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केंद्रीय बजट 2010-11 (क्षेत्रवार परिव्यय)

 

Sep 14, 2010 11:14 IST

कृषि और संबद्ध कार्य
     कृषि क्षेत्र में समावेशी विकास को प्रोत्साहन देने, ग्रामीण आय को बढ़ाने तथा खाद्य सुरक्षा को बनाये रखने हेतु बजट 2010-11 में एक चतुर्थ स्तरीय कार्ययोजना बनायी गयी जिसमें (क) कृषि उत्पादन; (ख) उत्पाद की बर्बादी में कमी; (ग) किसानों को ऋण सहायता; और (घ) खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर बल देने का संकल्प लिया गया. कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए देश के पूर्वी क्षेत्र - बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में हरित क्रांति के विस्तार की योजना पर बल दिया. वर्षापोषित क्षेत्रों के 60,000 ‘दलहन और तेल बीज ग्रामों’ के उत्पादन को बढ़ाने के लिए जल संचयन व प्रबंधन तथा मृदा संरक्षण तंत्र की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा. अनाज की बर्बादी को कम करने व देश के बफर अनाज स्टॉक को बनाये रखने हेतु भारतीय खाद्य निगम द्वारा किराये पर लिए गए गोदामों की गारंटी अवधि को बढ़ाया. कृषि उत्पादन में बढ़ावा के लिए उन्नत बीज व तकनीक हेतु किसानों के ऋण सहायता को भी बढ़ाया गया. साथ ही ऋणों की समय पर अदायगी करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु अतिरिक्त ब्याज सहायता को भी बढ़ाया गया. खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अत्याधुनिक आधारभूत संरचना को आगे बढ़ाते हुए पांच और मेगा फूड पार्क की स्थापना का निर्णय लिया.       
• राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेबीआई) के लिए – 6,722 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के लिए – 1,350 करोड़ रु.
• बिहार, छ्त्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में हरित क्रांति के लिए – 400 करोड़ रु.
• 60,000 ‘दलहन और तेल बीज ग्रामों’ के लिए – 300 करोड़ रु.
• जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के लिए – 200 करोड़ रु.
• लघु सिंचाई – 1,000 करोड़ रु.
• फसल बीमा के लिए – 1,050 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के लिए – 950 करोड़ रु.
• किसानों की ऋण उपलब्धता के लिए – 3,75,000 करोड़ रु.
 ‘किसानों के लिए ऋण माफ़ी और ऋण राहत योजना’ के तहत ऋण अदायगी अवधि को छः माह बढ़ाकर 30 जून 2010 तक किया
• भारतीय खाद्य निगम के द्वारा अनाज भण्डारण के लिए किराये पर लिए जाने वाले निजी गोदामों की गारंटी अवधि को 2 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष किया
• अल्पावधि फसल ऋणों की समयानुसार अदायगी करने वाले किसानों को प्रोत्साहन स्वरूप अतिरिक्त ब्याज सहायता 1% से बढ़ाकर 2% किया
• पांच और मेगा फूड पार्क की स्थापना का निर्णय
• पशुपालन के लिए – 848.15 करोड़ रु.
• डेरी विकास के लिए – 87.76 करोड़ रु.
• मत्स्य पालन के लिए – 262.44 करोड़ रु.
• कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए – 2,300 करोड़ रु.

ग्रामीण विकास
     समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने बजट 2010-11 में ग्रामीण अवसंरचना पर जोर दिया. समावेशी विकास की प्रक्रिया को और मजबूती प्रदान करने हेतु ग्रामीण विकास के साथ साथ रोजगार अवसरों की उपलब्धता पर भी जोर दिया. इसके मुख्य संघटक में ग्रामीण रोजगार, आवास निर्माण, सड़कें और पुल निर्माण को रखा गया.    
• 2 अक्टूबर 2009 से नरेगा का नया रूप “महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना” के लिए 40,100 करोड़ रु.
• ग्रामीण अवसंरचना का कार्यक्रम ‘भारत निर्माण’ के लिए 48,000 करोड़ रु.
• ग्रामीण आवास निर्माण का कार्यक्रम ‘इंदिरा आवास योजना’ में प्रति आवास लागत मैदानी क्षेत्रों में बढ़ाकर 45,000 रु. और पर्वतीय क्षेत्रों में 48,500 रु. किया. इस योजना का कुल आवंटन 10,000 करोड़ रु.  
• पंचायती राज के लिए 120 करोड़ रु. (12 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए)
• स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसआई) के लिए – 2,984 करोड़ रु. जिसमें से पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम हेतु 301 करोड़ रु. निर्धारित 
• पिछड़ा क्षेत्र विकास अनुदान निधि के तहत 7,300 करोड़ रु.
• भूमि सुधार के लिए 201 करोड़ रु. (20 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए)
• बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे में कमी लाने हेतु 1,200 करोड़ रु. की अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता
• अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रम के लिए - 1,016 करोड़ रु.

