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इंटर्नशिप : अनुभव प्राप्त करने और सीखने का सर्वोत्तम अवसर

जब एक कॉलेज स्टूडेंट किसी ऑर्गेनाइजेशन या कंपनी में इंटर्नशिप शुरू करता है, तो पहली बार उसे बिजनेस व‌र्ल्ड या प्रैक्टिकल वर्क के बारे में जानने का मौका मिलता है.

Jan 31, 2019 18:54 IST
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इंटर्नशिप
इंटर्नशिप

आजकल सभी प्रोफेशनल कोर्सेज के अंतर्गत इंटर्नशिप का प्रावधान कर दिया गया है. किसी किसी कॉलेज, यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूट में 6 महीने के लिए तो कहीं और 1 साल के लिए लेकिन इंटर्नशिप करना एक अनिवार्य कोर्स करिकुलम बन गया है. अब सवाल यह है कि आखिर इंटर्नशिप पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है ? वस्तुतः जब एक कॉलेज स्टूडेंट किसी ऑर्गेनाइजेशन या कंपनी में इंटर्नशिप शुरू करता है, तो पहली बार उसे बिजनेस व‌र्ल्ड या प्रैक्टिकल वर्क के बारे में जानने का मौका मिलता है. ऑफिस का प्रोफेशनल माहौल अक्सर स्टूडेंट्स के लिए चैलेंजिंग सा साबित होता है. परन्तु उम्मीदवार कुछ खास तैयारी और अच्छे इंटर्नशिप एटिकेट्स से कंपनी और उसके एंप्लॉइज के साथ एक मजबूत प्रोफेशनल रिलेशनशिप बनाने में सफल हो सकते हैं. इसका फायदा आगे चलकर जब आप किसी जॉब की तलाश कर रहें हो या फिर जॉब कर रहें हों तो अवश्य होता है.

इंटर्नशिप के जरिये सोशल स्किल्स बहुत काम आती है

इंटर्नशिप के दौरान एक इंटर्न के लिए अच्छी सोशल स्किल्स काफी काम आती हैं. ऑफिस के कलीग्स के साथ हमेशा मित्रवत व्यवहार करें. कंपनी या कार्यालय के अन्य लोगों को गौर से देंखें कि वे किस तरह से एक दूसरे के साथ बातचीत या व्यवहार करते हैं ?ऑफिस में काम के दौरान अपना सेलफोन बंद ही रखें अथवा पर्सनल कॉल्स बहुत जरूरी होने पर ही करें. अगर काम के सिलसिले में फोन पर बात करनी हो, तो प्रोफेशनल टोन में ही बातें करें,भूलकर भी अनौपचारिक बातें ऑफिस में अपनी सीट पर बैठकर हरगिज न करें. हो सकता है इससे आपके साथ बैठकर काम करने वाले अन्य कर्मचारी को इससे परेशानी हो सकती है. ई-मेल कर रहे हों, तो भाषा,ग्रामर और स्पेलिंग का पूरा ध्यान रखें. कभी किसी को पर्सनल ई-मेल न भेजें. इसके अलावा, दूसरे लोगों के साथ एक प्रोफेशनल डिस्टेंस मेनटेन करना हमेशा अच्छा रहता है.इससे एक मैसेज जाएगा कि आप सीखने आए हैं, पर्सनल रिलेशन बनाने नहीं।

रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर को फॉलो करें

एक इंटर्न के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि ऑर्गेनाइजेशन का फॉर्मल और इनफॉर्मल रिपोर्टिग स्ट्रक्चर क्या है ?  साथ ही इंटर्नशिप पीरियड के दौरान उन्हें किसे रिपोर्ट करना होगा, यह जानना भी बेहद जरूरी होता है.इसके लिए पहले दिन ही कंपनी के एचआर मैनेजर से मिलकर इंटर्नशिप की डिटेल्स पता कर लें कि आपको किसके अंडर में इंटर्नशिप करनी होगी, ताकि किसी एक सीनियर के गाइडेंस में सही तरीके से काम करने और सीखने का मौका मिल सके. उम्मीदवार को ऑफिस के चेन ऑफ कमांड अर्थात रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर का भी ध्यान रखना चाहिए. बेवजह और बिना काम के हर किसी के पास जाने से बचना चाहिए.

