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रीटेल मैनेजमेंट में करियर

Sep 21, 2018 11:59 IST

    परिचय

    बेहद कठिन व प्रतिस्पर्धी होती व्यापारिक परिस्थितियों में सुपरमार्केट या हाइपरमार्केट का प्रबंधन ही खुदरा प्रबंधन (रीटेल मैनेजमेंट) कहलाता है.  पिछले दशक में इस उध्योग ने भारत में काफी विकास किया है. नयी विपणन नीति बनाने से लेकर व्यापार को विभिन्न क्षेत्रों में फ़ैलाने तक कम्पनियां ग्राहकों को लुभाने के सभी हथकंडे आजमा चुकी हैं.
    यह एक ऐसा उद्योग है जो "ग्राहक सर्वोपरि है" के प्रतिमान पर कार्य करता है. अगली बार जब आप रिलाइंस फ्रेश अथवा बिग बाज़ार जैसे किसी हाइपर मार्केट या सुपरमार्केट से अपने पसंद की कोई वस्तु खरीदने जाएँ तो उस पर प्राप्त होने वाली छूट का विश्लेषण अवश्य करें.  आज बाज़ार गतिशील है तथा यहाँ उपस्थित तंत्र पूरी तरह कप्यूटराइज्ड़ है.  वो दिन लद गए जब आप ऊंची कीमत पर पास के किराना स्टोर से सामान लाते थे.  आज लगभग हर चीज़  छूट के साथ उपलब्ध है. वास्तव में यह सेल सीज़न है वो भी बिना किसी कारण के. आज लगभग सभी ब्रांड्स बाज़ार में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए अपनी फैक्ट्री आउटलेट से लेकर सुपरमार्केट तक सभी जगह छूट प्रदान कर रहे हैं.
    अतः, खुदरा प्रबंधन एक ऐसा विषय है जिसके लिए आपको सभी ब्रांड्स, उनकी विपणन नीति तथा ग्राहकों को जीतने की रीटेल फिलोसोफी के बारे में जानकारी होना आवश्यक है.

    चरणबद्ध प्रक्रिया

    आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले के लिए कैट (कॉमन एडमिशन टेस्ट) परीक्षा पास करनी होगी. इसी तरह विदेशी विश्वविद्यालयों से एमबीए करने के लिए जीमैट परीक्षा पास करनी होगी .

    रीटेल मैनेजमेंट में पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कुछ अच्छे संस्थान हैं- एमडीआई, गुड़गांव व एनएमआईएमएस यूनिवर्सिटी, मुंबई. इनमें दाखिले के लिए आपको प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी. 
    एक छात्र के रूप में रीटेल मैनेजमेंट पाठ्यक्रम आपको निम्न विषयों का ज्ञान देगा:

     

    1. खुदरा प्रबंधन का परिचय एवं संकल्पना
    2. रीटेल ट्रेंड्स
    3. रीटेल मार्केट विभाजन
    4. रीटेल प्राइसिंग एवं मर्चेंडाइजिंग
    5. रीटेलिंग में रिलेशनशिप मार्केटिंग
    6. रीटेलिंग में सूचना तकनीक का योगदान

     
    बाकी सभी विषय या तो इन विषयों के उप¬-विषय हैं या किसी न किसी रूप में इनसे जुड़े हुए हैं.

    पदार्पण

    खुदरा प्रबंधन निश्चित तौर पर एक गैर-पारंपरिक विषय है. इस विषय को आप तभी चुनें जब आपमें इस क्षेत्र की बारीकियों को समझने की क्षमता हो तथा आपका झुकाव विज्ञापन में भी हो.  इसके बाद तो बस, एक सुनहरा करियर आपका इंतज़ार कर रहा होगा.

    क्या यह मेरे लिए सही करियर है?

    जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि खुदरा प्रबंधन उनके लिए उचित करियर साबित हो सकता है जो कि उपयोगी वस्तुओं, सेल्स मार्केट, बाज़ार विभाजन, व्यापार की विविधता, विज्ञापन व प्रचार तथा मार्केट रिसर्च विषयों में रूचि रखते हों. यह प्रोफेशन बाज़ार में प्रवेश करने वाली नित नयी कम्पनियों तथा उनके नए उत्पादों को जानने का अवसर प्रदान करता है. यहाँ आप असिस्टेंट रीटेल मैनेजर के रूप में करियर की शुरूआत कर सकते हैं जहां आपको एक पूरे स्टोर को मैनेज करने की ज़िम्मेदारी सौंपी जा सकती है. इस क्षेत्र में सफल होने के लिए आपके  विचारों में गतिशीलता तथा टीम-लीडर के गुण होने चाहिए.