शहरी विकास और आवास  
     शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करने, दक्षता विकास और स्वरोजगार में सहायता करने पर बल दिया गया. आवास ऋणों पर ब्याज आर्थिक सहायता का भी विस्तार किया गया. मलिन बस्तियों के निवासियों और शहरी गरीबों के लिए राजीव आवास योजना के तहत राज्य सरकारों को प्रोत्साहित कर भारत को स्लम-मुक्त करने की भी प्रतिबद्धता बजट 2010-11 में  दिखायी गयी.
• स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के तहत – 5,400 करोड़ रु.
• आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन के लिए – 1,000 करोड़ रु.
• 20 लाख तक लागत वाले मकानों पर 10 लाख तक के आवास ऋणों पर एक प्रतिशत ब्याज आर्थिक सहायता योजना को 31 मार्च 2011 बढ़ाया. इसके लिए 700 करोड़ रु. का आवंटन
• राजीव आवास योजना के तहत मलिन बस्तियों के निवासियों और शहरी गरीबों के लिए – 1270 करोड़ रु.  

आधारभूत संरचना  
    आर्थिक विकास को बनाये रखने के लिए सड़कों, बंदरगाहों, हवाई-अड्डों और रेलवे के विकास पर बजट 2010-11 में बल दिया गया. समर्पित फ्रेट कॉरिडोर, पारिस्थितिकी-अनुकूल विश्वस्तरीय औद्योगिक निवेश केन्द्रों (नोड्स) के निर्माण पर जोर दिया. आधारभूत संरचना में समावेशी प्रक्रिया को सन्निहित करने के लिए ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों के उन्नयन पर जोर दिया. भारतीय आधारभूत संरचना वित्त कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) जो आधारभूत संरचना परियोजनाओं के वित्त पोषण का काम करती है, उसके भी वित्त पोषण योजनाओं में वृद्धि की गयी है. इसके लिए बजट के कुल आयोजना आवंटन का 46% से भी ज्यादा – 1,73,552 करोड़ रु. की व्यवस्था की गयी.     
• सड़क परिवहन संरचना विस्तारण – 19,894 करोड़ रुपये
• रेल नेटवर्क विस्तारण – 16,752 करोड़
• प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना हेतु – 10,000 करोड़ रु.
• पोत परिवहन, पत्तनों, अंतर्देशीय जल परिवहन और पोत निर्माण उद्योगों के विकास और विस्तार के लिए – 5,864 करोड़ रु.
• नागर विमानन के लिए – 3,800 करोड़ रु.
• ग्रामीण सड़कें और पुल के लिए – 12,000 करोड़ रु., जिसमें 1,114 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए 
• विद्युत क्षमता वर्धन – 5,130 करोड़
• सौर उर्जा उत्पादन – 1,000 करोड़
• लद्दाख क्षेत्र में सौर, लघु जल एवं माइक्रो विद्युत परियोजना – 500 करोड़
    
उर्जा 
     विद्युत क्षेत्र में क्षमता वर्धन को प्राथमिकता, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी को शामिल करने, कोयला खनन उत्पादन में बेहतर पारदर्शिता के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया आरम्भ करने, ‘कोयला विनियामक प्राधिकरण’ की स्थापना करने आदि पर बजट 2010-11 में जोर दिया गया. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को बजट में उर्जा का अहम घटक माना गया. पर्यावरण के प्रति सजगता दिखाते हुए नवीकरणीय उर्जा को भी प्राथमिकता दी गयी.   
• विद्युत उर्जा के लिए 50,121.42 करोड़ रु. के आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन सहित 60,751.42 करोड़ रु. का परिव्यय
• नाभिकीय उर्जा के लिए – 4,739 करोड़ रु.
• पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के लिए – 69,494.79 करोड़ रु.
• कोयला और लिग्नाइट के लिए – 13,518.39 करोड़ रु.
• नवीन तथा नवीकरणीय उर्जा के लिए जिसमें जवाहरलाल नेहरु राष्ट्रीय सौर मिशन भी शामिल है, के लिए – 1,950 करोड़ रु. 

सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण
    समावेशी विकास पर जोर देते हुए कृषि उत्पाद को बढ़ाने और उसकी बर्बादी को कम करने पर जोर दिया. सूखे या बाढ़ की समस्या से निजात पाने पर बल दिया.   
• वृहत् और मध्यम सिंचाई के लिए – 254 करोड़ रु.
• लघु सिंचाई के लिए – 116.50 करोड़ रु.
• बाढ़ नियंत्रण के लिए – 247.50 करोड़ रु.
• नौवहन परिवहन सेवाओं के लिए – 82 करोड़ रु.

