिक विशेषताओं जैसे जीभ को गोल करना, रुधिर वर्ग, विंडोपीक, वर्णान्धता का अध्ययन करना।

नियंत्रित परागण-बंध्यीकरण, टैगिंग और बैगिंग पर अभ्यास।

स्थायी स्लाइड अथवा प्रतिरूपों की सहायता से सामान्य रोगकारक जंतु जैसे एस्केरिस, एंटअमीबा, प्लाजमोडियम, रिंगवर्म की पहचान। उनके द्वारा उत्पन्न रोगों के लक्षणों पर टिप्पणी लिखना।

मरुद्भिदी एवं जलीय परिस्थितियों में पाये जाने वाले दो-दो पौधों और जंतुओं का अध्ययन एवं उनके अकारिकीपरक अनुकूलनों पर टिप्पणी करना।

प्रतिरूपों का अध्ययन एवं पहचान-अमीबा कोई स्पंज, हाइड्रा, लीवर फ्लूक, स्कैरिस, जोंक, केंचुआ, झींगा, रेशम कीट, पाइला, स्नेल स्टारफिश, शार्क, रोहू, मेढक, छिपकली, कबूतर, खरगोश।

प्रतिरूपों का अध्ययन एवं पहचान-जीवाणु, आक्सीलिटोरिया स्पाइरोगायज्ञराइजोपस, मशरूम, ईस्ट, लीवरवर्ट, प्रांस, फर्न, पाइन, एक एक बीजपत्री एवं द्विबीजपत्री पौधा।

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