    खर्चा कितना होगा?

    कॉलेज या इंस्टीट्यूट के चुनाव के आधार पर रीटेल मैनेजमेंट में किसी कोर्स की वार्षिक फीस 1 से 3 लाख होती है. यदि आप यह कोर्स टियर-1 के बी-स्कूलों जैसे आईआईएम इत्यादि से करते हैं तो फीस उपरोक्त बताई गयी सीमा में अधिकतम होगी. यदि आप किसी ऐसी अंतर्राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी का चुनाव करते हैं जो कि आपको विदेश में शिक्षा का अवसर प्रदान करे, तो उसकी फीस इससे भी ज्यादा हो सकती है.

    छात्रवृत्ति

    शिक्षा ऋण लेने का सबसे अच्छा विकल्प स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया है जो कि 7.5 लाख तक का ऋण प्रदान करता है. दूसरे बैंक भी ये सुविधा प्रदान करते हैं परन्तु ऋण लेने से पहले उनकी ब्याज दर के बारे में जानकारी अवश्य करें.
    कई कॉलेज अच्छे छात्रों को स्कॉलरशिप भी देते हैं हालाँकि भारत में यह कम प्रचलित है परन्तु विदेशी संस्थान कैट अथवा जीमैट में अच्छा स्कोर करने वाले छात्रों को पूरी स्कॉलरशिप प्रदान करते हैं हालाँकि यहाँ भी आपको अतिरिक्त खर्चों जैसे रहने-खाने का प्रबंध स्वयं ही करना होगा.  विदेशी संस्थान जीमैट व कैट स्कोर के आधार पर ही छात्रवृत्ति प्रदान करते है.

    रोज़गार के अवसर

    स्नातक छात्रों के लिए इस क्षेत्र में रोज़गार की काफी संभावनाएं हैं. आप सेल्स एग्जीक्युटिव से अपने करियर की शुरूआत कर सकते हैं या सीधे सेल्स मैनेजर अथवा मार्केटिंग मैनेजर भी बन सकते हैं. यहाँ तक कि आप किसी बड़े रीटेल ब्रांड की फ्रेंचाईज़ लेकर अपना खुद का काम शुरू कर सकते हैं.

    वेतनमान

    कार्य के परिमाण के आधार पर आप सेल्स एग्जीक्युटिव अथवा फ्लोर मैनेजर के तौर पर 15000 से 25000 रूपये तक मासिक वेतन प्राप्त कर सकते हैं. यहाँ आपकी ज़िम्मेदारी होती है- ग्राहकों को फ्लोर पर मैनेज करना व उन्हें खरीददारी में सहायता करना. 
    कॉर्पोरेट लेवल पर जाकर आप बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर भी बन सकते हैं.

    मांग एवं आपूर्ति

    सुपरमार्केट व हाइपरमार्केट का व्यापार तेज़ी से फैलने के कारण फ्लोर पर काम करने वाले लोगों व रीटेल मैनेजर की मांग बाज़ार में हमेशा ऊंची रहती है. कभी-कभी स्टार्ट-अप रीटेल चेन पीक-आवर्स में ग्राहकों को संभालने के लिए कॉलेज से फ्रेशर्स की भर्ती करती हैं अथवा पार्ट-टाइम जॉब के लिए भी ऑफर करती हैं.

    कभी-कभी तो ये कम्पनियां साधारण अंकों के साथ 12 वीं पास छात्रों को भी नौकरी पर रख लेती हैं. हालांकि, एमबीए छात्रों की मांग व्यापार अनुसंधान, बाज़ार अनुसंधान, मूल्य-निर्धारण तथा रण-नीति बनाने जैसे करों में होती है. भारत में रीटेल प्रोफेशनल्स की बहुतायात है परन्तु फिर भी इस क्षेत्र में अच्छे प्रोफेशनल्स की मांग हमेशा बनी रहती है.

    मार्केट वॉच

    रिलाइंस, बिग बाज़ार, विशाल मेगा-मार्ट तथा हाल ही में स्थापित स्टार बाज़ार जैसी कम्पनियां बड़े पैमाने पर उत्पादों की बिक्री कर प्रतिदिन लाखों रूपये कमा रही हैं. इनके अलावा वस्त्र बनाने वाली प्रमुख कम्पनियाँ वेस्टसाईड व पेंटालून, जूते बनाने वाली रीगल, मेट्रो तथा बाटा बाज़ार में अपने उत्पादों को बेचने के लिए नित नए व मौलिक तरीके खोजती हैं तथा विभिन्न रणनीतियां बनाती हैं.