जलापूर्ति एवं सफाई  
     ग्रामीण जलापूर्ति एवं स्वच्छता सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु राज्य सरकारों को सहायता देने पर बल दिया गया. देश में चल रही 593 जिलों में संपूर्ण स्वच्छता अभियान परियोजनाओं को सभी जिलों में चलाने पर बजट 2010-11 में जोर दिया गया.
• ग्रामीण क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए – 9,000 करोड़ रु, जिसमें 900 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र व सिक्किम के लिए
• केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए – 1,580 करोड़ रु, जिसमें 158 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र व सिक्किम के लिए

शिक्षा  
    सामाजिक क्षेत्र कार्यक्रमों के प्रति सरकार की अपनी प्राथमिकता होती है. इनमें एक अहम घटक शिक्षा है. विद्यालयी शिक्षा, उच्चतर शिक्षा, सर्वशिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, मध्याहन भोजन योजना और तकनीकी शिक्षा आदि के तहत बजट 2010-11 में आवंटन किये गए. समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए इस बजट में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को उच्चतर व तकनीकी शिक्षा से ज्यादा तरजीह दी गयी.  
• विद्यालयी शिक्षा और साक्षरता विभाग के लिए – 31,036 करोड़ रु.
• उच्चतर शिक्षा विभाग के लिए – 11,000 करोड़ रु; इनमें से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को 4,390 करोड़ रु; इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के लिए 100 करोड़ रु. और राज्य मुक्त विश्वविद्यालयों के लिए 50 करोड़ रु.
• तकनीकी शिक्षा के लिए – 4,706 करोड़ रु. का आवंटन; इसमें भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान के लिए 215 करोड़ रु; नए आईआईएम, आईआईटी और एनआईटी की स्थापना के लिए क्रमशः 25, 20 और 60 करोड़ रु. का आवंटन       
• सर्वशिक्षा अभियान के लिए – 15,000 करोड़ रु, जिसमें 1,397.90 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र हेतु.
• मध्याहन भोजन योजना (कक्षा I से कक्षा VIII तक) के लिए – 9,440 करोड़ रु, जिसमें 944 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र व सिक्किम के लिए
• माध्यमिक शिक्षा के लिए – 4,675 करोड़ रु, इसमें 467.56 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए; नवोदय विद्यालय समिति के लिए 1,385 करोड़ रु; केंद्रीय विद्यालय संगठन के लिए 350 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान योजना के लिए – 1,700 करोड़ रु.
• 6,000 आदर्श विद्यालयों की स्थापना के लिए – 425 करोड़ रु.
• बालिका छात्रावासों के निर्माण और संचालन के लिए – 100 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय साधन-सह योग्यता छात्रवृत्ति  योजना में 1,00,000 छात्रवृत्तियां संवितरित करने हेतु 90.50 करोड़ रु.
• प्रौढ़ शिक्षा के लिए – 1,300 करोड़ रु.  

स्वास्थ्य 
    स्वास्थ्य और परिवार कल्याण की जरूरतों को देखते हुए बजट 2010-11 में कुल 22,300 करोड़ रु. का आवंटन किया गया. सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ साथ प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना जिसमें 6 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और 13 मौजूदा सरकारी चिकित्सा कॉलेज संस्थानों के उन्नयन पर जोर दिया गया. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत जच्चा-बच्चा के मृत्यु अनुपात को कम करने पर भी बल दिया गया.
• प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लिए – 1,750 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए – 15,672 करोड़ रु.
• आयुष (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) विभाग के लिए – 800 करोड़ रु.

उद्योग और खनिज 
      देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए बजट 2010-11 में उद्योगों व खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया गया. नई तकनीक या जरूरी अवसंरचना के लिए आवंटन किया गया.
• लोहा एवं इस्पात उद्योग: 17,199.82 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें 36 करोड़ रु. की बजटीय सहायता और 17,163.82 करोड़ रु. आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन (आं.ब.बा.सं) आवंटित. भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) के लिए 12,254 करोड़ रु, की राशि आवंटित.
• अलौह खनन तथा धातुकर्म उद्योग: 1,553.17 करोड़ रु. के आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन (आं.ब.बा.सं) के साथ 1,763.17 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें भारतीय भू-विज्ञान सर्वेक्षण के लिए – 162 करोड़ रु.
• उर्वरक उद्योग: 2,914.99 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें 2,699.99 करोड़ रु. आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन (आं.ब.बा.सं) से और शेष 215 करोड़ रु. बजटीय सहायता आवंटित.
• वस्त्रोद्योग: 4,725 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें कपास प्रौद्योगिकी मिशन के लिए – 141 करोड़ रु; हथकरघा उद्योग के लिए – 426 करोड़ रु; हस्तकला उद्योग के लिए – 286 करोड़ रु; रेशम कीटपालन के लिए – 320 करोड़ रु.
• रसायन और पेट्रोरसायन उद्योग के लिए – 400 करोड़ रु.
• भारी उद्योग विभाग के लिए – 2,955 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें 2,585 करोड़ रु. आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन (आं.ब.बा.सं) से
• परमाणु उर्जा उद्योग के लिए – 1,402.14 करोड़ रु.  

