UPSC सिविल सेवा 2019 परीक्षा हिंदी मीडियम से दे कर ऋचा रत्नम ने हासिल की 274वीं रैंक: जानें उनकी Success Story

UPSC सिविल सेवा 2019 की परीक्षा हिंदी मीडियम से पास कर ऋचा रत्नम ने यह सफलता 5वें एटेम्पट में हासिल की है। इससे पहले वह किसी भी एटेम्पट में इंटरव्यू चरण तक नहीं पहुँच पाई थी।  

Created On: Aug 14, 2020 13:07 IST
UPSC 2019- Rheecha Ratnam Success Story
UPSC 2019- Rheecha Ratnam Success Story

जिस परीक्षा को उम्मीदवार अंग्रेजी में पास करने से भी कतराते हैं उसी परीक्षा को बिहार की ऋचा रत्नम ने हिंदी भाषा से दे कर मेरिट लिस्ट में अपना अर्जित कराया। हालांकि ऋचा के लिए हिंदी में परीक्षा देना एक कठिन सफर था क्योंकि हिंदी भाषा में UPSC का स्टडी मटेरियल मिल पाना काफी मुश्किल था। परन्तु ऋचा ने हार नहीं मानी और 4 असफल प्रयासों के बावजूद उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखी और 2019 में अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। आइये जानते हैं ऋचा ने अपने इस कठिन सफर में किन किन चुनौतियों का सामना कर सफलता प्राप्त की 

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इंग्लिश मीडियम से की B.Tech. 

ऋचा मूल रूप से बिहार के सीवान जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई हिंदी माध्यम से की है और 11वीं-12वीं की पढ़ाई अंग्रेज़ी मीडियम में सीवान के महावीर सरस्‍वती विद्या मंदिर से पूरी की। उनके पिता शैलेंद्र कुमार श्रीवास्‍तव जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय छपरा में इतिहास के प्रोफेसर थे और अब सेवानिवृत हो गए हैं। 

ऋचा ने बेशक UPSC की परीक्षा में हिंदी माध्यम को चुना परन्तु उन्होंने अपनी B.Tech की डिग्री जयपुर के VIT कॉलेज से इंग्लिश मीडियम से पास की है। 

नोएडा रह कर की UPSC की तैयारी 

ऋचा बताती हैं की उन्होंने UPSC की तैयारी के शुरुआती दो साल कोलकाता में रह कर की। उस समय वह कोलकाता के एक मीडिया हाउस में जॉब करती थीं और उसके साथ साथ ही तैयारी भी कर रहीं थी। हालांकि वह पढ़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाती थीं इसीलिए वह अपने पहले दो UPSC एटेम्पट में प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं। इसीलिए उन्होंने जॉब छोड़ कर नॉएडा में अपने भाई के घर रह कर तैयारी करने का फैसला किया। 

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UPSC की मेंस परीक्षा में 9 पेपर होते हैं और इन सभी पेपर्स को किसी भी एक भारतीय संविधान में लिखी भाषाओँ या अंग्रेजी में दिया जा सकता है। अमूमन उम्मीदवार इस परीक्षा को अंग्रेजी में ही देते हैं क्योकि ज़्यादातर कोचिंग और स्टडी मटेरियल अंग्रेजी में ही उपलब्ध रहता है। परन्तु इंग्लिश मीडियम से B.Tech.करने के बावजूद ऋचा रत्नम ने इस परीक्षा को हिंदी मीडियम से दिया। अपने इस फैसले के बारे में ऋचा कहती हैं "मुझे लगता था कि हिंदी में मेरा ‘नेचुरल थॉट’ है। मेरे विचार हिंदी में अच्छी तरह सामने आ सकता है। मैं खुद को हिंदी माध्यम से अच्छी तरह अभिव्यक्त कर सकती हूं। इसीलिए मैंने  हिंदी भाषा से पेपर देने का फैसला किया। 

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ऐसे की UPSC Prelims और Mains की तैयारी 

ऋचा कहती हैं की प्रीलिम्स के लिए उन्होंने NCERT और कुछ चुनिंदा खास किताबों को आधार बनाया। वह कहती हैं की "संसाधन को सीमित बनाना होगा, अन्‍यथा हम पढ़ते रह जाएंगे। मैंने पॉलिटी के लिए सिर्फ लक्ष्‍मीकांत को आधार बनाया, जो मेरे खयाल से पर्याप्त है। प्रारंभिक परीक्षा में तथ्‍यों की बजाय कॉन्‍सेप्ट पर जोर दिया जाता है। अगर कॉन्‍सेप्‍ट स्‍पष्‍ट है, तो उत्‍तर आसानी से दिए जा सकते हैं। सीसैट का पेपर बेशक क्‍वालिफाइंग है, पर इसे हल्‍के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि इससे डरने की जरूरत नहीं है। पीटी से 90 दिन पहले से मैंने सीसैट की नियमित तैयारी की। कॉम्पिहेंशन यानी परिच्छेद को समझना और उन पर आधारित सवालों के जवाब देना बहुत मुश्किल नहीं है।" 

मेंस परीक्षा के लिए ऋचा बताती हैं की अख़बार का एडिटोरियल कॉलम और तथ्यों के लिए करंट अफेयर्स का ज्ञान उनके काफी काम आया। वहीं निबंध पेपर के लिए GS पेपर्स के पढ़ाई काफी काम आई। शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी आदि विभिन्न मुद्दों को अच्छी तरह समझने के लिए किताबों से काफी मदद मिली। वह बतातीं हैं की "पिछले वर्षों में पूछे गए निबंधों का वर्गीकरण करके इसे समझना आसान हो जाता है। मैं हर रविवार एक निबंध लिख कर अभ्‍यास करती थी। इससे लिखने का अच्छा अभ्यास हो जाता है।"

हिंदी भाषा के UPSC अभ्यर्थियों के लिए ऋचा रत्नम की सलाह  

ऋचा रत्नम का है कि कोचिंग की जरूरत किसी अभ्‍यर्थी को हो सकती है और किसी को नहीं। कोचिंग में केवल फाउंडेशन तैयार कराया जाता है। क्‍वालिटी कंटेंट हिंदी में उपलब्‍ध नहीं है। बहुत कम किताबें हैं, जिनका हिंदी में अनुवाद उपलब्ध है। इसके बावजूद भाषा कोई बाधा नहीं हो सकती। खुद को सीमित ना करें। मॉक टेस्‍ट और आंसर राइटिंग का जमकर अभ्‍यास करें। इससे आपके सवाल छूटेंगे नहीं। पहले मेरे भी कुछ सवाल छूट गए थे। इससे मैंने यह सीखा कि हमें अभ्‍यास खूब करना चाहिए। इससे लिखने की गति आती है और परीक्षा भवन में प्रश्न छूटने की नौबत नहीं आती। मैंने अनावश्‍यक डायग्राम या ग्राफ नहीं बनाए। जहां जरूरी था, वहीं ऐसा किया।"

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