उषा थोराट की अध्यक्षता वाले कार्यसमूह द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए कड़े दिशा-निर्देश

Economy Current Affairs 2011. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC: non-banking financial institutions, एनबीएफसी) के नियमन के लिए कड़े दिशा-निर्देश पेश किया गया. भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर .....

Created On: Aug 30, 2011 15:29 ISTModified On: Aug 30, 2011 15:29 IST

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC: non-banking financial institutions, एनबीएफसी) के नियमन के लिए कड़े दिशा-निर्देश पेश किया गया. भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर उषा थोराट की अध्यक्षता वाले कार्यसमूह ने 29 अगस्त 2011 को अपनी सिफारिश पेश की.


गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए नियमन और निगरानी ढांचे को मजबूत बनाने हेतु कार्यसमूह ने नई एनबीएफसी के पंजीकरण के लिए न्यूनतम 50 करोड़ रुपये की संपत्ति को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया. कार्यसमूह ने इसके साथ ही इससे कम संपत्तियों वाली एनबीएफसी का पंजीकरण रद्द करने या फिर उन्हें दो वर्ष के बाद नया पंजीकरण प्रमाणपत्र लेने का भी सुझाव दिया.


उषा थोराट की अध्यक्षता वाले कार्यसमूह की सिफारिश में प्रावधान संबंधी दिशानिर्देशों और शेयर ब्रोकरों व मर्चेंट बैंकरों को कर्ज देने में एनबीएफसी के लिए बैंकों जैसे नियम लागू करने पर बल दिया गया. साथ ही बैंकों पर लागू होने वाले एकाउंटिंग नियम को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC: non-banking financial institutions, एनबीएफसी) के लिए भी लागू किए जाने का सुझाव दिया गया.


भारतीय रिजर्व बैंक ने सुझावों पर हितधारकों और जनता से 30 सितंबर 2011 तक टिप्पणियां मांगी हैं, जिसके बाद इसे क्रियान्वित किया जाना है.


उषा थोराट की अध्यक्षता वाले कार्यसमूह द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए पेश दिशा-निर्देश के मुख्य बिंदु: 
•    नई एनबीएफसी के पंजीकरण के लिए न्यूनतम 50 करोड़ रुपये की संपत्ति अनिवार्य
•    50 करोड़ रुपये से कण संपत्ति वाले एनबीएफसी का पंजीकरण रद्द करने या फिर उन्हें दो वर्ष के बाद नया पंजीकरण प्रमाणपत्र लेने का प्रावधान
•    शेयर ब्रोकरों व मर्चेंट बैंकरों को कर्ज देने में एनबीएफसी के लिए बैंकों जैसे नियम लागू हों
•    बैंकों पर लागू होने वाले एकाउंटिंग नियम को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए भी लागू करना
•    एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति वाली सभी एनबीएफसी के लिए निदेशक मंडल का गठन अनिवार्य
•    पंजीकरण के तीन वर्ष के भीतर पूंजी पर्याप्तता की दृष्टि से उनकी न्यूनतम शेयर पूंजी 12 प्रतिशत होना अनिवार्य
•    कर्ज वसूली के नए कानून-वित्तीय संपत्तियों का पुनर्गठन व प्रतिभूतिकरण और प्रतिभूति हित प्रवर्तन अधिनियम (सरफेसी कानून) का लाभ
•    25 प्रतिशत से अधिक की प्रत्यक्ष या परोक्ष हिस्सेदारी हस्तांतरण, नियंत्रण में बदलाव और रजिस्टर्ड एनबीएफसी के विलय या अधिग्रहण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति अनिवार्य

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