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग 
      देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का योगदान 8 प्रतिशत है. लगभग 6 करोड़ व्यक्तियों को इससे रोजगार मिलता है. इस क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए बजट 2010-11 में 2,400 करोड़ रु. का आवंटन किया गया. प्रधानमंत्री ने स्वयं एक उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया, जिसकी सिफारिशों और कार्यसूची को बजट का हिस्सा बनाया गया.
• प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के लिए – 906 करोड़ रु.
• खादी विपणन विकास सहायता सहित खादी अनुदान के लिए – 290 करोड़ रु.
• ग्रामोद्योग अनुदान के लिए – 55 करोड़ रु.
• ऋण सहायता कार्यक्रम के लिए – 222.70 करोड़ रु.
• प्रौद्योगिकी सहायता संस्थान और कार्यक्रम की गुणवत्ता के लिए – 336 करोड़ रु.

महिला और बाल विकास 
      महिला और बाल विकास के तहत महिला सशक्तिकरण, निरक्षर वयस्कों को ‘साक्षर भारत’ के तहत साक्षरता कार्यक्रम में 6 करोड़ महिलाओं को शामिल करने, महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना आदि पर बजट 2010-11 में जोर दिया गया. समेकित बाल विकास सेवा योजना (आईसीडीएस) के दायरे का विस्तार भी किया गया. नई योजनाओं में किशोरियों के लिए राजीव गाँधी किशोरी अधिकारिता योजना और इंदिरा गाँधी मातृत्व सहयोग योजना के शुरुआत का भी प्रस्ताव रखा गया.
• कुल आयोजना परिव्यय के लिए – 11,000 करोड़ रु. जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए – 1,100 करोड़ रु.
• समेकित बाल विकास सेवा योजना, जिसमें छः वर्ष तक के बच्चे, महिलाओं व उपचाराधीन माताओं के स्वास्थ्य, पोषाहार व शैक्षिक सेवाएं शामिल हैं, के लिए – 8,700 करोड़ रु.
• महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के लिए – 100 करोड़ रु.

पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन 
        पर्यावरणीय असंतुलन, औद्योगिकरण और शहरीकरण से बढ़े प्रदूषण स्तरों में सुधार करने हेतु बजट 2010-11 में आवंटन किया गया. औद्योगिक बहिस्राव शोधन संयंत्र, हरित क्षेत्रों में वृद्धि करने और गंगा स्वच्छता अभियान आदि पर जोर दिया गया.
• तिरुपुर, तमिलनाडु में हॉजरी उद्योग हेतु जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली की स्थापना के लिए – 200 करोड़ रु.
• गोवा के हरित क्षेत्र संरक्षण के लिए विशेष स्वर्ण जयंती पैकेज – 200 करोड़ रु.
• ‘मिशन स्वच्छ गंगा 2020’ के तहत – 500 करोड़ रु. का आवंटन ताकि कोई भी मलव्ययन या औद्योगिक बहिस्राव राष्ट्रीय नदी में नहीं बहाया जाए.


रक्षा व सुरक्षा 
     बढ़ती नक्सली हिंसा और राज्य समर्थित आतंकवाद से निपटने के लिए बजट 2010-11 में पर्याप्त आवंटन किया गया. सीमाओं को सुरक्षित करने से लेकर जान-माल की सुरक्षा आदि पर भी जोर दिया गया. चार नए एनएसजी केन्द्रों की स्थापना, आसूचना ब्यूरो और इसके बहु-विषयक एजेंसी केंद्र का विस्तार का प्रस्ताव भी रखा गया.
• रक्षा के लिए कुल आवंटन – 1,47,344 करोड़ रु.

भारतीय अनन्य पहचान प्राधिकरण 
     बजट 2010-11 में भारतीय अनन्य पहचान प्राधिकरण के व्यापक क्रियान्वयन को देखते हुए 1,900 करोड़ रु. का आवंटन किया गया. वर्ष 2011 में अनन्य पहचान संख्याओं का पहला सेट जारी करने की योजना पर बल दिया गया. अनन्य पहचान संख्या को वित्तीय समावेशन और लक्षित सब्सिडी भुगतानों के लिए प्रभावी माना गया.