नियमितता का पालन करें

इंटर्नशिप करने वाले फ्रेशर्स को कोशिश करनी चाहिए कि वह अनुपस्थित न हो.इस दौरान टाइमिंग एटिकेट्स का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है.अपनी समय की पाबंदी से आप सीनियर्स और मैनेजमेंट को प्रभावित कर सकते हैं. आपके रवैया से उन्हें ऐसा लगना चाहिए कि आप अपने काम को लेकर गंभीर हैं. इसके बावजूद किसी कारण अगर छुट्टी लेनी पड़ जाए, तो अपने मैनेजर या रिपोर्टिंग बॉस को इसकी सूचना अवश्य दें. किसी को सूचित किये बैगैर कभी भी छुट्टी न लें.प्रोफेशनल एटिकेट्स का पालन हर परिस्थिति में करें.

ऑफिस में सभी को समान महत्व दें अर्थात सभी का रिस्पेक्ट करें

इंटर्नशिप के दौरान स्टूडेंट्स को अच्छा परफॉर्म करना होता है. इससे आगे के लिए बेहतरीन अवसर मिलने की संभावना बनती है., लेकिन ये तभी संभव है जब एक इंटर्न सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखे. अगर आप ऑफिस में प्रोजेक्ट या वर्क रिलेटेड इश्यूज पर ही बात करेंगे और गॉसिप से बचेंगे, तो आपकी अच्छी इमेज बनेगी. इसी तरह ऑफिस में काम करने वाले हर व्यक्ति को आदर देना जरूरी है, क्योंकि वे वहां के वर्क कल्चर और माहौल को आपसे बेहतर तरीके से जानते हैं.

अपनी अमिट छाप छोड़ें

एक स्टूडेंट जब इंटर्नशिप के लिए किसी कंपनी में जाता है, तो उसका मकसद सिर्फ सीखना होता है. इसलिए कोशिश यही होनी चाहिए कि जो भी असाइनमेंट मिले, उसे स्वीकार करें. इसके साथ ही अपनी पर्सनालिटी भी कुछ इस तरह रखनी चाहिए कि आपके हाव भाव तथा व्यवहार सबको पसंद आये.अगर फ्रेंडली बिहेवियर और चेहरे पर स्माइल रहेगी, तो किसी भी कंपनी में फ‌र्स्ट इंप्रेशन जमाना आसान होगा तथा आपको प्वॉइंट्स भी अच्छे मिलेंगे साथ ही ड्रेसिंग सेंस भी प्रोफेशनल होना चाहिए.

ऑफिस डेकोरम का हमेशा ख्याल रखें

जॉब के लिए कॉम्पिटिशन टफ हो रहा है, ऐसे में स्टूडेंट्स को मिलने वाली इंटर्नशिप का रोल और भी अहम होता जा रहा है.इंटर्नशिप में अच्छी परफॉर्मेस से उम्मीदवार के लिए जॉब के दरवाजे खुलते हैं. इसलिए स्टूडेंट्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि उसके परफॉर्मेसं का नतीजा तो इंटर्नशिप खत्म होने पर आएगा, लेकिन एप्टीट्यूड और नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन का रिजल्ट, तो शुरू के दो-तीन दिनों में ही मिलने लगता है.आप अगर सही ड्रेस सेंस के साथ कंपनी में एंट्री करेंगे, प्रॉपर एटिकेट्स के साथ लोगों से मिलेंगे, उनके प्रश्नों का उत्तर देंगे, तो वहां के लोग भी आपको पॉजिटिव ही लेंगे तथा तहे दिल से आपके काम में आपको सहयोग करेंगे.

इसप्रकार हम देखते हैं कि वाकई कार्पोरेट जगत हो या प्रोफेशनल जगत हर जगह इंटर्नशिप बहुत कुछ सीखने तथा अनुभव प्राप्त करने का अवसर उम्मीदवारों को प्रदान करता है और इसी वजह से शैक्षणिक संस्थानों द्वारा इसकी अनिवार्यता पर बल दिया जाने लगा है.

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