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कर्म ही पूजा है | Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 19

“सफलता की राह पर” सीरीज़ के इस उन्नीसवें वीडियो में विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा जी हमें समझा रहे हैं कि, एक सुप्रसिद्ध कहावत है कि, “कर्म ही पूजा है”, यह कहावत सफलता हासिल करने के लिए भी खरी उतरती है. जीवन में महानता हासिल करने के लिए, किसी भी इंसान को अपने काम के प्रति ऐसी निष्ठा रखनी चाहिए, जैसी निष्ठा वह भगवान के प्रति रखता है. मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी यहां महान व्यक्तित्व ‘स्वामी विवेकानंद’ का सुन्दर उदाहरण हमारे सामने पेश कर रहे हैं. यह प्रेरणादायक वीडियो आपको आत्म-बोध की यात्रा शुरू करने और अपने जीवन में सफलता हासिल करने के लिए सारे जरुरी काम करने के लिए प्रेरित करेगा. 

Jan 21, 2020 17:47 IST
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हमारे देश में सदियों से लोग अपने कर्म को पूजा मानते आये हैं और भगवान श्री कृष्ण द्वारा तो अर्जुन को गीता में कर्मयोग का ही उपदेश दिया गया है. दरअसल समय और परिस्थिति के मुताबिक हमारी कर्मभूमि अलग-अलग हो सकती है लेकिन हमें अपने जीवन में सदैव ही अपने कर्तव्यों और कर्म को महत्व देना चाहिए. इस वीडियो में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें स्वामी विवेकानंद जी के उदाहरण से कर्म का महत्व समझा रहे हैं और कह रहे हैं कि दुआएं देने वाले मूंह से सेवा करने वाले हाथ कहीं बेहतर होते हैं. जैसे स्वामी विवेकानंद सहित देश-दुनिया के सभी सफल और महान लोगों ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण में कर्म मार्ग को ही चुना है, ठीक वैसे ही अपने जीवन में सफलता हासिल करने और मानवता जैसे गुण विकसित करने के लिए हमें भी सदैव कर्म-मार्ग का ही चयन करना चाहिए.

  • शिकागो में स्वामी विवेकानंद का बेजोड़ भाषण

इस वीडियो के शुरू में विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा जी हमें कह रहे हैं कि, अमरीका के शिकागो शहर में जब स्वामी विवेकानंद जी ने अपने ऐतिहासिक भाषण के शुरू में ही वहां उपस्थित जन-समुदाय को ‘मेरे साथी भाइयों और बहनों’ कहकर संबोधित किया तो वहां उपस्थित लोगों के लिए किसी भाषण के दौरान इतना प्यार और सम्मान भरा संबोधन पहला ऐसा अवसर था जिसका स्वागत उन्होंने स्वामी जी के सम्मान में खड़े होकर और तालियां बजाकर किया. आखिर ऐसा क्यों हुआ.....क्योंकि स्वामी जी से पहले जितने भी वक्ता आये उन सभी ने वहां उपस्थित जन-समुदाय को ‘लेडीज़ एंड जेंटलमेन’ कहकर संबोधित किया था. स्वामी जी का उद्बोधन सुनते ही लोगों को फर्क समझ आ गया. लोगों को तुरंत अंदाज़ा हो गया कि स्वामी जी की भाषा और भावना सबसे श्रेष्ठ है. इसलिए उन लोगों ने तुरंत अपनी सीटों से खड़े होकर, तालियां बजाकर स्वामी जी का स्वागत-सत्कार किया.

  • भारत के डलहौज़ी में प्लेग फैलने के दौरान स्वामी जी ने चुना कर्म और सेवा का मार्ग

भारत आकर स्वामी विवेकानंद डलहौज़ी में रहने लगे. उन्हीं दिनों डलहौज़ी में प्लेग नामक महामारी फ़ैल गई और बड़ी संख्या में लोग रोगग्रस्त होकर मरने लगे. तब स्वामी जी डलहौज़ी के विभिन्न अस्पतालों में पट्टियां और स्टेथेस्कोप लेकर गये और रोगियों की सेवा करने लगे.

  • स्वामी जी को मंदिर में पूजा करने की मिली हिदायत

स्वामी जी को दिन-रात रोगियों की सेवा करते हुए देखकर किसी ने स्वामी विवेकानंद जी से कहा, ‘स्वामी जी आप अस्पताल में क्या कर रहे हो? आप तो चिकित्सक भी नहीं हो.....आपको तो मंदिर में होना चाहिए.....मंदिर जाओ और पूजा करो.’

  • स्वामी विवेकानंद जी ने दिया सटीक जवाब

इस वीडियो में आगे सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें आगे समझा रहे हैं कि, ‘स्वामी जी ने उस व्यक्ति को जो सटीक जवाब दिया, अगर वह हमारे दिल में उतर जाए तो हमारा जीवन ही बदल जायेगा.’ स्वामी विवेकानंद जी ने उस व्यक्ति से कहा कि, ‘जो मैं यहां अस्पताल में कर रहा हूं, इसी को पूजा कहते हैं. जो आप मंदिरों में घंटियां बजाते हो, वह सब रीति-रिवाज है.....जो मैं अस्पताल में कर रहा हूं, यह पूजा है.’

  • शिव खेड़ा जी का प्रभावी उद्धरण

स्वामी विवेकानंद जी के जीवन की इस घटना से प्रेरित होकर सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा जी ने अपना एक उद्धरण (कोटेशन) तैयार किया है – ‘जो हाथ लोगों की सेवा करते हैं, वे उस मूंह से कहीं अच्छे हैं, जो मूंह सिर्फ दुआ करता है.’ सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर हमें समझा रहे हैं कि यह बात अत्यधिक विचार करने के लायक है और अगर हम इस कोटेशन को अपने जीवन में उतार लें तो फिर, हम जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल होने के साथ-साथ मानवीय गुणों से युक्त हो जायेंगे.  

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