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इसरो ने जून से एमओटीआर का उपयोग आरंभ करने की घोषणा की

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 15 मई 2015 को मल्टी ऑब्जेक्ट ट्रेकिंग रडार (एमओटीआर) का जून से उपयोग आरंभ करने की घोषणा की

May 18, 2015 17:55 IST
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एमओटीआर : मल्टी ऑब्जेक्ट ट्रेकिंग राडार

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 15 मई 2015 को मल्टी ऑब्जेक्ट ट्रेकिंग राडार (एमओटीआर) का जून से उपयोग आरंभ करने की घोषणा की.

इसरो इस स्वदेश निर्मित एमओटीआर का एक रॉकेट उड़ान के दौरान परीक्षण करेगा. इसमें केवल राडोम नामक कवच को अमेरिका से आयात किया गया है ताकि इसमें लगे एंटीना की रक्षा की जा सके.


राडार की मुख्य विशेषताएं

यह राडार सुदूर स्थित 10 वस्तुओं पर एक ही समय में एक साथ नजर रख सकता है.

यह अन्य लगातार घूमने वाले राडार से भिन्न एक स्थान पर स्थिर रह कर निगरानी कर सकता है.

इसका वजन 35 टन है, इसकी लम्बाई 12 मीटर तथा ऊंचाई 8 मीटर है.

एमओटीआर 800 किलोमीटर की दूरी से 30 बाइ 30 सेंटीमीटर अर्थात छोटे आकार वाली किसी भी वस्तु का पता लगाने में सक्षम है.

एमओटीआर के विकास पर कुल 245 करोड़ रुपये की लागत आई है.


राडार का महत्व

इसरो के भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए इस राडार की सफलता काफी अहम होगी.

अंतरिक्ष से वापस धरती पर लौटने के अभियानों के लिए इसरो का यह राडार अहम भूमिका निभाएगा, क्योंकि यह अंतरिक्ष के कचरे पर बारीक नजर रखने में सक्षम है.

अभी इसरो को अपने अभियानों में अंतरिक्ष कचरे की जानकारी के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के डेटा पर निर्भर रहना पड़ता है.

राडार का उपयोग हवाई अड्डों, मौसम विज्ञान संबंधित कार्यों में किया जायेगा.

इस तकनीक को लागू करने के बाद भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जापान, इजरायल तथा यूरोपीय संघ (ईयू) श्रेणी में शामिल हो जाएगा जो अभी इस तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं.

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