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एमओईएफ द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) संशोधन नियम 2015 जारी

इसका उद्देश्य धारा 6 और 25 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पर्यावरण (संरक्षण) नियम 1986 में संशोधन करना है

Dec 4, 2015 15:25 IST
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केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ) ने 30 नवम्बर 2015 को  पर्यावरण (संरक्षण) संशोधन नियम, 2015 हेतु मसौदा जारी किया गया.

इसका उद्देश्य धारा 6 और 25 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पर्यावरण (संरक्षण) नियम 1986 में संशोधन करना है.

मसौदे का उद्देश्य जल निकायों में स्नान के लिए प्रयोग किये जा रहे पानी के गुणवत्ता मानदंड को निर्दिष्ट करना था.

 

मानदंड

प्रभाव

कुल कॉलिफोर्म

(एमपी एन/100एमएल)

50

कॉलिफोर्म का प्रमुख उत्पादन मृदा द्वारा होता है तथा यह स्नान के समय सुरक्षित होता है.

फेकल कॉलिफोर्म

(एमपी एन/100एमएल)

<1.8

यह मानव द्वारा पानी में गए बेक्टीरिया को दर्शाते हैं जिससे जल जनित बीमारियां हो सकती हैं जैसे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, डायरिया, टाईडफाइड आदि. इसलिए यह पीने लायक नहीं होता.

फेकल स्ट्रेपटोकोचि  

(एमपी एन/100एमएल)

<1.8

यह आमतौर पर मनुष्य एवं जानवरों की आंत में पाए जाते हैं. इसकी मौजूदगी से दिमागी बुखार, आंत्रशोध एवं साइनाईटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं.  

पीएच वैल्यू

6.5-8.5

इससे त्वचा की रक्षा करने में सहायता मिलती है. इससे आंखें, नाक, कां आदि को सुरक्षित रखा जा सकता है.

घुलनशील ऑक्सीजन 

5 अथवा अधिक

अधिकतम 5 एमजी/एल ऑक्सीजन कार्बनिक प्रदूषण वाले ऑक्सीजन से उचित स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है जो नदी के ऊपर अवसादों से अवायवीय गैसों के उत्पादन को रोकने के लिए आवश्यक है.

बायो-केमिकल ऑक्सीजन

3 दिन, 27 डिग्री सेल्सियस

3 अथवा अधिक

यह  प्रदूषण फ़ैलाने वाले ऑक्सीजन से सुरक्षा सुनिश्चित करता है.

केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी)

<10 एमजी/एल

सीओडी का यह स्तर औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाले स्रोतों में सुरक्षित मात्रा सुनिश्चित करता है.

रंग

10-20

यह सामान्यतः पानी में मौजूद रासायनिक तत्वों के कारण उत्पन्न होता है जैसे क्रेसोल्स, फेनोल्स, नाफ्था आदि. यह पानी पीने अथवा नहाने लायक नहीं होता.

महक

ऐसी किसी गंध का पता नहीं लगा है.

यह पीने के पानी को एवं जलीय जीव जंतुओं को प्रभावित करता है.

फ्लोटिंग मैटर

कोई भी हानिकारक प्रभाव नहीं देखा गया.

यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पानी की सतह पर मौजूद होता है. यह पवन के वेग अनुसार दिशा तय करता है. इसमें पैथोजेनिक बैक्टीरिया अथवा वायरस हो सकते हैं तथा कीटनाशकों में मौजूद हाइड्रोकार्बन भी मनुष्यों को प्रभावित कर सकते हैं.

फ्लोटिंग पदार्थ जैसे तेल, ग्रीस एवं स्कम (पेट्रोलियम उत्पाद शामिल)

<1.0

कीचड़, ठोस पदार्थ, तेल अथवा खरपतवार

यह किसी औद्योगिक ईकाई से बहकर आया मलबा हो सकता है अथवा किसी शोधशाला का मलबा भी हो सकता है.

ठोस निलंबित पदार्थ  

<10 सीवेज अथवा औद्योगिक अपशिष्ट

ठोस निलंबित पदार्थों में पानी किसी भी प्रयोग के लिए हानिकारक हो सकता है.

 

मैलापन एनटीयू (नेफालो टेर्बीडीटि यूनिट)  

0.9 की गहराई पर नापा गया 30

 

इसका मुख्य कारण गाद, चिकनी मिट्टी अथवा अन्य कचरे का पानी में जमा होना है, इसमें प्लवक और अन्य सूक्ष्म जीव भी शामिल होते हैं.

 

बेन्थिक मैक्रो-अकशेरुकी का जलीय जीवन

नहाने के पानी में सैप्रोबिक एवं डाइवर्सिटी स्कोर रेंज की मौजूदगी पानी की सुरक्षा एवं जलीय जीवन को भी सुरक्षा प्रदान करती है.

सैप्रोबिक स्कोर रेंज

6.0-7.0

डाइवर्सिटी स्कोर रेंज

0.5-1.0

 

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