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उच्चतम न्यायालय ने मुंबई बम धमाके के आरोपी याकूब मेमन की सुधारात्मक याचिका खारिज की

सुधारात्मक याचिका जुलाई माह के चौथे सप्ताह में चर्चा  में रही क्योंकि 21 जुलाई 2015 को मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तु की अध्यक्षता में उच्चतम न्यायालय की पीठ ने 1993 के मुंबई धमाकों के दोषी याकूब अब्दुल रजाक मेमन की सुधारात्मक याचिका को खारिज कर दिया.

Jul 22, 2015 03:36 IST

सुधारात्मक याचिका जुलाई माह के चौथे सप्ताह में चर्चा  में रही क्योंकि 21 जुलाई 2015 को मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तु की अध्यक्षता में उच्चतम न्यायालय की पीठ ने 1993 के मुंबई धमाकों के दोषी याकूब अब्दुल रजाक मेमन की सुधारात्मक याचिका को खारिज कर दिया.
इससे पहले मेमन ने दया याचिका भी दायर की थी. जिसे खारिज कर दिया गया था. वर्तमान में मेमन नागपुर के केंद्रीय कारगर में है उसे 30 जुलाई 2015 को फांसी दी जाएगी.

क्या है सुधारात्मक याचिका ?

• सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में कोई दोष होने की स्थिति में उस पर पुनर्विचार किया जा सकता है. लेकिन कभी अपवाद स्वरूप कोई परिस्थिति ऐसी भी उत्पन्न हो सकती है जहाँ न्याय में त्रुटी हो या निर्णय से विपरीत रूप से प्रभावित होने वाले पक्ष की यह धारणा बन रही हो कि न्यायाधीशों ने पूर्वाग्रह से ग्रसित हो कर यह निर्णय दिया है तब सुधारात्मक याचिका दायर की जा सकती है.
• सुधारात्मक याचिका दोषी अपराधी के लिए पुर्नाविचार का एक अंतिम साधन है, इसका आवेदन दया याचिका के खारिज किए जाने के बाद ही किया जा सकता है.
• इसका आवेदन दोषी व्यक्ति द्वारा प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों के उलंघन और न्यायधीश द्वारा पक्षपात के आधार पर किया जाता है.

प्रायः सुधारात्मक याचिका पर निर्णय चैम्बर में न्यायाधीशों द्वारा लिया जाता है परन्तु विशेष अनुरोध सुनवाई खुली अदालत में की जा सकती है.

 
 सुधारात्मक याचिका की पृष्ठभूमि
 

• सुधारात्मक याचिका की अवधारणा 2002 में रूपा अशोक हुर्रा और अशोक हुर्रा बनाम अन्य वाद से आई.
• इस वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय लिया की न्यायालय अपनी निहित शक्ति का प्रयोग करते हुए फिर से अपने निर्णय पर विचार कर सकता है.

 

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