कृषि और संबद्ध कार्य :
     कृषि क्षेत्र में समावेशी विकास को प्रोत्साहन देने, ग्रामीण आय को बढ़ाने तथा खाद्य सुरक्षा को बनाये रखने हेतु बजट 2010-11 में एक चतुर्थ स्तरीय कार्ययोजना बनायी गयी जिसमें (क) कृषि उत्पादन; (ख) उत्पाद की बर्बादी में कमी; (ग) किसानों को ऋण सहायता; और (घ) खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर बल देने का संकल्प लिया गया. कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए देश के पूर्वी क्षेत्र - बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में हरित क्रांति के विस्तार की योजना पर बल दिया. वर्षापोषित क्षेत्रों के 60,000 ‘दलहन और तेल बीज ग्रामों’ के उत्पादन को बढ़ाने के लिए जल संचयन व प्रबंधन तथा मृदा संरक्षण तंत्र की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा. अनाज की बर्बादी को कम करने व देश के बफर अनाज स्टॉक को बनाये रखने हेतु भारतीय खाद्य निगम द्वारा किराये पर लिए गए गोदामों की गारंटी अवधि को बढ़ाया. कृषि उत्पादन में बढ़ावा के लिए उन्नत बीज व तकनीक हेतु किसानों के ऋण सहायता को भी बढ़ाया गया. साथ ही ऋणों की समय पर अदायगी करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु अतिरिक्त ब्याज सहायता को भी बढ़ाया गया. खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अत्याधुनिक आधारभूत संरचना को आगे बढ़ाते हुए पांच और मेगा फूड पार्क की स्थापना का निर्णय लिया.       
• राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेबीआई) के लिए – 6,722 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के लिए – 1,350 करोड़ रु.
• बिहार, छ्त्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में हरित क्रांति के लिए – 400 करोड़ रु.
• 60,000 ‘दलहन और तेल बीज ग्रामों’ के लिए – 300 करोड़ रु.
• जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के लिए – 200 करोड़ रु.
• लघु सिंचाई – 1,000 करोड़ रु.
• फसल बीमा के लिए – 1,050 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के लिए – 950 करोड़ रु.
• किसानों की ऋण उपलब्धता के लिए – 3,75,000 करोड़ रु.
• ‘किसानों के लिए ऋण माफ़ी और ऋण राहत योजना’ के तहत ऋण अदायगी अवधि को छः माह बढ़ाकर 30 जून 2010 तक किया
• भारतीय खाद्य निगम के द्वारा अनाज भण्डारण के लिए किराये पर लिए जाने वाले निजी गोदामों की गारंटी अवधि को 2 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष किया
• अल्पावधि फसल ऋणों की समयानुसार अदायगी करने वाले किसानों को प्रोत्साहन स्वरूप अतिरिक्त ब्याज सहायता 1% से बढ़ाकर 2% किया
• पांच और मेगा फूड पार्क की स्थापना का निर्णय
• पशुपालन के लिए – 848.15 करोड़ रु.
• डेरी विकास के लिए – 87.76 करोड़ रु.
• मत्स्य पालन के लिए – 262.44 करोड़ रु.
• कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए – 2,300 करोड़ रु.

ग्रामीण विकास 
     समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने बजट 2010-11 में ग्रामीण अवसंरचना पर जोर दिया. समावेशी विकास की प्रक्रिया को और मजबूती प्रदान करने हेतु ग्रामीण विकास के साथ साथ रोजगार अवसरों की उपलब्धता पर भी जोर दिया. इसके मुख्य संघटक में ग्रामीण रोजगार, आवास निर्माण, सड़कें और पुल निर्माण को रखा गया.    
• 2 अक्टूबर 2009 से नरेगा का नया रूप “महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना” के लिए 40,100 करोड़ रु.
• ग्रामीण अवसंरचना का कार्यक्रम ‘भारत निर्माण’ के लिए 48,000 करोड़ रु.
• ग्रामीण आवास निर्माण का कार्यक्रम ‘इंदिरा आवास योजना’ में प्रति आवास लागत मैदानी क्षेत्रों में बढ़ाकर 45,000 रु. और पर्वतीय क्षेत्रों में 48,500 रु. किया. इस योजना का कुल आवंटन 10,000 करोड़ रु.  
• पंचायती राज के लिए 120 करोड़ रु. (12 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए)
• स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसआई) के लिए – 2,984 करोड़ रु. जिसमें से पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम हेतु 301 करोड़ रु. निर्धारित 
• पिछड़ा क्षेत्र विकास अनुदान निधि के तहत 7,300 करोड़ रु.
• भूमि सुधार के लिए 201 करोड़ रु. (20 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए)
• बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे में कमी लाने हेतु 1,200 करोड़ रु. की अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता
• अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रम के लिए - 1,016 करोड़ रु.

शहरी विकास और आवास  
     शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करने, दक्षता विकास और स्वरोजगार में सहायता करने पर बल दिया गया. आवास ऋणों पर ब्याज आर्थिक सहायता का भी विस्तार किया गया. मलिन बस्तियों के निवासियों और शहरी गरीबों के लिए राजीव आवास योजना के तहत राज्य सरकारों को प्रोत्साहित कर भारत को स्लम-मुक्त करने की भी प्रतिबद्धता बजट 2010-11 में  दिखायी गयी.
• स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के तहत – 5,400 करोड़ रु.
• आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन के लिए – 1,000 करोड़ रु.
• 20 लाख तक लागत वाले मकानों पर 10 लाख तक के आवास ऋणों पर एक प्रतिशत ब्याज आर्थिक सहायता योजना को 31 मार्च 2011 बढ़ाया. इसके लिए 700 करोड़ रु. का आवंटन
• राजीव आवास योजना के तहत मलिन बस्तियों के निवासियों और शहरी गरीबों के लिए – 1270 करोड़ रु.  