    इस सन्दर्भ में, समर, स्प्रिंग, विंटर सेल्स का प्रमुख योगदान रहता है. इन बड़ी कम्पनियों के शेयरों का उत्थान व पतन इनकी मासिक व वार्षिक बिक्री पर ही निर्भर करता है.

    अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन

    भारत में सुपरमार्केट व हाइपरमार्केट का चलन विदेशी ब्रांड्स जैसे वॉलमार्ट जैसी कम्पनियों से आया है. वॉलमार्ट जैसी कम्पनियाँ अपने उत्पादों को बेचने के लिए आधुनिक आपूर्ति
    श्रंखला रणनीतियों का प्रयोग करती हैं.
    उच्च श्रेणी के भारतीय ग्राहकों को अपने फैशनेबल उत्पादों से संतुष्ट करने के उद्देश्य से रे-बैन, बोस, गुच्ची तथा मैंगो जैसे ब्रांड्स पहले ही भारतीय बाज़ार में प्रवेश कर चुके हैं. अतः भारतीय छात्रों के लिए इस क्षेत्र में रोज़गार के सराहनीय अवसर हैं.

    सकारात्मक/ नकारात्मक पहलू

    सकारात्मक

    1. जर्मनी, यूएस व यूके की कई कम्पनियां हर साल भारत में अपने स्टोर्स खोल रही हैं. परिणामस्वरूप, जॉब चाहने वाले युवाओं के लिए यहाँ अच्छे अवसर हैं.
    2. साधारणतया खुदरा तंत्र बहुत ही आकर्षक व विविधतापूर्ण क्षेत्र है. इस क्षेत्र में काम करने पर आपको ज़्यादा विस्तृत एक्सपोज़र मिलेगा तथा साथ ही प्रतिदिन विभिन्न प्रकार के लोगों से मिलने का मौका मिलेगा.

    नकारात्मक

    1. कुछ रीटेल आउटलेट्स एमबीए डिग्री धारकों या रीटेल मैनेजमेंट में कोई और पाठ्यक्रम किये हुए छात्रों को वरीयता न देकर साधारण स्नातकों को ही नौकरी दे देते हैं, ये छात्रों को उनके करियर में अनियमितता की ओर ले जाता है.
    2. जो ब्रांड्स बाज़ार में अच्छा नहीं कर पाते वो अपने व्यापार का परिमाण घटाते है तथा नौकरियों में कटौती करते हैं. इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ ये एक सबसे बड़ा जोखिम हैं.     

    भूमिका और पदनाम

    विभिन्न रीटेल कम्पनियों द्वारा नियोजित लोग अधिकतर फ्लोर मैनेजर, फ्लोर एग्जीक्युटिव, लॉबी मैनेजर इत्यादि कहलाते हैं. कॉर्पोरेट स्तर पर सेल्स मैनेजर एवं मार्केटिंग मैनेजर जैसे पद होते हैं.

    खुदरा उद्योग के विकास से ही आज लोग कई मॉल्स, सुपरमार्केट, मूवी थिएटर व हाइपरमार्केट देख पा रहे हैं. हालाँकि उत्पाद  जो ये सभी बेचते हैं, भिन्न प्रकार के होते हैं, परन्तु इनका आधार एक ही होता है- ग्राहकों के दिलों को जीतना.

    अग्रणी कम्पनियों

    भारत में टॉप-टेन रीटेल कम्पनियां हैं- शॉपर्स-टॉप, वेस्टसाईड, पेंटालूंस, लाईफ-स्टाईल, आरपीजी रीटेल, क्रॉसवर्ड, विल्स लाइफ स्टाईल, ग्लोबस, पीरामल्स एवं एबनी रीटेल होल्डिंग्स.

    रोज़गार प्राप्त करने के लिए कुछ सुझाव

    किसी रीटेल कम्पनी में नियोजित होने के लिए आपके लिए निम्न सुझाव हैं:

    1. एक ऐसा रिज्युमे तैयार कीजिये जो कि आपकी ग्राहकों से बात करने की कला व उत्कृष्ट संवाद क्षमता दर्शाता हो.
    2. स्कूल या कॉलेज में प्राप्त किये गए पुरस्कारों का ज़िक्र रिज्युमे में अवश्य करें.
    3. कम से कम 5 से 7 कंपनियों में आवेदन करें जिससे कि आप बेहतर विकल्प चुन सकें.

     

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