 

आधारभूत संरचना 
    आर्थिक विकास को बनाये रखने के लिए सड़कों, बंदरगाहों, हवाई-अड्डों और रेलवे के विकास पर बजट 2010-11 में बल दिया गया. समर्पित फ्रेट कॉरिडोर, पारिस्थितिकी-अनुकूल विश्वस्तरीय औद्योगिक निवेश केन्द्रों (नोड्स) के निर्माण पर जोर दिया. आधारभूत संरचना में समावेशी प्रक्रिया को सन्निहित करने के लिए ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों के उन्नयन पर जोर दिया. भारतीय आधारभूत संरचना वित्त कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) जो आधारभूत संरचना परियोजनाओं के वित्त पोषण का काम करती है, उसके भी वित्त पोषण योजनाओं में वृद्धि की गयी है. इसके लिए बजट के कुल आयोजना आवंटन का 46% से भी ज्यादा – 1,73,552 करोड़ रु. की व्यवस्था की गयी.     
• सड़क परिवहन संरचना विस्तारण – 19,894 करोड़ रुपये
• रेल नेटवर्क विस्तारण – 16,752 करोड़
• प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना हेतु – 10,000 करोड़ रु.
• पोत परिवहन, पत्तनों, अंतर्देशीय जल परिवहन और पोत निर्माण उद्योगों के विकास और विस्तार के लिए – 5,864 करोड़ रु.
• नागर विमानन के लिए – 3,800 करोड़ रु.
• ग्रामीण सड़कें और पुल के लिए – 12,000 करोड़ रु., जिसमें 1,114 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए 
• विद्युत क्षमता वर्धन – 5,130 करोड़
• सौर उर्जा उत्पादन – 1,000 करोड़
• लद्दाख क्षेत्र में सौर, लघु जल एवं माइक्रो विद्युत परियोजना – 500 करोड़
    
उर्जा  
     विद्युत क्षेत्र में क्षमता वर्धन को प्राथमिकता, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी को शामिल करने, कोयला खनन उत्पादन में बेहतर पारदर्शिता के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया आरम्भ करने, ‘कोयला विनियामक प्राधिकरण’ की स्थापना करने आदि पर बजट 2010-11 में जोर दिया गया. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को बजट में उर्जा का अहम घटक माना गया. पर्यावरण के प्रति सजगता दिखाते हुए नवीकरणीय उर्जा को भी प्राथमिकता दी गयी.   
• विद्युत उर्जा के लिए 50,121.42 करोड़ रु. के आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन सहित 60,751.42 करोड़ रु. का परिव्यय
• नाभिकीय उर्जा के लिए – 4,739 करोड़ रु.
• पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के लिए – 69,494.79 करोड़ रु.
• कोयला और लिग्नाइट के लिए – 13,518.39 करोड़ रु.
• नवीन तथा नवीकरणीय उर्जा के लिए जिसमें जवाहरलाल नेहरु राष्ट्रीय सौर मिशन भी शामिल है, के लिए – 1,950 करोड़ रु. 

सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण
    समावेशी विकास पर जोर देते हुए कृषि उत्पाद को बढ़ाने और उसकी बर्बादी को कम करने पर जोर दिया. सूखे या बाढ़ की समस्या से निजात पाने पर बल दिया.   
• वृहत् और मध्यम सिंचाई के लिए – 254 करोड़ रु.
• लघु सिंचाई के लिए – 116.50 करोड़ रु.
• बाढ़ नियंत्रण के लिए – 247.50 करोड़ रु.
• नौवहन परिवहन सेवाओं के लिए – 82 करोड़ रु.

जलापूर्ति एवं सफाई 
     ग्रामीण जलापूर्ति एवं स्वच्छता सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु राज्य सरकारों को सहायता देने पर बल दिया गया. देश में चल रही 593 जिलों में संपूर्ण स्वच्छता अभियान परियोजनाओं को सभी जिलों में चलाने पर बजट 2010-11 में जोर दिया गया.
• ग्रामीण क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए – 9,000 करोड़ रु, जिसमें 900 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र व सिक्किम के लिए
• केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए – 1,580 करोड़ रु, जिसमें 158 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र व सिक्किम के लिए

शिक्षा  
    सामाजिक क्षेत्र कार्यक्रमों के प्रति सरकार की अपनी प्राथमिकता होती है. इनमें एक अहम घटक शिक्षा है. विद्यालयी शिक्षा, उच्चतर शिक्षा, सर्वशिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, मध्याहन भोजन योजना और तकनीकी शिक्षा आदि के तहत बजट 2010-11 में आवंटन किये गए. समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए इस बजट में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को उच्चतर व तकनीकी शिक्षा से ज्यादा तरजीह दी गयी.  
• विद्यालयी शिक्षा और साक्षरता विभाग के लिए – 31,036 करोड़ रु.
• उच्चतर शिक्षा विभाग के लिए – 11,000 करोड़ रु; इनमें से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को 4,390 करोड़ रु; इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के लिए 100 करोड़ रु. और राज्य मुक्त विश्वविद्यालयों के लिए 50 करोड़ रु.
• तकनीकी शिक्षा के लिए – 4,706 करोड़ रु. का आवंटन; इसमें भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान के लिए 215 करोड़ रु; नए आईआईएम, आईआईटी और एनआईटी की स्थापना के लिए क्रमशः 25, 20 और 60 करोड़ रु. का आवंटन       
• सर्वशिक्षा अभियान के लिए – 15,000 करोड़ रु, जिसमें 1,397.90 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र हेतु.
• मध्याहन भोजन योजना (कक्षा I से कक्षा VIII तक) के लिए – 9,440 करोड़ रु, जिसमें 944 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र व सिक्किम के लिए
• माध्यमिक शिक्षा के लिए – 4,675 करोड़ रु, इसमें 467.56 करोड़ रु. पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए; नवोदय विद्यालय समिति के लिए 1,385 करोड़ रु; केंद्रीय विद्यालय संगठन के लिए 350 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान योजना के लिए – 1,700 करोड़ रु.
• 6,000 आदर्श विद्यालयों की स्थापना के लिए – 425 करोड़ रु.
• बालिका छात्रावासों के निर्माण और संचालन के लिए – 100 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय साधन-सह योग्यता छात्रवृत्ति  योजना में 1,00,000 छात्रवृत्तियां संवितरित करने हेतु 90.50 करोड़ रु.
• प्रौढ़ शिक्षा के लिए – 1,300 करोड़ रु.  

स्वास्थ्य 
    स्वास्थ्य और परिवार कल्याण की जरूरतों को देखते हुए बजट 2010-11 में कुल 22,300 करोड़ रु. का आवंटन किया गया. सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ साथ प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना जिसमें 6 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और 13 मौजूदा सरकारी चिकित्सा कॉलेज संस्थानों के उन्नयन पर जोर दिया गया. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत जच्चा-बच्चा के मृत्यु अनुपात को कम करने पर भी बल दिया गया.
• प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लिए – 1,750 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए – 15,672 करोड़ रु.
• आयुष (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) विभाग के लिए – 800 करोड़ रु.

उद्योग और खनिज 
      देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए बजट 2010-11 में उद्योगों व खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया गया. नई तकनीक या जरूरी अवसंरचना के लिए आवंटन किया गया.
• लोहा एवं इस्पात उद्योग: 17,199.82 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें 36 करोड़ रु. की बजटीय सहायता और 17,163.82 करोड़ रु. आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन (आं.ब.बा.सं) आवंटित. भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) के लिए 12,254 करोड़ रु, की राशि आवंटित.
• अलौह खनन तथा धातुकर्म उद्योग: 1,553.17 करोड़ रु. के आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन (आं.ब.बा.सं) के साथ 1,763.17 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें भारतीय भू-विज्ञान सर्वेक्षण के लिए – 162 करोड़ रु.
• उर्वरक उद्योग: 2,914.99 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें 2,699.99 करोड़ रु. आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन (आं.ब.बा.सं) से और शेष 215 करोड़ रु. बजटीय सहायता आवंटित.
• वस्त्रोद्योग: 4,725 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें कपास प्रौद्योगिकी मिशन के लिए – 141 करोड़ रु; हथकरघा उद्योग के लिए – 426 करोड़ रु; हस्तकला उद्योग के लिए – 286 करोड़ रु; रेशम कीटपालन के लिए – 320 करोड़ रु.
• रसायन और पेट्रोरसायन उद्योग के लिए – 400 करोड़ रु.
• भारी उद्योग विभाग के लिए – 2,955 करोड़ रु. का परिव्यय जिसमें 2,585 करोड़ रु. आंतरिक और बजट बाह्य संसाधन (आं.ब.बा.सं) से
• परमाणु उर्जा उद्योग के लिए – 1,402.14 करोड़ रु.  

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग 
      देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का योगदान 8 प्रतिशत है. लगभग 6 करोड़ व्यक्तियों को इससे रोजगार मिलता है. इस क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए बजट 2010-11 में 2,400 करोड़ रु. का आवंटन किया गया. प्रधानमंत्री ने स्वयं एक उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया, जिसकी सिफारिशों और कार्यसूची को बजट का हिस्सा बनाया गया.
• प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के लिए – 906 करोड़ रु.
• खादी विपणन विकास सहायता सहित खादी अनुदान के लिए – 290 करोड़ रु.
• ग्रामोद्योग अनुदान के लिए – 55 करोड़ रु.
• ऋण सहायता कार्यक्रम के लिए – 222.70 करोड़ रु.
• प्रौद्योगिकी सहायता संस्थान और कार्यक्रम की गुणवत्ता के लिए – 336 करोड़ रु.

महिला और बाल विकास  
      महिला और बाल विकास के तहत महिला सशक्तिकरण, निरक्षर वयस्कों को ‘साक्षर भारत’ के तहत साक्षरता कार्यक्रम में 6 करोड़ महिलाओं को शामिल करने, महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना आदि पर बजट 2010-11 में जोर दिया गया. समेकित बाल विकास सेवा योजना (आईसीडीएस) के दायरे का विस्तार भी किया गया. नई योजनाओं में किशोरियों के लिए राजीव गाँधी किशोरी अधिकारिता योजना और इंदिरा गाँधी मातृत्व सहयोग योजना के शुरुआत का भी प्रस्ताव रखा गया.
• कुल आयोजना परिव्यय के लिए – 11,000 करोड़ रु. जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए – 1,100 करोड़ रु.
• समेकित बाल विकास सेवा योजना, जिसमें छः वर्ष तक के बच्चे, महिलाओं व उपचाराधीन माताओं के स्वास्थ्य, पोषाहार व शैक्षिक सेवाएं शामिल हैं, के लिए – 8,700 करोड़ रु.
• महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के लिए – 100 करोड़ रु.

पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन 
        पर्यावरणीय असंतुलन, औद्योगिकरण और शहरीकरण से बढ़े प्रदूषण स्तरों में सुधार करने हेतु बजट 2010-11 में आवंटन किया गया. औद्योगिक बहिस्राव शोधन संयंत्र, हरित क्षेत्रों में वृद्धि करने और गंगा स्वच्छता अभियान आदि पर जोर दिया गया.
• तिरुपुर, तमिलनाडु में हॉजरी उद्योग हेतु जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली की स्थापना के लिए – 200 करोड़ रु.
• गोवा के हरित क्षेत्र संरक्षण के लिए विशेष स्वर्ण जयंती पैकेज – 200 करोड़ रु.
• ‘मिशन स्वच्छ गंगा 2020’ के तहत – 500 करोड़ रु. का आवंटन ताकि कोई भी मलव्ययन या औद्योगिक बहिस्राव राष्ट्रीय नदी में नहीं बहाया जाए.

रक्षा व सुरक्षा 
     बढ़ती नक्सली हिंसा और राज्य समर्थित आतंकवाद से निपटने के लिए बजट 2010-11 में पर्याप्त आवंटन किया गया. सीमाओं को सुरक्षित करने से लेकर जान-माल की सुरक्षा आदि पर भी जोर दिया गया. चार नए एनएसजी केन्द्रों की स्थापना, आसूचना ब्यूरो और इसके बहु-विषयक एजेंसी केंद्र का विस्तार का प्रस्ताव भी रखा गया.
• रक्षा के लिए कुल आवंटन – 1,47,344 करोड़ रु.

भारतीय अनन्य पहचान प्राधिकरण 
     बजट 2010-11 में भारतीय अनन्य पहचान प्राधिकरण के व्यापक क्रियान्वयन को देखते हुए 1,900 करोड़ रु. का आवंटन किया गया. वर्ष 2011 में अनन्य पहचान संख्याओं का पहला सेट जारी करने की योजना पर बल दिया गया. अनन्य पहचान संख्या को वित्तीय समावेशन और लक्षित सब्सिडी भुगतानों के लिए प्रभावी माना गया.

असंगठित क्षेत्र 
      असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकताओं को देखते हुए बजट 2010-11 में ‘असंगठित क्षेत्र कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008’ के तहत इन कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा निधि की स्थापना की गयी. गरीबी रेखा से नीचे के कामगारों और उनके परिवारजनों को स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करने की योजना ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना’ का लाभ महात्मा गाँधी नरेगा कर्मियों को भी पहुँचाने का प्रस्ताव रखा गया. असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत ‘स्वावलंबन’ योजना में केन्द्रीय सरकार के द्वारा प्रति वर्ष अंशदान का भी प्रस्ताव रखा गया.
• ‘असंगठित क्षेत्र कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008’ के तहत कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा निधि – आवंटन 1,000 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को विस्तृत कर इसमें वैसे महात्मा गाँधी नरेगा कर्मियों को भी शामिल किया गया, जिन्होंने कम से कम 15 दिन से अधिक दिन तक कार्य किया है.
• नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत ‘स्वावलंबन’ योजना में केन्द्रीय सरकार के द्वारा वर्ष 2010-11 में खोले गये प्रत्येक एनपीएस खाते में प्रति वर्ष 1,000 रु. का अंशदान देने के लिए – 100 करोड़ रु. का आवंटन. इससे 10 लाख एनपीएस अभिदाताओं को फायदा होने का अनुमान.  

      असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकताओं को देखते हुए बजट 2010-11 में ‘असंगठित क्षेत्र कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008’ के तहत इन कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा निधि की स्थापना की गयी. गरीबी रेखा से नीचे के कामगारों और उनके परिवारजनों को स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करने की योजना ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना’ का लाभ महात्मा गाँधी नरेगा कर्मियों को भी पहुँचाने का प्रस्ताव रखा गया. असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत ‘स्वावलंबन’ योजना में केन्द्रीय सरकार के द्वारा प्रति वर्ष अंशदान का भी प्रस्ताव रखा गया.
• ‘असंगठित क्षेत्र कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008’ के तहत कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा निधि – आवंटन 1,000 करोड़ रु.
• राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को विस्तृत कर इसमें वैसे महात्मा गाँधी नरेगा कर्मियों को भी शामिल किया गया, जिन्होंने कम से कम 15 दिन से अधिक दिन तक कार्य किया है.
• नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत ‘स्वावलंबन’ योजना में केन्द्रीय सरकार के द्वारा वर्ष 2010-11 में खोले गये प्रत्येक एनपीएस खाते में प्रति वर्ष 1,000 रु. का अंशदान देने के लिए – 100 करोड़ रु. का आवंटन. इससे 10 लाख एनपीएस अभिदाताओं को फायदा होने का अनुमान.